परिवार हो तो ऐसा – Update 34 | Erotic Family Incest Story

परिवार हो तो ऐसा - Family Incest Saga
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प्रीति अब नीचे खिसक स्वीटी की टाँगो के बीच आ गयी थी और

उसकी चूत को फैलाए अपनी जीब से उसे चाट रही थी.. चूस रही

थी… और थोड़ी ही देर मे स्वीटी की चूत ने पानी छोड़ दिया….

“प्रीति अब तुम लेट जाओ और में तुम्हारी चूत का पानी छुड़ा देती

हूँ” स्वीटी ने अपनी चचेरी बेहन से कहा.

स्वीटी ने अपना मुँह प्रीति की टाँगो के बीच दे दिया जो उसकी जगह

लेट गयी थी.. और अब वो स्वीटी की जीब का मज़ा अपनी चूत पर ले

रही थी… थोड़ी देर बाद प्रीति की चूत ने भी पानी छोड़ा और

दोनो बहने निढाल हो सो गयी…

लेकिन प्रीति की आँखों मे नींद कहाँ थी. उसके ख़यालों मे तो उसके

चाच्चा मोहन का लंड बसा हुआ था.. वो सोच रही थी कि किस तरह

पिछली बार उसने अपने चाच्चा मोहन से चुदवाया था…. उसने पलट

कर स्वीटी की तरफ देखा जो गहरी नींद मे सो चुकी थी.. उसने

बदन पर सिर्फ़ टी-शर्ट डाली और दबे पाँव कमरे से बाहर आ अपने

चाच्चा की स्टडी रूम की तरफ चल दी. उसे उमीद थी कि उसके चाच्चा

हर बार की तरह कंप्यूटर पर बैठे अपने लंड को मसल रहे होंगे..

“क्या चाचा जी अकेले ही लंड से खेल रहे हो?” प्रीति ने अपनी टी-

शर्ट उतार स्टडी रूम मे आते हुए कहा…

“और क्या करता.. जब तुम्हारी कहानी पढ़ी तो में आज स्वीटी के

कमरे के बाहर खड़ा चुप कर तुम दोनो को देख रहा था और सुन

रहा था..

“अच्छा तब क्या देखा और सुना आपने?” प्रीति ने अपने चाच्चा के लंड

को अपने हाथों पकड़ते हुए पूछा..

“मेने देखा कि ठीक तुम्हारी कहानी की तरह स्वीटी अंदर सिसक

रही थी और बड़बड़ा रही थी.. ” मोहन ने जवाब दिया..

“हां वो में उसकी चूत को अपनी जीब से तेज़ी से चोद रही थी”

प्रीति ने मोहन के लंड को मसल्ते हुए जवाब दिया.. “क्या ये सब देख

आप उत्तेजित हो गये थे..” प्रीति ने अपनी एक उंगली उसके मुँह मे दे

दी.. “क्या आपको अपनी बेटी की चूत के पानी का स्वाद मेरी उंगलियों पर

नही आ रहा?”

मोहन ने कोई जवाब नही दिया और उसकी उंगली को अच्छी तरह चूस वो

झुका और अपनी भतीजी की चुचियो को अपने मुँह मे ले चूसने

लगा…

प्रीति ने अपने चाच्चा का हाथ पकड़ा और उसे उठा कर खड़ा कर दिया

और फिर खुद उसकी जगह कुर्सी पर बैठ गयी उर अपनी टाँगे फैला

दी…

“अब आप अपनी जीब को वहीं घुसा दीजिए जहाँ थोड़ी देर पहले स्वीटी

ने घुसाइ थी.. मेरी चूत को खूब चूस चूस कर एक बार फिर झाड़ा

दीजिए…

मोहन अपनी भतीजी की टाँगो के बीच बैठ गया और अपनी जीब से

उसकी चूत को चाटने लगा.. मुँह मे भर चूसने लगा..

“ऑश हाां ऐसी ही चूसिए ऑश हाआँ अपनी जीब को अंदर तक

घुसैए.. ” प्रीति ने अपने चाच्चा के सिर पर हाथ रखा अपनी चूत

पर दबा दिया और सिसकने लगी.. थोड़ी ही देर मे उसकी चूत ने एक

बार फिर पानी छोड़ दिया..

आधी रात को स्वीटी की आँख खुली तो उसने अपने आप को बिस्तर पर

अकेले पाया… वो सोच मे पड़ गयी की प्रीति कहाँ गयी होगी… उसे

लगा कि प्रीति शायद टाय्लेट गयी होगी.. पर जब देर काफ़ी होने लगी

तो उसे चिंता होने लगी की आख़िर प्रीति है कहाँ… आख़िर हार

कर वो पलंग से नीचे उतरी और अपनी पेंटी पहन उसपर टी-शर्ट

पहन ली.

