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Update 131

सोफे पर अपनी गोद में ही बिठाए उसके नाम मात्र के कुर्ते के उपर से ही उसकी चुचियों को चूसने लगा… आह.. क्या महक आरहि थी उसके बदन से,

शायद कोई मस्त खुश्बू वाला सेंट मार के आई थी मेरी जानेबहार..

उसके कुर्ते का कपड़ा मेरी लार से गीला हो गया था, अभी हम कुछ और आगे बढ़ते, कि डोर बेल एक बार फिर से चीख पड़ी..

शाकीना हड़बड़ा कर मेरी गोद से उठ खड़ी हुई और बोली- इस वक़्त कॉन आ मरा मुआ..? और वही सोफे पर बैठ गयी, मे गेट खोलने चला गया…

मैने जैसे ही गेट खोला…. वाउ ! एक और धमाका…! आईशा चेहरे पर मुस्कान लिए हुए गेट पर खड़ी थी.

मैने चोन्कते हुए कहा- अरे ! आईशा तुम ? और इस वक़्त..? कोई काम था..?

वो इतराते हुए बोली – अच्छा अब हम बिना किसी काम के हुज़ूर के पास नही आ सकते..?

मैने कहा – नही ! नही ! ऐसी कोई बात नही है, ये भी तुम्हारा ही घर है, कभी भी तशरीफ़ ला सकती हो, लेकिन इस वक़्त.. सोचा कोई काम होगा..?

वो – हां काम तो है, लेकिन यहाँ गेट पर खड़े-2 नही हो सकता, अब अंदर तो आने दीजिए…

मे साइड में हो गया और वो हॉल की तरफ बढ़ गयी, मैने गेट बंद किया और उसके पीछे-2 हॉल में आ गये.

शाकीना को देख कर वो चहकने लगी… ओह्ह्ह.. तो जनाब इसलिए नही आने दे रहे थे हमें, अब हुज़ूर हमसे क्या परदा, हम तो बस इसी गुमान में यहाँ आए थे कि शायद शाकीना जान की कुछ झूठन ही मिल जाए.

ये कहते हुए वो भी उसकी बगल में बैठ गयी, उसकी बात पर शाकीना भी खिल खिलाकर हंस पड़ी, और फिर दोनो ने एक दूसरे को किस किया.

जब में एक सिंगल सीट सोफे पर बैठ गया तो आईशा बोली- अब हुज़ूर हमसे कोई गुस्ताख़ी हुई जो आप हमसे दूर-2 बैठे हैं.

अब आ भी जाइए यहीं, काफ़ी जगह है यहाँ पर भी और ये कह कर उन दोनो ने अपने बीच में मेरे लिए जगह बनाई और मे हंसते हुए उन दोनो के बीच जाके बैठ गया.

मेरे बैठते ही उन दोनो ने मेरे गालों को चूम लिया, मैने भी दोनो की कमर में हाथ डाल कर अपने से सटा लिया.

आईशा पहले से भी और ज़्यादा गदरा गयी थी, शाकीना से ज़्यादा तो वो पहले से ही थी.. उन दोनो के सीने की छुअन मुझे रोमांचित कर रही थी, मेरा मुसलचंद मेरे शॉर्ट में उच्छल कूद मचाने लगा.

आशिया मेरे लंड को सहलाते हुए बोली– अशफ़ाक़ साब ! वैसे मे यहाँ आपको कुछ खबर देने ही आई थी…!

मे उसके होठ चूम कर सवालिया नज़रों से उसको देखने लगा…!

आज जनरल को मैने किसी से बात करते हुए सुना था, वो कह रहा था कि हाफ़िज के दो आदमी आज नेपाल के रास्ते आज़मगढ़ पहुँचने वाले हैं,

वहाँ उसके दो आदमी जिनमें एक लड़की है पहले से ही मौजूद हैं, फिर वो चारों मिलकर गुजरात जाएँगे.

उसकी बात सुनकर मैने उसके होठों को चूम लिया और बोला- शुक्रिया मेरी जान आज तो तुमने दिल जीत लिया मेरा…! कह कर मैने उसकी चूत को हाथ से सहला दिया…

वो सिसकी लेते हुए बोली – सीईईई… आअहह…लेकिन आप इतने खुश क्यों हुए..? आपको हिन्दुस्तान की खबर से इतनी खुशी क्यों हुई…?

मे उसके सवाल पर गड़बड़ा गया… ग़लती से मेरे मुँह से ये क्या निकल गया…?

लेकिन फिर बात संभालते हुए बोला- कश्मीर की आज़ादी के लिए हमें हिन्दुस्तान से भी वास्ता तो रखना ही पड़ेगा.. वो मुल्क ही हमारा मददगार साबित हो सकता है..

हमम्म… सो तो है..इतना कह कर उसने मेरे कड़क हो गये मूसल को मसल दिया.

फिर हम तीनों उठकर बेडरूम में आ गये, और अपने-2 कपड़े उतार कर बेड पर कूद पड़े..

अब मे बीच में लेटा था और वो दोनो भूखी शेरनिया मेरे लंड पर टूट पड़ी,

वो दोनो मेरी तरफ अपनी-2 गान्ड करके बारी-2 से मेरा लंड चूस रही थी और मे उन दोनो की रसीली गान्ड और चुतो को उंगली से खोद रहा था.

लंड अब लिमिट से ज़्यादा शख्त हो गया, तो मैने आईशा को अपने उपर बैठने को कहा और वो अपनी गदर गान्ड रखकर मेरे लंड के उपर बैठ गयी,

आँखें बंद करके सीसियाती हुई धीरे-2 मेरा पूरा लंड अपनी चूत में निगल गयी.

शाकीना मेरे होठों पर लगी हुई थी और उसका एक हाथ मेरे कड़क हो चुके निप्प्लो को उंगली से कुरेद रहा था. मेरा एक हाथ आईशा की चुचि मसल रहा था, दूसरा शाकीना की गान्ड को सहलाते हुए चूत तक पहुँच जाता.

आईशा मस्ती में चूर मेरे लंड पर बेतहाशा कूद रही थी, हम तीनों ही इस समय वासना की आग में झुलस रहे थे, और जैसे भी संभव हो उसे बुझाने की कोशिश में लगे हुए थे.

10 मिनट में ही आईशा की चूत पानी दे गयी और वो हाँफती हुई सुस्त पड़ गयी.

अब मैने शाकीना को बेड पर लिटा दिया, और आईशा को घोड़ी बनाकर उसका मुँह
शाकीना की चूत पर लगाने को कहा और पीछे से उसकी पानी छोड़ चुकी चूत में फिर से अपना मूसल डाल दिया और एक ही झटके में जड़ तक पेल दिया.

आअहह…..हेयईीीईई…अल्ल्लाअहह…सुउुआहह,…मररर…गाइिईई…हान्न्न…फड़दूव…और जोर्र्र.. सी..फाड़ूओ….इसस्स..मु..को.. आह…मज़ाअ…तू…आपके
साथ..हिी..आअत्टाअ…हाईईइ….

सिसकी के बीच-2 में उसकी जीभ.. शाकीना की चूत को भी चाट लेती.. मे पूरा दम लगा कर आईशा को खुश करने में लगा था, क्योंकि आज उसने भी तो मुझे खुशी दी थी..

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