जीजू मेरी चुदाई का नंबर लगाने वाले थे पर मैंने उन्हें समय का तकाज़ा दे कर ठंडा कर दिया। अकबर चाचू के आने का समय भी करीब आ रहा था। दुसरे मुझे सुशी बुआ का दिया काम भी तो करना था। मुझे उसक काम के लिए भी थोड़ी नहीं बहुत ऊर्जा की ज़रुरत थी।
“जीजू, आज रात को आप का सिर्फ एक काम है। शानू की चूत की इतनी चुदाई और कुटाई कि उसकी चूत किसी भी लंड के लिए पूरी खुल जाये। आखिर गली के बेचारे कुत्तों और गधों के लिए भी तो कोई ताज़ी चूत होनी चाहिए। ”
शानू का सुंदर चेहरा जीजू की दमदार चुदाई के प्रभाव से सूरज की तरह दमक रहा था ,”नेहा अब तू आ गयी है कुत्ते और गधे को चूत की कमी नहीं खलेगी। ”
और फिर हम दोनों खुद ही बेतुकी बातों से हंस दिए जीजू ने भी साथ दिया हंसी में।
हम सब नीचे चल दिए और रत के खाने का इंतिज़ाम करने लगे।
मैंने मौका देख कर जीजू और शानू को अपना मददगार बनाने के लिए उन्हें अपने गुप्त काम का हमराज़ बनाने का निस्चय कर लिया। फिर थोड़ी गंभीरता से उन्हें हुए कहा, “जीजू, शानू आप दोनों को मेरी मदद करनी होगी। सुशी बुआ यदि आतीं तो वो अकबर चाचू का ध्यान रखतीं, ” मेरा इशारा दोनों बड़ी जल्दी समझ गए, “पर उन्होंने मुझे यह ज़िम्मेदारी सौंप दी है। इसिलए मैं आज रात को अकबर चाचू को रिझाने की कोशिश करूंगी। इसीलिये जीजू मैंने अपनी चूत को आपके मूसल को दुबारा नहीं कूटने दी।”
“नेहा यह तो बहुत ही शानदार ख्याल है। मामू मामा ीजान के इन्तिकाल के बाद बहुत अकेला महसूस करते होंगे। तुम यदि आज कामयाब हो जाओ तो मैं भी कुछ ततबीर सोचूंगा शानू और नसीम के साथ। ” जीजू की रज़ामंदी सुन कर शानू जो थोड़ी सी चकित थी खुल गयी।
“नेहा, आपा कई बार मुझसे इस बात का ज़िक्र कर चुकीं हैं। आपा भी अब्बु के अकेलेपन से बहुत परेशान जातीं हैं।” शानू की बात सुन कर मुझे लगा की मेरा काम शायद उतना मुश्किल मुझे लग रहा था। बस समय की ताल या टाइमिंग ठीक होनी चाइये।
“तो नसीम आपा ने कुछ किया क्यों नहीं ? आदिल भैया तो कभी उन्हें नहीं रोकते। ”
जीजू ने तुरंत कहा , ” अब्बु के इन्तिकाल के बाद फूफा ने ही तो हमारा और अम्मी का पूरा खाया रखा है। वो तो हमेशा से मेरी अब्बु के जैसे हैं। मैं यदि मुझे थोड़ा सा भी इशारा मिल जाता नसीम की तरफ से तो मैं उसे पूरा सहारा और मदद देता इस नेक काम में। ”
मैं यह सुन कर बहुत खुश हुई।
“नहीं नेहा जीजू ने नसीम आपा को नहीं रोका उन्हें ही बहुत शर्म और डर है अब्बु से इस बात का इल्म करने से। ” शानू ने प्यार से अपने जीजू की जांघों को सहलाया।
“अच्छा तो ठीक है मैं ही कुछ करतीं हूँ इस घर में सबकी खुशी और पनपने के लये ,” मुझे पता थे कि मेरी सफलता से सुशी बस बहुत खुश होंगी।
“तो फिर देखो आज शाम को हम तीनों अनौपचारिक सादे कपड़े पहनेंगें। मैं जब चाचू के कमरे में जाऊं तो मुझे थोड़ा समय देना आप दोनों। और फिर खाने पर बहुत कामुक उत्तेजित बातों का सिलसिला बनाये रखना। मैं पूरी कोशिश करूंगी चाचू से उनकी सुशी बुआ के साथ किसी और के साथ चुदाई की कहानी निकलवाने के लये।” मैंने अपनी तरफ से चालाकी की पर वास्तविकता में बचकानी चाल जीजू और शानू को समझाई।
जीजू ने सिर्फ जिम वाले शॉर्ट्स पहन लिए। मैंने शानू को बिना बाज़ू की ढीली टी शर्ट और छोटे से शॉर्ट्स पहनाये। शानू के बाज़ू हिलाने पर उसके कमसिन चूचियाँ झलक मर देतीं। मैंने भी छोटे से शॉर्ट्स और कसरत वाली ब्रा पहन ली। आज अकबर चाचू के संयम की पूरी परीक्षा होने वाली थी। पर हम तीनों मन ही मन दुआ मांग रहे थे की उनका संयम बहुत सख्तना हो और जल्दी ही हार मान ले।
शानू नीचे अपने अब्बू के स्वागत के लिए तैयार होगी और मैं जीजू के साथ जिम पसीने भीगी चाचू गले लग चिपक जाऊँगी।
शुक्र है जैसे सोचा था काम से काम शुरू में वैसा।
अकबर चाचू जैसे ही घर में कदम रखा उनकी कमसिन बेटी, जो उसी दोपहर को ताज़ी ताज़ी अपनी कुंवारी चूत का उद्घाटन जीजू से करवा चुकी थी, लपक कर अपने अब्बू की ओर बहन फैला कर लपक ली।
“हाय अब्बू कितना इन्तिज़ार करवाया आपने। नेहा बेचारी कितनी देर से आपके नाम को दोहरा दोहरा कर थक गयी है। उसे अपने चाचू का इन्तिज़ार कितना मुश्किल लगा है उसका आपको मैं पूरा बयान भी नहीं कर सकती। ” चाचू ने अपनी नन्ही लाड़ली को बाँहों में भर लिया। अकबर चाचू को बिना मेहनत अपनी नन्ही कमसिन बेटी के उगते उरोज़ों का दर्शन हो रहा था।
नेहा का परिवार – Update 111 | Erotic Family Saga

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