कमरे से बाहर आकर उसने देखा कि उसके पिताजी की स्टडी रूम की

लाइट जल रही थी… उसे तो लगा था कि शायद किचन मे कुछ लेने

के लिए गयी होगी.. लेकिन स्टडी रूम की लाइट जलते देख उसे थोड़ा

शक़ हुआ.. वो दबे पाँव स्टडी रूम की ओर बढ़ गयी,,,,

प्रीति स्टडी रूम मे अपने चाच्चा मोहन की गोद मे बैठी थी और उनके

कंधे पकड़ उछल उछल मोहन के लंड को अपनी चूत मे अंदर तक ले

रही थी… मोहन का सिर झुका हुआ अपनी ही भतीजी की चुचियों के

निपल को मुँहे मे ले चूसने मे मस्त था…

स्वीटी बड़ी मुश्किल से अपनी आँखों मे बसी नींद को दूर करने की

कोशिश कर रही थी.. जो उसे दीखाई दे रहा था उसे उस पर विश्वास

नही हो रहा था.. वो अपनी आँखों को मसल्ते हुए दरवाज़े के पीछे

चुप चाप खड़ी अंदर का नज़ारा देखने लगी…

प्रीति की नज़र अचानक अपनी बेहन पर पड़ी… पर वो तो पूरी

उत्तेजना मे थी और रुकना नही चाहती थी.. इसलिए वो और जोरों से

अपने चाच्चा के खड़े लंड पर उछल उछल कर चोद्ने लगी…

स्वीटी का दिल तो किया कि अंदर के नज़ारे के देख जोरों से चिल्ला

पड़े.. पूरे घर को सिर पर उठा ले.. प्रीति की इतनी हिम्मत कैसे

हुई कि वो उसी के पापा से चुदवाये.. लेकिन वो ये भी जानती थी कि

पिछली रात को ही उसने प्रीति की चूत का स्वाद चखा था… और

आज से पहले वो प्रीति के साथ उसी के भाई राज से चुदवा चुकी

थी… और साथ ही अपनी ताई यानी कि प्रीति की मम्मी के साथ भी सेक्स

का खेल खेल चुकी थी.. और आज का नज़ारा देख तो उसे पक्का यकीन

हो चुका था कि प्रीति अपने बाप यानी कि उसके ताऊ देव से भी चुदवा

चुकी है… और साथ ही वो इस बात को भी महसूस कर रही थी कि

अंदर के नज़ारे को देख उसकी चूत मे हलचल मच रही थी.. उसके

निपल तन कर खड़े हो रहे थे…

स्वीटी की इस तरह उनकी चुदाई देखते प्रीति तो और उत्तेजित हो गयी

और वो अपने चाच्चा के लंड से उछल उनके सामने नीचे बैठ गयी और

मोहन के लंड को अपने मुँह मे ले ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी… थोड़ी ही

देर मे मोहन के लंड ने उसके मुँह मे अपना मदन रस उगल दिया जिसे

प्रीति चटकारे ले ले कर पी गयी… उसने नज़र घुमा दरवाज़े की

ओर देखा तो स्वीटी वहाँ से जा चुकी थी.. उसने अपने चाच्चा से

विदा ली और वापस स्वीटी के कमरे मे आ गयी..

“प्लीज़ स्वीटी मुझे माफ़ कर देना.. मुझसे ग़लती हो गयी” प्रीति ने

अपनी चचेरी बेहन स्वीटी से कमरे मे आते हुए कहा.

“दिल तो कर रहा है कि अभी इसी वक्त तुम्हे ज़मीन पर सुलाऊ और

फिर कभी अपने पास और मेरी चूत के नज़दीक नही आने दूं…”

स्वीटी ने अपना गुस्सा जताते हुए कहा.. “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ये

घ्रिनत काम करने की?”

“दिल कर रहा है?” प्रीति ने पलट कर पूछा.

“हां लेकिन में ऐसा कर नही सकती.. क्यों कि ये तुम भी जानती हो

कि में तुमसे दूर नही रह सकती.. फिर भी में ये ज़रूर जानना

चाहूँगी कि कब से मेरे पापा से चुदवा रही हो… और इस सब की

शुरुआत कैसे हुई?” स्वीटी ने पूछा.

स्वीटी की मासूमियत भरी बात सुन प्रीति तो जैसे खुश हो गयी…

उसने अपने होठों को उसके होठों पर रखा और अपनी जीब उसके मुँह मे

डाल दी. और उसे जोरों से चूमने के बाद बोली, “सही मे स्वीटी में

बहुत बड़ी छीनाल हूँ.. पर में क्या करूँ में अपनी काम अग्नि को

कंट्रोल नही कर पाती.. अब तुम्ही देखो ना मैने अपने ही परिवार के

हर सदस्य के साथ खुल कर सेक्स किया है…” फिर वो स्वीटी को अपने

और अपने चाच्चा मोहन के बारे मे बताने लगी कि किस तरह उसने अपने

चाच्चा को अपनी स्टडी रूम मे मूठ मारते हुए और सेक्सी कहानी लिखते

हुए पकड़ लिया था.. फिर किस तरह उसने उस कहानी को अपनी ईमेल पर

भेज इस कहानी को आगे बढ़ाया और आख़िर वो अपने चाच्चा से चुदवाने

मे कामयाब हो गयी…

“प्रीति अब एक बात सच सच बताना क्या तुमने ताऊ जी यानी तुम्हारे

पापा से भी चुदवाया है?” स्वीटी ने पूछा.

