परिवार हो तो ऐसा – Update 30 | Erotic Family Incest Story

परिवार हो तो ऐसा - Family Incest Saga
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राज ने कह तो दिया लेकिन वो भी प्रीति की तरह ही अपनी ममेरी बेहन सोनिया की फोटो देख रहा था. सोनिया काफ़ी सुंदर लग रही थी.. उसका चेहरा गोल था और उसके बॉल कंधे तक आ रहे थे.. स्वेटर के नीचे से उसकी चुचियों का उभार दीख रहा था.. ऐसा लग रहा था कि जैसे दो नारंगी अंदर क़ैद हो.. राज का लंड फड़फड़ाने लगा… राज उठ कर अपनी बेहन के पास खड़ा हो गया और उसकी चुचियों को मसल्ते हुए अपने लंड को उसकी गीली चूत पर घिसने लगा.. “प्रीति क्यों ना हम अपने कमरे मे कॅमरा सेट कर दे जिससे इन तीनो को नंगा देख सके”

राज ने अपने लंड को उसकी चूत पर मसल्ते हुए कहा.

“हां तुम ठीक कह रहे हो.. में भी रवि और विवेक का लंड देखना चाहती हूँ…लगता तो ऐसा ही है काफ़ी मोटा तगड़ा लंड होगा दोनो का.. ” प्रीति ने कहते हुए अपने टाँगे थोड़ी फैला दी और राज के लंड को अपनी चूत मे लेने लगी…

तभी राज ने प्रीति को पलट के दरवाज़े के सहारे खड़ा कर दिया.. प्रीति थोड़ा झुक गई और अपनी टाँगो को फैला पीछे से उसके लंड को पकड़ अपनी चूत से लगा.. दिया.. राज ने उसकी गंद के छेद को कुरेदते हुए अपना लंड उसकी गीली चूत मे घुसा दिया..

“ऑश हाां ऑश अयाया हाआँ और अंदर तक घुसाओ… ” प्रीति सिसक पड़ी..

राज ने अपनी एक उंगली उसकी गंद के छेद मे घुसा दी और अब अपने लंड के साथ उसकी गंद मे उंगली अंदर बाहर करने लगा..

“ऑश राज हाआँ बहुत अच्छा लग रहा है.. श हां उंगली थोड़ी और अंदर तक करो और उसे घूमाओ.. मुझे लग रहा है कि तुम्हारा लंड और उंगली आपस मे मिल रहे है.. ”

राज और ज़ोर ज़ोर से धक्के लगा ने लगा.. प्रीति भी अपने कूल्हे पीछे कर उसकी उंलगी को आनी गंद मे और उसके लंड को अपनी चूत मे अंदर तक लेने लगी… दोनो ताल से ताल मिला हिल रहे थे.. राज की नसे तनने लगी.. और उसने प्रीति से कहा कि उसका छूटने वाला है तो प्रीति पलटी और नीचे बैठ उसके लंड को अपने मुँह मे ले चूसने लगी… और तभी राज के लंड ने पानी छोड़ दिया जिसे प्रीति पी गयी..

“लगता है कि मुझे गोलियाँ खानी शुरू करनी पड़ेगी.. में चाहती हूँ कि तुम मेरी चूत को अपने रस भर दो..” प्रीति ने अपने होठों पर लगे राज के वीर्य को चाटते हुए कहा.

“हां में भी यही चाहता हूँ कि अपने लंड को जड़ तक तुम्हारी चूत मे घुसा पानी छोड़ूं” राज ने कहा.

“ठीक है लेकिन तुम पहले अपनी जीब से मेरी चूत की प्यास बुझाओ… ” प्रीति ने कहा और पलंग के किनारे पर टाँगे नीचे कर लेट गयी…

राज उसकी टाँगो के बीच आ गया और अपनी जीब से उसकी चूत को चाटने लगा…

प्रीत अपनी चुचियों से खेलने लगी और सोचने लगी कि क्या सोनिया ने कभी सेक्स का मज़ा लिया है.. और क्या उसे लड़की के साथ सेक्स करना अच्छा लगता होगा.. सोचने लगी कि क्या विवेक का लंड राज के जितना मोटा और लंबा होगा.. वो दोनो कल्पना मे राज और विवेक के लंड की तुलना करने लगी और तभी उसकी चूत ने झटका खाया और पानी छोड़ दिया..

