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मधु घर पर पहुंची तो घर पर उसकी बड़ी बेटी आई हुई थी जिसे देखकर मधु एकदम से खुश हो गई क्योंकि शादी के 2 साल बाद पहली बार वह घर पर आई थी ,,,, मधु अपनी बड़ी बेटी को बरसों बाद देखकर एकदम खुशी से झूम उठी,,,।

महुआ तू,,,, तू कब आई,,,(घर में प्रवेश करते हुए मधु बोली,,, और अपनी मां को देखते ही महुआ अपनी जगह से खड़ी होते हुए अपनी मां की तरफ आगे बढ़ते हुए बोली,,,)

अभी अभी आ रही हूं मां,,,,(इतना कहने के साथ ही महुआ अपनी मां के पैर छूकर आशीर्वाद लेने लगी)

जीती रहो बेटी,,,, लेकिन तुम्हें लेकर कौन आया,,,

छोटा देवर आया था,,,,

रुका नहीं,,,,

नहीं उसे शादी में जाना था इसलिए तुरंत छोड़ कर चला गया,,,,

Mahuaa

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चलो कोई बात नहीं,,, गुलाबी,,,, महुआ को पानी पिलाई या नहीं,,,

यह भी कोई पूछने वाली बात है भाभी,,,,,,

बुआ ने आते ही मेरा मुंह मीठा कराकर पानी पिला दी,,, मां,,, बुआ मेरा बहुत ख्याल रखती है,,,

हां सो तो है,,,,

अच्छा राजू नजर नहीं आ रहा है वह कहां गया,,,,,,

(राजू का जिक्र आते ही,,, मधु को कुछ देर पहले का दृश्य याद आने लगा,,,, राजू के मोटे तगड़े लंड को जिंदगी में पहली बार वह अपनी आंखों से देख रही थी,, इसे देखते ही उसकी दोनों टांगों के बीच की खलबली को अभी भी महसूस कर रही थी,,,, इतना मोटा तगड़ा और लंबा लंड उसने आज तक कभी नहीं देखी थी,,,अपने बेटे के लंड की गर्माहट को अभी भी अपनी हथेली के साथ-साथ पूरे जिस्म में महसूस कर पा रही थी,,, अपनी मां को ख्यालों में खोया हुआ देखकर महुआ फिर से बोली,,,)

अरे मां मैं तुमसे पूछ रही हूं,,,,,, राजू दिखाई नहीं दे रहा है कहां है,,,?

अरे होगा कहां,,,अपने आवारा दोस्तों के साथ गांव में घूम रहा होगा कुछ दिनों से अपने पिताजी के साथ बैलगाड़ी पर भी नहीं जा रहा है,,,,

Madhu ki gadrayi gaand

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राजू बैलगाड़ी चलाता है,,,(महुआ आश्चर्य से  बोली,,)

तो क्या,,,,लेकिन कुछ दिनों से जा नहीं रहा है आज ही इसकी खबर लेती हूं,,,, चल वो जाने दे चल कर कुछ खा ले लंबा सफर तय करके आइ ह6 थक गई होगी,,,

हां मां सो तो हैं,,, मुझे बड़ी जोरों की भूख लगी है,,,।

तो इंतजार किस बात का महुआ,,, चलो खाना लगा देती हूं अपने तीनों साथ में खा लेते हैं,,,,(गुलाबी उत्साहित होते हुए बोली,,,, और तीनों हाथ मुंह धोकर खाना खाने बैठ गए,,,,,,,बातों ही बातों में गुलाबी बात को छेड़ते हुए बोली,,,)

क्यों महुआ रानी 2 साल हो गए हैं खुशखबरी कब सुना रही हो,,,,,

(गुलाबी की बात सुनते ही मधु भी उसके सुर में सुर लगाते हुए बोली,,,)

हां बेटी 2 साल हो गए हैं अभी तक हुआ क्यों नहीं,,,,, गांव वाले बात करते होंगे,,,।

(उन दोनों की बात सुनते ही महुआ थोड़ी उदास हो गई,,,,उसका उदास चेहरा देखकर मधु से रहा नहीं जा रहा था वहां काफी चिंतित नजर आ रही थी इसलिए फिर से बोली,,,)

क्या हुआ महुआ खामोश क्यों हो गई क्या कोई चिंता वाली बात है,,,,,,।

क्या बताऊं मां,,,,(कुछ देर विचार करने के बाद) पिताजी ने जल्दबाजी में मेरी शादी ऐसी जगह कर दी कि मेरी जिंदगी नरक हो गई है पिताजी ने किसी भी प्रकार की जांच पड़ताल किए बिना ही मुझे उस घर में ब्याह दिया,,, और फिर मेरी जिंदगी एकदम खराब हो गई,,,।

(महुआ की बात सुनते ही गुलाबी और मधु दोनों एकदम से चिंतित हो गए और मधु बोली)

क्यों क्या हो गया बेटी,,,,

क्या बताऊं ,,, रोज का झगड़ा,,,

किस बात का झगड़ा,,,(मधु हाथ में निवाला पकड़े हुए ही बोली,,, गुलाबी भी चिंतित मुद्रा में महुआ की तरफ देख रही थी,,,)

