परिवार हो तो ऐसा – Update 13 | Erotic Family Incest Story

परिवार हो तो ऐसा - Family Incest Saga
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“ये तो बहोत ही अछी बात है.. सपाट चूत से चुदवाने मे बहोत मज़ा आता है. हाँ तुम्हारी झांते सॉफ करते करते अगर में कुछ शैतानी करूँ तो बुरा मत मानना” प्रीति ने हंसते हुए कहा. “लेकिन में सोच रही हूँ कि तुम ऐसी क्या शैतानी कर सकती हो” स्वीटी ने अपनी चचेरी बेहन से पूछा “शायद कुछ इस तरह की” प्रीति ने अपनी स्कर्ट उपर उठा दी और अपनी नंगी चूत अपनी बेहन को दीखाने लगी “शुरुआत बुरी नही है” कहकर स्वीटी अपना हाथ बढ़ा प्रीति की

नंगी चूत पर फिराने लगी..

प्रीति हंस रही थी और स्वीटी ने उसके चूतदों को पकड़ अपने नज़दीक खींच लिया… उसकी जीब उसकी पंखुड़ियों तक पहुचि तो वो अपनी जीब को किसी तितली की पंख की तरह फड़फड़ने लगी.. स्वीटी अब अपनी जीब उसकी नंगी सपाट चूत पर उपर से नीचे तक चलाने लगी.. प्रीति ने अपनी उंगलियाँ स्वीटी के बालों मे डाल दी.. थोड़ी देर उसके बालों को सहलाने के बाद उसका हाथ नीचे खिसकते हुए पहले उसके कंधों को सहलाते हुए नीचे खिसक कर उसकी चुचियों पर ठहर गये..

फिर प्रीति ने उसके थोड़ा सा धक्का दे पलंग पर गिरा दिया और खुद उस पर लेट गयी.. उसकी चुचियाँ अब स्वीटी की चुचियों से टकरा रही थी. उसने अपनी जीब उसके मुँह मे दे चूसने लगी.. दोनो लड़कियाँ अपने दूसरे को अपने बाहों मे भीचे अपने बदन को दूसरे के बदन से रगड़ने लगी और अपनी जीव से जीब मिला एक दूसरे को चूम रही थी चाट रही थी… चूमते हुए दोनो एक दूसरे के

कपड़े उतारने लगी…

अब दोनो एक दूसरे के नंगे बदन को सहला रही थी.. मसल रही थी.. स्वीटी ने प्रीति की शानदार चुचिया अपने मूह मे कसी और भींचने लगी.. उसके निपल पर चिकोटी काटने लगी.. उन्हे मसल्ने

लगी…प्रीति ने अपना हाथ उसकी टॅंगो के बीच दे दिया और उसकी चूत को सहलाने लगी…

उन्माद मे स्वीटी ने अपनी टाँगे और फैला दी.. और थोड़ा उपर को उठ उसके निपल को अपने मुँह मे लिया और चूसने लगी. कभी वो पूरी चुचि को मुँह मे ले चूस्ति तो कभी उसके निपल को अपने दन्तो से काट लेती..

“ओ स्वीटी हाआँ ऐसे ही काटो …ओह कितना अछा लग रहा है” प्रीति सिसक उठी.

प्रीति अब अपनी दो उंगलियाँ उसकी चूत के अंदर डाल घुमाने लगी. फिर धीरे धीरे उसे उंगलियों से चोदने लगी.. स्वीटी खुद थोडा नीचे खिसकी और अपनी उंगलिया अपनी चचेरी

बेहन की चूत मे डाल उसे चोदने लगी.. उसने प्रीति के निपल को अपने मुँह से निकाला और उसकी चुचि को मसल्ते हुए बोली, “अब में तुम्हारी चूत को चूसोंगी… और आज चूस चूस कर

तुम्हारा पानी छुड़ा दूँगी”

“हां स्वीटी हां चूसो मेरी चूत को आज जी भर के चूसो बहुत आग लगी है इस चूत मे हाँ चूस” प्रीति उसकी चूत को कुरेदते हुए बड़बड़ा उठी. स्वीटी नीचे खिसकने लगी.. और उसका चेहरा ठीक प्रीति के चूत के नीचे आ गया.. वो बड़े प्यार से उसकी बिना बालों की सपाट चूत को देखने लगी. अपनी उंगलियाँ फिराने लगी…

