My Life @Jindgi Ek Safar Begana – Update 127

My Life @Jindgi Ek Safar Begana - Incest Story
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Update 127

हमें डर इस बात का सता रहा है, कि अगर किसी तरह अंतराष्ट्रीय मीडीया को ये भनक लग गयी कि हमारी फौज ने पहल की थी तो बहुत किरकिरी होगी. उन में जबाब देना भारी पड़ जाएगा हमें.

मुहम्मद हफ़ीज़ – इस सब का आप सोचो, अब हमें तो लंबे समय तक इस सबसे उबरने में काफ़ी वक़्त लग जाएगा, तो आइन्दा ऐसा कुछ करना चाहते हैं तो फिलहाल किसी और संघठन से करा सकते हैं.

जनरल – अगर आपके नुकसान की भरपाई हो जाए तो…!

मुहम्मद हफ़ीज़ – तो भी अब इतने सारे दूसरे लोगों को खड़ा करने में वक़्त तो लगेगा ही, और अभी कुछ दिन तो नये लोग आने को ही तैयार नही होंगे.

जनरल – चलो ठीक है, वैसे भी हाल-फिलहाल हम भी ऐसी किसी स्थिति का सामना करने की हालत में नही है, इस बारे में फिर कभी बैठते हैं.

और फिर कुछ दिशा निर्देश के बाद मीइंग बर्खास्त हो गयी, एक-एक करके सभी लोग चले गये और धीरे-2 मीटिंग हॉल खाली हो गया.

मीटिंग में हुई बातों से ये नतीजा निकला कि इस बार पाकिस्तान बुरी तरह पस्त हुआ है, जिसे वो आसानी से पचा नही पा रहा.

मीटिंग के बाद की हताशा को देख कर उस शख़्श के चेहरे पर एक रहश्यमयि मुस्कान तैर गयी और उसने भी अपना लॅपटॉप ऑफ कर दिया.
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रात करीब 9 बजे शाकीना अपने ऑफीस से सीधी मेरे फ्लॅट पर ही आ गयी, आज वो एक टॉप और लोंग स्कर्ट पहने हुए थी बुर्क़े के नीचे.

आते ही उसने अपना बुर्क़ा निकाल दिया और मेरे पास सोफे पर बैठ गयी..

मैने उसकी जाँघ पर हाथ फेरते हुए पुछा- और सूनाओ डार्लिंग..! क्या-2 किया आज ऑफीस में.

ये मेरी रोज़ की ही आदत थी, जब भी वो ऑफीस से मेरे पास आती थी, मे उसे इसी तरह पुच्छ लेता जिससे वो बिना और कोई सवाल किए सारी बातें बता देती थी.

शाकीना – आज तो पता नही सभी बड़े-2 लोगों की मीटिंग हुई थी.

मे – कॉन कॉन था मीटिंग में… तो उसने सभी लोगों के नाम बताए, फिर जब मैने आगे पुछा – कुछ पता चला क्या हुआ था मीटिंग में..?

वो – नही ये कुछ पता नही चला, क्योंकि मीटिंग के दौरान हॉल में जाना अलाउ नही है किसी को भी, फिर गहरी स्माइल देकर बोली- वैसे आपको तो सब पता चल ही गया होगा..!

सुनने में आया है कि सरहद पर कल रात जो मिसन हुआ था उसमें हमारी फौज बुरी तरह नाकाम हुई है, शायद इसी बाबत कुछ चर्चा हुई होगी.

मे – हो सकता है, वैसे तुम्हें किसने बताया कि सरहद पर मिसन फैल हो गया है..?

वो- स्टाफ में चर्चा हो रही थी, और ये भी चर्चा थी कि शायद इस प्लान को किसी ने लीक कर दिया है, जिससे हिन्दुस्तान की बीएसएफ समय पर अलर्ट हो गयी और सभी लोग मारे गये.

मे – खैर छोड़ो ये सब, हमें ऐसी बड़ी-बड़ी बातों से क्या लेना-देना, वैसे आगे क्या करने वाले हैं इस बाबत कुछ हलचल पता लगी.

वो – सुनने में आया है, कि सरहद पर तो अभी कुछ नही होने वाला, पर लगता है, इसकी झुंझलाहट लोगों पर निकलने वाली है.

हमें भी थोड़ा एहतियात से रहना होगा कुछ समय तक.

मे – हां ! शायद तुम सही कह रही हो, लेकिन लोगों पर बेवजह ज़ुल्म हो वो भी तो हम देखते नही रह सकते.

फिर मैने खालिद का रबैईया उसके प्रति कैसा है उसके बारे में पुछा, तो वो कुछ गंभीर हो गयी और बोली- उस कमिने की नज़रों में मेरे लिए हवस ही दिखाई देती है, गाहे बगाहे वो मुझे छेड़ ही देता है.

कभी-2 बिना किसी काम के ही मुझे अपने पास बिठा लेता है, और मुझे गरम करने की कोशिश करता है.

सच कहूँ अशफ़ाक़ ! कभी-2 तो मुझे डर सा लगने लगता है कि कहीं मे अपना आपा ही ना खो दूं.

मे – किस हद तक चला गया है वो अब तक..?

वो – कपड़ों के उतारने की ही देर है बस…! जल्दी कुछ करो वरना किसी दिन आपकी शाकीना लूटी-पिटी आपके सामने होगी.

मे – लेकिन तुमने तो उससे वादा लिया है, कि वो कभी ज़ोर जबदस्ती नही करेगा तुम्हारे साथ..!

वो – हां ! लेकिन कभी मे ही बहक कर उसकी बाहों में गिर पड़ी तो..? आख़िर हूँ तो हाड़ माँस की इंसान ही ना..!

मे – तो फिर क्या सोचा है तुमने..? अब क्या चाहती हो तुम..? अगर ऐसा है तो छोड़ दो उसे..! मे तुम्हें परेशानी में नही देख सकता.

वो – देखती हूँ, और कितना तक जा सकता है वो, कोशिश करूँगी की अपना कंट्रोल ना खोऊ.

इसी तरह की बातें कुछ देर हम करते रहे, फिर वो अपनी अम्मी के पास चली गयी, और मे खाना ख़ाके अपनी रिपोर्ट बनाने बैठ गया….!

दूसरे दिन रूटीन के मुतविक सुवह जल्दी उठकर फ्रेश हुआ योगा-प्राणायाम और फिर कुच्छ देर मेडिटेशन किया,

इन सब दिन चर्र्याओ से फारिग होकर सुवह-2 ही मॉर्निंग वॉक के बहाने सोसाइटी में राउंड पर निकल पड़ा और नंबर बाइ नंबर अपने अधिकतर लोगों से मिला, उनसे सभी तरफ की फीडबॅक इकट्ठा की.

चूँकि उनमें से बहुत से लोग अपना-2 छोटा मोटा बिज़्नेस चलाते थे, जहाँ पब्लिक ओपनीन ज़्यादा मिलती है,

और लोगों के दिल में हुकूमत और प्रशासन के प्रति क्या भाव हैं ये सब पता लगता रहता है..,

वो हुकूमत के कामों से किस कदर इत्तेफ़ाक़ रखते हैं ये सब मालूमत आसानी से मिल जाते हैं.

कुछ लोग तो ग्रूप में ही मिल गये सोसाइटी के छोटे से पार्क में, तो वहीं घास पर बैठ कर बात-चीत करते रहे.

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