मोहन उत्तेजना मे उसकी चूत को और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा… और
अपनी उंगली उसकी चूत पर घूमाते हुए उसने उसकी चूत का मुँह खोला
और अपनी उंगली उसकी चूत मे घुसाने लगा.. तभी प्रीति थोड़ा
पीछे को हट गयी और उसकी चूची उसके मुँह से बाहर आ गयी…
उसने देखा की प्रीति अपनी पॅंटी को उतार रही थी…..
प्रीति ने पॅंटी उतार कर अपना एक पाँव उठाया और कुर्सी पर ठीक
अपने चाचा के पीछे रख दिया जिससे उसकी चूत और खुल कर उसके
चेहरे के सामने हो गयी… और फिर अपना हाथ अपने चाचा के सिर पर
रख वो उसे अपनी चूत की ओर नीचे दबाने लगी..
मोहन अपनी भतीजी का इशारा समझ गया और बिना झीजक के उसने
अपना चेहरा उसकी चूत से सटा दिया… और अपनी जीब को उसकी चिकनी
मुलायम चूत पर फिराने लगा… प्रीति के हाथ का दबाव अपने चाचा
के चेहरे पर और बढ़ गया और मोहन अब उसकी चूत को उपर से
नीचे तक.. गोल गोल घुमा चाटने लगा…
प्रीति अपनी आज़ाद हुई चुचियों को अपने ही हाथों से मसल्ने लगी
और अपनी चूत को और अपने चाचा के चेहरे पर रगड़ उनकी खुरदरी
जीब का मज़ा लेने लगी… मोहन की जीब प्रीति की चूत के दाने को
कुरेद रही थी और प्रीति की चूत मे जोरों से उबाल आया और
उसके पूरे बदन मे एक हलचल सी मच गयी और तभी वो झार झार
कर अपने चाचा के मुँह मे झाड़ गयी…
प्रीति ने अपनी चूत को मोहन के चेहरे से हटाया और उसे कुर्सी की
पुष्ट से अछी तरह बिठा उसकी टांगो को फैला दिया… वो अपने चाचा
के लंड को चूसना चाहती थी… मोहन चुप चाप अपनी भतीजी की
कारनामे देख रहा था.. प्रीति की जीब अब उसके खड़े लंड की लंबाई
को नापते हुए उपर से नीचे हो रही थी.. अपने होठों को ओ शेप मे
कर वो उसे चूम रही थी.. और कभी अपनी जीब को त्रिकोण कर उसके
लंड के मुँह पर फिराती…
मोहन के लंड को अपने मुँह मे ले प्रीति चूसने लगी और बीच बीच
मे अपनी नज़रे उठा अपने चाचा की ओर देख मुस्करा देती… और फिर
ज़ोर ज़ोर से किसी लॉलीपोप की तरह उसका लंड चूसने लगती…
प्रीति ज़ोर ज़ोर से मोहन का लंड चूस रही थी और मोहन के लंड मे
उबाल आता जा रहा था.. लंड मे बढ़ती अकड़न ने प्रीति को बता
दिया कि उसका चाचा अब झड़ने वाला है… इसलिए वो अपने मुँह को और
तेज़ी से उपर नीचे कर उसके लंड को चूसने लगी… और साथ ही
लंड को अपनी मुट्ठी मे भर मसल्ने लगी… अब वो सिर्फ़ सूपदे को अपने
मुँहे मे रख चूस रही थी कि तभी मोहन के लंड ने ज़ोर की वीर्य
की पिचकारी छोड़ी जो सीधे प्रीति के गले से टकराई… और किसी
भूकि बिल्ली की तरह उस मलाई को गीटक गयी और फिर उसके लंड को
अपने मुँह मे ले चूसने लगी
प्रीति चाहती थी कि जितनी जल्दी हो वो अपने चाचा के लंड को फिर से
तना कर खड़ा कर दे…. मोहन का लंड एक बार तो उत्तेजना शांत होने
पर ढीला पड़ा लेकिन प्रीति के मुँह की गर्माहट ने जैसे एक बार फिर
उसमे जान फूँक दी हो….मोहन लंड एक बार फिर मचल कर तनने
लगा…. प्रीति ने देखा की लंड मे अकड़न पैदा हो रही है.. तो वो
और ज़ोर ज़ोर से उसे चूसने लगी… मोहन हैरत से अपनी भतीजी को
देख रहा था.. वो समझ रहा था कि ये तो उसकी चूसने की कला ही
थी जो उसके लंड को इतनी जल्दी खड़ा कर दिया…
प्रीति ने देखा कि अब उसके चाचा लंड वापस अपने पूरे आकार मे तन
