राज अपने लंड को मसल्ने लगा… दो दो प्यासी औरतें उसे अपने लंड को मसल्ते देख रही है यह सोच ने उसे और जोश मे ला दिया था..और थोड़ी ही देर मे उसका लंड अपनी पूरी लंबाई और मोटाई मे तन
कर खड़ा था..
में प्यासी हूँ} इससे मोटा और लंबा लंड मेने आज से पहले कभी नही देखा.
गीली चूत} बहोत हाई मस्त लंड है ना?
में प्यासी हूँ} ये तुम मुझसे कह रही हो.
राज आज अपने साथ माय्स्चुरिज़र लेकर आया था.. वो थोड़ा माय्स्चुरिज़र अपनी हथेली मे ले अपने लंड को मसल्ने लगा.. उसका लंड चमकने लगा और कुछ ज़्यादा तन गया… उसकी निगाह स्क्रीन पर गढ़ी हुई थी
जहाँ वो पढ़ रहा था कि उन दोनो को कितना मज़ा आ रहा था..
राज मस्ताना} क्या तुम दोनो अपनी चूत से खेल रही हो.
गीली चूत} और नही तो क्या.. तुम्हारे लंड को देख कौन अपने आप पर कंट्रोल कर सकेगा.
में प्यासी हूँ} में भी.
नेहा की आँखे अपने भतीजे के मोटे लंड पर टिकी हुई थी कि किस तरह अपने लंड को मुट्ठी मे भर ज़ोर ज़ोर से मसल रहा था.. उसकी चूत गीली हो रही थी.. वासू के कहे अनुसार उसने पॅंटी नही पहन
रखी थी.. अपने स्कर्ट को उठा वो एक हाथ से मेसेज टाइप कर रही थी और दूसरे हाथ से अपनी चूत से को रगड़ रही थी.. चूत से रस बह कर उसकी स्कर्ट को भिगो रहा था..
नेहा अपनी चूत को मसल्ति रही और राज को लंड पर मूठ मारते देखती रही कि तभी राज के लंड ने एक ज़ोर की पिचकारी छोड़ी और वीर्य छूटने लगा…..
गीली चूत} शुक्रिया राज
राज मस्ताना} इसमे शुक्रिया की क्या बात है.. शायद एक दिन इसका तुम बदला चुका दो.
गीली चूत} इसके लिए में तय्यार हूँ
गीली चूत} गुड नाइट राज
राज मस्ताना} गुड नाइट … फिर कभी मिलते है
गीली चूत} हां क्यों नही.
नेहा ने कंप्यूटर बंद किया कि तभी फोन की घंटी बज उठी. “तो मेरे बेटे का लंड कैसा लगा तुम्हे?” दूसरी ओर से वासू ने पूछा. “सच कहूँ तो मुझे सपने मे भी उम्मीद नही थी कि उसका लंड इतना मोटा और लंबा होगा.. सही मे मज़ा आ गया.. सोच अगर ये लंड हमारी चूत मे घुसे तो कैसा मज़ा आएगा?” नेहा ने जवाब दिया. “हां में भी कभी कभी यही सोचती हूँ” वासू ने कहा. “सच वासू मुझे विश्वास नही होता कि उसे आज तक ये पता नही है कि वो अपनी मा के सामने इस तरह अपने लंड को मूठ मारता है… ” “हां और आज से उसकी चाची के सामने भी” वासू ने जवाब दिया. “मुझे तुम्हारा तो पता नही लेकिन मुझे तुरंत बाथरूम जाकर अपनी चूत की गर्मी को शांत करना है… आज कुछ ज़रूरत से ज़्यादा ही खुजली मच रही है” नेहा ने कहा. “हां में तुम्हारी हालत समझ सकती हूँ… मुझे खुद को नही मालूम कि अपने बेटे के लंड को देख कर और सोच कर में कितनी बार अपनी गर्मी अपनी उंगलियों से शांत कर चुकी हूँ.. ठीक है गुड नाइट” कहकर वासू ने फोन रख दिया.