“हां प्रीति में चाहती हूँ कि तुम मेरी चूत की झान्टे सॉफ कर इसे भी अपनी चूत्कि तरह चिकनी और सुन्दर बना दो..” वो अपनी जीब को उसकी चूत के बाहरी सतह पर फिराते हुए बोली…

स्वीटी उसकी चूत को मुँह मे भर चूसने लगी. और प्रीति अपनी चूत को उसके मुँह पर दबाते हुए अपनी चुचियो से खेल रही थी… स्वीटी ने पहले उसकी चूत को जी भर के चूसा फिर अपनी उंगलियों

से उसे फैलाते हुए अपनी जीब अंदर तक घुसा गोल गोल घुमाने लगी..और अंदर से बहते शहद को चाटने लगी..

प्रीति सीधी हो अपनी चचेरी बेहन की मुँह पर बैठी थी.. वो एक हाथ से उसके बालों को पकड़ अपनी चूत पर दबा रही थी तो दूसरे हाथ से अपनी चुचि को ज़ोर ज़ोर से मसल रही थी.. जोरों से सिस्कार्ते हुए उसकी चूत ने झड़ना शुरू किया…

फिर प्रीति ने स्वीटी से कहा कि अब वो उसकी चूत का रस पीना चाहती है.. लेकिन स्वीटी ने कहा कि वो पहले उसकी झांते सॉफ कर दे फिर उसकी चूत को चूसे.. थोड़ी देर सुसताने के बाद दोनो बाथरूम की ओर बढ़ गयी…. बाथरूम मे पहुँच प्रीति ने पहले उसकी चूत को गरम पानी से अछी

तरह साफ किया फिर उसपर शेविंग जेल लगाने लगी… थोड़ी ही देर मे उसकी चूत शेविंग जेल के झाग से ढक सी गयी…

फिर प्रीति ने शेविंग रेज़र उठाया और धीरे धीरे उसके झाँते सॉफ करने लगी… जब भी रेज़र स्वीटी की चूत की नाज़ुक त्वचा को स्पर्श करता वो चिहुक उठती.. एक अजीब सी सनसनी मच जाती थी

उसके शरीर मे…उसकी चूत गीली होने लगी. और वो सिसकारने लगी… “तुम्हारी हालत में समझ सकती हूँ स्वीटी.. में खुद बाहो गरमा गयी हूँ तुम्हारी चूत की झाँते सॉफ करते करते… सुलग रही है मेरी चूत अंदर से” प्रीति ने आखरी बार उसकी चूत पर रेज़र चलाते हुए कहा..

फिर उसने अछी तरह से उसकी चूत को एक बार फिर गरम पानी से धोया और फिर झुक कर अछी तरह देख कर बाकी की बचे बालों को सॉफ कर दिया.. प्रीति ने अब स्वीटी को अपने सामने खड़ा किया और और खुद उसके सामने नीचे घुटनो पर बैठ गयी.. और अब उसकी नई बिना बालों की चूत को देखने लगी… स्वीटी की चूत की पंखुड़िया किसी गुलाब की पंखुड़ियो की तरह चमक रही थी.. महक रही थी… वो अपनी उंगली को हल्के से फिराने लगी… फिर उसकी चूत को खोल उसने अपनी उंगली अंदर घुसा दी…

“स्वीटी तुमने तो अपनी इस प्यारी चूत को आज तक झांतों से ढक रखा था.. कितनी प्यारी और सुन्दर दीख रही है ये आज…मन कर रहा है कि इसे अपने मुँह मे भर खा जाउ” प्रीति ने अपनी उंगली को

अंदर बाहर करते हुए कहा..

