परिवार हो तो ऐसा – Update 29 | Erotic Family Incest Story

परिवार हो तो ऐसा - Family Incest Saga
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आज घर पर प्रीति और उसके डॅडी दोनो अकेले ही थे.. उसकी मम्मी वसुंधरा और राज किसी काम से बाहर गये थे.. पापा ने अभी अभी गार्डेन की सफाई की थी और अब शवर मे नहा रहे थे..

प्रीति अपने कमरे मे खड़ी अपने कपड़े उतारने लगी… उसने सोच लिया था कि उसे आज से अच्छा मौका फिर नही मिलेगा.. शाम होने को आई थी और वो दोपहर से ही अपने बाप को अलग अलग अंदाज़ मे चिढ़ाती रही थी.. उसने अपने बाप देव को कई बार अपना लंड मसल्ते भी देखा था.. प्रीति ने धीरे से बाथरूम का दरवाज़ा खोला उसके पिताजी उसकी तरफ पीठ किए हुए थे इसलिए देव को उसके अंदर आने का एहसास नही हुआ.. उसने दरवाज़ा बंद नही किया वो अपने पापा को आगाह नही करना चाहती थी.. प्रीति ने देखा कि उसके पापा शवर के नीचे खड़े थे.. उनकी टाँगे थोड़ी फैली हुई थी और उनका दायां हाथ जोरों से हिल रहा था.. वो समझ गयी कि उसके पापा मूठ मार रहे है.. प्रीति धीमे से शवर के नीचे आ गयी और अपने कदमों की आहट से उसने अपने बाप को चौंका दिया..

इसके पहले की देव कुछ कहता प्रीति ने अपने हाथ की मुट्ठी उसके लंड पर कस दी और उसके लंड को उपर से नीचे सहलाने लगी.. फिर वो अपने पापा के सामने घुटनो के बल बैठ गयी और उसके लंड को खींच इस तरह कर दिया कि शवर के पानी ने लंड पर लगे साबुन को अच्छी तरह धो दिया..

देव हैरत भरी नज़रों से अपनी बेटी की हरकतों को देख रहा था.. वो जानता था कि उसे तुरंत अपनी बेटी को रोक देना चाहिए.. लेकिन उसकी निगाहे अपनी बेटी की भारी और कठोर चुचियों पर टीक गयी और वो उसकी चुचि की सुंदरता मे खो गया.. हवस रिश्तों और जज्बातों पर हावी हो गयी.. देव ने प्रीति को ना तो कुछ कहा और ना ही उसने उसे रोकने की कोशिश की…. और प्रीति ने अपना मुँह खोल उसके लंड को अंदर ले लया.. अपना पूरा मुँह खोल उसने ज़्यादा से ज़्यादा लंड को अंदर लिया और फिर उसे नीचे से उपर तक चूसने लगी.. प्रीति अपने मुँह को आगे पीछे कर अपने पापा का लंड चूसने लगी और अपने हाथों से अंडकोषों को सहलाने लगी.. तभी प्रीति को अपने बाप के मुँह से निकलती सिसकियाँ सुनाई पड़ी.. वो और ज़ोर ज़ोर से लंड को चूसने लगी.. और देव ने अपनी कमर को आगे कर अपने लंड को और अपनी बेटी के गले के अंदर तक घुसा दिया…

प्रीति मन ही मन खुश हो गयी थी.. वो अब अपने पापा को पा चुकी थी.. अब उसे विश्वास हो गया था कि अब वो अपनी मर्ज़ी के हिसाब से अपने पापा से चुदवा सकती है.. उसने अपनी नज़रे उठा कर अपने पापा को देखा.. और उसने देखा कि उसके पापा उन्माद और खुशी मे उसे अपना लंड चूस्ते देख रहे है.. वो अपने पापा की ओर देखते हुए मुस्कुरा दी और ज़ोर ज़ोर से उनके लंड को चूसने लगी.. और तभी उसके पापा के लंड से वीर्य की पिचकारी छूटी और उसके गले से टकराई जिसे वो खुशी खुशी पी गयी और फिर लंड को ज़ोर ज़ोर से चूस हर एक बूँद को पीने लगी..