“म्‍म्म्मम”

“हे भगवान मुझे तो लग रहा था कि में ही छीनाल रंडी हूँ

लेकिन तुम तो मुझसे भी दो कदम आगे.. हो अब तो मुझे लगता है कि

हमारे परिवार मे सिर्फ़ तुम्हारी चाची यानी कि मेरी मा और शमा ही

बचे है जिनके साथ तुमने सेक्स नही किया है” स्वीटी ने कहा.

“अच्छा प्रीति ये बताओ मेरे पापा का लंड कैसा है? तुम्हे मज़ा तो

बहुत आया होगा?” स्वीटी ने प्रीति की खड़े निपल को छूते हुए पूछा.

“क्यों? क्या तुम्हारा भी उनसे चुदवाने को दिल कर रहा है” प्रीति ने

हंसते हुए पूछा.

“यार प्रीति ज़िंदगी का कुछ पता नही… वैसे तो में तुमसे कम

छीनाल नही हूँ…. और मेरी भी चूत मे हमेशा आग लगी रहती

है… और तुम्हारा भाई है कि उसे मेरी चूत की ज़रा भी परवाह

नही है… इसलिए क्या पता कभी में भी तुम्हारी तरह अपने पापा

को पता उनसे चुदवा लूँ… ” स्वीटी ने कहा.

दोनो लड़कियाँ खिल खिला कर हँसने लगी और फिर एक दूसरे के साथ

छेड़ छड़ करते हुए दोनो सो गयी…

आज घर पर कोई नही था.. प्रीति कहीं बाहर गयी हुई थी और

सभी मेहमान घूमने फिरने गये हुए थे.. इसलिए राज ने मौके का

लाभ उठाते हुए अपने कॅमरा को बाथरूम मे सेट कर दिया और उसके तार

अपने कंप्यूटर से जोड़ दिए… और अब उसे इंतेज़ार था अपनी ममेरी

बेहन सोनिया का बाथरूम मे आकर नहाने का…..

अगले दिन शाम को राज यूनिवर्सिटी से जल्दी घर आ गया और अपने

कंप्यूटर पर बैठ कर कमेरे से रेकॉर्डेड तस्वीरों को देखने

लगा…. उसने स्क्रीन पर देखा कि सोनिया ने बाथरूम मे कदम रखा

और अंदर से दरवाज़ा बंद कर लिया…. फिर वो धीरे धीरे अपने

कपड़े उतारने लगी… राज की नज़रे तो जैसे उसके नंगे बदन पर

चिपक गयी…

सोनिया एक बहुत ही जानदार लड़की थी… बड़ी और भारी भारी

चुचियाँ… प्रीति जितनी बड़ी तो नही थी लेकिन फिर भी किसी पके

आम से कम नही थी…. उसके निपल खड़े तो नही थे लेकिन उनकी

साइज़ काफ़ी बड़ी थी.. सोनिया ने अपनी चूत पर झांतो को बड़ी अच्छी

तरह तराश रखा था जिससे चूत का आकार काफ़ी उभर आया था और

गुलाबी चूत काफ़ी प्यारी लग रही थी..इस नज़ारे को देख राज का लंड

झटके खा खड़ा होने लगा..

राज ने अपने लंड को अपनी शॉर्ट से बाहर निकाला और उससे खेलने लगा

और साथ ही कंप्यूटर मे रेकॉर्ड तस्वीरों को काट छाँट कर उसकी वीडियो

फिल्म बनाने लगा जिससे वो बाद मे उसे प्रीति को दीखा सके… थोड़ी

ही देर मे सोनिया नाहकार बाथरूम से निकली और उसकी जगह अब उसकी

मामी ने बाथरूम मे कदम रखा….

राज अपनी मामी के नंगे बदन को देख तो और जोश मे भर गया…

उसकी मामी नीता इस उमर मे भी बहुत जवान और सेक्सी लग रही थी.. वो

और ज़ोर ज़ोर से अपना हाथ अपने लंड पर चलाने लगा…. और जब उसके

लंड ने पानी छोड़ा तो उसने कंप्यूटर बंद कर दिया.

आख़िर शनिवार आया और सुबह से ही सब जोश मे भर मोहन और नेहा

के घर जाने के तय्यारी करने लगे….. अपना थोड़ा समान पॅक कर

सभी गाड़ी मे बैठ स्वीटी के घर की ओर रवाना हो गये…

मोहन नेहा, स्वीटी और शमा ने मिलकर अपने मेहमानो का स्वागत किया..

लिविंग रूम मे सभी इकट्ठा हो गये… सभी मिलकर ड्रिंक्स ले रहे

थे… बड़ों ने जहाँ विस्की के ग्लास पकड़ रखे थे तो बच्चो ने

अपनी अपनी पसंद के ड्रिंक ग्लासो मे भर रखी थी.

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