परिवार हो तो ऐसा – Update 12 | Erotic Family Incest Story

परिवार हो तो ऐसा - Family Incest Saga
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प्रीति को इतना मज़ा आ रहा था कि उत्तेजना मे उसकी चूत गीली होती जा रही थी…. आज उसने जान बुझ कर पॅंटी नही पहनी थी.. और वो सोचने लगी की चूत से बहते रस से उसकी स्कर्ट पर गीला धब्बा

बन गया होगा… प्रीति जैसे ही टेबल पर से पानी का जग उठाने झुकी तो उसकी चुचियाँ टेबल के किनारे से टिक गयी जिससे उसके खुले टॉप मे से उसकी चुचि की घाटियाँ नज़र आने लगी.. उसने देखा कि उसके चाचा मोहन की नज़रे उसकी चुचियों पर ही टिकी हुई थी.. उसका बदन हल्के से कांप उठा…

आज उसने अपने चाचा को चिढ़ाने की ठान ली. जब उसने देखा कि उसे कोई नही देख रहा सिर्फ़ उसके चाचा की नज़रे उसपर टीकी हुई है तो उसे टॉप के उपर से अपने एक निपल को पकड़ा और खींच कर छोड़

दिया… उसके चाचा मोहन की नज़रे प्रीति की इस हरकत से फटी की फटी रह गयी… अपने आप मे मुस्कुरा के प्रीति फिर अपनी टांग स्वीटी की टांग पर चढ़ाने लगी तो उसने महसूस किया कि इस बार स्वीटी थोड़ा आगे को खिसक आई थी और उसने अपनी टाँगे फैला दी थी.. जिससे उसे अपनी टाँगे उपर ले जाने मे तकलीफ़ ना हो… उसका पावं आराम से उसकी पॅंटी से टकराया और वो अपने अंगूठे को उसकी चूत पर घिसने लगी.. तभी शमा ज़ोर से खाँसी तो प्रीति ने अपनी टांग नीचे गीरा दी.. और हल्के से शर्मा गयी.. वो समझ गयी कि शमा उसकी हरकत को देख रही थी…

राज स्वीटी और प्रीति के चेहरों पर आई शरम को देख हँसने लगा तो प्रीति ने एक बार फिर उसके लंड को पकड़ ज़ोर से मसल दिया… सभी ने मिल कर खाना ख़तम किया… मोहन और नेहा ने चारों

बच्चो को बर्तन और किचन सॉफ करने को कहा और टेबल से खड़े हो गये … चारों उनकी आग्या को मानते हुए किचन की ओर चले गये..

जैसे ही चारों बच्चे किचन की ओर जाने लगे.. नेहा की नज़रे राज के गातीले शरीर पर जा टीकी..उसकी नज़रे फिसल कर उसकी जांघों के बीच आ गयी जहाँ उसका खड़ा लंड शॉर्ट्स मे एक तंबू बनाए हुए

था…. “हे भगवान क्या वासू को पता है कि उसने कैसे बेटे को जनम दिया.. है जिसका लंड शायद सबसे बड़ा लंड होगा..” उसने मन ही मन सोचा… उसने ज़बरदस्ती अपनी नज़रे उसके लंड पर सेहटाई और हॉल मे टीवी देखने चली गयी… मोहन अपने स्टडी रूम मे आ गया जहाँ उसका कंप्यूटर उसका इंतेज़ार कर रहा था…उसकी भतीजी की हरकतों ने उसे बेचैन कर दिया था.. उसने मन बना लिया था कि आज वो इंटरनेट पर उसकी भतीजी की उम्र की लड़कियों को नंगा देख अपने लंड को मूठ मारेगा… उसकी

समझ मे नही आ रहा था कि उसकी भतीजी ने ये हरकत क्यों की थी. और जितना वो सोचता उसका लंड उतना ही अकड़ते जा रहा था…

शमा सिंक पर झुकी बर्तन सॉफ कर रही थी.. कि राज उसके पीछे आया और अपने लंड को उसके चूतादो पर रगड़ने लगा… तभी प्रीति अपनी चुचियों को उसकी पीठ पर रगड़ने लगी…

राज को उमीद थी कि शमा उसे अपने पीछे से हटा देगी.. पर शमा थी कि उसे हटाने की जगह फँसने लगी.. और अपनी गंद को और पीछे की ओर धकेल दिया..उसका लंड और जोरों से मचलने लगा..