,, यही,,,(इतना कहकर महुआ खामोश हो गई,,, तो गुलाबी बोली)

अरे बता ना क्या हो गया किस बात का झगड़ा हमें बताएं कि नहीं तो हम कैसे सुलझाएंगे,,,,

क्या बताऊं बुआ,,,,, शादी को 2 साल हो गए हैं,,,,

तो,,,(मधु बोली)

तो क्या,,, सास को दादी बनना है,,,

तो इसमें कौन सी बड़ी बात है शादी हुआ है तो सब कुछ धीरे-धीरे हो ही जाएगा,,,(गुलाबी बोली)

लेकिन 2 साल गुजर चुके हैं बुआ,,,,

मैं तेरी बात को अच्छी तरह से समझ रही हूं महुआ,,,,,शादी के 2 साल गुजर चुके हैं अब तक तेरे पांव भारी हो जाना चाहिए था,,,(जिस बात को बताने में महुआ झिझक रही थी मधु उसे खुलकर बता दी,,,)

अब तो सांस ननद दोनों ताना कसने लगी है,,,(महुआ एकदम उदास होते हुए बोली मधु अपनी बेटी का दर्द अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए वह बोली,,)

दामाद जी कुछ नहीं बोलते,,,

वह किसी से कम नहीं वह भी मुझे बात-बात पर ताना देता रहता है,,, दिन भर जुआ शराब और रात को घर से बाहर ही रहता है,,,,,,।

तेरे साथ,,,(मधु एकदम गंभीर मुद्रा में बोले मधु के कहने का मतलब को महुआ की तरह से समझ रही थी इसलिए बोली)

होता है लेकिन जोर जबरदस्ती का,,,, और 2 मिनट में ही ढेर,,,,।

(महुआ के कहने के मतलब को मधु अच्छी तरह से समझ रही थी और महुआ को यह बताने में शर्म भी महसूस हो रही थी लेकिन वह किसी भी तरह से अपनी गलती बिल्कुल भी नहीं है यही दर्शना चाहती थी और वास्तव में इस में महुआ की गलती बिल्कुल भी नहीं थी,,, महुआ का पति शराबी था दिनभर शराब के नशे में डूबा रहता था रात में कभी कबार उसके साथ संबंध बनाने की कोशिश भी करता था तो एकदम ढेर हो जाता था,,,,भगवा इस बात को अच्छी तरह से जानती थी और अपने पति की करतूत अपनी सास से वह बताती भी थी लेकिन उसके साथसथी कि उसकी बात मानने को तैयार ही नहीं थी और सारा दोष महुआ को ही देती थी इसलिए वह लड़ झगड़ कर कुछ दिनों के लिए मायके आ गई थी,,,, सारी बात सुनने के बाद महुआ और गुलाबी दोनों चिंतित हो गई थी,,, इसलिए महुआ उसको सांत्वना देते हुए बोली,,,)

कोई बात नहीं बेटी तू चिंता मत कर किसी किसी को थोड़ा समय बाद ही मां बनने का सुख मिलता है,,, तुझे भी जल्द ही मिल जाएगा अब खाना खा चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है,,,,।

(इसके बाद तीनों ने खाना खाई और आराम करने लगी,,, शाम ढलने लगी थी हरिया बैलगाड़ी लेकर घर पर पहुंच गया,,,, बैलगाड़ी के पेर में बने घुंघरू की आवाज को सुनकर,,, मधु उत्साहित होते हुए बोली,,,)

महुआ तेरे बाबूजी आ गए हैं,,,,

(इतना सुनते ही अपनी बुआ के बगल में बैठकर सब्जी काट रहे महुआ तुरंत उठ कर खड़ी हो गई और उस लगभग भागते हुए घर के बाहर गई हरिया बैलगाड़ी को बेल से अलग कर रहा था उसे देखते ही  महुवा तुरंत बाबूजी के कहकर आगे बढ़ी और पाव छूने लगी हरिया तो एकदम से चौंक हीं गया क्योंकि उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी महुआ के इधर होने की क्योंकि 2 साल गुजर गए थे कोई हाल समाचार नहीं मिला था और ना ही हरिया ही महुआ के घर पर गया था इसलिए 2 साल बाद महुआ को देखकर वह एकदम खुश हो गया,,)

खुश रहो खुश रहो बेटी तुम कब आई,,,

दोपहर में ही आई हूं बाबूजी,,,,

पूरे 2 साल गुजर गए एक 2 साल में तुम्हें कभी भी हम लोगों का हाल समाचार नहीं ली,,,

ऐसी कोई बात नहीं है बाबू जी,,,,, कोई पहुंचाने को तैयार ही नहीं होता था,,,,

कोई बात नहीं तू अंदर चल में बेल को बांधकर आता हूं,,,,

जी बाबू जी,,,(इतना कहकर महुआ घर में चली गई और हरिया बहन को लेकर घर के पीछे की तरफ उसे बांधने के लिए चला गया,,,, इसके बाद गुलाबी पानी लेकर हरिया के लिए लेकर आई,,, हरिया गुलाबी के हाथ में से पानी का लोटा लेते हुए दूसरे हाथ से उसकी चूची दबाते हुए बोला,,,)

