नम्रता चाची ने उठ कर एक गहरी अंगड़ाई ली। उनके विशाल मुलायम पर भरी उरोज़ उनके बदन के साथ मचल कर हिल उठे। बड़े मामा नम्रता चाची को अपनी बाँहों में भर कर प्यार भरे अधिकार से चूमने लगे।
“रवि भैया, क्या आप और सुरेश मेरे दोनों छेदों को चोदने के लिए तय्यार हैं?” नम्रता भाभी ने बड़े मामा के बालों भरी सीने को अपने कोमल हाथों से सहलाया।
सुरेश चाचा ने भी अपनी अर्धांगनी को पीछे से बाँहों में भर कर उनके गुदाज़ नितिम्बों को मसलने लगे, “रवि, आपको अपनी भाभी की गांड चाहिये या चूत?”
“सुनियेजी, इसमें मेरा कोई कहना नहीं है?” नम्रता चाची दो मर्दों के बीच पिसी हुईं थीं पर फिर भी उनकी चंचलता में कोई कमी नहीं आई थी।
बड़े मामा ने नम्रता चाची की सुंदर नाक को मूंह में भर कर चूसा और फिर प्यार से उनके दोनों निप्पलों को मसल कर बोले, “भाभी आपको तो दो लंड चाहियें। कौन सा लंड किस छेद में जाता है वो निर्णय तो हम दोनों का है।”
नम्रता चाची की सिसकारी निकल गयी, “ठीक है रवि भैया। जैसे आप दोनों ठीक समझें मुझे बाँट ले पर मुझे मेरी चूत और गांड का मर्दन पूरी निर्ममता से चाहिए। दर्द के मारे मेरी चीखें निकलनी चाहिए।” नम्रता चाची ने बड़े मामा और सुरेश चाचा को अपनी काम-इच्छाओं से आगाह कर दिया।
बड़े मामा बिस्तर पर चित लेट गए और नम्रता चाची को अपने ऊपर खींचने लगे। नम्रता चाची ने अपनी मुलायम रेशमी चूत बड़े मामा के विशाल लोहे जैसे सख्त लंड पर रख कर उसे धीरे धीरे अपने अंदर निगलने लगीं।
मैं जल्दी से बड़े मामा जांघों के पास अपना सर रख कर उनके विकराल लंड का नम्रता चाची की चूत में प्रवेश का चित्ताकर्षक दृश्य बिना पलक झपकाए एक टक देखने लगी।
नम्रता चाची की चूत अविश्वसनीय आकार में चौड़ी हो कर बड़े मामा के भीमकाय लंड के ऊपर फ़ैल गयी। नम्रता चाची का सुंदर मूंह थोडा सा खुला हुआ था, उनकी भूरी कजराली आँखें आधी बंद थीं। उनके अत्यंत आकर्षक नथुने उनकी तीव्र साँसों के साथ फड़क रहे थे। नम्रता चाची का दैविक रूप उनकी वासना के ज्वर में और भी सुंदर हो चला था।
स्त्री के सुन्दरता जब वो कामाग्नि में जल रही होती है तो उसका रूप और भी निखर जाता है। यदि स्त्री नम्रता चाची जैसी परिपक्व दिव्य-रूपसी हो तो उसके नैसरगिक आकर्षण से कोई भी उन्मुक्त नहीं रह सकता।
सुरेश चाचा ने अपनी अर्धांगनी के प्रचुर गदराये नितिम्बो को अपने विशाल हाथों से फैला कर मेरी तरफ देखा। मुझे उनका मंतव्य एक क्षण में ही समझ आ गया। मैंने अपना मूंह नम्रता चाची की विशाल गहरी नितिम्बों के बीच की दरार में डाल कर उनकी गांड को चाटने और चूसने लगी।
नम्रता चाची की सिसकारी ने मुझे और भी उत्साहित कर दिया।मैंने अपनी जीभ को गोल करके नम्रता चाची की गांड के छिद्र को कुरेदने लगी। शीघ्र ही मुझे सफलता मिल गयी। नम्रता चाची का गुदा-द्वार धीरे धीरे फड़क कर खुल गया और मेरी जीभ उसके अंदर प्रविष्ट हो गयी।मैंने जितना हो सकता था उतनी अपनी लार नम्रता चाची की गांड में जमा कर दी।
सुरेश चाचा ने मुझे होले से अलग कर अपने विकराल लंड के सूपाड़े को नम्रता चाची की गांड के अधखुले गुदा द्वार पर रख कर कस कर अंदर दबाने लगे।
नम्रता चाची के नन्हे से गुदा द्वार के छिद्र को मैंने धीरे धीरे अमानवीय आकार की और चौड़ते हुए देख कर मेरी सांस मनो रुक गयी।
सुरेश चाचा ने अपना सेब जैसा मोटा सुपाड़ा नम्रता चाची की गांड के अंदर डाल कर एक गहरी सांस ली। बड़े मामा ने अपनी शक्तिशाली बाहों से नम्रता चाची की छाती को जकड़ कर अपने सीने से चिपका लिया।
सुरेश चाचा ने नम्रता चाची की भरी कमर को कास कर पकड़ कर अपने भारी नितिम्बों की ताकत से अपने मोटे लंड को भीषण धक्के से नम्रता चाची की गांड में निर्ममता से धकेल दिया।
नम्रता चाची की चीख कमरे में गूँज उठी, “हाय ऊंऊंऊंऊंह ह्हहूम।”
सुरेश चाचा ने अपना आधा घोड़े जैसा लंड एक ठोकर में अपनी पत्नी की गांड में बेदर्दी से ठूंस कर शीघ्र दूरे धक्के से उसे जड़ तक नम्रता चाची की चूत में घुसेड़ दिया।
नम्रता चाची की दूसरी चीख और भी ऊंची थी।
बड़े मामा ने नम्रता चाची के हिलते डोलते चूचियों के चूचुक को अपने होंठों में कास कर पकड़ लिया। उन्होंने अपने शक्तिशाली हाथों से नम्रता चाची के चूतड़ों को ऊपर उठा कर अपने लंड को एक भयानक धक्के से उनकी चूत में आखिरी इंच तक धकेल दिया।
सुरेश चाचा और बड़े मामा ने नम्रता चाची की चूत और गांड भीषण ठोकरों से मारनी शुरू कर दी। नम्रता चाची के आनंद और दर्द भरी चीखें कमरे में गूँज उठीं।