बर्तन सॉफ करते हुए स्वीटी राज, और प्रीति एक दूसरे के बदन से अपना बदन रगड़ छेड़ छाड़ करते रहे…और बीच बीच मे एक दूसरे के अंगों को पकड़ भींच देते… तभी प्रीति पीछे से अपने बदन को शमा के बदन से रगड़ते हुए ज़ोर से बोली, “शमा मुझे तुम्हारी चूत देखनी है” “लेकिन मुझे नही लगता कि तुम देख पओगि” शमा ने हंसते हुए कहा..

“अरे रानी अभी तुम मुझे जानती नही हो.. में ऐसे हालात पैदा कर दूँगी कि तुम अपनी चूत मुझे देखाने पर मजबूर हो जाओगी” प्रीति ने हंसते हुए जवाब दिया और एक प्लेट लेकर उसे धोने लगी… अब वो सोचने लगी कि किस तरह शमा की चूत देखी जाए.. उसे वो सीन याद आ गया जब उसने शमा को चूमा था.. तभी प्रीति को एक आइडिया आ गया…

प्रीति किचन के एक दम कोने मे खड़ी हो गयी.. जहाँ से उसपर किसी की नज़र नही पड़ सकती थी… फिर उसने अपनी स्कर्ट उठा दी और अपनी नंगी चूत राज और स्वीटी को दीखाने लगी… “हे भगवान प्रीति तुम्हे कुछ शरम है की नही.. अपनी स्कर्ट नीचे करो” शमा हंसते हुए बोली.. वो प्रीति की इस हरकत से चौंक पड़ी थी. “क्यों नीचे करे ये? मुझे तो देखने मे और इसे छूने मे बहोत मज़ा आएगा.. ” स्वीटी अपनी चचेरी बेहन के पास खिसक कर बोली और अपनी उंगलियाँ उसकी चूत पर फिराने लगी.. “हां हां मज़े लो… और जब मम्मी या पापा यहाँ आ जाहेंगे और तुम दोनो को ऐसे हालत मे पकड़ लेंगे तब मुझे भी बहोत मज़ा आएगा.” शमा ने फिर हंसते हुए कहा.

प्रीति और स्वीटी सोच मे पड़ गये.. लेकिन स्वीटी रुकी नही उसने अपनी उंगली प्रीति की चूत मे घुसा दी और गोल गोल घूमाने के बाद बाहर निकाल चूसने लगी.. प्रीति ने भी अपनी स्कर्ट नीचे नही की बल्कि उसे और चढ़ा के किनारे मे ठूंस दी.. जिससे की वो नीचे ना गिर जाए.. “में अपनी

स्क्रिट तब तक नीचे नही करूँगी जब तक कि तुम मुझे अपनी चूत दीखाने का वादा ना करो” प्रीति ने कहा. “मत करो मुझे क्या फरक पड़ता है” शमा ने जवाब दिया.. “फिर से सोच लो?” प्रीति ने कहा… तभी उन्हे किचन की ओर आते कदमों की आवाज़ सुनाई पड़ी.. “प्रीति कोई आ रहा है अब तो स्कर्ट नीचे कर लो” शमा ने कहा.

