” अरे ये दोनों छिनालें कहाँ छुप गयीं हैं ? मैं पांच मिंटो से घर में हूँ और दोनों का कोई पता नहीं है ?” हम दोनों नसीम आपा की सुरीली आवाज़ से जग गए। हम दोनों जब तक संभल या समझ पातीं की दोनों पूरे नगें है तब तक नसीम आपा का नैसर्गिक सौंदर्य हमारी आँखों को उज्जवल कर रहा था।
” आपा आप कब आयीं ? “शानू से शर्मा कर सपने ऊपर चादर खींचने की कोशिश की।
“अरे ढकने की क्या ज़रुरत है अब। दोनों ने पूरा तमाशा तो पहले ही दिखा दिया है। अब ढकने को रह ही क्या गया है ? “नसीम आपा ने लपक कर बिस्तर पे चढ़ गयी और हम दोनों की बीच लेट गयीं।
“मेरी प्यारी छोटी बहन तुझे कितने दिनों बाद देखा है ,” नसीम आपा ने मुझे बाँहों में भर कर मेरे खुले मुस्कराते मुंह को ज़ोर से चूम कर कहा।
मैं भी नसीम आपा की बाँहों में इत्मीनान से शिथिल हो गयी, ” देख तो तेरी चूचियाँ कितनी मोटी और बड़ी हो गयीं है री। किस से मसलवाते हुए चुदवा रही है तू ?” नसीम आपा ने मेरी दोनों चूचियों को अपने हांथों में भरते हुए पूछा।
“आपा आपकी चट्टानों जैसी चूचियों से तो बहुत पीछे हैं मेरी दोनों। जीजू ने खूब मसल मसल कर कितना बड़ा और उन्नत कर दिया है दोनों को “मैंने भी नसीम आपा की दोनों महा-चूचियों को सहलाते हुए कहा।
नसीम आपा मुझे तीन साल बड़ी थीं। उनकों उन्नीसवां लगने वाला था एक महीने में। उनका गदराया बदन पहले से ही पूरा भरा-भरा था पर शादी के छह महीनो में तो और भी गदरा गया था। उनके उन्नत उरोज़ कुर्ते से फट कर बहार आने के लिए मचल रहे थे।
“नसीम आपा अब आपकी बारी है जीजू के हाथों के कमाल को दिखने की ,” मैंने पलट कर आपा को अपनी बाँहों में भर लिया ,”चल शानू देख क्या रही है। चल आपा को नंगा कर। ”
नसीम आपा ने थोड़ा बहुत मुकाबिला किया पर उनका मन भी अपनी छोटी बहनों को नंगा देख कर मचल उठा था, ” देखो, चुड़ैलों, खुद नगें हो कर लिपट कर बिस्तर में लोट पोट करती हो और ऊपर से अपनी आपा को भी खींचने की कोश्सिश कर रही हो अपने नंगेपन में। ?