“पापा आप साबुन लगा अपने लंड को मूठ मार रहे थे.. मेरा मुँह उस साबुन से तो अच्छा ही है ना? प्रीति ने खड़े हो अपने पापा को बाहों मे भरते हुए कहा..

“हां बहोत अछा था लेकिन….”

“लेकिन वेकीन कुछ नही पापा.. मुझे ये सब चाहिए था और अब मुझे और भी चाहिए.. याद है बचपन मे आप मुझे नहलाते थे.. तो अब आप क्यों मुझे नही नहलाते हुए मेरे नंगे बदन को रगड़ते है.. ” प्रीति ने अपनी चुचियो को अपने बाप की छाती से रगड़ते हुए कहा.. प्रीति अपने हाथों मे साबुन ले और अपनी चुचियों पर मसल्ने लगी…

देव फटी नज़रों से अपनी बेटी की चुचियो को देख रहा था और वो अपने आप को रोक नही पाया उसने अपना हाथ बढ़ा अपनी बेटी की चुचियों को अपनी मुट्ठी मे लिया और सहलाने और मसल्ने लगा..

प्रीति ने अपने आप को शवर के नीचे दीवार के सहारे टीका दिया और अपने पापा के लंड को अपने हाथों मे ले मसल्ने लगी… जब उसके पापा ने उसके निपल को भींचा तो उसके मुँह से एक कराह निकल गयी और उसने अपनी चुचि को शवर के पानी के नीचे कर दिया जिससे सारी साबुन धूल जाए..

साबुन के धुलते ही देव ने अपने चेहरे को झुकाया और अपनी बेटी की चुचि को आपे मुँह मे ले चूसने लगा.. वो उसके निपल को अपने दाँतों से काटने लगा..

प्रीति उन्माद मे सिसक पड़ी.. “ऑश पापा हाआँ चूसो और ज़ोर ज़ोर से चूसो ऑश हाआँ बहुत अछा लग रहा है. काट लो मेरे निपल को खा जाओ मेरी चुचि को” प्रीति सिसक पड़ी और उसकी सिसकिया सुन उसका मुरझाया लंड एक बार फिर खड़ा होने लगा..

देव अपने एक हाथ से अपनी बेटी के नंगे बदन को सहलाने लगा और हाथ को नीचे खिसकते हुए उसने अपना हाथ प्रीति की चूत पर रख दिया..

प्रीति ने अपनी टाँगे और फैला दी.. और देव ने अपनी दो उंगली अपनी बेटी की चूत मे घुसा दी.. और उत्तेजना मे उसके निपल को और ज़ोर ज़ोर से काटने लगा..

प्रीति की तो जैसे हर तमन्ना आज पूरी हो रही थी.. उसने अपनी टाँगों को और फैला दिया.. और देव अपनी उंगलियो को तेज़ी से अपनी बेटी की चूत के अंदर बाहर करने लगा.. “पापा मुझे आपका ये लंड मेरी चूत मे चाहिए.. इसे मेरी चूत मे घुसा आज आप मेरी चूत को फाड़ दीजिए… कब से तड़प रही है आपके लंड के लिए” प्रीति ने अपने पापा के लंड को खींच अपनी चूत से सताते हुए कहा.. “और इस पानी को बंद भी कर दीजिए”

बलदेव थोड़ा हिक्खिचाया.. लेकिन आज तो वासना हर रिश्ते हर जज़्बे पर भारी थी.. उसने शवर के पानी को बंद कर दिया.. पानी के रुकते ही प्रीति पलट गयी और दीवार के सहारे नल को पकड़ घोड़ी बन गयी… देव ने अपने लंड को उसकी गंद के दरार के बीच रखा और थोड़ी देर घसने के बाद उसने अपना लंड अपनी बेटी की चूत मे घुसा दिया…

प्रीति ने अपनी कमर को पीछे कर अपने पापा के लंड को और अंदर तक ले लिया.. “ऑश पापा बहुत अछा लग रहा है.. ओह कब से तड़प रही थी आपके लंड के लिए.. हाआँ और अंदर तक घुसा कर चोदो मुझे ऑश हाआँ और अंदर तक” प्रीति अपनी कमर को आगे पीछे कर बोल पड़ी..

