Update 98
मेरे मन में शरारत सूझी, और मैने भी पानी के अंदर डुबकी लगा दी और उसे अंदर ही पकड़ लिया, वो मेरी बाहों में छटपटाई और छूट कर पानी के उपर आ गई.
मे- तुमने तो मुझे डरा ही दिया, इतनी देर पानी में कैसे रह ली..?
वो- अरे ! ये तो हमारे लिए रोज़ की बात है..
फिर मैने उसे पानी के अंदर अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठ चूम कर कहा- जब मैने कहा तब मना क्यों किया..?
वो- आपके सामने कपड़े निकालने में शर्म आ रही थी.
मे- अब भी तो पानी में सब दिख रहा है मुझे…! तो उसने शर्म से मेरे सीने में अपना मुँह छिपा लिया.
मैने उसके चुतड़ों पर अपनी हथेलिया कस दी और उसे अपनी गोद में उठा लिया, वो भी मेरी कमर में अपनी टाँगें लपेट कर मुझसे चिपक गयी.
मे उसे अपने से चिपकाए हुए झरने की ओर बढ़ गया, कुछ कदमों में ही हम दोनो झरने के सफेद पानी की धार का मज़ा ले रहे थे.
मे एक ऐसे पत्थर पर बैठ गया जहाँ झरने का पानी डाइरेक्ट तो नही गिर रहा था, लेकिन उसका पानी उच्छल-2 कर वहाँ तक पहुँच रहा था,
उसको अपनी गोद में बिठाए मैने उसकी गर्दन पर किस किया.
उसके मुँह से एक मादक सिसकी निकल गयी और अपनी गर्दन दूसरी ओर मोड़ कर मेरे गर्दन के पीछे से निकाल कर मेरे बालों को अपनी मुट्ठी में कस लिया.
मेरे दोनो हाथ उसके छोटे -2 सेबों पर थे और उनको ब्रा के उपर से ही धीरे-2 सहला रहा था.
मज़े के आलम में उसकी आँखें बंद थी, और मुँह से हल्की हल्की सिसकी निकल रही थी.
जब मैने उसके ब्रा के हुक खोलने चाहे तो उसने मेरे हाथ पकड़ लिए और ना में गर्दन हिला दी.
मैने उसके हाथों को चूम लिया और जीभ से उसकी पीठ चाटने लगा. उसने अपने हाथ मेरे हाथों से हटा लिए, तो मैने उसकी ब्रा के हुक खोल दिए और उसको अपने गले में लपेट लिया.
अब उसकी गोरी-चिटी छोटी-2 गोल-2 चुचियाँ जो कसरत करने की वजह से और ज़्यादा शेप में आ गयी थी, मेरे सामने नंगी थी,
कितनी ही देर उस मनमोहक चुचियों को मे देखता ही रहा, फिर धीरे से जीभ लगा कर उसके कंचे जैसे निपल को चाट लिया.
आनंद के मारे उसकी आअहह… निकल गयी और सिसकने लगी…
आआहह….सस्सिईईई….उफफफ्फ़… आमम्मिईीई……मत करो… कुछ होता है….
मे- क्या होता है मेरी जानणन्न्…! बोलो ना..!
वो – आअहह… पता नही… पर बहुत अच्छा लग रहा है…!
अब मैने उसके एक निपल को अपने अंगूठे और उंगली के बीच पकड़ कर हल्के से मसल दिया..
उसकी सिसकी और बढ़ गयी और मज़े में आकर वो अपनी गोल-2 गान्ड मेरे लंड पर पटकने लगी, जो अब एक दम कड़क हो गया था, और अंडरवेर को फाड़ डालने की कोशिश कर रहा था.
मेरे लंड का एहसास अपनी गान्ड पर फील करके वो उसे रगड़ने लगी.
मैने अब उसको अपने बाएँ बाजू पर लिटा लिया, उसके होठों को चूसने लगा और एक हाथ से उसको चुचियों को सहलाता, कभी -2 उत्तेजनावस मसल भी रहा था.
उसका पूरा बदन कामोत्तेजना में थिरक रहा था, होठ चुसते-2 अब मेरा हाथ उसके गोरे से पेट से होता हुआ जैसे ही उसकी चूत के उपर पहुँचा, उसने अपनी टांगे भींच ली, और मेरे हाथ को वहीं लॉक कर दिया.