“आने दो में कह दूँगी की शमा ने मेरी स्कर्ट उपर की थी और मेरी चूत देख रही थी” प्रीति ने हंसते हुए कहा.. “ये तो ब्लॅक मेलिंग है” शमा गुस्से मे बोली.. तभी कदमो की आवाज़ और नज़देक आ गयी.. “तो वादा करो मुझसे” प्रीति ने कह कर अपनी नज़रे शमा पर गढ़ा दी… “ठीक है बाबा दीखा दूँगी” शमा ने कनतलते हुए कहा.. प्रीति ने अपनी स्कर्ट नीचे की और अपनी चूत को ढक लिया तभी उसकी चाची नेहा किचन मे आई वो अपने लिए कोल्ड ड्रिंक लेने आई थी.. उसने फ्रिड्ज से कोल्ड ड्रिंक की बॉटल ली और वापस हॉल मे टीवी देखने चली गयी… “ये हुई ना बात.. में तो मरी जा रही हूँ देखने के लिए” प्रीति ने हंसते हुए कहा… चारों ने मिलकर बाकी का काम ख़तम किया और हॉल मे आ गये… जैसे ही वो हॉल मे दाखिल हुए नेहा की नज़रे एक बार फिर अपने भतीजे की खड़े लंड के उभार पर टीक गयी.. उसके लंड का तनाव बिल्कुल भी कम नही हुआ था वो सोचने लगी कि इसका लंड सिर्फ़ दीखने मे ही बड़ा है या फिर ये चुदाई भी मस्त करता है.. थोड़ी देर बाद प्रीति टाय्लेट जाने के लिए उठी. टाय्लेट जाते हुए वो स्टडी रूम के बाहर से गुज़री जहाँ उसके चाचा मोहन काम कर रहे

थे.. दरवाज़ा खुला हुआ था और चाचा उसकी ओर पीठ किए कंप्यूटर पर काम कर रहे थे.. प्रीति ने अपनी नज़रे अंदर डाली तो देखा कि उसके चाचा अपने लंड को पॅंट के अंदर अड्जस्ट कर रहे है.. वो

मुस्कुरा पड़ी..

टाय्लेट से वापस लौटते वो दरवाज़े पर ठहर अंदर झाँकने लगी.. उसकी नज़र कंप्यूटर स्क्रीन पर उठी तो उसने देखा की स्क्रीन पर उसकी ही उमर की लड़की की नंगी तस्वीर थी.. उसके चाचा कुर्सी पर पसरे हुए थे और अपने लंड को बाहर निकाल ज़ोर ज़ोर से मूठ मार रहे थे.. वो अपने चाचा के लंड को देखना चाहती थी लेकिन उसकी पीठ होने की वजह से वो देख नही पा रही थी.. प्रीति वैसे ही खड़ी देखती रही और मोहन स्क्रीन पर फोटो बदल बदल अपने लंड को मुठियाते रहा.. प्रीति ने अपना हाथ अपनी स्कर्ट के अंदर डाल दिया तभी उसे एहसास हुआ कि उसे ढूनडता हुआ कोई भी आ सकता है.. वो वापस हॉल मे आ गयी..

टीवी पर चलता प्रोग्राम ख़तम हुआ तो नेहा उठ कर सोने चली गयी… चारों बच्चे टीवी देखते रहे… थोड़ी देर बाद जब प्रीति को ये विश्वास हो गया कि हाल अब उन्हे देखने कोई नही आएगा.. वो शमा से अपना वादा पूरा करने की ज़िद करने लगी.. वो उसे अपनी चूत दीखाने को कहने लगी.. शमा पीछे हटना चाहती थी.. लेकिन राज और स्वीटी उसके बगल मे बैठ गये और ज़िद करने लगे.. प्रीति नीचे उसकी टाँगो के बीच बैठ गयी… अब उसके हाथ उसकी टाँगो पर रेंगते हुए उपर की ओर बढ़ने लगे और उसकी जींस के बटन और ज़िप को खोलने लगी…

प्रीति ने थोड़ा उपर उठ उसकी जीन्स नीचे खिसका दी. शमा की नीले रंग की कॉटन पॅंटी दीखने लगी..प्रीति ने अपनी नज़रे राज पर डाली जो अपने सूखे होठों पर जीब फिराते हुए शमा की धकि चूत देख रहा था.. फिर प्रीति ने उसकी पॅंटी को किनारे से पकड़ा और नीचे खिसकाने

लगी.. शाम की नंगी चूत अब तीनो के सामने पहली बार आज़ाद और खुली थी.. राज की आँखे तो उसकी चूत पर ही ठहरी हुई थी.. शमा ने अपनी झांते बहोत ही अछी तरह तराश रखी थी. और काट कर छोटी कर रखी थी.. “राज अब हमारी शमा को अपनी ख़ासियत बताओ.. बताओ इसे की लड़कियों की गीली पॅंटी के साथ तुम्हे क्या करना पसंद है.” प्रीति ने शमा की गीली पॅंटी राज की ओर उछालते हुए कहा.