नेहा ने फोन रख दिया और सोचा की बाथरूम मे जाकर अपनी चूत की खुजली को मिटाए फिर उसके दिल मे आया की मोहन के घर मे होते हुए हाथों से क्यों…
नेहा ये सोच कर हॉल मे आ गये जहाँ मोहन टीवी के सामने बैठा कोई प्रोग्राम देख रहा था.. वो उसके सामने आकर बैठ गयी.. मोहन ने अपने हाथ उसके कंधे पर रख दिए.. नेहा उसकी पॅंट के बटन खोलने लगी.. जिससे उन्हे खींच कर नीचे खिसका सके.. मोहन हैरत भरी नज़रों से अपनी बीवी को देख रहा था.. उसके चमकते चेहरे को देखता रहा और नेहा ने उसकी पॅंट को नीचे खिशका उसे मुरझाए लंड को अपने मुँह मे ले लिया और चूसने लगी…वो अपनी जीब उसे चुलबुलाने लगी और चूसने लगी… थोड़ी ही देर मे उसका लंड तन गया.. अब वो अपने मुँह को पूरा खोल उपर
नीचे करते हुए ज़ोर ज़ोर से उसके लंड को चूसने लगी… थोड़ी देर उसके लंड को चूसने के बाद नेहा उठ कर खड़ी हो गयी और अपनी स्कर्ट उठा कर अपने पति को बताने लगी कि आज उसने पॅंटी नही पहन रखी है.. फिर उसकी टाँगो पर चढ़ उसके लंड को अपनी चूत से लगाया और नीचे बैठ गयी.. उसका खड़ा लंड गॅप से उसकी चूत मे दाखिल हो गया…
नेहा अब उछल उछल कर उसके लंड को अपनी चूत मे लेने लगी.. मोहन ने भी उसकी कमर को पकड़ा और उसे धक्के लगाने मे मदद करने लगा… नेहा अपनी चूत को उसके लंड पर रगड़ती और फिर धक्के लगाती.. उसके नज़रों के सामने तो अपने भतीजा मोटा लंबा लंड घूम रहा था.. वो सिसकारिया भर और ज़ोर ज़ोर से उछल उछल कर धक्के लगाने लगी.. …और उसकी चूत ने झड़ना शुरू कर दिया.. मोहन ने जब अपनी पत्नी को शांत होते देखा तो उसे गिरा कर सोफे पर लिटा दिया और खुद उसकी टाँगो के बीच आ गया और अपने लंड को चूत मे घुसा हुचक हुचक कर धक्के मारने लगा… उसकी चुचियों को मसल्ते हुए वो ज़ोर ज़ोर के धक्के लगा रहा था… ‘ऑश हाआँ ऑश हाआँ”
मोहन को पता था कि उसकी पत्नी को भयंकर चुदाई मे मज़ा आता था.. इतने सालों की शादी मे वो अपनी पत्नी की पसंद को जानता था.. उसे भी नेहा का नंगा जिस्म बहोत अछा लगता था.. साथ ही उसे कमसिन लड़कियों को देखने मे भी मज़ा आता था..
लड़कियो का ख़याल आते ही उसकी नज़रों के सामने प्रीति का चेहरा आ गया और किस तरह उसने उसे अपनी चुचि की झलक दीखाई थी.. वो और जोश मे ज़ोर ज़ोर के धक्के लगाने लगा.. ‘ऑश मोहन आहह हाआँ चोदो और ज़ोर ज़ोर से चोदो ऑश हाआँ आज तो मज़ा आ गया ” नेहा उसके धक्कों से सिसक पड़ी. मोहन ने और ज़ोर ज़ोर के धक्के लगा अपना वीर्य नेहा की चूत मे छोड़
दिया.. और उसकी बगल मे लेट गया.. ‘आज तो तुमने मुझे चौका ही दिया..” मोहन ने अपनी पत्नी से कहा.. “मुझे इस तरह तुम्हे चौंकाने मे मज़ा आता है” नेहा ने हंसते हुए कहा. और हॉल के बाहर चली गयी.. मोहन ने उससे कहा कि वो थोड़ी देर टीवी देख कर आएगा.. थोड़ी देर टीवी
देखने के बाद वो वापस अपने कंप्यूटर के पास आया और प्रीति की भेजी कहानी को पूरी करने लगा.. फिर इससे पहले कि उसका इरादा बदले उसने वो कहानी प्रीति को इमैल कर दी.. और अपने बेडरूम मे
आकर लेट गया..
