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एक नया दिन
अगला दिन सबके लिए एक नयी तरंग लाया था. शालिनी की गांड की खुजली मिटी या बढ़ी ये कहना अभी संभव नहीं था. परन्तु ये निश्चित था कि गौतम को उसकी गांड की यात्रा के अब अनगिनत अवसर मिलने थे. गौरव शालिनी के कमरे से बाहर आया तो सामने उसे अनन्या अपने कमरे में जाती हुई दिखी. अनन्या भी उसे देखकर ठहर गई.
दोनों भाई बहन एक दूसरे को देखते रहे फिर लगभग एक ही साथ पूछ पड़े, “कैसी रही रात?
गौतम: “अकल्पनीय, दादी में आज भी वही मादकता और भूख है जो उनकी जवानी में रही होगी. हालाँकि कल उन्होंने कुछ कोमल चुदाई की इच्छा की थी, पर मुझे लगता है कि आगे से ऐसा कम ही होगा. तुम्हारा कैसा रहा?”
अनन्या: “मॉम तो सो गयी थीं जल्दी ही, ये दवाइयाँ सच में उन्हें बहुत सुस्त बना रही हैं. पापा उन्हें कल डॉक्टर के पास ले जायेंगे. कह तो रही हैं कि अब वे अंदर से ठीक अनुभव कर रही हैं और आशा कर रही हैं कि डॉक्टर उन्हें चुदाई की आज्ञा दे देंगे. वैसे कल उन्होंने और पापा ने मुझे चूत चाटना भी सिखाया. और मुझे अच्छा भी लगा. मुझे लगता है कि ये भी अब हमारे सामान्य जीवन का अंग बन जायेगा. फिर पापा ने मुझे फिर उतने ही प्यार से चोदा। मेरा मन तो नहीं भरा पर ये समझना होगा कि वे मुझे धीरे धीरे आगे ले जाना चाहते हैं. अब मैं तुम्हारे जितनी अनुभवी तो हूँ नहीं.”
गौतम: “तुम अधिक भाग्यशाली हो जो कि हर गुर अपनों से ही सीखोगी। मुझे जिन्होंने सिखाया है, उसमे केवल वासना और व्यभिचार था. प्रेम का एक अंश भी नहीं था.”
अनन्या: “ये सच है. चलाओ नहा धोकर मिलते हैं.”
उधर अजीत और अदिति भी तैयार होकर बैठक में पहुँचते हैं. अदिति चाय बनती है और अजीत पेपर पढ़ते हुए टीवी चलकर अदिति के साथ चाय पीता है. गोकुल का सामान लगा हुआ था. उसकी नौ बजे की बस थी और उसे जल्दी ही निकलना था. गोकुल और राधा तड़के सुबह ही उठकर एक बार और चुदाई कर चुके थे. गोकुल और राधा बंगले में गए और गोकुल को अजीत ने बुलाकर एक लिफाफा दिया.
अजीत: “इसमें मैंने दस हजार रूपये रखे हैं. अगर तुम्हें रहने का प्रबंध ठीक न लगे तो अपने मन का प्रबंध कर लेना. हालाँकि, मुझे नहीं लगता कि इसकी आवश्यकता पड़ेगी. ये पूरा तुम्हारा है, खर्चो या बचाओ, मुझे लौटना मत. अगर उन्हें तुम्हारा काम पसंद आया तो सम्भव है कि आगे भी बुलाएँ और इससे तुम्हारी कमाई बढ़ेगी. वो जो देंगे, यहाँ के वेतन के अतिरिक्त होगा. अब जाओ और अच्छे से रहना.”
गोकुल ने अजीत और अदिति के पाँव छूकर आशीर्वाद लिया और फिर राधा के साथ बाहर चला गया.
अजीत: “रुको दो मिनट, मैं गौतम को कहता हूँ, तुम्हें छोड़ आएगा.” ये कहकर अजीत ने गौतम को फोन लगाया.
गोकुल: “इसकी कोई आवश्यकता नहीं, बाबूजी.”
अजीत: “कोई बात नहीं. बस दो मिनट रुको, गौतम आ ही गया.”
गौतम आया और कार की चाभी लेकर राधा और गोकुल के साथ चला गया. आधे घंटे में वो राधा के साथ लौट आया. अदिति ने राधा के चेहरे पर आंसुओं की दाग देखे तो उसे पास बुलाकर अपने गले से लगा लिया.
“चिंता न कर, इनके अच्छे मित्र हैं, गोकुल को अपने घर जैसे ही रखेंगे. और तेरा ध्यान हम सब रखेंगे. १० ही तो दिन हैं, यूँ निकल जायेंगे. और जैसा माँ जी ने कहा है, तुझे अकेले नहीं रहना है, उनके साथ ही रहना है. समझी? अब दुखी मत हो और मुंह धोकर खुश हो जा कि गोकुल को इतने महत्वपूर्ण कार्य के लिए चुना गया है.”
राधा बाथरूम में गयी और फिर बाहर निकलकर रसोई में चली गयी.
अदिति ने उसे देखा तो बोल पड़ी, “यहाँ क्या करने आयी है. माँ जी तेरी राह देख रही होंगी.”