राज ने शमा की पॅंटी पकड़ी और अपनी शॉर्ट्स नीचे उतार दी.. उसका घोड़े जैसे लंड उछल कर बाहर आ गया.. शमा तो राज के लंड को देखते ही रह गयी “सच मे कितना सुन्दर और मोटा लंड है.. कब इसे दोबारा देखने के लिए तरस रही थी..” शमा ने अपने आपसे कहा. राज फिर दीवान पर बैठ गया और उसकी पॅंटी को अपने खड़े लंड पर चारों ओर लपेट मूठ मारने लगा..वो अपने लंड पर शमा की पॅंटी को उपर नीचे करने लगा..

शमा की नज़रे तो राज पर टीकी हुई थी और प्रीति अपनी उंगलियों को उसकी चूत पर फिराने लगी. शमा का बदन कांप उठा उसे लगा जैसे की उसकी चूत मे चईटियाँ रेंग्नी शुरू हो गयी है. “हे प्रीति बदमाश.. मेने सिर्फ़ देखने का वादा किया था.. तुम सिर्फ़ देख सकती हो छू नही सकती” शमा ने प्रीति से कहा. “यार इतनी प्यारी चूत को देख मुझसे रहा नही गया.. एक काम करो तुम अपनी चूत से खेलो…इससे तुम अपने आपको मज़ा दे पओगि और राज के साथ साथ झाड़ जाओगी.. में और स्वीटी सिर्फ़ देखेंगे कुछ नही करेंगे ये वादा है, क्यों में ठीक कह रही हूँ ना स्वीटी” प्रीति ने शमा से कहा.

“प्रीति प्लीज़ समझा करो ना मेने पहेल ऐसा कुछ किया नही है..” शमा ने असहाय स्वर मे कहा.. “फिर ठीक है ऐसा करते हैं कि में और स्वीटी कमरे से बाहर चले जाते है… फिर तुम और राज अकेले मे शायद कुछ कर सको” प्रीति ने कहा.

शमा की नज़रे राज के मोटे लंबे लंड पर ठहर गयी.. जिसे राज उसी की पॅंटी से लपेट मूठ मार रहा था.. उसे उस रात का नज़ारा याद आने लगा जब उसने इसी लंड को अपने गले तक लेकर चूसी थी…

कितना अछा लगा था उसका लंड चूसने मे..फिर उसे याद आया की जब राज ने अपने लंड को उसकी गंद पर रगड़ा था तो गरम लंड के स्पर्श ने उसे पागल सा कर दिया था… “ठीक है” शमा ने धीरे से कहा..प्रीति ताली बजाते हुए दीवान पर से खड़ी हुई और स्वीटी को भी हाथ पकड़ खड़ा कर दिया..

प्रीति और स्वीटी के जाते ही उसने राहत की सांस ली.. पता नही क्यों वो अपनी दोनो बहनो के सामने खुल नही पा रही थी.. राज और शमा अब एक दूसरे के सामने मुँह किए हुए थे…राज ने देखा

की शमा ने अपनी टाँगे फैला दी थी और अपनी उंगलियों को अपनी चूत पर फिराते हुए अपनी चूत को थोड़ा फैलाया और अपनी बीच की उंगली चूत मे घुसा दी.. अपनी उंगली को अछी तरह गीला करने के बाद उसे अपनी चूत के दाने पर फिराने लगी.. रस से भीग उसकी चूत चमकने लगी.. . राज हैरत भरी नज़रों से उसकी चूत को देख रहा था….

अब शमा अपने भाई को देखने लगी.. जो उसकी पॅंटी को अपने लंड पर लपेट मूठ मार रहा था.. वो भी अपनी दो उंगलियाँ चूत के अंदर डाल अंदर बाहर करने लगी.. उसकी मुँह से सिसकारियाँ फूटने लगी..

