परिवार हो तो ऐसा – Update 23 | Erotic Family Incest Story

परिवार हो तो ऐसा - Family Incest Saga
Reading Mode

“प्रीति में तुम्हारा बाप हूँ और में सपने मे भी ये सब नही

सोच सकता.. इसलिए मेहरबानी करके अब जाओ यहाँ से” देव ने प्रीति

से कहा.. दिल मे कहीं वो जानता था कि उसने आज एक अछा मौका खो

दिया था लेकिन वो उसका बाप था और ये सब पाप है है वो अपनी ही

बेटी की काम अग्नि शांत नही कर सकता था.. ये सब उसकी नज़रों मे

ग़लत था…

प्रीति ने उन दोनो खिलोनो को उठा लिया और कमरे से जाने लगी..

“मुझे लगता है कि तुम इन्हे यहीं छोड़ दो.. ” देव ने अपनी बेटी से

कहा.. लेकिन उसने ऐसा क्यों कहा ये वो भी नही जानता था..

“पापा आप इतने बेरहम होंगे मुझे नही मालूम था. ठीक है में

इन्हे यहीं छोड़ देती हूँ लेकिन ये में आपको बता दूं कि में यहाँ

से किचन मे जाउन्गि और वहाँ से कुछ लेकर अपनी चूत की गर्मी

शांत करूँगी… और जब आपको कुछ सिसकियों की या कराह की आवाज़

सुनाई दे तो समझ लेना कि मेरी चूत झाड़ रही है… ” प्रीति

कहते हुए अपने बाप के बगल से निकल गयी.. उसने अपनी पॅंटी भी

नही उठाई..

देव वैसे ही नंगा खड़ा कमरे की बिखरी हालत देखता रहा… इधर

उधर उसकी बीवी के खिलोने बिखरे पड़े थे… और प्रीति की पॅंटी

ज़मीन पर पड़ी थी… उसका दीमाग काम नही कर रहा था…

देव सोचते हुए पलंग पर बैठ गया.. थोड़ी देर बाद उसने वो डिल्डो

उठा लिए जो थोड़ी देर प्रीति की चूत मे घुसा हुआ था… वो

वसुंधरा के आने से पहले कमरे को ठीक कर देना चाहता था..

उसने प्रीति की ज़मीन पर पड़ी पॅंटी भी उठा ली…. उसने देखा की

उसकी पॅंटी सॅटिन की थी और नीले रंग की थी… उसे सॅटिन बहोत

पसंद था… पता नही उसे क्या हुआ उसने उस पॅंटी को अपनी नाक के

पास किया और उसे सूंघने लगा…. फिर उसने उस डिल्डो को भी अपनी नाक

पर लगा सूँघा.. प्रीति की चूत की महक दोनो मे बसी हुई थी…

उसका लंड एक बार फिर मचल उठा..

देव को अपने आप झल्लाहट हो रही थी.. क्यों तो वो घर जल्दी आया

और अब वो इस स्तिति मे फँस गया.. वो अपनी जवान बेटी को गुस्सा भी

नही कर सकता था.. उसे पता था कि प्रीति काफ़ी सेक्सी लड़की थी..

इसलिए तो वो हरदम उसे अपने बदन की झलक दीखा चिढ़ाती रहती

थी.. लेकिन वो अपनी मर्यादा मे रहना चाहता था…. उसने उस खिलोने

को वापस डिब्बे मे रख दिया…

देव प्रीति की पॅंटी को अपने हाथों मे ले पलंग पर बैठा था..

उसके जहाँ मे बार बार अपनी बेटी का नंगा बदन घूम जाता.. उसकी

भारी भारी चुचियाँ उसकी आँखों के आगे आ जाती.. लंड फिर

मचलने लगा था.. उसके क्या दिल मे आया की उसने अपनी बेटी की पॅंटी

को एक बार फिर अपनी नाक लगा सूँघा और फिर अपने लंड को उस पॅंटी के

बीच फँसा मूठ मारने लगा…

देव अपने लंड को ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगा… सॅटिन मे लिपटा लंड उसे

