My Life @Jindgi Ek Safar Begana – Update 95

My Life @Jindgi Ek Safar Begana - Incest Story
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Update 95

एक बार पक्का इरादा हो तो सब कुछ मुमकिन है, वो सब आप मुझ पर छोड़ दो, कि कैसे क्या करना है, आप सिर्फ़ हां बोलो, फिर देखो ये आपकी दोनो बेटियाँ 10-10 पर भारी ना पड़ें तो कहना..!

शाकीना – सच अशफ़ाक़ साब ये मुमकिन है..?

मे – हां मेरी छुइ-मुई गुड़िया बिल्कुल मुमकिन है..! क्यों बीबी क्या कहती हो..?

अमीना – मे क्या बोलूं बेटा, इनसे ही पुछो क्या ये तैयार हैं इसके लिए..?

मे – क्यों रहना, शाकीना क्या कहती हो..?

रहना – क्या करना होगा हमें..?

मे – ज़्यादा कुछ नही जैसे मे तालीम दूँगा, वैसे ही करना है तुम्हें, और हां आज से दूध और घी की मात्रा खाने में बढ़ानी होगी.

अमीना – खुदा के फ़ज़ल से इस चीज़ की तो अपने यहाँ कोई कमी नही है, लेकिन ये मर्जानी खाती नही हैं..!

मे – आज से खायेंगी..! क्यों खाओगी ना तुम दोनो..

दोनो ने हां में मुन्डी हिला दी..

तो फिर अब देखो मे तुम्हें क्या से क्या बनाता हूँ..?

अब फटाफट घर के काम में बीबी का हाथ बँटाओ, उन्हें ख़तम करके अपने जानवरों को चराने किसी ऐसी जगह ले चलेंगे जहाँ आम तौर पर कोई आता जाता ना हो.

हम क्या कर रहे हैं, किसी को कानो-कान खबर नही होनी चाहिए ठीक है.

वो दोनो ये सब करने के लिए एक्शिटेड लग रहीं थी, सो जल्दी-2 घर के काम निपटा कर खाना वाना ख़ाके जानवरों को लेकर हम चल दिए एक पहाड़ी मैदान की ओर, जिधर कोई कभी-कभार ही निकलता था.

वहाँ पहुँच कर जानवरों को छोड़ दिया घास खाने, मे कुछ देर इधर-उधर वहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य को देखता रहा.

ये एक झरने के पास एक छोटा सा हरा-भरा सा मैदान था, ज़्यादा समतल तो नही पर ठीक था, जानवर अपने घास खाने में लगे थे.

कुछ देर में धूप भी थोड़ी कम हो गयी, और खाना खाए हुए भी काफ़ी टाइम हो गया तो मे उन दोनो को लेकर एक्सर्साइज़ करने में लग गया.

दो घंटे मैने उनका पूरा शरीर थका दिया, साथ में अपना भी.

पहला-2 दिन शौक-2 में वो मेरे साथ-2 जैसे मे करता गया, करती गयी. शाम को घर लौटते-2 उनके शरीर थक कर चूर हो गये थे.

घर आकर जम के खाना खाया, फिर सोने से पहले के एक-एक लीटर गरमा-गरम दूध घी और अंडा (एग) डालकर हम तीनों ने पिया और सो गये.
दूसरे दिन उन दोनो का उठने का मन ही नही हो रहा था, पूरा बदन दर्द से टूट रहा था,

मैने ज़बरदस्ती उनको गुदगुदाके उठाया, शाकीना कुछ ज़यादा नखरे कर रही थी.

पेट के बाल उल्टी लेटी थी वो, उसकी 32 की गोल-मटोल गान्ड उपर को उठी हुई बड़ी मनमोहक लग रही थी.

पहले मैने उसकी गान्ड की चोटी पर हाथ का दबाब देकर हिलाया, वो कुन्मुना कर रह गयी.

फिर मैने उसके बगल में ठीक उसकी चुचियों के पास अपनी उंगलियों से गुदगूदाया.

तो उसने अपने बाजुओं को भींच कर मेरे हाथ को दबा दिया, जब और थोड़ा आगे बढ़ते हुए जब उसकी चुचियों को साइड से सहलाया तो वो झट से सीधी हो गयी और मुस्करा कर उठ बैठी.

फ्रेश होकर वो दोनो घर के कामों में लग गयी.

दोपहर ढलते – ढलते फिर जानवरों को लेकर हम वहीं पहुँचे, और लग गये एक्सर्साइज़ करने, शुरू-2 में तो वो आनाकानी कर रही थी, लेकिन मैने अपने तरीक़े से उनको शुरू करा दिया.

कुछ ही देर में उनका शरीर खुल गया और वो मन लगा कर एक्सर्साइज़ करने लगी.

इसी तरह मैने उनको 10 दिन लगातार जम कर एक्सर्साइज़ करवाई, जब उनका शरीर एक्सर्साइज़ के मुतविक ढल गया तब मैने उनको योगा और ध्यान के टिप्स दिए. जिससे अपने को किसी भी पोज़िशन में कोन्स्टरेट करने में आसानी हो सके.

साथ-2 फाइटिंग भी करवाना भी शुरू कर दिया. 15 दिनों में ही उन दोनो को इसमें इंटेरेस्ट आने लगा, और वो अपने से ही ये सब करने लगी,

अब तो घर में भी दोनो आपस में फाइट प्रॅक्टीस और दूसरी एक्सर्साइज़ करने लगी जब भी मौका लगे कि शुरू हो जाती.

कोई एक महीने की मेहनत और मशक्कत के बाद ही वो शेरनी बन गयी.
एक दिन मैने अमीना बी से कहा-

बीबी देखना चाहोगी आपकी बेटियाँ क्या गुल खिलाने लगी हैं..?

वो शंकित स्वर में बोली- हाए बेटा ये क्या कह रहे हो तुम..?

मे – यकीन नही है तो खुद देख लो…!

और मे उन दोनो को घर के सामने मैदान में ले आया और उन दोनो को चॅलेंज दिया कि अगर तुम दोनो ने मिलकर मुझे हरा दिया, तो तुम दोनो को एक-एक सोने की चैन इनाम में मिलेगी.

वो दोनो ही शेरनिया एक साथ बोली- क्या ? सोने की चैन.. ! फिर क्या है आ जाओ मैदान में देखें किस्में कितना दम है.

अमीना बी मुँह फाडे उन दोनो की ओर देखने लगी.

हम तीनों की फाइट शुरू हो गयी, ऐसी फाइट उनकी अम्मी ने कभी देखी ही नही थी, वो दोनो तो चैन के लालच में अपने शरीर पर लगी मेरी करारी चोटों की भी परवाह नही कर रही थीं.

लड़ते-2 एक घंटा हो गया, वो दोनो हाँफने लगी, पसीने से हम तीनों के कपड़े सराबोर हो गये, मे बीच-2 में उन्हें चिढ़ाता जाता जिससे वो और दुगने जोश से फाइट करने लगती.

अंत मे मैने उन्हें जिता देना उचित समझा और मे जान बुझ कर हार गया.

वो दोनो ही बड़ी खुश हो गयी और याहू…2 .. करके उछल्ने लगी.

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