नेहा का परिवार – Update 118 | Erotic Family Saga

नेहा का परिवार - Pariwarik Chudai Ki Kahani
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अकबर चाचू और शन्नो मौसी
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अगले दिन जब ईशा टाँगे फैला कर अजीब से चल रही थी तो सासु और रज्जो दोनों मेरी ओर देख कर मुस्कुरायीं।
“दामाद बेटा कैसी रही ईशा के साथ बातचीत ? ” सासु माँ बड़ी ही हसमुख थीं।
“अम्मी ईशा के साथ बातचीत बहुत हे रसीली थी। आखिर बेटियां किसकी हैं ?”मैंने सासु को चूम लिया। उन्होंने मेरी बालाएं उतारीं।
“मैंने रज्जो को समझा दिया है। वो शन्नो को या तो मना लेगी नहीं तो पकड़ के दबा देना अपने नीचे। एक बार खाने के बाद कभी भी मना नहीं करेगी। ” मैंने सासु अम्मी का हाथ दबा कर उनके अहसान के लिए शुक्रिया अदा किया।
वापसी में लिमोज़ीन में रज्जो, शन्नो और मैं थे। बीच में काला शीशा था। मैंने रज्जो के चूचियों को मसलना शुरू कर दिया।
“हाय अल्लाह, कुछ तो सबर कीजिये। घर पहुँच कर आप मुझे छोड़ थोड़े ही देंगे। वैसे भी कल रात ईशा के साथ सारी रात चुदाई की थी आपने। ” रज्जो ने मुझे चूमते हुए कहा। उसका एक हाथ मेरे लंड को निकाह के चूड़ीदार पजामी के ऊपर से सहला रहा था।
“रज्जो रानी तुम्हरी मझली बहन का तो जवाब ही नहीं है। उसकी रसीली कुंवारी चूत मारके के लगा की जन्नत में पहुँच गया । अब तो मेरा दिमाग तुम्हारी चूत की चाहत से बेचैन है। ” मैंने बेगम के बड़े बड़े बड़े भारी उरोज़ों को उसके सिल्क के निकाह के कुर्ते के ऊपर से मसला।
“आखिर बेटी तो अम्मी की है।”रज्जो ने शन्नो की तरफ देख कर कहा , “सुना शन्नो तूने जीजू को बिलकुल मना कर दिया मस्ती करने से ?”रज्जो ने सिसकारते हुए कहा। मेरी उँगलियाँ उसकी चूत को कपड़ों की कई परतों के ऊपर से रगड़ रहीं थीं।
“आपा मुझे नहीं मस्ती करवानी अभी। मैं तो इन्तिज़ार करूंगी और। आप और ईशा करिये मस्ती जीजू के साथ,” नन्ही शन्नो बिलकुल भी मान के नहीं दे रही थी।
“आप फ़िक्र ना करें यदि शन्नो खुद नहीं मानी तो उसे पकड़ के ज़बरदस्ती रगड़ दीजियेगा। आपको अम्मी के खुली चूत है ,”रज्जो ने सिसकते हुए अपनी सबसे छोटी बहन को घूर कर देखा। शन्नो ने जीभ निकल कर चिढ़ाया।
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घर पर हमारा सुहागरात का कमरा फूलों से सजा हुआ था। रज्जो के साथ पहली चुदाई मुझे कभी भी नहीं भूलेगी। उस रात हम दोनों ने सारी रात दनादन चुदाई की।
दुसरे दिन हम हनीमून के लिए गोवा गये। जैसा तय था शन्नो हमारे साथ चली। हमारे ‘ हनीमून सुइट’ के साथ शन्नो का कमरा था। पर रज्जो ने ईशा को अपने सुइट में हे रखा। आखिर उस सुईट में तीन कमरे थे।
पहली रात रज्जो ने मेरा लंड चूसते हुए शन्नो दिखाया कि लंड कैसे चूसा जाता है।
शन्नो ने आखिर में झिझकते हुए मेरा लंड अपने नन्हे हाथों में थाम लिया। रज्जो ने उसे बहला फुसला कर मना लिया और शन्नो ने मेरा लंड अपने हाथो से अपनी आपा की चूत में डालने को तैयार हो गयी।
रज्जो ने धीरे धीरे उसके कपड़े उतरवा दिए। फिर जब मैं घोड़ी बना कर शानू की अम्मी को चोद रहा को खींच कर रज्जो ने अपनी नाबालिग अल्पव्यस्क कमसिन नन्ही बहन शन्नो अपने सामने लिटा लिया और उसकी अविकसित नन्ही चूत को चूसने चाटने लगी। अब कमरे में दो लड़कियों की सिस्कारियां गूंजने लगीं।
शन्नो को पहली बार झड़ने के मज़े का अहसास हुआ।
शन्नो एक ही रात में बिना शर्म के मेरे लंड से खेलने लगी। मैंने जब रज्जो की गांड का उद्घाटन किया तो शन्नो ने मेरे साथ अपनी बड़ी बहन की गांड मन लगा कर चूसी।
जब रज्जो कुंवारी गांड मरवाते हुए चीखी चिल्लाई और बिलबिला कर लंड निकलने की गुहार मचा रही थी तो शन्नो इस बार ईशा की चुदाई के जैसे घबराई नहीं। बल्कि वो रज्जो को चूमने लगी और उसके चूचियों को मसलने लगी।
आखिर रज्जो भी गांड के दर्द कम होने के बाद हचक कर अपनी गांड चुदवाने लगी।

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