तभी दोनो को ख्याल आया कि वो बाथरूम मे थी और रात के वक्त कोई भी आ सकता है.. इसलिए वो दोनो बिना आवाज़ किए वापस स्वीटी के कमरे मे आ गये… कमरे मे आते ही स्वीटी पलंग पर गिर गयी और प्रीति को खींच कर अपनी टाँगो के बीच कर दिया… प्रीति उसका इशारा समझ गयी और अपनी जीब को उसकी चूत पर फिराने लगी.. उसकी चूत को अछी तरह चारों ओर से चाटने के बाद.. उसने जीब अंदर घुसा दी.. फिर जीब को बाहर निकाल उसकी नंगी त्वचा पर चला उसे चिढ़ाने लगी.. उसे उतेज़ित करने लगी..फिर जीब को चूत के अंदर डाल उसे चोदने लगी.. स्वीटी सिसक रही थी..

“ऑश प्रीती ओ मुझे नही पता था कि बिना बालों की चूत चूसवाने मे इतना मज़ा आता है.. अब तो में राज के लंड को अपनी इस सपाट चूत मे लेने के लिए मरी जा रही हूँ” अगले दिन प्रीति की आँख काफ़ी सुबह खुल गयी.. उसने अपना मुँह तकिये मे छिपा फिर सोने की कोशिश की लेकिन उसे नींद नही आई… फिर उसका दिल किया कि क्यों ना वो राज के कमरे मे जा उसे तय्यार करे उसे चोदने के लिए या एक बार फिर स्वीटी की चूत का मज़ा लिया जाए…. लेकिन उसे पता था कि उसके चाचा चाची घर पर ही थे… उन्हे किसी बात का शक़ ना हो जाए इसलिए उसने मन बदल दिया…

तभी उसे ख़याल आया कि किस तरह कल रात उसके चाचा कंप्यूटर बैठ कर अपने लंड से खेल रहे थे.. उसने सोचा कि क्यों ना वो चाचा की स्टडी रूम मे जाकर कंप्यूटर पर देखे कि उसके चाचा क्या देख रहे थे.. वो दबे पावं अपने कमरे से बाहर निकली… स्वीटी ने स्टडी रूम मे आकर कंप्यूटर को ऑन किया और हिस्टरी सेक्षन की मदद से उन पॉर्न तस्वीरों को देखने लगी.. जिन्हे देख

कर उसके चाचा मूठ मार रहे थे…. उसने देखा की सभी तस्वीरें उसकी उम्र की लड़कियों की ही थी.. तस्वीरों को देखते देखते वो उत्तेजित हो गयी और खुद अपनी चूत मे उंगली डाल अंदर बाहर करने

लगी…उसकी समझ मे नही आ रहा था कि आख़िर उसके चाचा को क्या पसंद है. उसने फिर कंप्यूटर को टटोलना शुरू किया…तभी रीसेंट डॉक्युमेंट्स के सेक्षन मे उसकी नज़र एक फाइल पर पड़ी.. जिगयसा वश उसने वो वर्ड फाइल खोली तो देखा कि वो एक कहानी थी जिसे शायद उसके चाचा ने लीखा था.. ये कहानी एक आदमी की थी जो

अपनी भतीजी के पीछे पड़ जाता है.. कहानी का विषय प्रीति को पसंद आया और वो उसे पढ़ने लगी.. कहानी पढ़ते वक्त उसने महसूस किया कि कहानी की लड़की का किरदार ठीक उससे मिलता जुलता था..उसके बदन का विवरण भी ठीक उससे मेल ख़ाता था.. सिर्फ़ कहानी मे लड़की का नाम रानी रखा हुआ था… वो

सोचें लगी की कहीं ये कहानी उसके चाचा ने उसको को तो दिमाग़ मे रख कर नही लीखी…

उसका शक़ यकीन मे बदल गया जब उसने पढ़ा कि कहानी मे लड़की अपने चाचा के साथ हँसी मज़ाक कर उसे चिढ़ाती है.. ठीक उसी की तरह जैसे उसने कल रात खाने के टेबल पर अपने चाचा को चिढ़ाया था.. इस कहानी मे सिर्फ़ इतना फ़र्क था कि मर्द एक वृढ इंसान था और उसकी पत्नी का निधन हो चुका था… और अब वो अकेला ही अपनी दो बेटियों की परवरिश कर रहा था…एक रात अचानक उसकी छ्होटी बेटी उसके कमरे मे आकर उससे चिपक कर सो जाती है.. और सुबह वो देखता है कि उसकी एक टांग बेटी पर चढ़ि हुई थी.. हाथ उसकी छातियों पर टीके हुए थे और उसका खड़ा लंड उसकी जांघों से रगड़

