#27
मैं- थोड़े दिन पहले ही क्या
चंदा ने इधर उधर देखा और बोली- थोड़े दिन पहले ही मंगल सिंह ने लाल मंदिर के पीछे सरिता देवी का अपहरण कर लिया था और अफवाह थी की सरिता देवी के साथ ……….
चंदा ने जानबूझ कर अपने शब्दों को अधुरा छोड़ दिया था पर उसकी बातो का मतलब मुझसे छिपा नहीं था .
मैं- इसमें तेरे पति का क्या रोल हुआ
चंदा- वो ड्राईवर था गाड़ी का पर हैरानी की बात ये थी की मेरे पति ने बार बार दुहाई दी थी की मंगल सिंह ने सरिता देवी का अपहरण जरुर किया था पर उसके साथ कुछ भी गलत नहीं किया इस बात की गवाही ठाकुर के भतीजे ने भी दी थी पर ठाकुर ने किसी की नहीं सुनी अपने गुरुर में उसने डेरे को नष्ट कर दिया ,
मैं- पर तेरे पति को फांसी पुरुषोत्तम ने दी थी
चंदा- ये बात भी उन दोनों के साथ ही चली गयी
मैं- पर तुम नहीं गयी हवेली से, जब तक की हवेली बर्बाद नहीं हो गयी तुम वहां पर जमी रही
चंदा ने उपहास उड़ाती हुई नजरो से मुझे देखा और बोली- मैं वहां जमी रही क्योंकि रुपाली ऐसा चाहती थी उसने मुझे जाने नहीं दिया .
मैं- हर बात घूम फिर कर रुपाली पर आकर क्यों थम जाती है.
चंदा- क्योंकि रुपाली ही हवेली थी और हवेली ही रुपाली थी . तुम्हे लाख लगता होगा की हवेली की बर्बादी में मेरा हाथ रहा होगा पर ऐसा नहीं है , मेरी वहां पर कोई औकात नहीं थी , एक नौकरानी की भला क्या ही हसियत होगी और ठाकुरों का कद आसमान था .जानते हो हवेली के आसपास भी कोई क्यों नहीं फटकता क्योंकि वो मनहूस है , वहां कभी कोई पनप नहीं पाया.
मैं- तुम चारो में से किसके साथ सोती थी .
मैंने चंदा से सीधा ही पूछ लिया
चंदा- चारो के साथ ,
चंदा बहुत ही घाघ औरत थी इस जवाब ने मुझे एक बार फिर से अहसास करवा दिया था . कहानी इतनी आसान नहीं थी जितना की पहली नजर में लगती थी और यही तो वो बात थी जिसने उलझाया हुआ था . सवाल ये था की शौर्य सिंह के तीन बेटे कैसे मर गए एक ही रात में. ठाकुर कोमा में गया उस पर हमला किसने किया और ठाकुर का भतीजा कहाँ गायब हो गया . मंगल सिंह और ठाकुर की दुश्मनी का क्या कारन रहा था . ठाकुर ने कौन सा वादा पूरा नहीं किया था और सबसे बड़ी बात रुपाली ठकुराइन जिसके चर्चे ही इतने शानदार थे वो खुद कैसी रही होगी.
मेरे कदम एक बार फिर हवेली जाने को मचलने लगे थे , शाम घिर रही थी मैंने चंदा के घर पानी पिया और हवेली की तरफ निकल गया पुल के पास मुझे पद्मिनी दिखी जो घुटनों तक पैर डाले किनारी पर बैठी थी . मैं दौड़ कर उसके पास गया . उसने मुझे देखा और बोली- मेरे आगे पीछे मंडराने के आलावा और कोई काम नहीं है क्या तुम्हे.
मैं- अभी मजाक की इच्छा नहीं है मुझे मालूम हुआ है की तेरे बाबा और ठाकुर ने आपस में कोई वादा किया था जो न निभाने पर उनकी दुश्मनी हो गयी थी .
पद्मिनी- मैंने ही तो बताया था तुमको ये
मैं- पर तूने ये तो नहीं बताया था की मंगल डाकू ने सरिता देवी का अपहरण किया था और उसके साथ…………..
मैंने भी चंदा के जैसे बात को अधुरा छोड़ दिया .पद्मिनी कुछ नहीं बोली
मैं- पता नहीं ये बात सची है या झूठी पर एक बात समझ तेरी और मेरी मंजिल शायद एक न हो पर रास्ता जरुर एक है . हम दोनों के रस्ते हवेली तक जाते है , और फिलहाल मैं वही जा रहा हूँ तू चाहे तो मेरे साथ चल सकती है .