देव तो अपनी बेटी की सिसकियों को सुन जैसे पागल हो गया उसने अपना हाथ नीचे किया और प्रीति की चुचियों को पकड़ ज़ोर ज़ोर के धक्के मार अपने लंड को और अंदर तक घुसा उसकी चूत को चोद्ने लगा… उसने अपना पूरा लंड उसकी चूत मे घुसाना चाहा लेकिन प्रीति ने मना कर दिया कहा कि उसे दर्द होता है.. देव ने अब अपने हाथों को प्रीति की चुचियों से हटा उसके कुल्हों पर रख दिए जिससे वो और ज़ोर से धक्के मार सके.. और प्रीति ने अपना एक हाथ दीवार से हटा अपनी चूत पर रख अपने बाप के लंड को अपनी ही चूत के अंदर बाहर होता देख महसूस करने लगी.. “ऑश पापा श हां चोदो मुझे और तेज़ी से चूओडूओ…. ऑश हाआँ ऐसे ही.. ओह… ” प्रीति अपनी चूत को मसल्ते हुए सिसकने लगी.. उसकी चूत जैसे लावे से खौल रही थी..

बलदेव का भी लंड अकड़ने लगा था और वो ज़ोर ज़ोर के धक्के लगाने लगा था..

“ऑश पापा हाआँ और ज़ोर से श हां आज भर दो मेरी चूत को.. ” प्रीति भी अपनी कुल्हों को आगे पीछे कर सिसकने लगी..

तभी देव ने अपनी बेटी से कहा कि उसका छूटने वाला है और प्रीति ने आगे होते हुए अपने बाप के लंड को अपनी चूत से बाहर निकाल दिया.. और वो जैसे ही नीचे बैठ उसे अपने मुँह मे लेने लगी.. देव के लंड से वीर्य की बौछार छूटी जो सीधे प्रीति के चेहरे पर पड़ी.. फिर दूसरी और तीसरी फुहार उसकी बेटी को भीगोति गयी..

देव ने शवर फिर से ऑन कर दिया और प्रीति अपने बदन को सॉफ करने लगी.. देव की उत्तेजना जब शांत हुई तो उसे अपने आप से घृणा होने लगी.. उसने जल्दी जल्दी अपने बदन को सॉफ किया और टवल उठा अपने बदन को पौन्छ्ता हुआ बाथरूम से बाहर चला गया..

देव के जाते ही प्रीति ने अपने बदन को अच्छी तरह सॉफ किया और फिर टवल से पौंच्छ वो नंगी ही बाथरूम से बाहर आ गयी.. और जब वो अपने डॅडी के कमरे मे पहुँची तो उसने देखा कि उसके पापा टवल मे अपना मुँह छिपाए बैठाए थे.. “क्या हुआ पापा? आप इस तरह क्यों बैठे है” प्रीति ने पूछा..

“मुझे माफ़ करना प्रीति में बहक गया था.. मुझे ये सब नही करना चाहिए था.. ये सब ग़लत है. में तुमसे वादा करता हूँ कि में ऐसा दोबारा नही करूँगा.. तुम इसे एक हादसा समझ भूल जाना ” देव ने जवाब दिया..

“पर पापा में तो चाहती हूँ कि ऐसा हादसा बार बार हो.. और आप हर बार मुझे ऐसा ही सुख दें जो आज आपने दिया है..” प्रीति ने देव के नज़दीक आते हुए कहा.. ” पापा में आपसे बहोत प्यार करती हूँ और में अपनी हर ख्वाइश हर खुशी आपसे बाँटना चाहती हूँ”

“प्रीति में भी तुमसे बहोत प्यार करता हूँ.. और में ये भी मानता हूँ कि तुम बहोत खूबसूरत हो और अपने जान लेवा हुस्न से तुम किसी भी मर्द को बहका सकती हो… लेकिन हम दोनो के बीच ये ग़लत है.. ये नही हो सकता.. ” देव ने अपनी बात पर ज़ोर देते हुए कहा..

“पापा में फिलहाल आपसे इस विषय पर बहस नही करूँगी.. कुछ दिन जाने दीजिए फिर देखते है की आपके विचार ऐसे ही रहते है या बदल जाते है.. ” प्रीति ने कहा..