खा रहा था…

कहानी अभी तक सिर्फ़ यहीं तक लीखी हुई थी.. प्रीति सोचने लगी कि काश उसे ये पता चल जाता कि आगे क्या होने वाला है.. वो सोचने लगी कि काश कल वो अपने चचे को पीछे से देखने की जगह स्टडी

मे घूस जाती और उनका लंड चूस देती.. वो सोचने लगी कि क्या चाचा का लंड भी लंबा और मोटा है… तभी उसे एक ख़याल आया उसने उस अधूरी कहानी को अपने एमाइल आईडी पर मैल दिया… और मुस्कुराने लगी.. अब वो इस कहानी को पूरा कर अपने चाचा को वापस ईमेल कर उन्हे चौंका देगी और उन्हे बताएगी कि आगे की कहानी उसके दिल के हिसाब से होनी चाहिए… तभी प्रीति को स्टडी रूम के बाहर से कदमों की आवाज़ सुनाई डी.. उसने झट से कंप्यूटर बंद किया और बाहर हॉल मे आ गयी…

जब सुबह घर के बाकी लोग चले गये और स्वीटी और शमा अकेले थे तो स्वीटी ने अपनी बेहन से पूछा,, “और सुनाओ कैसी गयी कल की रात क्या तुम्हारी चूत ने पानी छोड़ा?” “एम्म्म” उसने जवाब दिया.. “क्या उसके भी लंड ने पानी छोड़ा?” “हां” “कहाँ तुम्हारी चुचियों पर या फिर और कहीं?” स्वीटी ने मुस्कुराते हुए पूछा. “नहीं मुझ पर तो नही हां…” शमा ने अपनी बात अधूरी छ्चोड़

दी… वो स्वीटी को चिढ़ाना चाहती थी..

“तो फिर क्या उसने दीवान को गंदा किया या फिर ज़मीन को?” स्वीटी ने झल्लाते हुए कहा. “अरे पगली मेरा मतलब था कि बहोत सारा मेरे मुँह मे….” “अरे वाह क्या बात है.. तुमने फिर उसका लंड चूसा.. में पहले ही जानती थी कि मेरी बेहन से रहा नही जाएगा… अब तुम्हे उससे चुदवाने की कोशिश करनी चाहिए? सही कह रही हूँ उसके मोटे लंबे लंड से चुदवा कर तुम्हे बहोत मज़ा आएगा” स्वीटी ने अपनी बेहन से कहा. “हां में भी यही सोच रही थी” “हाँ वो तुम्हे चोद कर बहोत खुस होगा” स्वीटी ने कहा..

“हाँ मुझे भी ऐसा ही लगा कि उसे खुशी हुई है” कहकर शमा ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी और अपनी बेहन के चेहरे पर आए भावों को देखने लगी… “हे भगवान.. में भी कितनी बड़ी बेवकूफ़ हूँ मुझे पहले ही समझ जाना चाहिए था… अब देखना जब प्रीति को पता चलेगा तो वो भी अपनी भाई की तरह तुम्हारी चूत का स्वाद चखना चाहेगी” स्वीटी ने कहा.

“हां लेकिन मुझे नही लगता कि वो ऐसा कर पाएगी” शमा ने जवाब दिया. “अरे तुझे उसकी जीब का कमाल नही पता… एक बार उससे चूत चूस्वा लेगी तो दोबारा ना नही कर पाएगी.” स्वीटी ने कहा, “या फिर लगता है कि मुझे तुम्हे सीखाना पड़ेगा की चूत कैसे चूसी जाती है ?”