कर खड़ा है तो उसने लंड को अपने मुँह से बाहर निकाला और खड़ी हो
गयी और फिर अपनी टाँगो को मोहन की जांघों के अगल बगल कर गोद मे
खड़ी हो गयी…. फिर उसके खड़े लंड को उसने अपनी चूत से लगाया
और उस पर धीरे धीरे नीचे बैठती गयी.. मोहन का लंड उसकी
गीली चूत मे अंदर घुसने लगा…
मोहन का लंड जब प्रीति की चूत की दीवारों को चीरता हुआ उसकी जड़
से टकराया तो उसके मुँह से एक कराह सी निकल गयी…. उसे प्रीति की
चूत अपनी बीवी की ढीली चूत से कहीं कसी लग हुई लग रही थी
और उसने अपनी कमर को थोडा उठा अपने लंड को और अंदर तक पेल
दिया… प्रीति की चुचियाँ उसकी छाती मे धँसी हुई थी… आज
किसी कमसिन अपनी ही बेटी की उमर की लड़की को चोदने का उसका सपना
पूरा हो रहा था.. जो शायद वो खुद करने की कभी हिम्मत नही कर
पाता.. तभी प्रीति ने अपने चेहरे को झुका अपने होंठ अपने चाचा
के होठों पर रख दिए…
मोहन तो जैसे पागल सा हो गया.. उसने प्रीति के होठों को अपने
होठों मे ले लिया और चूसने लगा… प्रीति ने अपने हाथ उसके
कंधों पर रखे और अपनी छाती को इस तरह उसकी छाती से सटा
दिया की अब उसके हर धक्के साथ उसकी चुचियाँ मोहन की छाती से
रगड़ खा उपर नीचे होने लगी.. प्रीति उछल उछल कर धक्के
लगाने लगी.. फिर प्रीति उसके कंधों को पकड़ पीछे की ओर झुकी
जिससे उसकी चूत मे अंदर बाहर होता लंड दीखाई देने लगा.. अपने
चाचा के लंड को देखते हुए उसने अपनी उंगली लंड के साथ साथ चूत
मे घुसा दी और ज़ोर ज़ोर से सिसक कर उछलने लगी..
“ह्म्म्म्मम ऑश हाां ऑश ह्म्म्म्मम ”
तभी अचानक प्रीति उसकी गोद से खड़ी हो गयी.. मोहन चौंक पड़ा
वो उसे फिर से पकड़ता कि प्रीति ने अपनी उंगली अपने होठों पर रख
उसे इशारा किया कि वो कोई आवाज़ पैदा ना करे… और फिर कुर्सी का
सहारा ले वो घोड़ी बन गयी… और उसने पलट कर अपने चाचा की ओर
देखा..
मोहन अपनी भतीजी को इस मुद्रा मे देख किसी शिकारी कुत्ते की तरह
उस पर चढ़ गया.. उसने पीछे से अपने लंड को उसकी चूत से लगाया
और एक ज़ोर का धक्का मारता हुआ पूरा लंड उसकी चूत मे घुसा
दिया…
प्रीति ने ने अपने सिर को अपने हाथों पर टीका दिया ठीक उसी तरह
जिस तरह उसकी बीवी ने पिछली रात को किया था… मोहन तो जैसे
और जोश मे भर गया वो उछल उछल कर धक्के लगाने लगा…
मोहन का लंड फिर अकड़ने लगा…. अंडकोषों मे उबाल भरने लगा..
प्रीति समझ गयी कि उसका चाचा एक बार फिर झड़ने के करीब है वो
पीछे हटी और एक बार फिर अपने चाचा के सामने मुँह खोल बैठ
गयी.. मोहन ने उसके सिर को पकड़ा और मुँह मे धक्के मार उसके मुँह
को चोदने लगा… और थोड़ी ही देर मे उसका लंड पिचकारी दर
पिचकारी छोड़ प्रीति के मुँह को भरने लगा…
जब उसका लंड शांत हुआ तो प्रीति ने ज़मीन पर पड़ी अपनी पॅंटी
उठाई और अपने मुँह को उस पेंटी से पौंचते हुए चुप चाप स्टडी
रूम से बाहर चली गयी…
अपने चाचा मोहन के स्टडी रूम से आकर प्रीति अपनी चचेरी बेहन
स्वीटी के बगल मे आ कर लेट गयी और सोचने लगी.. कि अगली बार वो
चाचा को कहानी भेजेगी तो उसमे लीखेगी कि किस तरह उस कहानी मे
लड़की का चाचा उसे अपनी ही बेटी के साथ सेक्स करते पकड़ लेता और
फिर दोनो लड़कियों को किस तरह चोद्ता है.. इस ख़याल से ही उसकी
चूत फिर गीली होने लगी.. पर अपने पर काबू पा वो गहरी नींद सो
गयी..