“प्लीज़ प्रीति समझो मेरी बात को” देव ने कहा.. “नही पापा में नही समझ नही सकती.. लेकिन में अभी आपको छोड़ रही हूँ लेकिन में जानती हूँ कि आज के बाद सपने मे आप मुझे ही देखेंगे.. मेरी चूत को चोद्ते हुए देखेंगे… और एक दिन आप अपने आप को रोक नही पाएँगे ” कहते हुए प्रीति अपने पाँवों को पटकते हुए अपने बाप के कमरे से निकल गयी.. …………………….

“तुम सभी को ये जान कर खुशी होगी कि तुम्हारे मामा अश्विन और नीता मामी एक महीने के लिए छुट्टियो मे यू के से आ रहे है और वो हमारे पास ही रुकेंगे” वसुंधरा ने सभी से कहा..

“मम्मी तब तो बहोत मज़ा आ जाएगा…. कई साल हो गये है सभी से मिले ” राज ने खुश होते हुए कहा.

“हां और साथ मे रवि विवेक और सोनिया भी आ रहे है… उन तीनो की भी तुम दोनो से मिलने की काफ़ी इच्छा है.. और साथ मे वो स्वीटी और शमा से भी मिलना चाहते है.. ” वासू ने कहा.

“हां मम्मी मुझे तो तीनो की शकल भी याद नही.. पता नही कैसे देखते होंगे .. मेरे ख़याल से चार साल हो गये ना मांजी को यूके शिफ्ट हुए” प्रीति ने कहा.

“ठीक है अब वो आ रहे है और हमारे साथ ही रहेंगे.. और हां वो तुम दोनो का रूम शेर करेंगे तो तुम्हे कोई ऐतराज़ तो नही है?” वासू ने पूछा..

“बिल्कुल भी नही मम्मी” राज ने जवाब दिया..

“वैसे ममाजी लोग कितने दिन रुकेंगे?” प्रीति ने पूछा.

“करीब करीब एक महीना” वासू ने जवाब दिया.

“और वो लोग आ कब रहे है?” राज ने पूछा.

“अगले हफ्ते” वासू ने कहा.

खाने के बाद प्रीति अपने भाई राज के कमरे मे आ गयी और उसने दरवाज़ा बंद कर दिया… राज कंप्यूटर पर कुछ काम कर रहा था उसने नज़रे उठा कर अपनी बेहन की ओर देखा..

“सिर्फ़ एक हफ़्ता है.. इस हफ्ते मे तुम मेरी इतनी चुदाई करो.. कि आने वाले एक महीने तक मुझे लंड की ज़रूरत महसूस ना हो.. क्या पता बाद मे मौका मिले या ना मिले… ” प्रीति ने मुस्कुराते हुए कहा…

“वो तो में करूँगा ही पर तुम ऐसा क्यों सोचती हो कि हमे मौका नही मिलेगा.. हम कभी भी चाचा जी के यहाँ जाकर कर सकते है.. फिर वहाँ स्वीटी और शमा तो है ही.. ” राज ने जवाब दिया.

“ठीक है वो सब बाद मे सोचेंगे पहले तुम मेरे पास आओ.. मेरी चूत मे बहोत जोरों की खुजली मच रही है.. ” कहकर प्रीति ने अपनी नाइट सूयीट उतार और अपनी बिना बालों की चूत राज के सामने कर दी…

राज भी अपनी बेहन की चूत देख अपने कपड़े उतारने लगा.. कि तभी उसे कोई ईमेल आने का संकेत मिला…

“राज अब उसे छोड़ो भी.. क्या वो मेरी चूत से ज़्यादा ज़रूरी है” प्रीति झल्लाते हुए बोली..

“अरे थोड़ा तो सब्र करो.. लगता है कि ममाजी ने कुछ फोटोस भेजी है… ” राज ने कहा.. और प्रीति अपने भाई के पास जाकर खड़ी हो गयी जिससे वो अपने ममरे भाई बेहन की तस्वीर देख सके.. अपने दोनो ममेरे भाइयो की तस्वीर देख प्रीति चौंक पड़ी..

“राज कितने सुन्दर लग रहे है दोनो है ना.. क्या इनके इतने गतीले बदन के साथ इनका……

“तुम्हारा दिमाग़ मे क्या हर वक्त एक ही बात घुसी रहती है.. ” राज ने उसे बीचे मे टोकते हुए हंसते हुए कहा.

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