‘श ऊ ऊ हाआँ ऑश श” शमा की नज़रे राज पर टीकी हुई थी.. वो देख रही थी कि उसके लंड के मुँह पर कुछ वीर्य की बूंदे नज़र आती और फिर अचानक उसकी पॅंटी से धूल जाती.. फिर कुछ बूंदे नज़र आती फिर खो जाती… तभी उसे याद आया कि राज उसकी बेहन स्वीटी और अपनी खुद की बेहन

प्रीति को चोद चुका है.. इस ख़याल ने उसकी चूत मे ज़ोर की खुजली पैदा कर दी.. वो ज़ोर ज़ोर से अपनी उंगली अंदर बाहर करने लगी.. जितना वो राज को अपनी पॅंटी से लपेट लंड को मूठ मारते देखते उसकी चूत मे उतनी ही खुजली ज़ोर पकड़ लेती.. वो सिसकते हुए और ज़ोर से उंगलियाँ अंदर बाहर करने लगी.. ..

राज उसे चोदना चाहता है वो अछी तरह समझ रही थी.. वो उसकी आँखों मे से झलकती तड़प को पढ़ रही थी.. और जितना वो सोचती उसकी खुद की ख्वाइश उतनी ही बढ़ती जा रही थी.. तभी राज के लंड

पर फिर वीर्य की बूंदे चमकी.. शमा बेकाबू हो गयी… और उसने वही किया जो उसका दिल चाह रहा था..

शमा ने खिसक कर अपनी जीब उसके लंड के मुँह पर रख चमकती बूँदो को चाट लिया… वो खुशी से चिहुक्न पड़ी.. राज ने अपना लंड थोड़ा आगे किया और शमा ने अपना मुँह खोलते हुए उसके लंड को अपने मुँह मे ले लिया..

राज की सोच के विपरीत शमा उसके लंड को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी… वो कभी अपनी जीब को उसके मुँह पर फुदकती तो कभी जोरों से होठों से भीच अपने गले तक ले लेती.. राज तो जैसे पागल हो गया.. उसने

अपने दोनो हाथ उसके सिर पर रखे और उसके मुँह मे धक्के मारने लगा…

“ऑश शमा ऑश हां चूसो और चूसो ओ” तभी शमा ने उसके लंड को अपने मुँह से निकाल दिया. और दीवान पर पसर सी गयी.. “हमारी बहने सही कह रही थी” उसने अपनी टाँगो को

फैलाते हुए कहा. “और क्या कह रही थी वो? ” राज ने पूछा. “यही कि इतने मोटे और लंबे लंड को कोई लड़की ज़्यादा देर तक सिर्फ़ देख नही सकती.. वो खुद बा खुद चुदने को तय्यार हो जाएगी.. क्या

पता फिर मौका मिले या ना मिले” शमा उसकी गोद पर चढ़ उसके लंड को अपनी चूत पर लगा नीचे बैठते हुए बोली. “श शमा तुम्हारी चूत तो किसी भट्टी की तरह सुलग रही है..

ओःःः मज़ा आ गया” राज अपनी गंद को और उठा सिसक पड़ा… शमा सिर्फ़ मुस्कुरा दी और नीचे देखने लगी.. किस तरह उसके चचेरे भाई का मोटा और लंबा लंड उसकी चूत के अंदर बाहर हो

रहा था.. फिर वो अपनी दोनो चुचियों को मसल्ते हुए उछल उछल कर धक्के मारने लगी अपनी चूत की गहराई को देख उसे विश्वास नही हो रहा था कि राज का इतना मोटा और लंबा लंड उसकी छोटी सी चूत मे पूरा का पूरा घूस अंदर बाहर हो रहा था… वो और ज़ोर ज़ोर से उसके लंड पर उछलने

लगी… वो अपने आप को कोस रही थी कि पहले उसने इस लंड को अपनी चूत मे क्यों नही लिया.