राधा के मन में तितलियाँ उड़ने लगीं. अब उसे पता तो था ही कल रात क्या हुआ था, सो वो उत्तेजित मन और पैरों से शालिनी के कमरे में चली गई. अब चूँकि घर में पूर्ण उन्मुक्त वातावरण बन ही चुका था तो शालिनी ने कोई कपड़ा नहीं डाला था और वो भी राधा की ही प्रतीक्षा कर रही थी. राधा के ध्यान के बिना भी उसे उपयुक्त प्रेम मिल रहा था, पर आज ये राधा को उस राह पर ले जाने के लिए आवश्यक था जिससे उसका लौटना असम्भव हो.
“बड़ी देर कर दी आने में आज, क्या कर रही थी?”
“माँ जी, इन्हें बस अड्डे तक छोड़ने गई थी. इसीलिए.”
“ये अच्छा किया. कुछ सुबह भी किया गोकुल के साथ या बेचारे को यूँ ही सूखा भेज दिया?”
राधा शर्मा गई.
“एक बाद करके गए हैं.”
“ये ठीक किया, अब उसका तो उपवास आरम्भ हो गया. पर तेरी दावत होने वाली है हर रात।”
राधा फिर से शर्मायी पर उसका मन ख़ुशी से उछलने लगा.”
शालिनी ने अपने पांव फैलाये और उसे अपनी चूत दिखाकर बोली, “बड़ी देर से ये तेरी ही राह देख रही है. अब देर न कर, फिर मुझे भी नीचे जाना है.”
राधा ने शालिनी के पांवों के बीच अपना स्थान लिया और उसकी चूत में अपना मुंह डालकर चाटने में व्यस्त हो गयी.
“आज तेरे लिए मैंने अपनी गांड में कुछ बचाकर रखा है. उसका ही स्वाद ले ले.”
राधा जानती थी कि वो गौतम के रस के बारे में कह रही हैं. पर उसने अनिभिज्ञता दर्शाई और अपना मुंह शालिनी की गांड में डालकर चूसने लगी. गौतम के वीर्य का पान करके उसे एक विशिष्ट उत्तेजना हुई. गोकुल ने कभी उसकी गांड को छुआ भी नहीं था. पर उसे शालिनी की गांड में से निकले रस का स्वाद कुछ ऐसा भाया कि उसने तय किया कि वो अपनी गांड में से भी इसका स्वाद लेगी.
“कैसा लग रहा है ये नया स्वाद?” शालिनी ने छेड़ते हुए पूछा.
“बहुत अच्छा लग रहा है माँ जी. क्या है ये?”
“मेरे पोते का रस. कल रात गौतम ने मेरी गांड मारी थी और तेरे लिए मैंने उसका रस संभालकर रखा था. कैसा लगा?”
राधा कुछ नहीं बोली.
“मैं सोच रही थी कि तुझे भी ये रस पिलाऊँ, पर इस बार तेरी गांड से निकालकर। और ये तो कुछ बासी सा है, जब ताज़ा पीयेगी तो इसकी दीवानी हो जाएगी.” शालिनी बोलती रही.
“माँ जी, क्या आपने भी ये पिया है कभी? “
“बिलकुल, जब अजीत मेरी गांड मारता था तो मैं अपनी गांड से निकाल कर पीती थी. कुछ कठिनाई होती है, पर हो जाता है. अब जब तू करेगी तब जानेगी.”
राधा ने शालिनी की गांड को पूरा साफ कर दिया तो शालिनी ने उसे हटने को कहा.
“बाकी आज रात में करेंगे. तू आज से मेरे ही साथ सोयेगी. चल अब नीचे भी जाना है.”
ये कहते हुए शालिनी उठी और कपड़े डालकर राधा को लेकर रसोई में चली गयी.
अदिति ने राधा को छेड़ते हुए पूछा, “चाय पीयेगी या मुंह का स्वाद नहीं बदलना चाहती. कैसा लगा तुझे नया स्वाद?”
राधा शरमाते हुए बोली: “अच्छा लगा, दीदी.”
अदिति: “मेरे बेटे का था, तुझे पता है न?”
राधा: “जी. माँ जी ने बताया.”
अदिति कुछ गंभीर होकर: “देख राधा, तू इस घर में हमारे परिवार जैसी है, ये तुझे अच्छे से पता है. बच्चे तुझे मौसी और तू मुझे दीदी कहती है. तुझे हम सबकी कसम कभी ये बात बाहर नहीं जाये.”
राधा: “दीदी, मैं सौगंध खाती हूँ, कभी ऐसा नहीं होगा. पर हमें इनके (गोकुल) के बारे में भी कुछ विचारना होगा. उन्हें अगर शंका हुई तो मैं कुछ भी नहीं कर पाऊंगी.”
अदिति: “इसके बारे में भी इन्होने (अजीत) ने कुछ सोचा हुआ है. दो तीन दिन रुक, फिर बताती हूँ, वो कुछ तय कर लें उसके बाद.”
राधा: “जी दीदी. पर उन्हें कोई कष्ट या अड़चन न हो.”
अदिति: “कैसी बात करती है, तेरा पति ही तो मेरा भी कुछ हुआ न? चिंता छोड़. सबके जाने का समय हो रहा है. हम बाद में भी बातें कर सकती हैं.”
तीनों महिलाएं अपने कार्य में व्यस्त हो गयीं. जब नाश्ता लगा तो राधा गौतम से आंख नहीं मिला पा रही थी.
