चाचू के बलशाली धक्कों से मैं सर से चूतड़ों तक हिल जाती। चाचू के हर धक्के का अंत चाचू की जांघों के मेरे कोमल गुदाज़ नितिम्बों के ऊपर थप्पड़ के शोर के साथ होता। उनका लंड फचक फचक फचक की अश्लील अव्वाज़ें पैदा करता हुआ मेरी चूत की रेशमी गहराइयों को ना केवल नाप रहा था पर उनके लंड की विकराल लम्बाई उन गहराइयों को और भी अंदर तक धकेल रहीं थी।
मैं सुबक सुबक कर झड़ रही थी। चाचू के हांथो ने मेरे उरोज़ों को मसल मसल कर लाल कर दिया। मेरे चूचियों के ऊपर सम्भोग की गर्मी से उपजे पसीने की एक हलकी सी परत की फिसलन उनके हाथों को बहुत रास आ रही थी।
चाचू ने मेरे उरोज़ों को नृममता से मसलने कुचलने के बाद अपने हांथों को मेरे हिलते कांपते चूतड़ों के ऊपर जकड दिया। चाचू ने बेदर्दी से अपना एक अंगूठा मेरी गांड में ठूंस दिया। मैं चहक उठी। चाचू ने मेरी चूत मारते मारते मेरे गांड में उसी लय से अपना अगूंठा भी धकेलने लगे। कुछ देर बाद उन्होंने अपना दूसरा अंगूठा भी मेरी गांड में घुसा दिया। उन्होंने उस पकड़ को इस्तेमाल कर मेरी चूत का मर्दन जारी रखा। उनके अंगूठे मेरी गांड के तंग छेद को चौड़ा कर रहे थे। मुझे लगा कि चूत की कुटाई के बाद मेरी गांड की तौबा बुलवाने के लिए तटपर थे चाचू। मैं मीठे दर्द से सुबक उठी। मेरी सिस्कारियां हल्की घुटी घुटी चीखों के सिंगार से चाचू के कानों में संगीत का रस भर रहीं थीं।
“चाआआ चूऊऊऊऊऊ ……चोदिये मुझे ……आआह्ह्ह्ह चो …..ओओओओओओओओ दीईईईईई ये एएएएएएए और ज़ोओओओओ रर से उउन्न्न्ह्ह्ह्ह्ह,” मैं कामोन्माद की आग में जलते हुए चिल्लायी। चाचू ने मेरी चूत के कूटने की रफ़्तार को और भी उन्नत चढ़ा दिया।
मेरे चूत में रति रस के मानों फव्वारा फुट उठा। मैं अब गनगना उठी। चाचू मुझे बिना थके उसी रफ़्तार से चोदते रहे और मैं निरंतर झड़ रही थी। वासना के आनंद के उन्माद ने मुझे थका सा दिया। चाचू ने गुर्रा कर मेरे चूत में अपना लंड और भी ताकत से धकेला, “नेहा मैं तुम्हारी चूत में पानी छोड़ने वाला हूँ। ”
“हाँ चाचू भर दीजिये मेरी चूत अपने गरम से। नहा दीजिये मेरे गर्भ को अपने उर्वर मलाई से ,” मैं भी वासना के अतिरेक से अनर्गल बोलने लगी।
चाचू ने एक घंटे से भी ऊपर लम्बी चुदाई के बाद मेरी फड़कती चूत में अपने वीय का फव्वारा खोल दिया। चाचू का लंड थिरक थिरक कर मेरे गर्भाशय के ऊपर उपजाऊ वीर्य की पिचकारी बार बार मार रहा था।
चाचू ने हचक कर तीन चार धक्के और मारे और मैं चरमानंद की कमज़ोरी में पेट के बल ढुलक गयी और चाचू भी अपने पूरे वज़न से मेरे ऊपर ढुलक गए।
चाचू ने मेरी चूत से लंड निकल के मुझे बाँहों में भर लिया ,” खुदा की रहमत हो आप तो नेहा बेटी। उसकी नियामत ही ले कर आयी है आपको मेरे पास जीते जी जन्नत में पहुँचाने के लिए। ”
मैंने भी प्यार से चाचू को खुले गीले मुंह से चूमा ,” पर चाचू यदि आप एक घंटे से भी ज़्यादा चुदाई को जल्दी झड़ना कहतें है तो लम्बी चुदाई में तो मेरी हालत ही ख़राब कर देंगे। ”
“नेहा बेटी चुदाई में बिगड़ी हालत में जितना मज़ा है उस से बेहतर मज़ा और कहाँ से मिल पायेगा। ”
चाचू ने मेरे मुंह को कस कर अपने हांथो में पकड़ कर मेरे होंठो को जम कर चूसा। फिर उन्होंने मेरे फड़कती नासिका को अपने मुंह में भर लिया। उनकी जीभ की नोक ने मेरी नासिका के आकार को मापा। चाचू ने जीभ को पैना कर एक एक करके मेरी दोनों नथुनों को चोदने लगे। मैं पहले तो खिखिला कर हंस दी। फिरना जाने कैसे चाचू की इस विचित्र क्रिया से भी मेरी चूत में हलचल मचने लगी। मुझे याद आया कि बड़े मामा ने भी मुझे ऐसे के आनंद दिया था। वासना के खेल में ना जाने कितने नए आनंदायी मोड़ मिलेंगे।