प्रीति अपनी सिर्फ़ पॅंटी और टी-शर्ट मे किचन मे घुसी..उसके खड़े निपल कोटन की टी-शर्ट से झलक रहे थे… “गुड मॉर्निंग मम्मी” प्रीति ने अपनी मा वासू से कहा जो डाइनिंग टेबल पर बैठी नाश्ता कर रही थी..

“गुड मॉर्निंग बेटा.. ” वासू ने कहा और उसकी निगाह अपनी बेटी के आध नंगे बदन पर घूमने लगी.. उसके खड़े निपल देख उसकी चूत मे हलचल होने लगी… प्रीति जब घूम कर फ्रिड्ज से जूस की बॉटल निकालने लगी तो वासू की निगाह उसके कुल्हों पर ठहर गयी जहाँ उसकी गुलाबी रंग की पॅंटी मे छुपी उसकी गंद सॉफ दीखाई दे रही थी… उसने देखा तो नही था लेकिन उसे ये एहसास था कि उसकी बेटी अपने भाई से चुदवाति है.. राज का ख़याल आते ही उसकी चूत मे और खुजली मच उठी.. उसका दिल किया कि वो अभी प्रीति की चुचियों को अपनी मुट्ठी मे भर ले.. उन्हे अपने होठों से लगा चूस ले…

जूस पीने के बाद प्रीति ने स्वीटी को फोन लगाया और उसे अपने साथ शॉपिंग पर चलने को कहा.. “क्या खरीदने जा रही हो?” वासू ने अपनी बेटी से पूछा..

“वो क्या है ना मम्मी मुझे अपने लिए कुछ नई पॅंटी ख़रीदनी है” प्रीति ने कहा.

“पॅंटी तो मुझे भी ख़रीदनी है.. अगर तुम कहो तो में भी तुम दोनो के साथ चलूं” वासू ने कहा…

“हां मम्मी क्यों नही वैसे भी आपके साथ शॉपिंग पर गये बहुत दिन हो गये है” प्रीति ने खुश होते हुए कहा. वसुंधरा और प्रीति पहेले स्वीटी के घर गये और फिर वहाँ से तीनो शॉपिंग के लिए निकल गये..

“तो कहाँ चलना पसंद करोगे तुम दोनो?” वासू ने दोनो लड़कियों से पूछा.

“मुझे तो टॉप और स्कर्ट खरीदना है” स्वीटी ने प्रीति की ओर देखते हुए कहा..

“हां मम्मी मैं भी एक स्कर्ट खरीद लूँगी.. पॅंटी बाद मे ले लेंगे” प्रीति ने कहा.

तीनो गाड़ी को पार्किंग मे पार्क कर एक शॉपिंग माल मे घुस गये और अपनी पसंद की दुकान मे आ गये.. तीनो अपने अपने लिए ड्रेस खरीद चेंज रूम मे चेंज करने चल दिए.. लेकिन माल मे भीड़ काफ़ी होने से उन्हे एक ही चेंज रूम मे कपड़े ट्राइ करने पड़ रहे थे.. स्वीटी की तो हालत खराब होती जा रही थी. जब भी वो अपनी बेहन और आंटी को कपड़े उतारते देखती तो उसकी चूत मे चिंतियाँ रेग्ने लगती.. चूत मे खुजली बढ़ती जा रही थी.. उसकी आँखे तो अपनी ताई के मम्मो पर से हटाए नही हट रही थी. उसका दिल कर रहा था की अभी यहीं चेंज रूम मे वो अपनी ताई की चुचि को मुँह मे ले चूसने लगे…