पद्मिनी- मैं क्यों जाऊ दुश्मनों के घर
मैं- जिनकी दुश्मनी थी वो चले गए रह गए है तो हम लोग. मैं अपने आप को खोज रहा हूँ तेरा पता नहीं पर क्या मालूम तुझे वहां वो वजह मिल जाये जिसकी वजह से तेरे कुल का नाश हुआ . कम से कम तुझे तो मालूम होना चाहिए न की आखिर क्यों इतने लोगो की जान गयी . आना है तो आजा
कह कर मैंने अपने कदम आगे बढ़ा दिए, पर दिल को ख़ुशी हुई जब मैंने अपने पीछे पद्मिनी को आते हुए देखा उसी चोर तरीके से मैं उसके साथ हवेली में दाखिल हो गया .
“अजीब सी घुटन है यहाँ ” पद्मिनी ने हौले से कहा
मैं- सोलह साल से यहाँ कोई नहीं आया .
पर जैसे पद्मिनी ने मेरी बात सुनी ही नहीं हो बस दीवारों पर बनी तस्वीरों को देख रही थी .
“एक बड़े जमींदार और डाकू का रिश्ता कैसा हो सकता है ” मैंने पद्मिनी से सवाल किया
पद्मिनी- वो रिश्ते थे ही नहीं वो बस स्वार्थ रहा होगा , रिश्तो में कभी तेरा-मेरा जैसा कुछ नहीं होता , एक डाकू और जमींदार दोनों के बीच लालच ही रहा होगा.
पद्मिनी बहुत बुद्धिमान थी ये मैं जानता था .
मैं- अगर हम उस लालच को तलाश पाए तो क्या मालूम हम दोनों को अपने अपने जवाब मिल सके.
पद्मिनी- देख अर्जुन,मैं ये नहीं कहूँगी की बाबा शरीफ थे ठाकुर ने उनके साथ गलत किया , डाकू ने भी किसी न किसी को कभी न कभी सताया होगा . जुल्म किये होंगे किसी की बद्दुआ ली होगी .
मैं- तू इस लालच को किस नजरिये से देखती है
पद्मिनी- मैं लालच को नहीं देखती मैं नफरत को देखती हूँ इतनी नफरत अर्जुन की उसकी आग में लोग एक दुसरे को मार दे. नफरत होने के लिए बेहद ठोस कारण होना चाहिए
मैं- और वो कारण क्या होगा
पद्मिनी- मुझे लगता है की तू उसी कारण को तलाशने यहाँ आया है तो बातो में समय क्यों ख़राब करता है और देख अपने आस पास ये ईमारत क्या पता तुझसे कुछ कहना चाहती हो .
मैं- यही तो समझ नही पा रहा , रूपये गहने तमाम शानोशोकत का सामान ज्यो का त्यों पड़ा है तो फिर जाने वाले क्या ले गए अपने साथ .
“जाने वाले दर्द लेकर गए अपने साथ , इतना दर्द की फिर उनको कोई चाह रही ही नहीं होगी. ” पद्मिनी ने गहरी साँस लेकर कहा.
उसकी बात सही थी जब सब खत्म हो गया तो कोई क्या ही करता इन सब का
मैंने इस बार पुरुषोत्तम के कमरे की तलाशी ठीक से लेने का सोचा क्योंकि मेरे दिमाग में चंदा की कही बाते थी अगर पुरुषोत्तम को मर्दाना समस्याए थी तो अवश्य ही रुपाली और उसके बीच दिक्कते रही होंगे पुरुषोत्तम ने एक नौकर को फांसी दी थी , वो गहरी नफरत करता होगा उस से तभी इतना बड़ा कदम उठाया पर एक नौकर जो उसकी दया पर निर्भर था पुरुषोत्तम चाहता तो उसे काम से निकाल सकता था पीट सकता था , गाँव से बहार कर सकता था पर उसे मारा मतलब साफ़ था की नफरत गहरी रही होगी पर कितनी गहरी जर जोरू और जमीं .क्या पुरुषोत्तम को मालूम हो गया था की हवेली की औरत को चुदते हुए उसका नौकर देखता था या फिर वो नौकर ही हवेली की उस औरत को चोदता था .क्या वो औरत रुपाली हो सकती थी मैं सोच में इतना डूब गया था की बहार से आती पद्मिनी की आवाज मुझे सुनाई ही नहीं दी.
“अर्जुन , जरा यहाँ आओ देखो तो सही ”
मैं- दौड़ कर पद्मिनी के पास गया उसके हाथ में कुछ था और जब वो मैंने देखा तो मेरे माथे पर बल पड़ गए.

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