नेहा का परिवार – Update 116 | Erotic Family Saga

नेहा का परिवार - Pariwarik Chudai Ki Kahani
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अकबर चाचू और शन्नो मौसी
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सासु माँ के जाते ही मैंने ईशा को फिर से दबा लिया। उसके दोनों चुचों को मसलते हुए शन्नो को चिढ़ाया, “देखो छोटी साली साहिबा अपनी मझली आपा को, कितना मज़ा आ रहा है इन्हे । ”
“तो आप दीजियेना उसे और मज़ा। मेरे पीछे क्यों पड़े है फिर। “शन्नो ने मटक कर कहा।
मैंने ईशा के कुर्ते के अंदर हाथ डाल दिए। उसने हमेशा कि तरह अंगिया या चोली नहीं पहनी थी।
“जीजू उस खाली कमरे में चलिए, उसमे पलंग भी है । यहाँ भरोसा नहीं कब कोई ना कोई आ जाये ,” मैंने ईशा के दोनों उरोज़ों को मसलते हुए शन्नो को नज़रअंदाज़ कर दिया। ईशा को धकेलते हुए मैं उसे कमरे में ले गया। देखा तो शन्नो भी धीरे धीरे अंदर आ रही थी।
“मैं सिर्फ अम्मी की वजह से यहाँ हुँ. उन्होंने हम दोनों को जीजू का साथ देने के लिए बोला था। लेकिन मुझसे कोई और उम्मीद नहीं रखियेगा ?” शन्नो ने लचक कर हाथ मटकाए।
तब तक ईशा के हाथ मेरे सिल्क के पजामे के ऊपर से मेरे लंड को सहला रहे थे।
मैंने बेसब्री से ईशा का कुरता खींच कर उतार दिया। उसका सलवार के ऊपर का नंगा गोरा बदन बिजली में चमक रहा था।
“जीजू अभी तो मुझ से ही काम चला लीजिये। जब आप रज्जो अप्पा को देंखेंगे तो बेहोश हो जायेंगें।” ईशा ने सिसकारते हुए कहा, “अरे नासमझ निगोड़ी कम से कम थोड़ा दिमाग से काम ले और दरवाज़ा तो अच्छे बंद कर दे। ” ईशा ने छोटी बहन को लताड़ा।
शन्नो ने जल्दी से दरवाज़ा बंद दिया।
मैंने ईशा को पलंग पर खींच अपनी गोद में बिठा कर उसके मीठे होंठों को चूसते हुए उसके कुंवारे उरोज़ों को मसल मसल कर लाल करने लगा। मैंने ईशा कई बार कपड़ों के ऊपर से मसला और रगड़ा था **** पर उसे पूरा नंगा करने का कभी मौका नहीं मिला था।
उसके गोल गोल गदराये नितिम्ब मेरे लंड को रगड़ रहे थे।
शन्नो एक टक इस सम्भोग को देख रही थी।
अब मुझसे इन्तिज़ार नहीं हो पा रहा था। मैंने ईशा की सलवार खोल कर अपना हाथ उसकी जांघों के बीच में घुसा दिया। उसकी नन्ही से जाँघिया पूरी भीगी हुई थी , “हाय अल्लाह ! जीजू देखोना मेरी चूत कितनी गीली है। यह सारा दिन आपके बारे में सोच सोच कर कितना पानी छोड़ चुकी है। ”
ईशा ने होंठ मेरे होंठो से चिपका कर मेरी जीभ से अपनी जीभ भिड़ा दी। उसने अपने आप अपनी जांघे चौड़ा कर मेरे हाथ को पूरी इजाज़त दे दी अपनी चूत को सहलाने की।
ईशा के चूत पर उस वक्त सिर्फ कुछ रेशमी रोयें ही उग पाये थे। मैंने उसके गुलाब के कलियों जैसे फांकों को खोल कर उसकी कुंवारी चूत के दरवाज़े को सहलाते हुए उसकी चूत की घुंडी को रगड़ते हुए मैंने ईशा के होंठो को दांतों से काटने लगा।
“जीजू , अब नहीं रहा जाता। जीजू अब चोद दीजिये हमें। ” ईशा कुनमुना कर सिसकारते हुए बोली।
मैंने जल्दी से अपने कपड़े उतार कर दूर किये।
“अल्लाह, जीजू आपका घोड़े जैसा है। यह तो हमारी चूत फाड़ देगा ,” ईशा बुदबुदाई।
“दर्द तो होना ही है ईशा रानी। बताइये चुदवाना है की नहीं? ”
मैंने बोलते ईशा की सलवार को एक झटके से उतार कर दूर फैंक दी। उसकी नहीं सी जाँघिया उसके चूत के रस से लबालब गीली थी।
मैंने ईशा की जांघो को फैला कर उनके बीच में घुटनों पर बैठ गया।
मैंने अपने लंड के मोटे सुपाड़े को उसकी कुंवारी चूत ले रगड़ते हुए ईशा से पूछते हुए कहा, “सासु माँ ने कुछ समझाया या नहीं?”
“जीजू हाँ मम्मी ने जब रज्जो आपा को समझाया की पहली चुदाई कैसे दर्दीली होती है तो मैं भी वहां थी। मुझे पता है की पहली चुदाई में दर्द तो होना ही है। पर उन्होंने औसतन लंड का नाप बताया था उस नाप से से तो आपका लंड मोटा है। लगभग दढाई गुना या तिगना लम्बा और मोटा है। ऐसा लंड तो मैंने सिर्फ घोड़े के नीचे देखा है। ” ईशा कसमसा रही थी। उसके चूतड़ खुदबखुद ऊपर मेरे लंड की तरफ हिल रहे थे।
“तो साली साहिबा मैं आपको चोदूँ या नहीं, ” मैंने बेददृ से नन्ही कमसिन ईशा को चिढ़ाया। मुझे मालूम था की उस तक ईशा का बदन वासना से गरम हो गया था। उसका मेरे लंड के लम्बे मोटे होने के डर की झिझक उसके गर्मी से हार मान लेगी।
“जीजू आप चोदिये। अल्लाह रहमत करेगा। चूत फटनी है तो फटेगी ही ,” ईशा की चूत से एक रस की धार बह रही थी।
मैंने सुपाड़े को ईशा की कुंवारी कमसिन चूत की तंग सुरंग के मुहाने में फंसा कर अपने पूरे वज़न से उसके ऊपर लेट गया। मैंने होंठों को अपने होंठों से दबा कर एक ज़बरदस्त धक्का लगाया। मेरा लंड सरसरा कर उसकी चूत में घुस गया। ईशा का बदन कांप उठा।

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