नेहा का परिवार – Update 153 | Erotic Family Saga

नेहा का परिवार - Pariwarik Chudai Ki Kahani
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वापस मौजूदा वक़्त में
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नसीम आपा की अब्बू के साथ बितायी रात का ब्योरा सुन कर शानू और मैं बिलकुल गरम हो गए। हम दोनों ने नसीम आपा को दबा लिया और बारी बारी उनकी चूत और गांड को चाट चूस कर उनकी हालात और भी बिगाड़ दी। फिर हम तीनों नहाने के बाद दोपहर के खाने के बाद बाहर चल पड़े। बुआ जान की कार कड़ी देख आकर मुझे अपने आगे की योजना का ख्याल आया। मैंने नसीम आपा को समझाया। हम दोनों ने बड़ी मुश्किल से शानू को उसके कमरे में भेजा और बुआ के बंगले की और चल दिए।
नूसी आपा और मैंने सिर्फ एक ढीला ढाला काफ्तान पहना हुआ था। शबनम बुआ ज़रूर रात में देर से वापस आयी होंगीं।
उनके घर की बावरचन बाहर ही मिल गयी। पूछने पर बोली , “मालकिन सुबह वापस आयीं हैं। थकी हुईं थी सो तुरंत सोने चलीं गयीं। अभी भी अपने बैडरूम में हैं। ”
यह तो और भी अच्छा था। नूसी और मैंने एक दुसरे को बिना बोले शाबासी दी और शब्बो बुआ के कमरे की ओर तेज़ी से चल पड़े।
शब्बो बुआ पूर्णतया नग्न बिस्तर अपनी बाहें फैला कर सो रहीं थीं। शब्बो बुआ का स्त्रीत्व नैसर्गिक सौंदर्य से नूसी आपा और मैं इतनी प्रभावित हो गयीं कि दोनों हतप्रभ हो उनके हुस्न के नज़ारे को अपनी सोखने लगीं।
शब्बो खाला अकबर चाचू से तीन साल छोटीं थीं। पर उनकी शादी उनसे पाँच बड़े ममेरे भाई से सिर्फ सोलह साक ई उम्र में हो गयी थी। शब्बो बुआ और उनके ममेरे भाई के बीच में प्यार का बीज बुआ की कमसिन उम्र में हो चला था।
बुआ का गुदाज़ सुडौल बदन तब तक और भी भर गया था। बेटे के जन्म के बाद उनका बदन भरता चला गया था।
शब्बो बुआ का साढ़े पांच फुट से थोड़ा , शायद एक इंच , कम ऊंचा शरीर। उनके चेहरे की सुंदरता और फिर उनकी नैसर्गिक सुंदर नासिका बस उतने से ही कई लोग उन्हें घूरते रह जातें है। फिर उनकी गोल गदरायी भारी बाहें। उनकी काँखों में घने घुंगराले बाल। नूसी आपा उन सुंदर बगलों से कभी भी जीत नहीं सकती थीं।
उनका सीना ज़रूर गोल और भरा-पूरा ४४ इंच था। और उसके ऊपर उनकी स्थूल भारी गुदाज़ मुलायम भारी भरकम उनके स्तन एच एच जैसे थे। उनकी दो तह वाली उभरी कमर अड़तीस-चालीस [३८-४०] के लगभग थी। पर उसके नीचे थे उनके तूफानी चूतड़। दोनों ओर फैले पीछे और बगल में , लगभग पचास इंच के तो होंगे। फिर उनकी बगलों में घुंगराले घने बाल, बहुत गहरी नाभि , भारी केले के तने जैसी जांघें और उनके बीच घुंघराली झांटों का झुरमुट जो उनकी रंगों के ऊपर और निचले पेट की शोभा भी बड़ा रहा था।
शब्बो बुआ का बदन बिलकुल शास्त्रीय या क्लासिक रेतघड़ी [ हावरग्लास ] की तरह था।
उनका लगभग अस्सी किलो का वज़न उनके स्त्रीत्व के हर अंग को और भी सुंदर बना रहा था। उनका विपुल गदल शरीर और अविश्वसनीय सुंदर गोल भरा-भरा चेहरा किसी देवता के संयम को चुनौती दे सकता था।
जैसे किसी माँ को बिना आँख खोले अपने बच्चों की मौजूदगी का अभ्यास हो जाता है उसी तरह शब्बो आपा को नूसी आपा और मेरी मौजूदगी का अभ्यास हो गया और उनकी लंबी पलकें खुल गयीं।
“अरे लड़कियों इतनी दूर क्यों कड़ी हो। चलो कूद जाओं बिस्तर में अपनी खाला की बाँहों में ,” शब्बो बुआ नम्रता चाची की तरह खुले व्यवहार और स्पष्ट विचारों की मालिक थीं। ठीक नम्रता चची की तरह बिंदास और समाज के पाखंड और ढोंग से अछूती।
“और पहले यह सब काफ्तान उतारो। खाला के बिस्तर में खाला के जैसे बन कर आओ ,”जैसा मैंने अभी बताया शब्बो बुआ बिल्कुल खुली निष्कपट और स्पष्टवादी थीं।
नूसी आपा और मैंने जल्दी से अपने काफ्तान उतार फैंके और बुआ की खुली बाहों में कूद कर लेट गयीं।
बुआ ने हम दोनों को बारी बारी प्यार से कई बार चूमा , “चलो अब पूरा ब्यौरा दो कि मेरे पीछे क्या गुल खिलाये तुम दोनों ने?”
नूसी आपा जल्दी से हंस कर बोलीं,”लंबी कहानी है खाला। ”
“लंबी है तो क्या हुआ। हम तीनो की कोई फ्लाइट तो निकल नहीं जाने वाली !”शब्बो आपा ने नूसी आपा के खुले हँसते गुलाबी होंठों को गहरे चुम्बन से ढक दिया।

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