वासू भी अपनी भतीजी की आँखों से अंजान नही थी.. उसकी चूत मे तो पहले से ही आग लग रही थी.. वो दोनो के नंगे बदन को देखते हुए कपड़े ट्राइ करने लगी.. उसने देखा की स्वीटी ने ब्रा नही पहन रखी थी. और उसकी छोटी लेकिन कठोर चुचि ने वासू के मुँह मे पानी ला दिया.. वो उन नारंगियों का स्वाद चखना चाहती थी.. तीनो एक दूसरे के साथ सेक्स करना चाहते थे. लेकिन तीनो ने अपने अपने कपड़े पसंद किया और दूसरी दुकान मे घुस गये.. दुकान मे घुस तीनो अपने अपने लिए पॅंटी पसंद करने लगे.. और साथ ब्रा और पॅंटी के सेट भी देखने लगे… तीनो फिर चेंज रूम मे जाकर ब्रा और पॅंटी ट्राइ करने लगे.. स्वीटी ने अपने लिए एक काले रंग की पॅंटी और उससे मिलती ब्रा पसंद की और चेंज रूम मे घुस गयी..

ब्रा और पॅंटी पहनने के बाद स्वीटी ने अपनी आंटी को चेंज रूम मे बुलाया जिससे उनकी राई ले सके.. “क्यों आंटी कैसी लग रही है?” स्वीटी ने पूछा..

“एक मिनिट ज़रा देखने दो.. ” कहकर वासू ने अपनी भतीजी की दोनो चुचियों को अपनी मुट्ठी मे भर लिया जैसे कि ब्रा की गोलाइयाँ माप रही हो..

“ये स्ट्रॅप कुछ टाइट नही है” वासू ने उसकी चुचियों को मसल्ते हुए कहा..

स्वीटी के बदन मे तो जैसे 440 वॉट का करेंट दौड़ गया… उसकी चूत गीली हो गयी लेकिन फिर भी उसने अपने आप को संभाल लिया..

वासू ने उसके लिए वो सेट पसंद कर लिया और फिर वो खुद अपने लिए ट्राइ करने लगी.. जब वासू ने ब्रा पहन अपनी बेटी और भतीजी को बुला कर दिखाया… तो प्रीति को चहक पड़ी.. “ओह मम्मी क्या ब्रा है ?”

“ज़रा में भी तो देखूं” स्वीटी ने कहा तो वासू घूम गयी.. अब उसकी पीठ प्रीति की ओर थी और चेहरा स्वीटी के सामने. वासू को तो अंदाज़ा भी नही था कि उसकी भतीजी कुछ ऐसा करेगी..

स्वीटी ने उसकी ब्रा के उपर से अपनी ताई के निप्पके को पकड़ा थोड़ा मसला और फिर ब्रा के उपर से चुचि को थोड़ा सहलाया जैसे कि चुचि को ब्रा मे अड्जस्ट कर रही हो. “हां अब अच्छी लग रही है” स्वीटी ने मुस्कुराते हुए कहा..

“मुझे नही पता था कि आज की नई फॅशन की ब्रा को कैसे अड्जस्ट किया जाता है..” कहकर वासू ने स्वीटी की चुचियों को भी ठीक उसकी तरह मसला और भींचा जैसे कि उसने उसके साथ किया था..

प्रीति चुप चाप अपनी बेहन और मा को ये खेल खेलते देख रही थी. उसकी समझ मे नही आ रहा था कि वो कहे.. वो पहले ही अपने भाई और चाचा और पिताजी से चुदवा चुकी थी. दोनो चचेरी बहनो के साथ सेक्स कर चुकी थी.. पर अपनी सग़ी मा के साथ… ये सोच कर ही उसके बदन मे सिरहन सी दौड़ गयी.. आख़िर तीनो ने अपनी अपनी पसंद की पॅंटी और ब्रा पर्चेस की और बिल चुका कर दुकान के बाहर आ गयी..