अब तो जैसे वसुंधरा और नेहा के पीछले दिन वापस लौट आए थे.. अब दोनो अक्सर मिलने लगे और अपनी काम अग्नि को शांत करने लगे. अब तो फोन पर बात करीब करीब रोज़ ही होने लगी…और अक्सर दोनो साथ साथ राज का लंड वेब कॅम पर देखती और उसके लंड से छूटते वीर्य का मज़ा लाती.. वहीं मोहन और प्रीति के बीच ईमेल का आदान प्रदान बढ़ गया.. मोहन कहानी लीख कर प्रीति को मैल करता तो प्रीति उस कहानी को थोड़ा आगे बढ़ा वापस मैल कर देती. और मोहन उस कहानी को और आगे बढ़ाने लगता… इन सब के साथ प्रीति अब अपने पिता को और चिढ़ाने लगी.. उसे जब भी मौका मिलता वो अपने पिता की काम उत्तेजना को बढ़ाने से बाज नही आती… पर उसके समझ मे नही आ रहा था कि वो कब और कैसे अपने बाप के लंड का मज़ा चखे….
एक दिन जब राज अपनी मम्मी की अलमारी और ड्रॉयर को तलाशी लेने लगा.. कहने को तो प्रीति ने कहा था कि उसने नकली लंड या डिल्डो के बारे मे ऐसे ही कह दिया था लेकिन राज अपने आप को रोक नही पाया
और वो जानना चाहता था…. कि प्रीति की बात कहाँ तक सही है… आख़िर राज की कोशिश रंग लाई और अलमारी के अंदर कपड़ों के नीचे छुपे डिब्बे मे उसे सब मिल गया जिसे वो तलाश रहा था…उसने देखा कि डिब्बे मे कई प्रकार के खिलोने के लंड रखे हुए थे… उसने एक डिल्डो को उठा लिया और देखने लगा साथ ही सोच रहा था कि उसकी मा की बिना बालों की चूत जो उसने वीडियो कमरे पर देखी थी.. अगर ये नकली लंड उसमे घुसेगा तो कैसा लगता होगा…. उसने उनसब खिलोनो को उठा कर अछी तरह देखा कि कही उन पर उसकी मा की चूत के रस के कुछ निशान मिल जाए…उसने उन्हे सूंघ कर
भी देखा की कहीं उनमे चूत की खुश्बू ना बसी हो.. बल्कि ऐसा कुछ नही मिला.. उन खिलोनो को वापस डिब्बे मे रखते हुए वो सोचने लगा कि जब उसकी मा इन खिलोनो को अपनी चूत मे इस्तामाल कर रही हो तो वो किस तरह उस द्रिश्य को अपने कमेरे मे क़ैद करे… तभी उसके दिल मे एक ख़याल आया कि क्यों ना इन डिल्डो मे से एक वो प्रीति पर इस्तेमाल करे और देखे कि उसका क्या कहना है.. वो वापस झुक कर डिब्बे मे से एक डिल्डो उठाने लगा कि उसकी आँखे फटी रह गयी…
उसके सामने ठीक वैसा ही एक डिल्डो पड़ा हुआ था जिसे गीली चूत ने पीचली बार उसके सामने वेब कॅम पर इस्टामाल किया. था… वो उस डिल्डो को उठाकर देखने लगा.. डिल्डो काफ़ी लंबा और मोटा था लेकिन उसके खुद के लंड से कहीं कम… वो सोचने लगा कि क्या गीली चूत उसकी ही मा हो सकती है… फिर खुद ही अपनी सोच पर हँसने लगा.. कि ऐसा कैसा हो सकता है वो गीली चूत की तो चूत और गंद भी मार चुका है…. आख़िर उस तरह का वो इकलौता डिल्डो तो नही है जो बाज़ार मे बिकता है.. ऐसे ना जाने कितने डिल्डो बेज़ार मे बिकते होंगे.. एक दूसरे गुलाबी रंग के डिल्डो को उठा वो अपने कमरे मे आ गया..