गौतम: “मौसी, मुझसे कोई गलती हो गयी क्या? मुझसे क्षुभ्ध लग रही हो.”
राधा हड़बड़ा गई: “नहीं नहीं, ऐसा कुछ नहीं. बस इनके बारे में सोच रही थी. कैसे रहेंगे इतने दिन मेरे बिना.”
अजीत: “जहां भेजा है मेरा अच्छा मित्र है और उसे कह भी दिया है कि मेरे परिवार का ही सदस्य है गोकुल. निश्चिन्त रह, वो मुझसे भी अधिक ध्यान रखेगा उसका.”
राधा ने सिर हिलाकर स्वीकृति दी और अपने काम में लग गयी.
अजीत ने गौतम और अनन्या को सम्बोधित करते हुए कहा: “देखो, मौसी का ध्यान रखना. उसे अकेलापन नहीं लगना चाहिए बिलकुल भी.”
दोनों बच्चों ने उन्हें विश्वास दिलाया और नाश्ता करके वे तीनों अपने अपने गंतव्य की ओर निकल गए. शालिनी और अदिति के बीच आँखों से कुछ संकेत हुआ और वे मुस्कुराकर बैठक में चली गयीं.
बैठने के बाद शालिनी ने अदिति से पूछा, “क्या सोचा है अजीत ने?”
अदिति: “माँ जी, मुझे अभी बताया नहीं कुछ. पर ये जो काम दिलाया है, इसमें गोकुल को हर महीने १० दिन के लिए जाना होगा. पैसा भी उसे अच्छा मिलेगा. पर इससे अधिक कुछ भी नहीं बताया.”
शालिनी: “इसकी आज चुदाई तो हो ही जानी है. और फिर इसे लंड के बिना रहा नहीं जायेगा. गोकुल इसे पूरा संतुष्ट नहीं कर पाता है. पर मैं सोच रही थी कि क्यों न हम भी इसकी चूत का स्वाद लें?”
अदिति: “मुझे कोई आपत्ति नहीं. आज रात आप शुभारम्भ करो फिर मैं भी बाद में किसी दिन चख लूंगी।”
फिर दिनचर्या और अन्य कार्यों में समय निकल गया. दोपहर को अपने नियत कार्यक्रम के अनुसार अदिति और शालिनी ने एक दूसरे की चूत और गांड चाटी और कुछ देर के लिए सो गयीं. ५ बजे से परिवार के सदस्य लौटने लगे. और ७ बजे तक अजीत लौटा. अजीत नहाने के बाद आया और उसके हाथ में अदिति ने ड्रिंक दी. शालिनी को भी एक ड्रिंक थमा दी गयी. बाहर की बातों में समय व्यतीत हो गया.
अदिति ने बताया की समर्थ और जॉय के बच्चों का सम्बन्ध पक्का हो गया है और सगाई अगले महीने है. ये बात सुनकर सब अनन्या के विषय में सोचने लगे पर अजीत ने कहा कि अभी उसके विवाह की आयु नहीं है. अगर कोई विशेष ही बात हो जाये तो अलग, अन्यथा अगले वर्ष ही वो इस विषय में कुछ सोचेगा. आठ बजे खाना खाने के समय राधा की ऑंखें अजीत से हट नहीं रही बार उसे अजीत का तना खड़ा हुआ मूसल जैसा लंड याद आ रहा था. अगर उसने गलत नहीं सोचा था तो आज की रात उसकी खुदाई होनी थी. शालिनी ये सब देखकर मन ही मन मुस्कुरा रही थी.
खाने के बाद शालिनी ने राधा से कहा कि वो अपने कुछ कपड़े लेकर नौ बजे उसके कमरे में आ जाये. बार बार कपड़ों के लिए घर जाने की आवश्यकता नहीं होगी. उधर अदिति ने अनन्या को आज अपने ही कमरे में सोने को कहा क्योंकि उन्हें सुबह ही डॉक्टर के पास जाना था. चूँकि उनके डॉक्टर को कहीं जाना था तो उसने उन्हें सुबह सात बजे तक बुलाया था. अनन्या मन मसोस कर अपने कमरे में चली गयी. शालिनी ने गौतम को बुलाया और उसे कुछ समझाया और उसे भी उसके कमरे में भेज दिया.
नौ बजने में देर नहीं लगी और राधा अपने हाथ में एक छोटा सा बैग लेकर शालिनी के कमरे में जा पहुंची।
शालिनी ने उसे देखा तो बाँहों में ले लिया.
फिर पूछा, “ बड़ी अच्छी खुशबु आ रही है, नहा कर आयी है?”
राधा ने शर्माकर हामी भरी.
“ये अच्छा किया. अब आ जा. तेरे नए जीवन की नयी रात है. और अब जो तू मेरे साथ ही रहेगी कुछ दिन तो हम सखियों जैसे ही रहेंगी.”
राधा ने फिर केवल हामी ही भरी. उसका मन तेज गति से धड़क रहा था और वो देख रही थी कि अभी तक अजीत नहीं आये थे. तभी शालिनी ने उसका चेहरा ऊपर किया और उसके होंठ चूम लिए.
“जिसकी राह देख रही है, वो भी आएगा. पर कुछ ठहर कर. तब तक हम अपना खेल खेलते हैं. अब तू भी कपड़े उतार दे, देखूं तो सही कैसी लगती है नंगी होने के बाद.”