पर जल्दी ही उनका कुरता फर्श था। उनकी से उनके विशाल उरोज़ मुश्किल से संभल पा रहे थे। शानू ने उनकी ब्रा उतार फेंकी और मैंने उनकी सलवार का नाड़ा खोल कर उसे उतार कर अलग कर दिया।
जब तक नसीम आपा नाटकीय विरोध करतीं मैंने उनकी सफ़ेद कच्छी भी खींच कर उन्हें सम्पूर्ण नग्न कर दिया।
नसीम आपा का यौवन भगवान ने समय लगा कर खूब मन लगा कर बहाया होगा।
पांच फुट पांच इंच लम्बी , पूरे भरे कमनीय सुडौल शरीर की मलिका , देवी सामान सुन्दर गोरा चेहरा, घुंघराले लम्बे काले बाल -यदि नैसर्गिक सौंदर्य का कोई नाम देना होता तो मैं उसे ” नसीम आपा ‘ का ख़िताब दे देती।
नसीम आपा के उरोज़ों को उठान उनकी गोल भरे-बाहरी थोड़े से उभरे उदर के नीचे घने घुंघराले झांटों से भरी ढंकी उनकी योनि और फिर केले के तने जैसे गोल मटोल जांघें। क़यामत ढाने वाला सौंदर्य था नसीम आपा का।
नसीम आपा ने मौका देख कर मुझे और शानू एक एक बाज़ू में दबा कर चिट बिस्तर पर लेट गयीं।
“अच्छा अब बता किस लंड से चुदवा कर तू इतनी गदरा गयी है मेरी नेहा ,” नसीम आपा ने मेरी नाक की नोक को चूमते हुए कहा।
” आपा नेहा की कुंवारी चूत बड़े मामा ने चोदी है। उसके बाद सुरेश चाचू ने भी इसकी खूब चुदाई की है। ” शानू ने जल्दी से मेरे चुदाई-अभियान की शुरुआत का ब्यौरा कर दिया।
“शानू आपा को पहले ये बता कि तेरी कुंवारी चूत को कल किसने चोदा है ?” मैंने झट से नसीम आपा का ध्यान बेचारी शानू की तरफ कर दिया।
” क्या वाकई नेहा ? शानू तूने आखिर में अक्ल का इस्तेमाल कर ही लिया। सच बता तूने अपने जीजू को अपनी चूत वाकई सौंप दी या नहीं ?” नसीम आपा ने चहकते हुए ज़ोर से पूछा।
“हाँ आपा , कल नेहा ने जीजू को मेरे लिए मना लिया ,” शानू ने शरमाते हुए कहा।
” अरे फिर शर्मा क्यों रही है। आखिर तेरे जीजू ने कितना इंतज़ार किया है तेरे लिए। चल बता खूब चोदा क्या नहीं आदिल ने ?” नसीम आपा ने शानू के दोनों नीम्बुओं को मसलते हुए चिढ़ाया।
“हाय आपा , आदिल भैया ने…. नहीं नहीं मेरा मतलब जीजू ने ना जाने कितनी बार मुझे पहले दिन चोदा। बहुत बेदर्दी से चोदते हैं जीजू ,” शानू का सुंदर दमकते हुए चेहरे की मुस्कान कुछ और ही कह रही थी।
” अरे आदिल ने दूसरी साली को क्यों छोड़ दिया ? ” नसीम आपा ने मेरी और देखते हुए पूछा।
“छोड़ा कहाँ आपा। पहले पहल तो मेरी चूत की ही कुटाई हुई। चूत की ही नहीं मेरी गांड का भी भरकस बना दिया जीजू ने, ” मैंने नसीम आपा के भरी मुलायम उरोज़ों को सहलाते हुए बताया।
” हाय नेहा तूने गांड भी मरवा ली अपने जीजू से !” नसीम आपा ने मेरी बायीं चूची ज़ोर से मसलते हुए मुझे चूम लिया।
“हाँ आपा , आपकी इस नालायक छोटी बहन ने ये ही शर्त रखी थी। कि यदि मैं जीजू से गांड मरवा लूंगी तो ये महारानी अपने जीजू को अपनी चूत मारने देगी ,” अब हाथ फैला कर नसीम आपा के केले के तने जैसे चिकनी गदराई रान को सहलाते हुए कहा।
” तो रात में तुम दोनों की खूब कुटाई की मेरे आदिल ने?” नसीम आपा ने हल्की सी सिसकारी मारी। मेरे हाथ अब उनके प्रचुर यथेष्ठ नितिम्बों पर थे।
” नहीं जीजू को मुझे अकेले ही सम्भालना पड़ा। तभी तो मेरी हालत बिलकुल इतनी ढेली कर दी जीजू ने ,” शानू ने जल्दी से सफाई दी।
” तो तू फिर कहाँ थी ?” नसीम आपा ने स्वतः ही असली मुद्दा उठा दिया।
” आपा कल मेरी कुटाई चाचू कर रहे थे ,” मैंने बम फोड़ दिया।
इस बात के धमाके से नसीम आपा की बोलती कुछ देर तक बंद हो गयी।
नेहा का परिवार – Update 129 | Erotic Family Saga

Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.