प्रीति और उसके चाचा के बीच ईमेल का आदान प्रदान काफ़ी बढ़ गया था और इस दौरान दोनो आपस मे काफ़ी खुल चुके थे.. एक दोनो एक दूसरे को बता चुके थे कि किस तरह प्रीति उनकी लीखी हुई कहानी को पढ़ते वक्त अपनी चूत मे उंगली अंदर बाहर करती थी और मोहन ने बता दिया था कि वो अक्सर उसके आगे की कहानी को पढ़ते वक्त अपने लंड को मूठ मारता था… प्रीति की अपने ही चाचा से चुदवाने की जिगयसा दिन पर दिन बढ़ती जा रही थी.. प्रीति ने तो अपने चाचा को अपनी सिर्फ़ पॅंटी पहनी हुई फोटो तक ईमेल कर दी थी….और बदले मे चाचा मोहन ने उसे अपने खड़े लंड की तस्वीर ईमेल कर दी थी …. फोटो देख कर प्रीति ने महसूस किया कि उसके चाचा का लंड उसके भाई के लंड जितना मोटा और लंबा नही था फिर काफ़ी अछा था और उसने अपने दिल की बात अपने चाचा को
लीख भी दी थी की किस तरह उसके लंड को देखते हुए उसने अपनी चूत मे उंगली कर उसकी गर्मी को शांत किया था.. एक दिन प्रीति ने अपने चाचा को ईमेल पर पूछा कि क्या वो उसे नंगी देखना चाहता है.. अब हालत यहाँ तक पहुँच चुके थे की मोहन भला कैसे मना करता… उसने जवान हां मे दे दिया.. फिर प्रीति ने पूछा कि अगर वो उसे नंगी देखेगा तो उसके साथ क्या करना चाहेगा..
मोहन के समझ मे कुछ नही आया उसने जवाब दिया कि वो उसकी फोटो देखने के बाद ही बता पाएगा.. प्री ने अपने कपड़े उतारे और पूरी तरह नंगी हो अपनी चुचियों की और चूत की फोटो खींच अपने चाचा को ईमेल कर दी… और जवाब मे मोहन ने लीखा कि उसकी चुचियाँ और बिना बालों की चूत कितनी सुंदर लग रही है…
एक शनिवार की सुबह जब पूरा परिवार वीक एंड के लिए कहीं बाहर जाना चाहता था तो प्रीति पढ़ाई का बहाना बना पीछे रह गयी.. और वहीं मोहन और स्वीटी भी उन के साथ नही गये.. उन्हे नही पता था कि प्रीति भी घर पर अकेली है… एक रात अकेले घर पर बीतने के बाद प्रीति को अपने चाचा मोहन से ईमेल मिला और उसने जाना कि उसके चाचा घर पर अकेले है… तो उसने उन्हे फोन लगाया.. उसके दिमाग़ मे चाचा से चुदवाने का ख़याल आने लगा.. पर जब स्वीटी ने फोन उठाया तो वो चौंक पड़ी.. स्वीटी ने उसे अपने ही घर पर बुला लिया… वो शाम प्रीति ने अपनी चचेरी बेहन और चाचा के साथ वीडियो पर मूवी देखते हुए बीताई.. पर वो अपनी हरकतों से बाज नही आई.. उसे जब भी मौका मिलता तो वो स्वीटी और अपने चाचा मोहन को चिढ़ा देती… प्रीति को अपने चाचा पर दया आ रही थी.. जब से वो घर मे दाखिल हुई थी उसके चाचा का लंड तन कर खड़ा था और उसे अपने लंड को अपनी बेटी से छुपाने मे काफ़ी तकलीफ़ हो रही थी.. आख़िर मूवी ख़तम हुई और स्वीटी और प्रीति दोनो कमरे मे आ एक दूसरे की चूत से खेल सो गयी…
कुछ घंटे के बाद प्रीति की आँख खुली उसे पेशाब जाना था… वो दबे पावं कमरे से बाहर निकली और बाथरूम जाते वक्त उसने देखा की स्टडी रूम की लाइट जल रही है… उसने धीरे से कमरे मे कदम रखा और देखा कि कंप्यूटर पर उसका चाचा मोहन उसी की नंगी तस्वीर को देख रहा है और अपने हाथों से अपने लंड को मसल रहा है… प्रीति ने अपनी टी-शर्ट को उतार कर वहीं ज़मीन पर गीरा दिया.. टी-शर्ट के नीचे उसने काले रंग की पॅंटी पहने हुए थी. अपने निप्प्लो से खेल वो उन्हे खड़ा करने लगी..उसने अपने हाथ को अपनी चूत पर रखा तो देखा कि उसकी चूत गीली हो चुकी थी.. रस उससे बह रहा था… तब उसने मन पक्का कर लिया कि आज वो अपनी तमन्ना पूरी करके रहेगी.. अपने पीछे आहट सुन कर मोहन घबरा गया उसे लगा कि उसकी पत्नी नेहा आ गयी है.. उसे ख़याल नही रहा की वो तो बाहर गयी हुई है… उसने तुरंत अल्ट-टॅब दबाकर अपनी भतीजी की तस्वीर को स्क्रीन पर से हटा दी..