अब चूँकि राधा कभी शालिनी के सामने निर्वस्त्र नहीं हुई थी तो थोड़ी झिझकी.
शालिनी ने उसे समझाया, “जो खेल खेलने वाली है, उसमे शर्म और झिझक का कोई स्थान नहीं होता. अगर इसका सुख लेना है, तो बिलकुल निर्लज्ज बनाकर खेल, नहीं तो न मन संतुष्ट होगा न ही तन.”
राधा भी समझ तो चुकी ही थी, सो वो कुछ ही देर में नंगी हो गयी. शालिनी ने उसे भरपूर दृष्टि से निहारा और उसने जो देखा वो सच में सुंदर था. हाँ राधा का रंग अवश्य थोड़ा सांवला था पर उसमे जो आकर्षण था वो कई गोरी स्त्रियों में भी नहीं होता. और तो और उसका शरीर बेहद सुडौल और भरा हुआ था. अंग प्रत्यंग बिलकुल सांचे में ढाले गए हों जैसे.
शालिनी: “अरे राधा, तू तो सच में बहुत सुन्दर है. क्यों छुपाती है अपनी ये सुंदरता?”
ये कहते हुए शालिनी ने अपने भी वस्त्र उतारे और राधा को खींच कर उसके होंठ चूमने लगी. राधा के शरीर में मानो आग सी लग गयी. शालिनी उसे यूँ ही चूमते हुए बिस्तर पर ले गयी और उसे लिटा दिया.
शालिनी: “ हर दिन तू मेरी चूत चाटती है न, आज मुझे तेरा स्वाद लेने दे.”
ये कहते हुए उसने राधा के पांव फिलाये और अपना मुंह राधा की चूत में डाल दिया. राधा चिहुंक पड़ी. उसकी चूत में कभी किसी ने मुंह नहीं लगाया था. गोकुल हर बार उसे इसके लिए मना कर देता था. पर आज उसे इसका भी अनुभव होना निश्चित था. उसने अपना शरीर ढीला किया और स्वयं को शालिनी के वश में छोड़ दिया. शालिनी की अनुभवी जीभ और मुंह के पराक्रम से राधा अधिक देर न ठहर सकी. कल रात से ही वो एक उत्तजेना में थी जिसे शालिनी के स्पर्श ने एक बांध के समान तोड़ दिया था. शालिनी ने बिना रुके राधा के रस का सेवन किया. उसे इस बात का कोई क्लेश नहीं था कि राधा उनकी नौकरानी थी. उसे उन्होंने सदैव ही अपने परिवार का ही जो समझा था. जब राधा का ज्वर उतरा तो वो एकदम से निढाल हो गयी.
“माँ जी. ऐसा तो मेरे साथ कभी नहीं हुआ.”
“क्यों गोकुल के साथ ऐसे नहीं झड़ती है क्या?”
“नहीं माँ जी. मजा तो बहुत आता है, पर ऐसा कभी नहीं हुआ.”
“अभी तूने जीवन में कुछ देखा नहीं है मेरी बन्नो. असली सुख तो तुझे अब मिलने वाला है. अब मैं तेरे मुंह पर बैठूंगी और तू मेरी चूत चाटना। ”
ये कहते हुए शालिनी उठी और राधा के मुंह पर अपनी चूत लगा दी. इस कार्य में अभ्यस्त राधा चूत केंद्र तक चाटने लगी. तभी उसे ऐसा लगा जैसे कोई दरवाजा खुला और बंद हुआ. पर ये तो बाथरूम की ओर से ध्वनि आयी थी. राधा ने इसे अपनी कल्पना समझा और शालिनी की चूत में मुंह गढ़ाए रही. फिर उसे अपने दोनों पांव किसी के द्वारा फ़ैलाने का आभास हुआ. और फिर एक मुंह उसकी चूत पर लगा और उसे चूसने लगा.
राधा समझ गयी की अजीत आ चुके हैं और आज उसकी भरपूर चुदाई होगी. उसकी पानी छोड़ती हुई चूत भी इस बात का संकेत दे रही थी कि उसकी प्रतीक्षा समापन पर है. शालिनी ने राधा से कहा कि जब तक वो न कहे अपने ऑंखें बंद ही रखे, नहीं तो कार्यक्रम बंद कर दिया जायेगा. ये बताते हुए वो राधा के मुंह से हट गयी और बंद आँखों से राधा ने अनुभव किया कि उसकी चूत पर से मुंह हटा और फिर दोबारा लगा. ये मुंह कोमल था अर्थात अजीत ने शालिनी को स्थान दे दिया था. फिर उसने अपने सिर के पास कुछ हलचल का आभास किया. और उसके मुंह से कुछ छुआ. उसकी सांसों ने ये भान कर लिया कि ये किसी का लंड ही है क्योंकि उसके नथुनों में उसकी गंध घर कर गयी. पर डर के मारे उसने ऑंखें बंद ही रखी पर उसकी साँसे अब तीव्र गति से चलने लगीं और मन उसी गति से धड़कने लगा.
उसे शालिनी की पुकार कहीं दूर से आती हुई सुनाई दी, “आँख खोल ले बन्नो और अपने आज के दूल्हे का स्वागत कर.”
