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सुरेश चाचा ने मेरे दोनों हिलते स्तनों को अपने हाथों में भर कर मसला और मेरे कान में फुसफुसाये, “नेहा बेटी आपके मलाशय की मीठी सुगंध कितनी आनंददायक है?”
मैं अब कामवासना से सिसक रही थी और कुछ भी नहीं बोल पाई, “आः .. चाचू …. मुझे … झाड़ ….ऊऊऊण्ण्णः ऊँ ….आह।
सुरेश चाचा ने मेरी वासना भरी कामना की उपेक्षा नहीं की। उन्होंने मेरे मेरी दोनों चूचियों का मर्दन कर मेरी गांड को भीषण धक्कों से मारते हुए गुर्राये, “बेटी, आज रात हम आपकी गांड को फाड़ कर आपको अनगिनत बार झाड़ देंगे।”
मेरे चूतड़ अब चाचू के लंड के हिंसक आक्रमण से दूर आगे जाने के स्थान पर अब उनके धक्कों की तरफ पीछे हिल रहे थे।
सुरेश चाचू ने ने मेरा एक उरोज़ मुक्त कर मेरे संवेदनशील भगशिश्न को अपनी चुटकी में भर कर मसलने लगे। मेरा सारा शरीर मानो बिजली के प्रवाह से झटके मार कर हिलने लगा, “आह .. मैं …. आ गयी …. चा … चू …..मैं …आः ….झ …झ … ड़ गयी … ई … ई।”
मेरी रति-निश्पति की प्रबलता ने मेरी सांस के प्रवाह को भी रोक दिया।
मेरा शरीर थोडा शिथिल हो गया। पर चाचू ने अपने मज़बूत हाथों से मेरे चूतड़ को स्थिर रख मेरी गांड में अपना विकराल लंड रेल के इंजन के पिस्टन की ताकत और तेज़ी से मेरी गांड चोद रहा था।
मेरे मलाशय की समवेदनशील दीवारें अब उनके लंड की हर मोटी शिरा, रग और नस को महसूस कर रहीं थीं।
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सुरेश चाचा ने मेरी गांड का मर्दन अब निसंकोच भीषण पर अत्यंत कामानंद उपजाते हुए धक्कों से करते हुए मुझे एक बार फिर से झाड़ दिया। मेरी चूत रति रस से लबालब भरी हुई थी और मेरा रस मेरी गुदाज़ जांघों पर फिसलने लगा।
मैं अब पूरे भ्रमांड से कट चुकी थी। मेरा अस्तित्व अब तो सुरेश चाचा के विकराल लंड और मेरी तड़पती गांड पर स्थिर हो गया था। सुरेश चाचा के लंड की भयंकर ठोकरों ने, और उनकी मेरे भग-शिश्न को सहलाती अनुभवी उँगलियों ने मुझे कामोन्माद के कगार पर फिर से पहुंचा दिया। जब मैं झड़ रही थी और मेरी सिस्कारियां मेरे कम्पित शरीर की स्थिति अंकित कर रही थीं तब ही सुरेश चाचू ने गुर्रा कर तीन बार मेरी प्रताड़ित गांड में निर्ममता से ठूँस कर अपने गरम जननक्षम वीर्य से मेरी सुलगती गांड को सींचने लगे।
मेरे लम्बे निर्दयी गांड मर्दन और अनिगिनत रति-निष्पति से थका मेरा अल्पव्यस्क शरीर शिथिल हो कर बिस्तर पर गिर जाता यदि चाचू ने अपनी मजबूत भुजाओं से मुझे जकड़ ना रखा होता। सुरेच चाचा मुझे पकड़े हुए बिस्तर पर लेट गए। उनका लंड अभी भी मेरी गांड में समाया हुआ था।

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