परिवार हो तो ऐसा – Update 26 | Erotic Family Incest Story

परिवार हो तो ऐसा - Family Incest Saga
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राज दोनो चूत के बीच घुटनो के बल बैठ गया और अपनी उंगली दोनो

चूतो पर घूमाने लगा… और सहलाने लगा.. फिर उसने एक एक

उंगली दोनो चूत के अंदर घुसा दी और गोल गोल घूमाने लगा और जब

उसकी उंगलियाँ उनकी छूट के रस अछी तरह गीली हो गयी तो उन्हे

अंदर बाहर कर चोदने लगा.. चादर के उस और से दोनो औरतों के

मुँह से सिसकारियाँ फूटने लगी….

फिर एक की टाँगो के बीच आ कर उसने अपना चेहरा झुकाया और उस

चूत को अपनी ज़ुबान से चाटने लगा.. उसे यकीन नही था कि वो

किसकी चूत को चाट रहा है.. लेकिन फिर भी उसे काफ़ी मज़ा आ रहा

था..

“क्या मेरी चूत नही चूसोगे? राज को उस दूसरी औरत की आवाज़ सुनाई

दी.. वो समझ गया था कि वो अपनी मम्मी की चूत चाट रहा था..

थोड़ी देर अपनी मम्मी की चूत चाटने और चूसने के बाद उसने अपना

मुँह उस दूसरी चूत पर लगा दिया और चूसने लगा…

“ऑश हाआँ चूसो ज़रा ज़ोर ज़ोर से चूसो ओ हाआँ काटो अपने डांटो

से ऑश हां मज़ा आ रहा है” उसकी मम्मी की सहेली सिसक पड़ी..

थोड़ी देर उस नई चूत को चूसने के बाद राज अछी तरह उसकी टाँगो

के बीच आ गया और उसने अपने लंड को उसकी चूत के छेद से लगा

दिया.. और धीरे धीरे अंदर धकेल घुसाने लगा…

“ओह हां कितना बड़ा लंड है तुम्हारा मेरी तो चूत ही भर दी

तुमने ऑश हां पूरा अंदर घुसा दो ऑश हां और अंदर ”

राज अपने लंड को और अंदर तक घुसा धक्के मारने लगा.. वो औरत

भी अपनी कमर को उठा उसका साथ देने लगी और तभी उसने अपने दोनो

हाथ चादर के नीचे से आगे कर उसके कुल्हों को पकड़ अपनी तरफ

खींच उसके लंड को अपनी चूत के और अंदर तक लेने लगी..

“ओ अब में और अंदर नही ले सकती क्या तुम्हारा लंड अभी और बाकी

है ?” उस औरत ने पूछा..

“हां अभी पूरा कहाँ घुसा है. तीन चार इंच बाकी होगा” राज ने

जवाब दिया और अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा..

“है ना कमाल का लंड” उसकी मा ने कहा.

“हां सही मे बहुत लंबा और मोटा है.. मज़ा आ गया” वो औरत

जवाब देते हुए अपनी कमर हिलाने लगी..

तभी चादर के उस पर पलंग पर हलचल होने लगी.. वो समझ नही

पाया कि क्या हो रहा है..

“हां चूसो मेरे निपल को ओ हां ज़ोर ज़ोर से चूसो तुझे पता

है कि मुझे ये सब कितना अछा लगता है” वो औरत सिसक रही थी..

वो समझ गया कि उसकी मम्मी उस औरत की चुचियो को चूस रही

है..

राज को आश्चर्य हो रहा था.. जब उसने अपनी सहेली को साथ लाने की

बात कही थी तो ये नही सूझा कि उसकी मा को समलैंगिक सेक्स मे भी

दिलचस्पी है… उसने तो यही सोचा था कि एक चुदवायेगि और दूसरी

देखेगी.. लेकिन यहाँ तो खेल ही दूसरा था.. उसकी मम्मी किसी दूसरी

औरत के निपल को चूस रही है ये सोच कर ही वो और उत्तेजित हो

गया और ज़ोर ज़ोर से उसकी सहेली की चूत को चोदने लगा…

“मेरा छूटने वाला है” राज ने बताया… उसकी नसों मे तनाव बढ़

गया था..

“हां छोड़ दो अपना पानी मेरी चूत मे ऊहह हाआँ भर दो मेरी चूत

को ” उस औरत ने कहा.. और राज ने दो तीन धक्के मार अपने वीर्य की

पिचकारी से उस औरत की चूत भर दी..