राधा ने धीरे से अपनी आंखे खोलीं और अपने आँखों के सामने एक मोटे बड़े लम्बे लंड को झूलता हुआ पाया. उसने अपनी आँखें ऊपर उठाकर अजीत की ओर देखा तो वो हतप्रभ रह गयी. ये अजीत नहीं, बल्कि गौतम था. और कल उसने दूर से जो लंड देखा था अगर वो बड़ा था तो पास से देखने पर ये लंड तो भयावह लग रहा था. उसकी साँस रुक सी गयीं, क्या ये लंड मेरी चूत में जायेगा? वो ये सोच ही रही थी कि उसे किसी ने बुलाया.
“मौसी, क्या इसको प्यार नहीं करोगी?” ये गौतम था और उसके चेहरे पर एक मुस्कराहट थी.
“ गौतम बेटा तुम? मैं तो समझी थी कि ..’”
“पापा होंगे. वो भी आएंगे मौसी, पर आज नहीं. दादी ने आज आपकी सेवा का कार्य मुझे सौंपा है. और इसके लिए आपको मेरे लंड को प्यार करना होगा.”
राधा ने जीभ निकालकर गौतम के लंड पर थिरक रही मदन रस की बूंदो को चाट लिया. उधर शालिनी ने अपनी जीभ राधा की चूत की गहराइयों में गुमा दी. राधा अपनी कामवासना में इतनी खो चुकी थी कि उसे गौतम से चुदवाने में भी कोई आपत्ति नहीं थी. बाप न सही बेटा ही चोद दे उसे. उसकी उबलती हुई चूत की प्यास मिटाना ही अब उसका उद्देश्य था. माँ जी भी उसकी चूत को जिस प्रकार से चाट रही थीं, उसे नहीं लगता था कि वो अधिक देर ठहर पायेगी. गौतम ने अपने लंड को उसके मुंह पर लगाया.
गौतम: “मौसी, देखो न, तुम्हारे प्यार के लिए कैसा लालायित है. इसे चूसोगी नहीं?”
राधा ने अपना मुंह खोला और लंड मुंह में ले लिया. पर इसका आकर गोकुल से कहीं बड़ा था. सुपाड़ा ही दो इंच से अधिक बड़ा और मोटा रहा होगा. पर एक कहावत है कि खाने का निवाला और लौड़े का सुपाड़ा मुंह में जगह बना ही लेते हैं. तो राधा ने भी जब लंड निगला तो सुपाड़े ने अपने पीछे चल रहे लंड के लिए भी स्थान बन ही गया. पर अब समस्या थी चूसने की, तो गौतम ने राधा की कठिनाई को समझते हुए ये काम भी अपने हिस्से में लिया और लंड को धीरे धीरे उसके मुंह में चलाने लगा. जब राधा कुछ अभ्यस्त हुई तो भी अपने गालों और जीभ से लंड पर अपना खेल खेलने लगी. ये देखकर गौतम रुक गया और उसने राधा के ही ऊपर ये कार्यभार सौंप दिया. राधा ने भी अपने सामर्थ्य के अनुसार लंड को चूसा. अब गौतम उसकी चूत का आनंद लेना चाहता था.
“दादी, मौसी की चूत का क्या हाल है.”
“मैं तो सोच रहेगी कि तू पूछेगा ही नहीं. बन्नो की चूत अपने सैंया के लौड़े के लिए बहे जा रही है. इतना पानी छोड़ रही है कि मेरी तो प्यास ही मिट गयी.”
फिर उसने राधा की चूत से मुंह निकाला और उसकी आँखों में ऑंखें डालकर बोली, “ क्यों रे मेरी बन्नो, तेरा आज का दूल्हा अब तेरी सवारी के लिए आ रहा है. तेरी चूत की तो आज खैर नहीं है. पर अगर उससे विनती करेगी तो वो इतने प्यार से चोदेगा कि तेरी आत्मा तृप्त कर देगा. तो क्या चाहती है उसे बता दे.”
राधा ने गुहार लगाई, “गौतम बेटा, आज अपनी मौसी न समझना बल्कि अपनी दुल्हन समझ कर मेरी चूत को खोल दे. तेरा लौड़ा बहुत बड़ा है, तो मुझे प्यार से चोदना नहीं तो तेरी ये दुल्हन मर ही न जाये. फिर न तुझे दुल्हन मिलेगी न मौसी.”
गौतम: “अरे मौसी, तुम बस आज रात भर की ही दुल्हन हो. सुबह होते होते तुम मेरी मौसी ही बन जाओगी. तो मेरी राधा रानी, अब मैं तुम्हारी चूत को अपना बनाने वाला हूँ.”
शालिनी हटकर राधा की बगल में बैठ गयी और उसका एक हाथ अपने हाथ में थाम लिया. गौतम ने राधा की टांगों के बीच में बैठकर अपने टनटनाये लौड़े को राधा की अनवरत बहती हुई चूत के मुहाने पर रखा.
राधा ने अंतिम अनुरोध किया, “बेटा, धीरे और प्यार से करना.”