अछा लग रहा था…. उसके दीमाग मे प्रीति का नंगा बदन ही घूम

रहा था… और बार बार वो द्रिश्य आ जाता जहाँ उसके दोनो छेदों वो

खिलोने घुसे हुए थे.. बस उसने लंड ने पानी छोड़ना शुरू कर

दिया…

प्रीति ने जैसा कहा था वैसा ही किया.. अपने पापा के रूम से निकल

वो सीधे वो किचन मे गयी और वहाँ से दो लंबी गाजर उठा अपने

कमरे मे आ गयी और पलंग पर लेट अपनी स्कर्ट उठा उस गाजर को अपनी

चूत के अंदर बाहर करने लगी…

अपनी टाँगो को फैलाए वो उस खुरदूरी गाजर को अपनी चूत को अंदर

बाहर कर रही थी लेकिन उसके जहाँ मे अपने बाप का मोटा लंबा लंड

बसा हुआ था..

जब वो गाजर उसकी चूत से रस से गीला हो गया तो उसने उस गाजर को

अपनी चूत से निकाला और उसे अपनी गंद के छेद मे घुसाने लगी..

खुरदूरी गाजर से उसे हल्का दर्द तो हुआ लेकिन वो उसे अंदर घुसाने

मे सफल हो गयी.. फिर उसने दूसरी वाली गाजर अपनी चूत मे डाल ली..

अब वो दोनो गाजर को अपनी चूत और गंद के अंदर बाहर कर रही

थी… थोड़ी ही देर मे उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया…

प्रीति अपनी उखड़ी हुई सांसो को संभाल ही रही थी कि उसे घर के

बाहर गाड़ी रुकने की आवाज़ सुनाई पड़ी… उसने झट दोनो गाजर को उठा

कर डस्ट बिन मे फैंक दिया… और अपने कपड़े ठीक कर लिए…

* * * * * * * *

नेहा ने अपने पति मोहन का दरवाज़े पर ही स्वागत किया… आज

शमा और स्वीटी अपने दोस्तों के साथ बाहर गये थे…… आज उसने

अपने पति को रिझाने का फ़ैसला कर लिया था… उसने उसके हाथ से

उसकी ऑफीस का ब्रीफकेस्लिया और वहीं पर ज़मीन पर रख मोहन को

अपनी बाहों मे भर उसके होठों को चूम लिया…

“क्या बात है आज तो कुछ ज़्यादा ही प्यार आ रहा है” मोहन ने अपनी

बीवी से कहा.

“वो क्या है ना.. दोनो बच्चे घर पर थे नही तो मेने सोचा क्यों ना

आज थोड़ी शरारत की जाए.. इसलिए मेने सोचा कि पहले तो तुम्हे

प्यार से खाना खिलवँगी फिर आज तुम्हारे लंड का सारा पानी निचोड़

लूँगी… ” नेहा ने हंसते हुए जवाब दिया..

“इसका मतलब आज तुमने मेरा और मेरे लंड का कबाड़ा करने की ठान ही

ली है” मोहन भी हंसते हुए बोला… आज रात की मस्त चुदाई ने

उसके लंड को खड़ा कर दिया था…

“क्या तुम्हारा मेरा ख्याल अछा नही लगा… तुम बैठ कर सुस्ताओ में

तुम्हारे लिए बीअर लेकर आती हूँ” मोहन अपनी बीवी के पीछे हॉल मे

आ गया और सोफे पर बैठ गया वहीं नेहा किचन से बियर लाने

चली गयी.. थोड़ी देर मे नेहा उसकी मन पसंद बियर हेवर्ड्स 5000

लेकर लौटी और उसके लिए टीवी ऑन कर दिया..

मोहन अपनी मॅन पसंद ठंडी बियर का धीरे धीरे सीप लेने लगा और

नेहा उसके बगल मे बैठ उसकी पॅंट के उपर से उसके लंड को सहलाने

लगी… फिर वो थोड़ा खिसक कर उसकी पॅंट की बेल्ट खोलने लगी..

