नसीम आपा और अब्बू ५
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अब्बू की गांड की दरार से उठती खुशबु ने मुझे पागल सा कर दिया। मैंने उनके चूतड़ों के बीच की दरार को अपने जीभ से चूम चाट कर अपनी लार से नहला दिया। फिर मैंने अब्बू की गांड के छेद को अपनी जीभ से कुरेदने लगी। अब्बू की गांड का मांसल तंग छेद इतना कसा हुआ था की मैं जितनी भी कोशिश करती फिर भी मेरी जीभ की नोक उसमे नहीं घुस पायी।
लेकिन मैंने हार नहीं मानी। मेरी जीभ बिना थके और निरुत्साहित हुए अब्बू की गांड के छल्ले को कुरेदती रही। आखिर कार बेटी के प्यार ने अब्बू की गांड के छेद की बढ़ को निरुत्तर कर दिया।
अब्बू की गांड का छल्ला धीरे धीरे खुलने लगा और मेरी नदीदी जीभ की नोक उनकी गांड के अंदर घुस गयी। अब की गांड की सुगंध नेमेरे दिमाग में तूफ़ान उठा दिया। मैंने उनकी गांड के कसैले पर मेरे लिए मीठे स्वाद को अपनी जीभ से खोदने लगी।
मेरी दीवानगी की कोई हद नहीं थी अब। हर हदें टूट कर चूर चूर हो गयीं थीं। अब्बू के हलक से उबलती हलकी हलकी सिसकियाँ मेरे मगज़ में ठप्पे की तरह दागी हों गयीं।
मैंने दिल खोल कर अपने प्यारे अब्बू की गांड को जितनी मेरी जीभ अंदर सकती थी उतनी गहराई तक खूब कुरेदा चाटा।
अब्बू का लन्ड अब टनटना रहा था। मेरा नन्हा नाज़ुक हाथ उनके बोतल जैसे मोटे लन्ड को भी सहलाने लगा।
“नूसी बेटा अब तेरी चूत की खैर नहीं है। तूने आज मुझे पूरा दीवाना कर दिया है ,”अब्बू में भारी आवाज़ में कहा।
“अब्बू तक आपि दीवानगी के मैं आपको और भी दीवाना करना चाहूंगीं। और मेरी चूत तो अब आपकी और आदिल की है। उसकी खैरखबर आप दोनों की ज़िम्मेदारी है ,” मैंने अपनी लालची जीभ अब्बू की गांड से बाहर निकाल ली।
अब्बू ने लपक कर मुझे बिस्तर पर पटक दिया। उन्होंने मेरी भारी मांसल झांगे उठा कर मेरी फ़ैली टांगों के बीच में बैठ गए। मेरी साँसें भारी हो गयीं। अब्बू ने अपने घोड़े जैसे मोटे लंबे लन्ड का सेब जैसा मोटा सूपड़ा मेरी घनी घुंघराली झांटों से ढकी चूत की दरार कर गुर्रा कर कहा , “नूसी बेटी अब आप मेरी औरत बन गयी हो। अब आपकी चूत मैं अपने दिल की चाहत से चोदूंगा। ”
“अब्बू दिल खोल अपनी बेटी की चूत चोदिये। आपकी बेटी की चूत अब आपकी और आदिल की है जैसे आपका दिल चाहे वैसे मेरी चूत मारीये अब्बू ,”मैं चीखी।
मैं वासना के तूफ़ान में उलझी हुई थी और अब्बू मेरी गीली और फड़कती चूत ऊपर अपना लन्ड दबा रहे थे ।
“अब्बू चोदिये अपनी बेटी की चूत। फाड़ डालिये अपनी बेटी चूत अपने घोड़े जैसे लन्ड से ,” मैं वासना के बुखार से जलती हुए चीखी।
अब्बू ने मुझे बिस्तर पर दबा कर अपने भारी भरकम चूतड़ों की ताकत से चूत फाड़ने वाला धक्का मारा। मैं बिलख कर चीख उठी। अब्बू का लन्ड का सूपड़ा मेरी चूत में धंस गया। अब्बू ने बिना रुके तीसरा दर्दनाक धक्का मारा और मेरी चूत में तीन-चौथाई ठुंस गया। मैं सुबक रही थी। अब्बू ने मेरे खुले सुबकते मुंह के ऊपर अपना मूंह दबा कर एक और धक्का मारा।उनका आधा लन्ड अब मेरी चूत में घुस चूका था। मेरी चूत में मीठा दर्द हो रहा था अब्बू के लन्ड की मोटाई से। अब्बू ने अब बिना रुके एक धक्के के बाद दूसरे धक्के से अपना लन्ड मेरी चूत में जड़ तक ठूंस दिया।
मैं सुबक उठी। अब्बू का लन्ड चाहे जितना भी दर्द कर रहा हो पर मेरी चूत उनके लन्ड को अंदर बेताब थी।
“उउनन्नन अब्बू ऊ …… ऊ ……, “मैं सिकने लगी चुदने की बेसब्री से।
अब्बू बेटी के दिल की चाहत बिना बोले समझ ली और अपने महाकाय लन्ड को सुपाड़े तक निकल कर पूरी ताकत से मेरी चूत में ठूंस दिया।
नेहा का परिवार – Update 148 | Erotic Family Saga

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