नेहा का परिवार – Update 168 | Erotic Family Saga

नेहा का परिवार - Pariwarik Chudai Ki Kahani
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“चलो मेरे स्वामी अब अपनी नन्ही भांजी को घुड़ सवारी के लिए तैयार कर लो. मैं अपने जेठ जी और आपके बड़े भैया के घोड़े पे चढ़ती हूँ। नेहा जब तू अच्छी और पूरी तरह अपने छोटे मामू के घोड़े पर चढ़ जाये तो शुरू कर अपनी कहानी. मेरी चूत कब से गीली है तेरी कहानी सुनने के लिए ,” सुशी बुआ ने बड़े मामू को दीवान पर बिठा कर अपनी कमर उनके सीने की तरफ कर अपनी घने रेशमी रति रस से भीगी झांटों से ढकी चूत को बड़े मामू , अपने जेठ जी के महाकाय लंड के ऊपर टिका कर धीरे धीरे नीचे दबाने लगीं। इतने वर्षों से भीमकाय लंड अपनी चूत और गांड में लेने के बाद भी सुशी बुआ की चूत चरमरा उठी बड़े मामू की हर इंच के साथ। सुशी बुआ ने अपने निचला होंठ दांतों से दबा कर अपनी चूत में एक एक इंच कर बड़े मामू के लंड को पूरा निगल लिया।
जब उनकी रेशमी झांटे बड़े मामू की खुरदुरी झांटों से संगम करने लगी तो सुधि बुआ का मुँह फिर से चल पड़ा ,” सुनिए जी, पहली बार जा रहा आपके लंड अपनी नन्ही भांजी की चूत में। कोई हिचक मत कीजियेगा। नेहा की चूत कुलबुलाना उठे तो मैं आपको नहीं दूँगी अपनी चूत एक हफ्ते तक , सिर्फ अपने जेठजी की सेवा करूंगी तब तक। ”
सुशी बुआ ने मुश्किल से लिया तह बड़े मामू का लंड पर अब इतरा रहीं थी और मेरी चूत की आफत बुलाने के लिए अपने पति, मेरे छोटे मामू, को चुनौती दे रहीं थीं।
मुझे पता था की पुरुष का गर्व अपनी भ्याता के चुनौती से उग्र हो जायेगा। छोटे मामू ने मुझे घुमा कर मेरी गोल कमर को पकड़ कर हवा में उठा लिया। फिर मुझे खिलोने की तरह उछाल कर अपने हाथो से मेरी जांघों को पकड़ मुझे अपने लंड के ऊपर टिका लिया। कुछ कोशिशों के बाद और मेरे हाथों की अगुवाई से उनके लंड का सेब जैसा मोटा सुपाड़ा मेरी नहीं चूत के द्वार पर टिक गया। छोटे मामू ने अपने भारी चूतड़ों की एक लचक से अपना सुपाड़ा मेरी चूत में ठूंस दिया। मैं सिसक उठी और आगे आने वाले मीठे पर जानलेवा दर्द की तैयारी के लिए अपने होंठ को दांतों से दबा लिया। पर साड़ी तैयारियां निरर्थक हो गयीं जब छोटे मामू ने अपने हाथो को ढीला छोड़ दिया। मेरा अपना वज़न ही मेरी आफत का औज़ार बन गया। मेरी चूत छोटे मामू के लंड के ऊपर रोलर-कोस्टर की तरह भीषण रफ़्तार से नीचे फिसल पड़ी।
मेरी चीख मेरे हलक से उबल कर कमरे कोना भरती तो क्या करती ? ” नहीईईआँह्ह्ह मा आ मू उउउ। ”
पर जब तक में संभल पाती छोटे मामू की कर्कश घुंघराली झांटे मेरी रेशमी झांटो से उलझ गयीं थीं।
” हाय जी ,मैंने इतनी भी बेदर्दी दिखने के लिए भी तो नहीं उकसाया था आपको ,” वैसे तो सुशी बुआ मुझ पर तरस खा रहीं थी शब्दों से पर उनकी चमकीली भूरी आँखें ख़ुशी से उज्जवल हो गयीं थीं।

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