“तो लड़कियो अब क्या इरादा है?” वासू ने पूछा..

“आंटी मुझे कुछ और खरीदना है.. लेकिन उसमे आप ही मेरी मदद कर सकती है.. अगर आज नही खरीद पाई तो पता नही कब खरीद पाउन्गी” स्वीटी ने कहा..

“अरे तो बोलो ना इसमे शरमाने वाली क्या बात है.. बेटियाँ जब बड़ी हो जाती है तो वो बच्चे नही सहेली बन जाती है” वासू ने स्वीटी के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा..

“आंटी मुझे ऑव रब्बर वाला.. क्या कहते है.. उसे ओह्ह हां डिल्डो.. यानी नकली लंड…आअप गुस्सा तो नही हो रही है.. ” स्वीटी ने कहा.. आज जब उसकी आंटी उसके साथ खुल ही गयी है तो उसे भी चान्स ले लिया डिल्डो खरीदने का.

प्रीति के होश ही उड़ गये स्वीटी की बात सुनकर. वो जानती थी के उसकी मा के पास तो अच्छे ख़ासे डिल्डोस की भरमार है. पर अपनी बेटी और भतीजी के साथ वो ऐसी चीज़ ख़रीदेगी… क्या कहेगी वो.?

“नही स्वीटी मुझे बिल्कुल भी बुरा नही लग रहा लेकिन मेरा ये खुद का मानना है कि हर औरत को अपने आप को खुश करने का पूरा पूरा हक़ है.. चाहे जिससे भी और जैसे भी.. और अगर तुम्हे नकली लंड से खुशी मिलती है तो चलो आज में तुम्हे एक खरीद कर दे ही देती हूँ” वासू ने स्वीटी से कहा.

मा की प्रतिक्रिया देख प्रीति मन ही मन खुश हो गयी.. इसी बहाने उसे भी खरीदने का मौका मिल गया था और वो भी एक नकली लंड खरीद राज को चौंका देना चाहती थी..

वासू दोनो लड़कियों को एक सेक्स शॉप पर ले गयी जहाँ सेक्स मे इस्तेमाल होने वाली हर चीज़ मिलती थी.. वहाँ कई प्रकार की मॅगज़ीन्स.. सीडी… और अलग अलग तरह के खिलोने शो केस मे पड़े थे..

मॅगज़ीन रॅक से प्रीति ने एक मॅगज़ीन उठा ली और पन्ने पलट देखने लगी.. “स्वीटी ये देखो.. इस लड़की ने एक लंड अपनी चूत मे और दूसरा अपनी गंद मे ले रखा है… मुझे भी ये ट्राइ करना है” प्रीति ने स्वीटी को मॅगज़ीन दिखाते हुए कहा..लेकिन उसने ये ध्यान रखा कि उसकी मा ये बात ना सुन पाए..

“दो दो लंड साथ मे तो बाद मे लेना पहले अपनी गंद मे तो लंड लेने की आदत डाल लो” स्वीटी ने हंसते हुए कहा.

“वो मैं ले चुकी हूँ” प्रीति ने जवाब दिया.. और हंसते हुए अनपी चचेरी बेहन की शक्ल देखने लगी..

“तुम ऐसा कर ही नही सकती” स्वीटी ने कहा.

“कौन क्या नही कर सकता” वासू ने दोनो लड़कियों के पीछे आते हुए कहा और उसकी आँखे मॅगज़ीन पर पड़ गयी जिसमे एक लड़की दो लंड लिए हुए थी..

“कुछ नही मम्मी बस ऐसी ही” प्रीति ने शरमाते हुए कहा..

“कुछ नही मेरी जूती से..” वासू ने हंसते हुए कहा..

“अगर तुम नही बताना चाहती तो कोई बात नही.. वैसे में बहुत खुले विचारों की हूँ और शायद में तुम दोनो की कुछ मदद ही करूँगी.. अगर ऐसा नही है तो में तुम दोनो के साथ आज यहाँ नही होती.”

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