गौतम ने दबाव बनाते हुए लंड को चूत में अंदर डाला, सुपाड़े के अंदर जाते ही राधा झड़ गयी और इसका लाभ उठाते हुए गौतम ने निर्विघ्न ४-५ इंच लंड अंदर उतार दिया. अब वो उस स्थान पर पहुंचा था जहाँ तक राधा का रास्ता गोकुल ने खोला हुआ था. आगे की राह संकीर्ण और कठिन अवश्य थी पर गौतम जैसे योद्धा के लिए अजेय तो थी नहीं. पर उस दुर्ग को भेदने के पूर्व गौतम राधा को सामान्य होने का समय दे रहा था. राधा को अधिक समय नहीं लगा, क्योंकि वो इस गहराई तक की चुदाई की अभ्यस्त थी, पर उसे ये भी पता था कि अभी गौतम का पूरा लंड उसकी चूत में नहीं गया है. डर और रोमांच ने उसकी चूत को फिर ढ़ेर सारा पानी छोड़ने के लिए बाध्य कर दिया. गौतम ने जब अपने लंड पर नए जलपात का अनुभव किया तो उसने दादी की ओर देखा जो समझ गयी कि अब किला गिराने के लिए आक्रमण करने का समय आ गया है.
“बन्नो, एक बात बता, अगर तुझे चोट लगी हो और उस पर बैंडऐड लगाया हो, तो निकालने के लिए क्या करेगी? धीरे धीरे निकालेगी जिसमे अधिक देर कष्ट होगा या एक ही बार में जिससे कि दर्द हो भी पर जल्दी ही दूर भी हो जाये?”
राधा ने इस बात का अर्थ इस परिपेक्ष में समझा नहीं और वो समझी कि माँ जी उसका ध्यान बाँटने के लिए बात कर रही हैं.
तो उसने भी अनिभिज्ञता से उत्तर दिया, “माँ जी, एक ही बार का कष्ट ठीक है, वैसे भी मैं ऐसा ही करती हूँ.”
जिस समय वो उत्तर दे रही थी गौतम अपने लौड़े को बाहर की ओर निकाल रहा था जिससे आक्रमण के समय लम्बाई और गहराई एक साथ जल्दी तय हो सकें.
शालिनी: “तो मेरी बन्नो, आज तेरा दूल्हा भी तुझे अधिक देर तक न तड़पाते हुए एक ही बार का कष्ट देगा.”
राधा को जब अर्थ समझ आया तो वो न नुकुर करते हुए शालिनी का हाथ छोड़कर अपनी कमर पीछे करने का प्रयास करने लगी. पर दादी और पोता दोनों उसकी इस प्रतिक्रिया के लिए तैयार थे. शालिनी ने हाथ नहीं छोड़ने दिया और आगे झुकते हुए अपने होंठों से राधा का मुंह बंद कर दिया. पर राधा की चीखें निकलने लगी थीं. गौतम ने एक लम्बे तगड़े झटके के साथ अपना तीन चौथाई लंड राधा की चूत में उतार दिया था. राधा तड़प रही थी और किसी प्रकार से मुक्त होने का प्रयास कर रही थी. पर गौतम का बलिष्ठ शरीर और शालिनी के उसे चुप करते हुए होंठ उसे असमर्थ कर दे रहे थे.
राधा ने अपनी चूत में से गौतम के लंड को बाहर निकलते हुए अनुभव किया तो थोड़ा आश्वस्त हुई कि शायद गौतम को उस पर दया आ गयी है. पर ये विचार किंचित गलत सिद्ध हुआ जब बाहर निकलते हुए लंड ने तेजी के साथ उसकी चूत में एक और धक्का मारा और इस बार गौतम के पुरे लंड ने अपना लक्ष्य पा लिया. राधा इस तीव्र दर्द से निढाल हो गयी. उसकी आँखों से आंसू बहने लगे. गौतम ने शालिनी की पीठ पर थप्पी देकर उसे संकेत किया कि किला धराशायी हो गया है. शालिनी ने अपना चेहरा उठाकर राधा के बहते हुए आँसू चूम लिए और उसे सांत्वना देने लगी.
“बस मेरी बन्नो, हो गया. आज तू पूरी स्त्री बन गयी. आज तेरी चूत की पूरी गहराई को खँगालने वाले लंड ने तुझे एक नया जीवन दिया है. और जिसे तू अभी दर्द समझ रही है, वो तेरे इस नए जीवन का नया द्वार है जिसके खुलने से तुझे आनंद का एक नया मार्ग दिखेगा. बस कुछ देर ठहर, फिर देख मैं सच कह रही हूँ.”
राधा ने गौतम से पूछा: “मैंने आपसे कहा था कि प्यार से करना, मौसी हूँ मैं तेरी. मुझ पर थोड़ी भी दया नहीं आयी तुझे?’
गौतम: “मौसी, बस कुछ ही देर रुको फिर आप यही कहोगी कि मैंने सही किया. बस कुछ और देर.” गौतम बहुत हल्के हल्के अपने लंड को राधा की चूत में चलाते हुए उसे समझाने लगा.
राधा की चूत से उठता दर्द उसे कुछ भी न समझने के लिए विवश कर रहा था. गौतम उसकी चूत में उसी गति से लंड चलाता जा रहा था. शालिनी उसके होंठ और मम्मे चूम और चाट रही थी. राधा की चूत ने ही इस समस्या का निदान किया और अपने रस से उस सुरंग को जलमग्न कर दिया. छप छप की ध्वनि से ये विदित हो गया कि अब राधा की चूत उस लौड़े की उपस्थिति को स्वीकार कर चुकी है और संभवतः कुछ अधिक की इच्छा रखती है. राधा को अचानक ऐसा प्रतीत हुआ मानो उसका दर्द कम होने लगा हो.