तभी उसकी मा ने अपनी टाँगे वापस खींच ली और फिर घोड़ी बन

चादर के इस तरफ अपनी कमर तक का हिस्सा कर दिया..

“अब मेरी चूत मे लंड घुसाओ राज में जानती हूं तुम्हारा लंड बहुत

जल्दी वापस खड़ा हो जाता है” उसकी मम्मी ने कहा..

राज ने अपने ढीले लंड को अपनी मा की चूत पर घिसा और उसे अंदर

घुसा दिया.. वो अपने लंड का खड़ा होने का इंतेज़ार करने लगा..

“तुम्हारी चूत को मेरे मुँह के आगे करो जिससे में तुम्हारी चूत

से बहते इसके रस को चाट सकू” उसकी मम्मी ने अपनी सहेली से

कहा.. तभी पलंग की दूसरी ओर थोड़ी हलचल हुई और

उसे ’सपर’ ’सपर’ की आवाज़ सुनाई पड़ने लगी..

अपनी मा को किसी दूसरी औरत की चूत चूस्ते देख राज के बदन मे

उतेज्ना दौड़ गई और उसका लंड तुरंत खड़ा हो गया.. वो अब अपने

खड़े लंड को अंदर बाहर करने लगा..

राज जोश मे भरते हुए धक्के मार रहा था और साथ ही नीचे से

अपनी दो उंगली अपने लंड के साथ अपनी मम्मी की चूत के अंदर बाहर

कर रहा था… थोड़ी ही देर मे उसके लंड ने एक बार फिर पानी छोड़

दिया…

वसुंधरा ने एक बार अपने शरीर को चादर के उस तरफ से इस तरफ

कर लिया जिससे उसकी देवरानी उसकी चूत को चूस राज के लंड के वीर्य

का स्वाद चख सके जिस तरह उसने चखा था..

दोनो औरतों अपने खेल मे मशगूल गयी…

“उम्मीद है तुम दोनो मुझे नही भूली होंगी?” राज ने अपने मुरझाए

लंड को सहलाते हुए पूछा.

“अरे तुम्हे कैसे भूल सकती है.. अभी तो तुम्हे मेरी सहेली की गंद

मे अपना इतना मूसल लंड घुसाना है” उसकी मम्मी ने चादर की दूसरी

ओर से कहा..

“पहले नई चूत फिर नई गंद मुझे तो खुशी होगी” राज ने जवाब

दिया.

“अपने लंड को ज़रा अछी तरह चिकना कर लेना जिससे मेरी सहेली को

कोई तकलीफ़ ना हो” उसकी मा ने कहा और एक बार फिर चादर के उस ओर

से टाँगे इस तरफ आने लगी..

राज ने साइड मे पड़ी ट्यूब से थोड़ी क्रीम उठाई और अपने लंड पर

क्रीम मलने लगा… उसका लंड एक बार फिर तन कर खड़ा हो चुका

था… उसने अपने लंड को घोड़ी हुई टाँगो के बीच रख उस गंद के

छेद पर लगा दिया.. फिर राज ने थोड़ी क्रीम अपनी उंगलियों मे ले उस

उस गंद के छेद मे मल दी.. और अपनी उंगली गंद के अंदर घुसा उसे

चिकना करने लगा…

राज को जब लगा कि वो गंद अछी तरह चिकनी और चौड़ा गयी है तो

उसने अपनी उंगली निकाल अपना लंड गंद के छेद पर लगाया और उसे

अंदर घुसाने लगा… वो औरत दर्द से कराह उठी..

युवर आड़ हियर

“ऑश मर गयी.. थोड़ी धीरे ऑश आअहह प्लीज़ धीरे”

राज और प्यार से और धीरे से अपने लंड को उस गंद मे घुसाने

लगा.. कसी गंद उसे बहोत अछी लग रही थी.. वो उसके कुल्हों को

पकड़ अपने लंड को ज़्यादा से ज़्यादा अंदर घुसाने लगा… थोड़ी ही देर मे

उस औरत की गंद उसके लंड की मोटाई और लंबाई की आदि हो गयी तो वो औरत

अपने कुल्हों को पीछे कर उसके लंड को अपनी गंद के और अंदर तक

लेने लगी..