राज ने उसी होटेल के उसी कमरे का दरवाज़ा खोला जिसमे पहले वो गीली
चूत की चूत और गंद दोनो मार चुका था.. उसने दरवाज़ा बंद किया
तो उसे वही भर्रयि हुई आवाज़ सुनाई पड़ी जो कि वो अब जान चुका था
कि ये आवाज़ उसकी मम्मी की है.. उसकी मम्मी ने उसे कपड़े उतार पलंग
पर लेट जाने को कहा..
आज से दो दिन पहले उसे एक ईमेल मिला था जिसमे गीली चूत ने उससे
फिर होटेल के कमरे मे मिलने की इच्छा जताई थी और साथ ही कहा था
कि वो अपनी उसी सहेली को साथ मे लाना चाहती है… जिससे वो अपनी
सहेली को भी उसके जोरदार लंड का मज़ा दिला सके… भला राज को
क्या ऐतराज़ हो सकता था.. उसने खुशी खुशी गीली चूत की बात
मान ली थी.. क्यों कि अब वो समझ चुका था कि उसकी मम्मी इस बार
अपने साथ उसकी सग़ी चाची को लेकर आने वाली थी..
“क्या तुम अपने साथ अपनी उस सहेली को भी लेकर आई हो?” राज ने अपने
कपड़े उतार ते हुए चादर के उस पर से पूछा.
“ओह्ह हां वो यहीं… तुम उससे बात क्यों नही करती”
“हां में यहीं हूँ” राज को दूसरी औरत की आवाज़ सुनाई पड़ी.
दो औरतों की साथ साथ चुदाई के ख़याल से ही राज का लंड तन कर
खड़ा था और वो नंगा पलंग पर लेट गया… तभी उसकी मम्मी ने आपी
सहेली को अपना बदन चादर से सटाने को कहा जिससे वो उसके बदन को
एहसास कर सके..
उस औरत ने अपने नंगे बदन को चादर से सटा दिया और चादर के इस
ओर से राज ने उसकी चादर से धकि चुचि को पकड़ा और चादर के
उपर से ही उसके निपल को अपने मुँह मे ले लिया… और उसकी चुचि को
मसल्ने लगा.. उसका नंगा और तना हुआ लंड चादर से सटा हुआ था..
और उस औरत के पेट पर ठोकर मार रहा था.. तभी दो हाथों ने
उसके लंड को पकड़ लिया..
“हे भगवान ये तो कंप्यूटर स्क्रीन पर देखा था उससे भी कहीं मोटा
और लंबा है” उस औरत ने उसके लंड को भींचते हुए कहा..
“मुझे खुशी है कि तुम्हे मेरा लंड पसंद आया” राज ने जवाब
दिया..
“अब ज़रा लंड को चादर से नीचे करो ताकि हम दोनो इसे अछी तरह
देख सके और इसका स्वाद चख सकें” गीली चूत ने कहा..
उस औरत ने चादर को बस इतना उपर उठाया कि राज का लंड दीखाई
देने लगा… एक हाथ ने उसके अंडकोषों को पकड़ लिया और एक औरत का
गरम मुँह उसके लंड पर टिक गया.. और उसे चूसने लगा..
“ज़रा संभाल के लेना अपने मुँह मे बहोत लंबा है कहीं गले मे ना
अटक जाए” राज को अपनी मम्मी की आवाज़ सुनाई पड़ी और वो समझ गया
कि वो दूसरी औरत उसका लंड चूस रही है..
वो औरत उसके लंड को अपने गले तक लेकर चूसने लगी.. और जोरों
से अपने मुँह मे भींचने लगी.. फिर वो थोड़ी देर के बाद उसके लंड
को मुँह से निकालती और फिर चूसने लगती.. राज की समझ मे नही आ
रहा था कि कौनसी औरत उसके लंड को चूस रही थी और कौनसी उसके
लंड को मसल रही थी.. वो चुप चाप मज़े ले रहा था…
जब दोनो औरतों को उसके लंड को चूस्ते थोड़ी देर हो गयी तो राज ने
कहा, “क्या कोई मुझे अपनी चूत भी दीखाईगा या सिर्फ़ मेरा लंड
चूसने का ही इरादा है?”
“अरे दिखाएँगे भी और इस मूसल को अपनी चूत के अंदर भी
लेंगे” उसकी मा ने कहा और तभी दो जोड़ी टाँगे चादर के नीचे से
पलंग पर आ गयी.. और जब दोनो जोड़ी पलंग पर अड्जस्ट हो गयी तो
दो बिना बालों की चूत राज के सामने थी..

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