मोहन ने थोड़ा हिल कर उसकी इस काम मे मदद की…… नेहा ने बेल्ट

निकाल उसकी पॅंट की ज़िप खोल कर उसे उतार दी…

“मेरी तो समझ मे नही आ रहा कि आज अचानक तुम्हे हो क्या गया

है? फिर भी मुझे बहोत अछा लग रहा है” मोहन ने नेहा से कहा जो

उसके सामने अब घुटनो के बल बैठ गयी थी.. और उसके आज़ाद खड़े

लंड को अपने हाथों मे पकड़े हुए थी… उसने उसके लंड को पीछे की

ओर उसके पेट से सटाया और नीचे अंडकोःशों के पास से उसे उपर तक

चाटने लगी… फिर वो कभी उसके लंड के सूपदे को मुँह मे ले चूस्स

लेती तो फिर उसे बाहर निकाल ऐसे ही चाट्ती….

मोहन बियर की सीप भरते हुए अपनी बीवी की कला देख रहा था.. आज

उसे बहोत मज़ा आ रहा था.. कई दीनो के बाद उसकी बीवी इस तरह

उसका लंड चूस रही थी…. नेहा उसके लंड को अपने गरम मुँह मे

भींच अपने गले तक लेती और जब उसे लगता की अब वो और अंदर तक नही

ले पाएगी तो उसके लंड को अपनी जीब और तालू से भींच चूस्ति…

तभी नेहा ने अपने पति के हाथों से बियर का मग लिया और उसमे से एक

लंबा घूँट भर वापस उसके लंड को अपने मुँह मे लिया… मोहन का

लंड बियर की घूँट से भरे मुँह मे जाते ही उसकी ठंडक से

झंझणा उठा…

नेहा ने तो इस बार हद ही कर दी उसने एक बार फिर उसके हाथों से मग

को लिया और इस बार उसके लंड को पूरी तरह ठंडी बियर मे डूबा दिया

और फिर उसके लंड को चूसने लगी.. मोहन उसी बियर का सीप लेने

लगा.. आज ये अनोखी बियर उसे बहोत मज़ा दे रही थी..

उसके लंड को और थोड़ी देर चूसने के बाद वो खड़ी हुई और अपने

पति से बोली कि वो किचेन मे जाकर खाने की तय्यरी करती है…

मोहन वहीं सोफे पर बैठा टीवी देखते रहा…. आज कई सालों के बाद

उसकी बीवी इतनी उत्तेजित लग रही थी… वो सोचने लगा कि क्या उसकी

भतीजी प्रीति भी इसी तरह एक दिन हॉल मे बैठी टीवी के सामने उसके

लंड को चूसेगी… प्रीति के ख़यालों मे डूबा वो अपने लंड को

मसल्ने लगा..

थोड़ी देर बाद जब नेहा ने उसे आवाज़ दी कि खाना तय्यार है तो वो

अपनी पॅंट को वापस पहन किचन मे आ डाइनिंग टेबल पर बैठ

गया… दोनो साथ मिलकर खाना खाने लगे…

जब दोनो खाना ख़तम कर चुके तो नेहा ने अपने पति का हाथ पकड़ा

और उसे खींच कर बेडरूम मे ले आई…

“मुझे लगता है कि अब तुम्हे सारे कपड़े उतार देने चाहिए” नेहा ने

उसकी शर्ट के बटन खोलते हुए कहा…

“और मुझे लगता है कि यही काम तुम्हे खुद के साथ भी करना

चाहिए” मोहन ने उसके ब्लाउस के बटन खोलते हुए कहा… दोनो एक

दूसरे को चूमते हुए एक दूसरे के कपड़े उतारने लगे…. फिर मोहन

ने उसकी स्कर्ट खोल उतार दी और तभी उसकी निगाह उसकी लाल रंग की

पॅंटी पर पड़ी..

“क्या बात है इस नयी पॅंटी मे आज बहोत सेक्सी लग रही हो” मोहन ने

उसकी पॅंटी के उपर से उसकी चूत को सहलाते हुए कहा…

फिर नेहा ने उसे पलंग पर धकेल दिया और उसकी पॅंट को खींच

पैरों से निकाल उतार दिया… जब वो पूरी तरह नंगा हो गया तो वो

उसपर चढ़ उसके होठों को चूसने लगी… अपनी पॅंटी मे ढाकी चूत

को वो उसके खड़े लंड पर रगड़ने लगी… अपनी चुचियो को उसकी

छाती पर रगड़ते हुए उसने अपनी ब्रा का हुक खोल उसे निकाल दिया..

