शानू ने अपनी बाहें अपने अब्बू की गर्दन के इर्द गिर्द डाल दीं।
शानू तो एक कदम और भी आगे बड़ गयी। उसने रोज़ की तरह अपने अब्बु के गाल को चूमने की बजाय अपने होंठ इनके होंठों पर रख कर एक ज़ोर का चुम्बन दे दिया।
अकबर चाचू ने मुश्किल से लम्बे चुम्बन नन्ही बेटी को नीचे रखा ही था कि तभी मैं पसीने से भीगी चाचू चाचू पुकारती हुई अकबर चाचू के से चिपकने उनकी ओर दौड़ पड़ी।
“नेहा मेरी बिटिया, कितने दिनों बाद दिखी है तू,” कहते हुए चाचू ने मेरा पसीने से लथपथ शरीर अपनी बाँहों में भर कर उठा लिया। मेरी गुदाज़ बाहें चाचू के गले का हर बन गयीं। चाचू को बिना शक मेरी गीली काँखों से पसीने की सुगंध आ रही होगी।
“चाचू हम भी आप को कितने दिनों के बाद मिल रहे हैं। आपने अपनी भतीजी को मिस नहीं किया ?” मैंने इठला कर चाचू के होंठो लिया।
“अरे नेहा बेटा हमने कितनी बार रवि, सुशी और अक्कू को बोला की नेहा बेटी को इस तरफ भेजो लिए पर आपके स्कूल की पढ़ाई रस्ते में आ जाती थी। पर अब आपको देख कर बहुत सुकून मिला है। “अकबर चाचू देख कर मुझे अपनी योजना की सफलता के लिए और भी दृढ़ निश्चय कर लिया।
“चलिए तो अब जब मैं आ ही गयीं हूँ तो अब आप तैयार हो जाइये अपनी भतीजी के लिए। यह अब आपसे चिपकी रहेगी। ” मैंने अपनी गदराई झांगें चाचू की कमर के दोनों ओर डाल कर उनकी चौड़ी कमर को जकड़ने का प्रयास किया। अकबर चाचू छह फुट से कुछ इंच ऊँचे बहुत भारी भरकम शरीर के मालिक हैं। उनकी तोंद भी चाचू से काम नहीं है पर वो उनके मर्दानगी में और भी इजाफा कर देती है।
मेरे शरीर को सँभालने के लिए चाचू को अपने हांथों को मेरी जांघों के नीचे करना पड़ गया। मेरे उरोज़ इस हलचल में उनके सीने और चेहरे पर रगड़ मार गए। आखिर में चाचू के हाथ मेरे गोल गोल फुले चुत्तडों पर पहुँच गए।
” नेहा बेटा जब अपने बच्चे हमसे चिपकना चाहे तो हम अल्लाह का शुक्र अदा करते थकेंगे नहीं। किसी के लिए इस से बड़ी क्या चीज़ नसीब हो सकती है। ” इस बार चाचू ने मेरे मुस्कराते चूमा तो मैंने जम कर अपने होंठ उनके होंठों से लगा दिए। मैंने कुछ देर बाद हलके जीभ की नोक चाचू के होंठो दी। ऐसे की जैसे गलती से जीभ लग गयी हो।
चाचू के मर्दाने मज़बूत हांथो की पकड़ मेरी नितिम्बों सख्त लगी। मैंने उनके होंठो को और भी कस कर चूमा और फिर शरमाते हुए अलग गयी।
“मैं भी कितनी बुद्धू हूँ चाचू। आप अभी अभी काम से आएं हैं और थके भी होंगे। और यह आपकी पागल भतीजी आसे लिपट चिपक गयी। चलिए आप नहा कर तैयार हो जाइए। खाना करीबन तैयार ही है। ” मैंने एक बार फिर चाचू के होंठ चुम कर उनकी गोड से उतर गयी।
“नेहा बिटिया आपके आने से घर में रौनक और भी बढ़ गयी। मैं जल्दी से कर कपडे बदल कर आता हूँ। ” चाचू के विशाल शरीर करतीं रहीम जब तक वो अपने गलियारे में नहीं पहुँच गए।
नेहा का परिवार – Update 112 | Erotic Family Saga

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