और इस पीड़ा के साथ उसके एक नया आनंद भी आने लगा. पीड़ा और सुख का ये अद्भुत समागम उसने केवल कहानियों में ही पढ़ा था. पर आज उसका शरीर इसे स्वयं अनुभव कर रहा था. राधा ने अपने कूल्हे हिलाकर अपने आनंद को बढ़ाने का प्रयास किया तो गौतम ने भी उसका साथ देते हुए अपनी गति बढ़ाई। शालिनी वस्तुस्थिति भांपते हुए राधा के मम्मों को मसलने लगी जिसके कारण राधा एक बार फिर से अपने चरम की ओर बढ़ चली. शालिनी ने अब अपने मुंह और हाथों से राधा के मम्मों पर वार करना शुरू किया और नीचे से गौतम ने भी अपनी गति कुछ और बढ़ाई। राधा का मस्तिष्क एक नए उल्लास में लीन हो गया और उसे एक ऐसा आनंद आने लगा जिसमे वो अपना सब कुछ भूल गयी.
“चोद दे मुझे, और अच्छे से चोद। माँ जी अपने मुझे पहले ये सब क्यों नहीं दिया. आप बहुत बुरी हैं माँ जी. आअह, क्या हो रहा है मुझे. माँ जी! मेरी चूत में क्या हो रहा है.” राधा का अकड़ता बिखरता शरीर अब छटपटा रहा था. पर इस छटपटाहट में एक मुक्ति थी. उसके कूल्हे अचानक ही ऊपर की ओर हुए और काँपते हुए वो निश्चल हो गयी. उसकी चूत ने एक धार फेंकी जो गौतम के लंड से बंद होने के कारण बाहर न निकल पायी पर चलते हुए लंड के साथ कुछ कुछ मात्रा में बाहर रिसने लगी. फिर उसके कूल्हे एक थाप के साथ बिस्तर पर गिर गए पर उसका कम्पन अभी भी रुका नहीं. और इस पूरे प्रकरण के समय गौतम ने एक भी ताल छूटने नहीं दी. जब राधा अपने शीर्ष से उत्तरी तो वो शालिनी का चेहरा हाथ में लेकर उन्हें बेतहाशा चूमने लगी.
शालिनी हँसते हुए बोली, “ क्यों मेरी बन्नो, कैसी लगी चुदाई तुझे, अब दर्द है?”
राधा: “जी माँ जी, दर्द तो है, पर मीठा मीठा. और सच में ऐसे तो मेरी कभी चुदाई हुई ही नहीं.”
“तो अब मेरे पोते को अपने ढंग से चोदने दे.”
“जी माँ जी.”
ये सुनकर गौतम ने अपने धक्कों को और तेज कर दिया. गौतम के बढ़ते और तेज होते हुए धक्कों की थाप पूरे कमरे में गूंज रही थी. और इसमें मिले हुई थीं राधा की सिसकारियां और आनंदकारी चीत्कारें. गौतम के मोटे लम्बे लंड ने राधा की चूत को ऐसे पैक किया हुआ था कि उसे जीवन का अलग अनुभव हो रहा था. चूत अब तक हाथ डाल चुकी थी. कितना झड़ती आखिर. लगातार पानी के स्त्राव से सूख सी गयी थी. और इसी कारण अब गौतम के लंड को अधिक घर्षण मिल रहा था और वो स्वयं भी आनंद के महासागर में गोते लगा रहा था. शालिनी के मन में न जाने क्या आया उसने अपना हाथ बढाकर राधा के भग्नाशे को मसलना शुरू कर दिया. अब राधा के लिए एक नया आयाम था. उसे इस बात का आभास भी नहीं था कि उसके शरीर का कोई ऐसा अंग भी है जो उसे आनंद के शिखर पर मात्र मसलने से ले जा सकता है.
सूखती चूत में एक नया ज्वार सा उठा और और फिर राधा का शरीर अकड़कर काँपने लगा. परन्तु शालिनी ने भग्नाशे की छोड़ा नहीं, बल्कि और अधिक तीव्रता से उसे मसलने लगी. राधा के मस्तिष्क में मानो रक्त का संचालन रुक गया. वो अपने हाथ पैर इधर उधर फेंकने लगी और उसकी चूत फिर से जलमग्न हो गयी. अब गौतम को भी रुकना सम्भव नहीं लग रहा था और उसने भी स्वयं को छोड़ दिया और उसके लंड से निकलती हुई तेज धाराओं ने राधा की चूत को तृप्त कर दिया. उसने अपने अकड़े हुए लंड को इसी अवस्था में बाहर खींचा तो न जाने कितना पानी राधा की चूत ले बाहर बहने लगा.
शालिनी अब तक राधा के भग्नाशे को रगड़ती हुई पास आ चुकी थी. उसने तुरंत अपना मुंह राधा की चूत पर लगाया और उस धार को पीने का प्रयास किया. पर पानी इतनी तेजी से बहा था कि शालिनी के इस प्रयत्न के बाद भी उसे केवल कुछ ही रस पीने को मिला. पर वो ऐसे हार मानने वालों में तो थी नहीं. उसने गौतम के लंड को लपक कर अपने मुंह में डाला और उस मिश्रण को चाटकर अपनी प्यास बुझा ही ली. इसके बाद उसने फिर राधा की चूत पर धावा बोला और इस बार चूस कर उसे पूरा खाली कर दिया. राधा बेसुध सी लेटी दादी पोते के इन क्रियाकलापों को केवल देखती ही रही. पर उसके चेहरे पर एक मुस्कराहट थी. एक असीम संतुष्टि से उसका चेहरा खिला हुआ था.