मैने दबे हाथ से अपनी उंगली को हरकत दी और पेंटी के पतले से कपड़े के उपर से ही उंगली उसकी चूत के उपर घुमाई, उसकी टांगे खुल गयी और मैने उसकी छोटी सी चूत को अपने पंजे में भर लिया.
उसने किस तोड़ दिया और लंबी-2 साँसें लेने लगी, उसकी आँखें लाल हो चुकी थी, आँखों में वासना के लाल डोरे साफ साफ दिखाई देने लगे.
अब मैने उसको उस पत्थर पर बिठा दिया और खुद उसके नीचे उसके सामने बैठ गया.
उसके कमर के दोनो साइड से उंगली फँसा कर उसकी पेंटी को निकालना चाहा तो उसने मेरी हेल्प करते हुए अपनी गान्ड को हवा में लहरा दिया.
मैने पेंटी उतार कर एक ओर रख दी, उसकी छोटे-2 बालों वाली चूत अब मेरे सामने थी.
पतले-2 होठों को भींचे हुए उसकी पतली सी एक दरार जैसी चूत को देख कर मेरा लंड बाबला हुआ जा रहा था, मैने उसे अपने हाथ से सहला कर थोड़ी देर शांत बैठने को कहा और उसकी टाँगों को सहला कर उसकी थोड़ी-2 मांसल होती जा रही जांघों को चौड़ा किया.
मैने झुक कर अपना मुँह उसकी चूत पर रखा और एक उद्घाटन चुंबन लिया.
वो अपनी हथेलियों को पीछे की ओर टिका कर पीछे की तरफ झुकी हुई थी, सर उसका हवा में था, और आँखें आने वाले मज़े के इंतजार में बंद थी.
एक बार मैने अपनी जीभ पूरी चौड़ाई में उसकी छोटी सी चूत पर गान्ड के छेद के पास से शुरू करके उपर तक फिराई..
सस्सिईईई…..आअहह……आअम्म्म्मिईीई…. ऐसी ही कुछ आवाज़ उसके मुँह से निकली और गान्ड पत्थर से उपर उचका दी.
फिर उसकी पुट्टियों को खोल कर जो एक दम एक दूसरे से जुड़ी हुई थी, अपनी जीभ की नोक से अंदर की साइड कुरेदा,
उसकी गान्ड फिर से हवा में लहराई. जब अपना अंगूठा मुँह मे लेकर उसकी चूत के होठों पर रगड़ा, तो उसकी आहह.. सस्सिईईईईईईईईईईईईईईई……फुट पड़ी.
उसकी चूत के उपरी भाग पर उसका क्लोरिट मुँह से चूमने लगा, जिसे मैने जीभ से कुरेद कर और बाहर को किया और फिर अपने होठों में दबा कर चूसने लगा, साथ ही साथ उसके छोटे से छेद को अपने अंगूठे से सहला दिया.
मज़े के मारे शाकीना का बुरा हाल हो रहा था, कभी वो अपनी गान्ड को हिलाती तो कभी अपनी टाँगों को मेरे कंधे पर पटकती.
5-7 मिनट में ही उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया और ये शायद उसकी चूत का पहला ओरगैस्म था जो किसी मर्द के द्वारा हुआ हो.
बहुत ज़ोर से झड़ी वो, और झड़ते समय दोहरी होकर मेरे सर से लिपट गयी.
जब वो शांत हुई तो मैने उसके होठों पर एक चुम्मन लिया और उसको पुछा- कैसा लगा शाकीना..?
वो शर्म से पानी पानी हो गयी और मेरे कंधे में सर रख कर मुस्कराने लगी…..!
मैने उसे अपनी गोद में उठा लिया और पानी के अंदर चल दिया, वो अपने हाथ पैर फड़फड़ाकर चिल्लाई- अरे मेरी पेंटी रह गयी ….!
मैने शरारत से कहा – छोड़ो उसको क्या करोगी उसका ..?
वो – नही प्लीज़ लेने दो ना, मेरे पास वैसे भी कोई एक्सट्रा नही है…
मैने उसकी गान्ड के छेद को उंगली से सहला कर कहा – आज के बाद पेंटी पहनना बंद कर दो…
वो मेरी गोद में किसी बच्चे की तरह उपर नीचे झूलती हुई बोली – लेने दो ना प्लीज़,

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