मम्मी ने अपनी जांघों के ऊपर अपने हाथ रख कर पापा की मदद की। पापा ने अपने बड़े हाथों से मम्मी की गोल पिण्डिलयों को जकड़ के उनकी जांघों को पूरा फैला कर चौड़ा कर दिया। पापा ने अपना लंड एक बार फिर मम्मी की गांड के छोटे से छेद पर टिका कर मम्मी से पूछा ,” ज़ोर से या धीरे धीरे निर्मू ?”
“हाय कैसे तरसाते हो अंकु। घुसा दो ना अपने लंड को मेरी तड़पती गांड में ,” मम्मी की कांपती हुयी आवाज़ में अजीब सी याचना थी।
“फिरना कहना …… ,” पापा ने गुर्रा कर कहा और पूरी ताकत से मम्मी की गांड की तरफ धक्का लगाया। मम्मी की लम्बी चीख कमरे में गूँज उठी। पापा का आधा लंड मम्मी की गांड में गायब हो गया। पापा ने मम्मी की पहली चीख के रुकने का इंतज़ार किये बिना दूसरा धक्का मारा और उनका डरावना लंड पूरा का पूरा मम्मी की गांड में जड़ तक घुस गया।
पापा ने अब जितनी ज़ोरों और तेज़ी से मम्मी की गांड चोदी उसे देख कर अक्कू और मेरा मुंह खुला का खुला रह गया। मम्मी की गांड से अजीब सी ‘ फच-फच ‘ की आवाज़ें निकल रहीं थीं। पापा के हर धक्के से मम्मी का सारा शरीर सर से पाँव तक हिल जाता था। उनकी चूचियां पापा के धक्कों से उनकी छाती पर बड़े पानी भरी गुब्बारों की तरह ऊपर नीचे झूल रहीं थीं।
पापा की गुरगुराहट मम्मी की सिस्कारियों से मिल गयीं। पापा जब गुराहट के साथ पूरे दम से अपना लंड मम्मी की गांड में घुसाते थे तो मम्मी सिसकने से पहले सुबक उठती थीं।
मम्मी हर कुछ मिनटों बाद झड़ने लगीं, “अंकु चोद डालो मेरी गांड ……ज़ोर से…… अपने लंड से मेरी गांड फाड़ दो। हाय माँ मैं फिर से झड़ने वाली हूँ। आज तो तुम मेरी जान ही ले लोगे। ”
पापा ने मम्मी की बातों की तरफ कोई भी ध्यान नहीं दिया और बिना थके उनकी गांड मारते रहे। मम्मीना जाने कितनी बार चीख कर ,सुबक कर , सिसक कर झड़ गयीं थीं।
“अंकु अब मेरी गांड में अपना लंड खोल दो। अब अपने लंड से मेरी गंदी गांड को नहला दो। आँ…… आँ………आँ…. आँ……..आँह…….. ऊँह……….. अंकू… ऊ …ऊ…. ऊ…. ऊ…………. , मैं फिर से आ रही हूँ,” मम्मी का मीठा खुशी का विलाप कमरे में गूँज रहा था।
पापा ने तीन चार बार पूरे के पूरा लंड सुपाड़े से जड़ तक मम्मी की गांड में ठूंस कर उनके ऊपर गिर पड़े। मम्मी ने अपनी टांगें पापा की कमर के ऊपर गिरा दीं। उनकी सुंदर गोल बाँहों ने हाँफते हुए पापा को प्यार से कस कर जकड़ लिया। पापा मम्मी के शरीर पसीने से लथपत हो चुके थे।
मम्मी ने प्यार से पापा के पसीने से भीगे माथे को चूम लिया जैसे मैं और मम्मी अक्कू के माथे को चूमती थीं।
मम्मी के मुलायम नाज़ुक हाथ हाँफते हुए पापा के सर के ऊपर प्यार से उनके बालों को सेहला रहे थे। मम्मी भी हांफ रहीं थीं।
अक्कू और मैंने पापा और मम्मी को प्यार से लिपटे हुए काफी देर तक देखा और फिर हम दोनों एक दुसरे का हाथ कस कर पकड़ कर मम्मी और पापा के शयन-कक्ष से धीरे से बाहर निकले और फिर अपने कमरे की तरफ हलके पैरों से भागने लगे।