“कैसी है मेरी बन्नो?” शालिनी ने पूछा.
राधा ने थकी मगर ख़ुशी से भरे स्वर में उत्तर दिया, “एकदम मस्त, माँ जी.”
फिर कुछ देर रुकी और बोली, “माँ जी, अब दोबारा कब करेंगे?”
“आज की रात अपनी ही है. पहले मैं भी तो अपने अपनी चूत और गांड की सिकाई करवा लूँ। “
गौतम: “दादी. पहले आपकी चूत , फिर मौसी की चुदाई, फिर आपकी गांड, फिर मौसी की चुदाई.”
राधा और शालिनी उसके इस उतावलेपन पर हंस पड़ीं. और रात भर गौतम ने उन दोनों की जी भर कर चुदाई की और सुबह तक तीनों संतुष्ट होकर सो गए.
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अदिति और अजीत सुबह डॉक्टर से मिलने के लिए निकल गए. अनन्या उठी तो देखा घर शांत है. पापा और मॉम तो चलो डॉक्टर के पास थे पर दादी, राधा और गौतम ही नहीं दिखे तो वो गौतम के कमरे में झाँकने गई तो उसे खाली पाया. उसने दादी के कमरे का दरवाजा खोला तो उसे कपड़े बिखरे हुए दिखे. आगे बढ़कर उसने दादी के बिस्तर को देखा तो उसे तीनों सोते हुए दिखे. उसकी आँखों ने गौतम के लंड को देखा और उसे अपने पापा के लंड की याद आ गयी. गौतम का लंड उनके लंड से बीस ही लग रहा था. उसने हल्के पैरों से आगे बढ़कर गौतम के लंड को देखा और अनायास ही झुकते हुए उसे अपने मुंह में ले लिया.
चूत और वीर्य का स्वाद तो वो जानती थी, पर कुछ एक अलग स्वाद भी था. उसकी आंख अपनी सोती हुई दादी की ओर गयी जिनकी पीठ उसकी ओर थी. उसने देखा की दादी की गांड का छेद कुछ खुला हुआ था और उसमे से कोई सफेद रंग का द्रव्य बाहर बहा हुआ था. अनन्या को समझ आ गया कि उस नए स्वाद का क्या कारण है. उसने एक बार फिर गौतम के लंड को चाटा और लौटने के लिए मुड़ी.
“कैसा लगा अपने भाई के लंड का स्वाद, अनन्या बिटिया?” ये राधा मौसी का स्वर था.
अनन्या चौंककर मुड़ी तो देखा मौसी बैठ चुकी थी. उनके स्तन लाल थे, लगता था रात में अच्छे से मसले गए थे.
“बहुत अच्छा मौसी. तुम्हारा भी तो स्वाद मिला हुआ है न इसमें.”
“हाँ, और अब वो दिन दूर नहीं जब इस लौड़े पर से तुम भी अपना स्वाद चाटोगी अपनी माँ के साथ.”
अनन्या उस आने वाले दिन के बारे में सोचती हुई कमरे से निकली और अपनी चूत सहलाने के लिए अपने कमरे में चली गई.
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दिन के ११ बजे के लगभग अदिति और अजीत भी लौट आये. अदिति के चेहरे पर एक चमक थी और पांव मानो जमीं नहीं छू रहे थे. उसने आते ही शालिनी को बाँहों में भर लिया.
“बताओ माँ जी, डॉक्टर ने क्या कहा?”
“तेरी ख़ुशी तो यही बता रही है, कि चुदाई की अनुमति मिल गयी है.”
“बिलकुल सही. माँ जी मैं आज बहुत खुश हूँ.”
“तो जा और अजीत को काम पर लगा दे. पर सुन. ध्यान रख. अधिक अधीरता मत दिखाना. नयी नयी सिलाई है, उधेड़ मत देना।”
“जी माँ जी. डॉक्टर ने भी यही कहा है. अगले दस दिन सीमा के अंदर ही सम्भोग करें. नहीं तो समस्या हो सकती है.”
“अब जा, और अपने पति को समर्पित कर दे तेरी ये नयी चूत.”
अदिति उड़ती हुई अपने कमरे में गयी जहाँ अजीत पहले ही जा चुका था. और उसने कमरा बंद किया और पीछे मुड़ी तो अजीत को नंगा खड़ा पाया.
“वापसी पर स्वागत है.” अजीत ने अपने लंड को हाथ से हिलाते हुए मुस्कुराकर कहा. “तुमने कुछ कपड़े अधिक नहीं पहने हुए हैं?”
अदिति ने आनन फानन कपड़े फेंके और जाकर अजीत से लिपट गयी.
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बाहर इतना शोर सुनकर अनन्या और गौतम भी आ गए. पर देखा कि दादी अकेली है.
“कुछ शोर सुनाई दिया था, क्या था?”
“तेरी माँ को चुदवाने की अनुमति मिल गयी है. अब अंदर है अजीत के साथ.”
अनन्या और गौतम के चेहरे पर प्रसन्नता छा गयी, पर दोनों के कारण भिन्न अलग थे.

