अकबर चाचू और शन्नो मौसी
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ईशा की चीख़ यदि मैंने अपने मुंह से नहीं दबाई होती तो सारे डाल ान में गूँज जाती। मैंने ईशा के बिलबिलाने की परवाह नहीं करते हुए एक के बाद एक तूफानी धक्के लगाते हुए अपना सारा लंड उसकी कुंवारी चूत में जड़ तक ठूंस दिया।
मैंने ईशा के चूचियाँ मसली और उसके सुबकते मुंह को अपने मुंह से दबाये रखा। थोड़ी देर उसे आराम देने के बाद मैंने अपना लंड आधा बाहर निकला और फिर से ईशा की चूत में ठूंस दिया।। ईशा की चूत से उसकी कुंवारी चूत के पहली बार लंड से खुलने की वजह से फट गयी । ईशा के कुंवारेपन के खात्मे की फतह लगा उसकी चूत से बहती लाल धार बिस्तर पर फ़ैल कर सफ़ेद चादर को लाल कर उसके औरत बनने का रंग फैला रही थी ।
ईशा के कंवारी चूत से निकले खून ने मेरे लंड को चिकना कर दिया । मैंने सुपाड़े तक लंड को बाहर निकाल दो तूफानी धक्कों से जड़ तक उसकी चूत में फिर से डाल दिया।
ईशा का पूरा बदन कांप रहा था। उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे। उसकी सुब्काइयां मेरे मुंह के अंदर ताल बजा रहीं थीं। मैंने अब उसकी चूत मारनी शुरू कर दी।
एक धक्के के बाद एक मैं आधा या पूरा लंड निकला कर ईशा की चूत में पूरी ताकत से ठूंस रहा था। करीब दस बारह मिनटों के बाद ईशा की सुब्काइयां और घुटी घुटी चीखें सिस्कारियों में बदल गयीं। अब उसकी आँखों में आंसुओं के अलावा एक औरताना चमक थी। उसने अपनी बाहें मेरी गर्दन पे डाल कर मुझसे कस कर लिपट गयी।
“जीजू ……………….. आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह …………… उउउन्न्न्न्न्न्न्न्ह्ह्ह्ह्ह आअरर्र्र्र्र …………. ज्ज्जीईई जूऊऊऊऊओ ………,” ईशा की सिस्कारियां मेरे लंड को और भी सख्त और बेताब बना रहीं थी।
मेरा लंड अब सटासट ईशा की चूत मार रहा था। ईशा ने अचानक हल्की सी चीख मार कर मुझसे और भी ताकत से लिपट गयी, “जीजूऊऊ मैं झड़ गयी। अल्लाह कितना लम्बा मोटा है आपका लंड। चोदिये मुझे जीजूऊऊओ ……………….. उउन्न्न्न्ह्ह्ह्ह्ह ………………. आअन्न्न्न्ग्घ्ह्ह्ह ………… ,”ईशा की सिस्कारियां शुरू हुईं तो बंद ही नहीं हुई।
मैंने उसकी चूत के चूडी के रफ़्तार और भी तेज़ कर दी। मेरा लंड अब उसकी कुंवारी चूत में रेलगाड़ी के इंजिन तरह पूरे बाहर आ जा रहा था। मैंने लगभग घंटे भर ईशा की कुंवारी चूत बेदर्दी और हचक कर मारी । ईशाना जाने कितनी बार झड़ चुकी थी। उसकी उम्र ही क्या थी। जब ईशा आखिरी बार भरभरा के झड़ी तो कामुकता की त्तेजना से बेहोश हो गयी । मेरा लंड उस की चूत में उबल उठा। मैंने ईशा की कमसिन चूत को अपने गर्म वीर्य से भर दिया।
जब मैंने ईशा की चूत से अपना लंड बाहर निकला तो मेरे वीर्य, ईशा की चूत के रस उसकी कुंवारी चूत के फटने का खून भी बहने लगा। शन्नो की आँखे फटी हुई थी। उसने हिचकिचाते हुए पूछा , “जीजू ईशा, आप ठीक तो हैं ना ?”
“शन्नो घबराओ नहीं। जब कुंवारी लड़की की हचक के लम्बी चुदाई हो और वो कई बार झड़ जाये तो कभी कभी उस बेहोशी तारी हो जाती है ।
जैसे मुझे सही साबित करने के लिए जैसे ईशा ने सही वक्त चुना। उसने अपनी आँखे फड़फड़ाईं और मुझसे लिपट गयी।
“मेरे जीजू। मेरे अच्छे जीजू। कितना मज़ा दिया आपने। अम्मी ने बताया था की दर्द के बाद कितना मज़ा आता है पर मुझे नहीं पता था की इतना मज़ा आएगा। जीजू जब मैं रज्जो आपा को आपके लंड के बारे में बताऊँगी तो वो बेसब्री से आपसे चुदने का इन्तिज़ार करेंगी।” ईशा की ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं था।
” जीजू आप मुझे और चोदेंगे ?” ईशा ने बचपन के भोलेपन से पूछा।
‘साली जी इस लंड को देखिये और फिर पूछिए यह सवाल ,”मैंने उसका हाथ अपने फिर से तन्नाये लंड के ऊपर रख दिया।
मैंने ईशा को बिस्तर पर धकेल कर एक बार फिर से उसकी चूत में अपना लंड जड़ तक ठूंस कर उसकी चूत लगा।
इस बार चीखें सिर्फ कुछ धक्कों के बाद ही सिस्कारियों में बदल गयीं।
मैंने उसे एक और लम्बी चुदाई से कई बार झाड़ा। जब मैं दूसरी बार उसके चूत में झड़ा तो उसने मुझे चूम चूम कर मेरा सारा से गीला कर दिया।
उस रात मैंने ईशा की चूत दो बार और मारी। जब उसने लड़खड़ाते हुए कपड़े पहने तो मैंने उसे चूम कर कहा, “ईशा रानी अगली बार आपकी गांड का ताला खोलेंगे। ”
“अल्लाह आपके फौलादी घोड़े के लंड ने मेरी चूत का यह हाल कर दिया है तो मेरी गांड की तो तौबा ही बोल जाएगी।” ईशा ने ऊपर से तो ना नुकर की पर उसकी आँखे कुछ और ही कह रहीं थीं।
नेहा का परिवार – Update 117 | Erotic Family Saga

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