“ओ ये अब अपने मूसल लंड से मेरी गंद मार रहा है.. ऑश कितना

अछा लग रहा है.. ” उसने उस औरत को अपनी मा से कहते

सुना… “मुझे विश्वास नही हो रहा कि इतना मोटा और लंबा लंड मेरी

गंद मे इतनी गहराई तक भी घुस सकता है.”

राज और ज़ोर ज़ोर से अपने लंड को उसकी गंद के अंदर बाहर करने लगा

और साथ ही उसने नीचे से अपनी दो उंगली उसकी चूत मे घुसा दी और

गंद के साथ साथ उसकी चूत को अपनी उंगली से चोदने लगा…

“ऑश हाआँ इसी तरह मेरी चूत को चोदो ओ हाआँ और ज़ोर से मेरी

गंद मे लंड घुसा दो.. ऑश मुझसे सहन नही हो रहा है… में

तो गयी.. ”

राज अपने लंड के साथ साथ और तेज़ी से उसकी चूत को अपनी उंगली से

और उसकी गंद को अपने लंड से चोदने लगा.. साथ ही वो उसकी चूत को

मसल्ते जा रहा था… और तभी उस औरत की गंद ने जैसे उसके

लंड को जाकड़ लिया और तभी उसके लंड ने आज तीसरी बार पानी छोड़

दिया… और साथ ही उसकी उसकी चूत भी झड़ने लगी…

उस औरत का बदन सुस्त पड़ गया और उसने अपने आप को चादर के उस

ओर वापस खींच लिया..

“शुक्रिया राज हम फिर इसी तरह किसी नए खेल के लिए मिलेंगे” उसकी

मा ने चादर के उस ओर से कहा और दोनो औरत अपने कपड़े पहनने

लगी..

“हां क्यों नही में तुमसे नेट पर बात करूँगा” राज ने अपनी मम्मी

को जवाब दिया”

* * * * * * * * * * *

प्रीति ने अपनी लीखी हुई ईमेल के सेंड बटन को दबा दिया.. वो

सोच रही थी कि इस कहानी को पढ़ उसके चाचा क्या सोचेंगे.. उसने

इस कहानी को एक नया मोड़ दे दिया था.. जिसमे चाचा अपनी भतीजी को

उसी की बेटी के साथ सेक्स करते पकड़ लेता है.. और उसने इतना तक

खुलासा लीख दिया था कि भतीजी को उसकी बेटी की चूत मे अपनी जीब

घुसा उसकी चूत चाटना बहोत अछा लगता है..

प्रीति तो इस ख़याल से ही गरमा गयी कि अगर कभी उसके चाचा ने

उसे और अपनी ही बेटी को साथ साथ चोदा तो कितना मज़ा आएगा.. वो

उत्तेजना मे अपनी स्कर्ट को उठा अपनी चूत को सहलाने लगी.. और फिर

उसने पॅंटी के बगल से अपनी उंगली चूत के अंदर घुसा दी.. वो लंड

के लिए तड़पने लगी.. उसे उम्मीद थी कि राज घर पर ही होगा.. इस

उम्मीद से वो वो अपने कमरे से निकल हॉल मे आ गयी.. लेकिन उसने

देखा कि राज की जगह उसके पापा टीवी देख रहे थे..

“पापा क्या आपने राज को देखा?” प्रीति ने अपने पापा से पूछा.

“हां अभी थोड़ी देर पहले स्वीटी के पास गया है उसे कुछ काम

था” देव ने अपनी बेटी को जवाब दिया और उसकी निगाह अपनी बेटी के

उत्तेजित बदन पर घूमने लगी..

प्रीति अपने पापा की निगाहों को अछी तरह पहचानती थी. उसने और

चिढ़ाने की सोची.. वो अपने पापा के नज़दीक गयी और अपन स्कर्ट को

थोड़ा उपर करते हुए उनके बगल मे बैठ गयी.. उसकी नंगी चूत देव

की निगाह से छुप ना सकी..

देव की जैसे सांस ही हलक मे अटक गयी.. वो चाह कर भी अपनी

निगाहों को नही फिरा सका.. उसकी आँखे स्कर्ट के नीचे से झलक्त

अपनी ही बेटी की नंगी चूत पर टीकी थी.