पर प्रीति को देख वो चौंक पड़ा .. जो तस्वीर उसके सामने स्क्रीन पर थी अब वही जीती जागती तस्वीर उसके सामने नंगी खड़ी थी… खड़ी ही नही बल्कि चल कर उसके पास आ रही थी..
उसने काले रंग की पॅंटी मे वो किसी अप्सरा से कम नही लग रही थी…उसकी भारी भारी चुचियों उसके चलने से हिल रही थी और जिन निप्प्प्ले को थोड़ी देर पहले वो निहार रहा था वही निपल उसके सामने तन कर खड़े थे..
प्रीति ने अपने होठों पर उंगली रख अपने चाचा को इशारे मे समझा दिया कि वो कोई शोर नही मचाए.. वो नही चाहती थी की आवाज़ सुनकर स्वीटी जाग जाए…वो मोहन के पास आई और झुक कर उनके होठों पर अपने होठ रख दिए और एक हाथ से उसके खड़े लंड को पकड़ सहलाने लगी..
प्रीति का हाथ लगते मोहन के लंड एक झटका खाया और उसे लगा कि वो झाड़ जाएगा.. वैसे भी वो झड़ने के करीब ही था…और उसके हाथों की गर्मी और साथ ही उसके मीठे होठों की मीठास ने उसकी उत्तेजना और बढ़ा दी…उसने अपने हाथ बढ़ा कर उसकी कठोर चुचियों को पकड़ लिया और धीरे धीरे सहलाने लगा.. फिर दूसरे हाथ को उसकी कमर पर रख उसकी नंगी त्वचा को सहलाने
लगा… उसकी उंगलियाँ उसकी पॅंटी के एलास्टिक पर आकर ठहर गयी. वो उसकी पॅंटी को उतार उसकी चूत को सहलाना चाहता था लेकिन उससे पहले प्रीति उसके सामने घुटनो पर बैठ गयी.. और उसके खड़े लंड
को अपने मुँह मे ले लिया… मुँह की गर्माहट ने उसके लंड को और फड़फदा के रख दिया..
प्रीति को जैसे कोई खिलोना मिल गया हो वो अपने चाचा का खड़ा लंड अपने मुँह मे ले खुश हो गयी और अपने चेहरे को उपर नीचे कर उसे चूसने लगी.. साथ ही उसने लंड को नीचे से अपनी मुट्ठी की गीरफ्त मे ले लिया और मसल्ने लगी.. उसने अपना एक हाथ नीचे अपनी टाँगो के बीच किया और अपनी पॅंटी के बगल से अंदर डाल अपनी गीली चूत को मसल्ने लगी… अपनी चूत को मसल्ते हुए वो अब ज़ोर ज़ोर से अपने चाचा के लंड को चूसने लगी..
मोहन के बदन मे तो उत्तेजना ने ज़ोर पकड़ लिया था. उसने देखा कि उसकी भतीजी उसके लंड को चूस्ते हुए साथ ही अपनी चूत मे उंगली कर रही है… तो उसकी उत्तेजना और ज़ोर पकड़ा और उसके लंड ने वीर्य
की पिचकारी छोड़ दी… प्रीति को जैसे कोई अमृत मिल गया हो.. वो खुशी खुशी चाचा के वीर्य को पीने लगी और चूस चूस कर उसकी आखरी बूँद तक पी गयी…तभी मोहन ने कुछ कहना चाहा लेकिन प्रीति ने फिर उसे शांत रहने का इशारा किया… वो खड़ी हुई और उसने अपनी गीली पॅंटी उतार दी…

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