मोहन ने अपनी बीवी की एक चुचि को एक हाथ से पकड़ा और उसे मुँह मे

ले चूसने लगा….नेहा सिसक कर अपनी चूत को और जोरों से उसके

लंड पर रगड़ने लगी.. मोहन ने अपनी उंगली उसकी पॅंटी के एलास्टिक मे

फँसाई और नीचे खिसकाने लगा…

पर नेहा ने उसके हाथ को झटक खुद नीचे खिसक गयी और एक बार

फिर उसके लंड को अपने मुँह मे ले चूसने लगी..

नेहा ज़ोर ज़ोर से मोहन के लंड को चूसने लगी… मोहन सिसक पड़ा…

‘”ऑश हाआँ नेहा चूसो और जीब से भींच भींच कर चूसो ऑश

नेहा रुक जाओ नही तो लंड पानी छोड़ देगा.. ओ रूको….”

लेकिन नेहा ने उसकी बात को अनसुना कर दिया… वो यही तो चाहती

थी.. आज वो अपने पति के लंड के पानी का स्वाद चखना चाहती थी वो

और ज़ोर ज़ोर से उसके लंड को भींच चूसने लगी…. तभी मोहन का

लंड आकड़ा और पानी छोड़ने लगा… नेहा उसके लंड को जोरों से भींच

उससे छूटी हर बूँद को पीने लगी… आख़िर उसने हर बूँद को

निचोड़ निचोड़ कर गटक लिया…

“एम्म्म शुरुआत अछी थी” नेहा ने अपने होठों पर लगे उसके वीर्य को

अपनी जीब से चाटते हुए कहा..

“क्या मतलब.. तुम्हारा दिल नही भरा इससे?” मोहन ने चौंकते हुए

पूछा..

“अरे डरो मत… आज की रात मेने तुम्हारे लिए कुछ स्पेशल सोच

रहा है जिससे तुम्हारा लंड कुछ मिनिट मे ही फिर हिचकोले खाने

लगेगा… ” नेहा ने कहा. “अब ऐसा करो कि बिस्तर पर लेट जाओ”

मोहन पालग पर लेट अपने सिर को तकिये से टीका दिया.. नेहा उसकी

छाती के अगल बगल पावं रख उसके सामने खड़ी हो गयी.. फिर अपनी

पॅंटी को बगल से हटा अपनी बिना बालों की चूत की झलक दे उसे

चिढ़ाने लगी.. मोहन की समझ मे नही आया कि आज उसकी बीवी क्या

चाहती थी.. नेहा फिर पलटी और अपनी कुल्हों को उसकी आँखों के सामने

कर मटकाने लगी.. जैसे की कोई रंडी अपने ग्राहक को रिझा रही

हो… फिर उसने पीछे से अपनी पॅंटी को नीचे खिसका दिया जिससे उसकी

भर और गोल गंद नंगी हो गयी… वो फिर घूमी और इस बार उसने

सामने से भी अपनी पॅंटी को नीचे खिसका दिया.. उसकी बिना बालों की

चूत लाइट मे चमकने लगी…

“ये क्या आज तुमने अपनी झांते सॉफ की है” मोहन ने खुशी मे

कहा… “में इतने सालों से तुम्हे कहता रहा आख़िर तुमने मेरी बात

मान ही ली.. क्यों ऐसा कैसे हो गया.. ” मोहन उसकी चूत के अगल

बगल अपनी उंगलियों को फिराते हुए बोला.

“बस आज में और वासू दीदी बात कर रहे थे.. और बातों के दौरान

टॉपिक चुचियों से चूत तक पहुँच गया और तब उसने बताया कि वो

बरसों से अपनी चूत के बाल साफ करती है… तब मेने उससे

बताया कि डर की वजह से आज तक मेने अपनी झांते सॉफ नही की है

तब उसने मुझसे कहा कि मुझे ऐसा कर तुम्हे चौंका देना चाहिए…

और तब मेने उसकी मदद से अपनी चूत के बाल सॉफ किए” नेहा ने

जवाब दिया..

“अब ज़रा इस प्यारी और मोहक चूत को नीचे झूकाओ जिससे में इसे

चूस सकूँ और साथ ही तुम्हारी जेठानी और मेरी भाभी को मन ही

मन शुक्रिया कह सकूँ”

Please complete the required fields.




Comments

Leave a Reply