देव ने अपना ध्यान अपनी ही बेटी की चूत पर से हटाया और टीवी देखने

का बहाना करने लगा… लेकिन प्रीति अपने पापा की निगाहों को

पहचानती थी. वो अपनी जगह से थोड़ी हिली और उसकी चूत का काफ़ी

सारा भाग दीखाई देने लगा…

देव से सहन नही हो रहा था और वो समझ रहा था कि उसकी सग़ी

बेटी उससे चुदवाना चाहती है लेकिन वो उसकी बात कैसे मान लेता

आख़िर वो उसका सगा बाप था.. लेकिन प्रीति तो जैसे आज ठान कर

आई थी.. उसने अपनी स्कर्ट को और उपर उठाया दिया जिससे उसकी चूत

अब पूरी तरह नंगी हो गयी थी..

बलदेव फटी आँखों से अपनी बेटी को देख रहा था जिसकी नंगी चूत

अब उसकी आँखों के सामने थी.. बिना बालों की चूत देख उसके मुँह मे

पानी आ रहा था.. उसका दिल तो कर रहा था कि वो तभी उसकी टाँगो

के बीच चला जाए और अपनी बेटी की चूत को मुँह मे भर चूस

ले..

“नही में ये नही कर सकता नही.. कभी नही..” अपने आप से

कहता हुआ बलदेव हॉल से निकल अपने कमरे मे आ गया…. उसे विश्वास

नही हो रहा था कि उसकी सग़ी बेटी किसी रंडी की तरह उसे ही

बहकाने की कोशिश कर सकती है.. लेकिन वो ये भी जानता था कि

प्रीति का जिस्म और चूत दोनो जान लेवा थे.. उसका दिल कुछ कह रहा

था और दीमाग कुछ..

बलदेव हॉल से तो निकल आया लेकिन वो चाह कर भी अपनी बेटी की

चूत की झलक अपने दीमाग से नही निकल पाया.. अपने कमरे मे आकर

उसने कुछ पोर्नो मॅगज़ीन निकाली और अपने लंड कों आज़ाद कर उसे

मसल कर मूठ मारने लगा.. उसके जेहन मे अपनी बेटी की चूत बसी

हुई थी..

प्रीति अपनी नंगी चूत को मसल्ते हुए सोच रही थी कि काश उसके

पापा उसके भाई की तरह समझ जाते… लेकिन ऐसा नही हुआ और उसे

लगा कि उसे और कोई तरीका अपनाना पड़ेगा.. यही सोच वो उठी और

हॉल से निकल अपनी कमरे की ओर जाने लगी.. अपने पापा के कमरे के

बाहर से गुज़रते हुए उसने अपने पापा की जोरों की सिसकारिया और

कराहें सुनी तो वो समझ गयी कि उसके पापा अपने कमरे मे मूठ मार

रहे है.. उसका दिल तो किया कि वो कमरे के अंदर चली जाए और

हिम्मत कर वो कमरे का दरवाज़ा खोल अंदर दाखिल होने लगी..

जैसे ही कमरे का दरवाज़ा खुला देव की निगाह दरवाज़े पर उठ गयी..

वो पलंग पर बैठा एक मॅगज़ीन को देखते हुए मूठ मार रहा था…

अब वो चाह कर भी पीछे नही हट सकता था.. वो अपनी बेटी प्रीति

को कमरे मे दाखिल होते देखता रहा…. देव इतना ज़्यादा उत्तेजित था

कि उसने अपने लंड को मसलना नही छोड़ा और दो तीन मूठ के बाद ही

उसके लंड ने वीर्य की पिचकारी छोड़ी जो हवा मे उछल सीधे सामने

पड़ी मॅगज़ीन पर गिरी..

प्रीति तुम यहाँ क्यों आई हो?” देव ज़ोर से अपनी बेटी पर चिल्लाया.

“पापा आप जानते है.. आपको इसे इस तरह व्यर्थ नही करना चाहिए

था..” प्रीति ने जवाब दिया..

“अगर आपं मुझे अपने लंड को चूसने देते तो शायद आपको ज़्यादा

मज़ा आता” प्रीति ने आगे कहा..

देव लड़खड़ाते हुए कदमों से ज़मीन पर बिखरे अपने कपड़े उठाने जा

रहा था की प्रीति ने अपने पापा के हाथों से वो मॅगज़ीन झपट ली

और उस पर गिरे वीर्य को चाटने लगी.. और उस मॅगज़ीन को लेते हुए

कमरे से भाग गयी..

“पापा इसे मे बाद मे लौटा दूँगी” प्रीति ने कमरे से निकलते हुए

कहा..

“हे भगवान में इसका क्या करूँ.. क्या होगा.. इसका..” अपने आप से

कहता हुआ वो वैसे ही पलंग पर लुढ़क गया..

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