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Update 102

यहाँ से कोई 25 किमी दूर जंगली इलाक़े में जो सरहद के करीब ही है वहाँ कई कॅंप चालू किए हैं, ये सब क़ैदी वहीं जंगल की सफाई, तारों की बाढ़ लगाना इन्ही सब कामों में लगाए जाते हैं.

मे – और जैल के रेकॉर्ड में ये सब दर्ज होता है..?

मेरी बात सुन कर वो हंस पड़ा और बोला – कैसा रेकॉर्ड..? किसका रेकॉर्ड..?

अरे मेरे भाई, जब उन क़ैदियों का ही कोई रेकॉर्ड नही है, तो काम का क्या रेकॉर्ड होगा…?

मे अचंभित रह गया, और सोचने लगा, ये कैसा मुल्क है, जहाँ क़ैदियों का भी जैल में रेकॉर्ड नही है,

फिर प्रत्यक्ष में बोला- तो क्या ये क़ैदी सज़ायाफ्ता नही हैं..?

वो – अरे नही भाई, जिन क़ैदियों के जुर्म कोर्ट में साबित ही नही हुए वो कैसे सज़ायाफ्ता..?

उसकी बात सुनकर में मुँह फाडे उसे देखता ही रह गया…..!

चाइ आ चुकी थी, उसे ख़तम करके मैने अंदर बैठी रहना को इशारा किया, वो उठ कर टाय्लेट की ओर जाने लगी, मैने उसको बोला-

देखो वो टाय्लेट की तरफ जा रही है, जाओ जाकर उससे सारी बातें तय कर्लो, बोल देना तुम्हारे दोस्त से बात हो गयी है.

उसने अपने पीछे मूड कर देखा तो रेहाना अपने टाइट सूट में कुछ ज़्यादा ही गान्ड मटकाती हुई टाय्लेट की तरफ जाती दिखी उसे. वो उठकर उसके पीछे-2 चल दिया.

मैने चाइ के पैसे दिए और उठकर बाहर की ओर चल दिया, अपनी बाइक के पास खड़ा होकर रेहाना का इंतजार करने लगा.

10 मिनट भी नही हुए थे कि वो तेज-तेज कदमों से चलती हुई बाहर आई और बाइक पर मेरे पीछे बैठते हुए बोली- चलो.

मैने बाइक आगे बढ़ाते हुए पुछा – क्या बात है, तुमने तो उसे 5 मिनट में ही ठंडा कर दिया, क्या हुआ सब ठीक तो हुआ ना.

पता नही वहीं पड़ा है, मरेगा नही तो किसी लायक भी नही रहेगा, बच भी गया तो जिंदगी भर गर्दन टेडी करके फ़िरेगा.

मैने हसते हुए कहा – ऐसा किया क्या तुमने उसके साथ ?

मेरी पीठ से अपनी चुचियों को सटाते हुए बोली – जब मे टाय्लेट में थी, उसने आते ही गेट बंद किया और मुझे पीछे से पकड़ने की कोशिश की,

मे सावधान तो थी ही, सो उसका बाजू पकड़ कर कमोड से दे मारा, और उसकी गर्दन मरोड़ दी, शायद गले की हड्डी टूट गयी होगी उसकी, और वो वहीं खमोद पर बेहोश पड़ा है …

वहाँ से हम मार्केट गये, कुछ ज़रूरत का समान लिया और अपनी बाइक हमने सरहद की ओर जाने वाले रास्ते पर दौड़ा दी,

शहर से कोई 15 किमी बाहर आकर हमने सड़क के किनारे घनी झाड़ियों में अपनी बाइक छिपा दी और प्लॅनिंग के मुतविक पूरा इंतेज़ाम कर दिया.

उस संतरी के मुतविक वो लोग क़ैदियों को लेकर 5 बजे तक जैल लौटते थे. अभी 4:45 हो रहे थे.

कोई 5 मिनट और इंतजार किया होगा कि एक ट्रक के आने की आवाज़ सुनाई दी,

ये एक फ़ौजी ट्रक था, मध्यम गति से आता हुआ ट्रक जैसे ही हमारे सामने से गुजरा, भड़ाक-2, की आवाज़ के साथ उस ट्रक के टाइयर फट गये.

अचानक हुए ब्रस्ट से ड्राइवर कंट्रोल खो बैठा और किसी शराबी की तरह लहराता हुआ ट्रक आगे एक पुलिया से जा टकराया, और नीचे सुखी पड़ी एक बरसाती नदी के पत्थरीले रास्ते में जा गिरा.

ट्रक में कोई 8-10 पोलीस वाले थे और 20-25 क़ैदी,

ट्रक के उलटने से आगे बैठे 4 पोलीस वाले ड्राइवर समेत बुरी तरह ज़ख्मी हो गये, कुछ लोग ट्रक के उछल्ने से दूर जा गिरे कुछ ट्रक के नीचे फँसे रह गये.

हमने अपनी बाइक निकाली, स्टार्ट की और इस तरह से वहाँ पहुँचे जैसे राहगीर कहीं से आरहे हों, और हादसे को देख कर खड़े हो गये हों.

सबको अपनी-2 जान बचाने की पड़ी थी, कोई बुरी तरह ज़ख्मी था, तो कोई दर्द से कराह रहा था…

मे एक घायल पोलीस वाले के पास पहुँचा और रेहाना को इशारा किया कि वो कुछ दूर छिटक गये लोगों में अपने शौहर को तलाश करे.

मैने पोलीस वाले को ट्रक के नीचे से बाहर खींचा और बोला- ये सब कैसे हो गया..?

दर्द से कराहते हुए वो बोला – पता नही, आकस्मात टाइयर ब्रस्ट हुए और पुलिया से टकरा कर उलट गया.

आप और लोगों को निकालने की कोशिश करो.

मे एक क़ैदी को निकाल कर बाहर कर ही रहा था कि रेहाना ने शीटी मारी, मैने उसे बाइक की तरफ चलने का इशारा किया, उसको उसका शौहर मिल गया था.

मैने उस पोलीस वाले से कहा- देखो संतरी साब मे अकेला कुछ नही कर सकता, जाके शहर से मदद लेकर आता हूँ, इतना कहकर मे निकल लिया.

रेहाना अपने शौहर को कंधे पर डाले थोड़ा आगे जाकर खड़ी थी जिससे किसी और की नज़र में ना आ सके.

रेहाना का शौहर ज़्यादा घायल तो नही था, झटके से दूर छिटकने की वजह से हल्की सी पत्थरों से घिसटने की चोटें थी.

लेकिन कमज़ोरी और पूरे दिन के कमर तोड़ मेहनत की वजह से आधी बेहोसी की हालत में था. उसको बीच में बिठा कर हम वहाँ से निकल लिए.

हमें पता नही और कितने लोग भागने में सफल हुए होंगे.

हमने बाइक अपनी मज़िल की ओर दौड़ा दी और 8 बजते-2 घर पहुँच गये.

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