“देखो स्वीटी किसी लड़के चुदवाना अलग बात है और किसी लड़की के साथ सेक्स ये में सोच भी नही सकती.. प्लीज़ ज़िद मत करना हाँ भविश्य का में कह नही सकती” शमा ने अपनी छोटी बेहन से कहा. तभी उनके मम्मी पापा घर आ गये और दोनो बहने अपने अपने काम मे लग गयी.राज और प्रीति जब घर पहुँचे तो उनके मम्मी डॅडी घर पर उनका इंतेज़ार कर रहे थे. और दोनो ही खुश नज़र आ रहे थे…

राज और प्रीति घर मे कुछ बँध से गये थे.. मम्मी पापा के घर मे होते हुए उन्हे मन मानी करने के आज़ादी नही मिल पा रही थी… अब वो इंतेज़ार कर रहे थे उस दिन का जब उन्हे एक बार फिर घर मे एकांत मिले… प्रीति सोचने लगी कि कैसे उसने स्वीटी की झांते सॉफ की थी और जब वो दोबारा उससे मिलेगी तो क्या उसकी चूत वैसे ही होगी… और क्या उसकी नई बिना बालों वाली चूत देख पाएगा… उसे चोद पाएगा…

कुछ दीनो बाद नाश्ते की टेबल पर वसुंधरा ने कहा, “मुझे एक हफ्ते के लिए काम से सहर के बाहर जाना है” राज और प्रीति की नज़रे एक दूसरे की ओर गयी…बड़ी मुश्किल से दोनो ने अपनी मुस्कान छुपाई… अब उन्हे किसी तरह अपने पिताजी को रास्ते से अलग करना था फिर वो दोनो खुल कर मज़ा कर सकते थे.. राज ने अपना ईमेल चेक किया तो उसने देखा कि गीली चूत से ईमेल आया था कि कल की रात वो दिन है जब वो दोनो मिलकर चुदाई कर सकते है… उसने प्रीति से कह दिया कि कल की रात वो अपने दोस्त के यहाँ गुज़ारेगा…. प्रीति को राज की बात सुनकर थोड़ी निराशा हुई.. लेकिन वो कुछ कर भी तो नही सकते थे.. उनके पिताजी थे कि घर से बाहर ही नही जा रहे थे.. गीली चूत ने अपने होटेल का नाम पता और रूम नंबर उसे लीख भेजा था.

अगले दिन राज प्रीति से विदा लेकर निकल गया.. और प्रीति अपने कमरे मे आ गयी और उसने अपने चाचा वाली कहानी को पूरा करने की सोच लिया….वो सिर्फ़ लाल रंग का छोटा टॉप और पॅंटी पहने कुर्सी पर बैठ

कहानी को पूरा करने मे लग गयी… वो जैसे जैसे लिखती जा रही थी वो खुद गरमा रही थी…और आख़िर वो कहानी को एक ऐसे मोड़ पे लाई..जहाँ वो छोटी लड़की उत्तेजना और गर्मी से एक छीनाल बन अपने

बाप का लंड चूस्ति है और फिर जहाँ वो बैठ कर कहानी लीखा करता था उसी टेबल पर उसे चोदने देती है…. कहानी लीखते हुए वो अपनी चूत मे उंगली करती रही कि क्या उसे ये कहानी अपने चाचा

को वापस भेजनी चाहिए.. वो क्या सोचेंगे… क्या वो पढ़ कर खुश होंगे या फिर गुस्से से भर जाएँगे… वो थोडा और सोचना चाहती थी इसलिए वो अपने कमरे से निकल किचन से अपने लिए कुछ ड्रिंक लाने के लिए उठी… देव उस समय किचन मे था..जब उसकी बेटी ने किचन मे कदम रखा…देव ने देखा कि उसकी बेटी के खड़े निपल उसकी पतली टी-शर्ट से छलक रहे थे… उसे लगा कि उसे इस तरह अपनी बेटी को नही देखना चाहिए… लेकिन वो अपनी निगाहों को हटा नही पाया…. प्रीति के तो तन बदन मे आग लगी हुई थी.. उसे पता था कि उसके पिताजी तिरछी नज़रों से उसे देख रहे है… और ना जाने क्यो वो अपनी हरकतों से उन्हे चिढ़ाने लगी.. देव के कड़क होते लंड का उभार उससे छिपा ना रहा… उसे पता था कि घर मे वो दोनो अकेले ही है… उसका दिल तो कर रहा था कि वो रात को अचानक अपने बाप के कमरे मे जाकर उनका लंड पकड़ ले और ज़ोर से चूसे…. पर वो ऐसा कर नही सकती थी…

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