वो जोरों से उसके लंड पर उछलने लगी.. और फिर अपना हाथ अपनी चुचियों पर से हटा उसने नीचे किया और अपनी चूत के आस पास फिराने लगी.. फिर उसने राज के लंड के साथ अपनी दो उंगलियाँ चूत के

अंदर घुसा दी और सिसकने लगी..

“ओ राज तुम्हारा लंड कितना अछा है.. में ही बेवकूफ़ थी … ऑश

हां चोदो और ज़ोर से अपने लंड को अंदर तक घुसा दो.. ओ हां ” “उसकी चूत झड़ने के लिए फड़फड़ने लगी. वो ज़ोर से उपर उठ उसके लंड पर और ज़ोर से बैठ गयी और अपनी गंद को गोल गोल घुमाने लगी.. तभी उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया… फिर निढाल हो वो उसके लंड पर से उत्तर गयी..

“ओह शुक्रिया राज मुझे नही पता था कि तुम्हारे साथ इतना मज़ा आएगा”

“शुक्रिया तो मुझे कहना चाहिए था.. में तो खुद हैरान हूँ कि आज तक तुमने मेरा लंड अपनी चूत मे क्यों नही लिया” राज ने जवाब दिया.

शमा आज के पहले भी चुदाई का मज़ा ले चुकी थी.. लेकिन उसकी आँखे थी जो राज के लंड से हटाए नही हट रही थी.. आज तक उसने अपनी ही चूत के रस से भीगे लंड को कभी नही चूसा था… और

अब वो समझ चुकी थी कि उसकी जगह प्रीति या स्वीटी होती तो वो भी यही करती.. उसने झुक कर राज के लंड को अपने मुँह मे ले लिया और चूसने लगी….

राज का लंड अभी झाड़ा नही था और वो बेताब था झड़ने के लिए.. वो दीवान पर पसर शमा को अपना लंड चूस्ते देखने लगा… राज हाथ बढ़ा कर उसके सिर पर हाथ रख उसके बालों मे अपनी उंगलियाँ फिराने लगा… शमा ने नज़रे उठाकर उसे देखा..

राज का लगा कि अब उससे रुका नही जाएगा तो वो अपनी कमर उठा अपने लंड को और अंदर तक घुसाने लगा.. और उसके मुँह को चोदने लगा.. शमा को मज़ा आ रहा था.. उसने अपना पूरा मुँह खोल दिया.. और राज का लंड उसके गले के तालू से छूता तो वो सिहर उठती.. राज का लंड आकड़ा और एक ज़ोर की पिचकारी छूट कर उसके गले से टकराई.. .. शमा बड़ी मुश्किल से अपने आपको संभाल पा रही थी. उसने जल्दी से अपने कपड़े उठाए और राज को चूम कर अपने कमरे मे भाग गयी ..

राज अपनी जानदार चचेरी बेहन को भाग कर जाते देख रहा था.. उसका दिल तो किया कि वो उसके पीछे भाग कर उसे पकड़ ले.. लेकिन फिर समय की नज़ाकत को समझते हुए उसने अपने आप को रोक लिया…

स्वीटी और प्रीति जैसे ही राज और शमा को अकेले कमरे मे छोड़ बाहर निकली स्वीटी प्रीति से बोल उठी, “प्रीति में चाहती हूँ कि आज तुम मेरे लिए कुछ करो? ” “क्या करवाना चाहती हो मुझसे?” प्रीति ने पूछा. “में चाहती हूँ कि तुम मेरी झान्टे साफ कर मेरी चूत को भी अपनी

चूत की तरह सपाट और चिकना बना दो” स्वीटी ने जवाब दिया..

“सच मे?” प्रीति ने कहा, “मुझे ये करते हुए बहोत अछा लगेगा.. लेकिन अचानक ये चूत की झांते सॉफ करने का ख़याल कैसे आया?” “जब मेने पहली बार तुम्हारी सपाट चूत देखी थी तभी से में

सोच रही थी.. लेकिन आज रात तुम्हारी सपाट चूत देखकर मुझसे रहा नही गया… और तभी मेने सोच लिया कि आज में अपनी झांते तुमसे सॉफ करवा के रहूंगी” स्वीटी ने जवाब दिया.

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