साला मौका नहीं मिल रहा है तुझे चोदने का,,, तेरी बुर का रस अभी तक मेरे लंड पर लगा हुआ है,,,

क्या कर रहे हो भैया जरा धीरे बोलो अब तो महुआ भी आ गई है अगर सुन ली तो बखेडा हो जाएगा,,,

अरे कोई नहीं सुनेगा,,,,(धीरे-धीरे पानी को पीते हुए बोला पानी पी लेने के बाद वापस लौटे को गुलाबी के हाथ में पकड़ाते हुए बोला,,,) अरे सुनना मैं कह रहा था कि चलना घर के पीछे बस सलवार खोल कर खड़ी हो जाना बाकी का काम मैं संभाल लूंगा,,,

अरे पागल हो गए हो क्या भैया,,,(घर के द्वार की तरफ देखते हुए बोले) कोई देख लिया तो गजब हो जाएगा,,,और जब तक महुआ है तब तक ऐसी होती कोई भी हरकत मत करना महुआ हमेशा मेरे पास ही रहती है इसलिए कुछ करने का मौका भी नहीं मिलेगा,,,,

(गुलाबी की बात सुनते ही हरिया लंबी सांस लेते हुए अफसोस भरे स्वर में बोला)

चल कोई बात नहीं तेरी भाभी से ही काम चलाना पड़ेगा,,,,

(और इतना कहकर हरिया और गुलाबी दोनों घर में प्रवेश कर गए मधु जो कि खाना बना रही थी हरिया को रसोई घर की तरफ आता हुआ देख कर बोली),,

अजी सुनते हैं कुछ दिनों से राजू को साथ में क्यों नहीं ले जाते दिनभर यहां-वहां घूमता फिरता है,,,

अरे ले तो जाऊ लेकिन समय पर रहता था वह तो बैल गाड़ी ले जाते समय गायब रहता है,,, अच्छा आने दो आज ईसे बताता हूं,,,यह समय हो गया अभी तक यह घर पर नहीं आया ना जाने कहां घूमता फिरता रहता है,,,।

हां जरा डांटीएगा तो,, लापरवाह होता जा रहा है,,,,,,(तवे पर रोटी को सेंकते हुए वह बोली,,,, थोड़ी देर में सब कोई अपना काम करने लगे खाना बनकर तैयार हो गया था तभी राजू घूमता का घर में प्रवेश किया,,,, उस पर नजर पड़ते ही मधु बोली,,,)

आ गए हैं लाट साहब,,,,

(अपनी मां की बात सुनकर राजू अपनी मां की तरफ देखने लगा उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां ऐसा क्यों बोल रही हो तभी उसके पिताजी बोलें,,,)

राजू दिन भर कहां घूमता फिरता रहता है तुझे मेरे साथ बैलगाड़ी पर चलना चाहिए था ना कुछ दिनों से चल क्यों नहीं रहा है तू,,,।

ओ ओ ,,,, क्या है ना पिताजी,,,वो,,,,

क्या वो वो लगा रहा है दिनभर गांव के आवारा लड़कों के साथ घूमता रहता है,,, तुझे घर की जिम्मेदारी का कुछ भान है या नहीं,,,,

ऐसा कुछ भी नहीं है पिताजी कुछ दिनों से मुझे अपनी तबीयत सही नहीं लग रही थी इसलिए नहीं गया,,,।

(राजू अपनी मां की तरफ देख कर बोल रहा था उसे समझ में आ गया था कि उसके पिताजी उसे डांट क्यों रहे हैं लेकिन इतना तो उसे तसल्ली थी कि उसकी मां ने खेत वाली बात को नहीं बताई थी,,,,,)

अरे तबीयत खराब है तो मुझसे कहा होता अपनी मां से कहां होता किसी से बोला भी तो नहीं,,,

(अभी यह डांट फटकार चल ही रही थी कि बाहर महुआ जोकि पानी लेने गई थी वह घर में प्रवेश करते हुए और पानी भरी बाल्टी को एक कोने में रखते हुए बोली,,,)

क्या बाबू जी मेरे भाई को खामखा डांट रहे हो,,,,।

अरे दीदी तुम,,,, तुम कब आई,,,

घर में रहोगे तब ना पता चलेगा कि घर में कौन आ रहा है कौन जा रहा है,,,,(एक बार फिर से थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए हरिया बोला,,, अपने पिताजी की बात को अनसुना करते हुए वह तुरंत महुआ की तरफ आगे बढ़ा,,,,महुआ अपने भाई से 2 साल बाद मिल रही थी इसलिए प्यार से उसे गले लगा ली,,,, राजू भी 2 साल बाद अपनी बहन को देखकर पूरी तरह से खुश हो गया था इसलिए वहां भी एकदम से अपनी बहन को गले लगा लिया था लेकिन इस हरकत की वजह से राजू की छातियों में उसकी बहन की गोल-गोल खरबूजे जैसी चूचियां चुभती हुई महसूस होने लगी यह एहसास राजू को अंदर तक उत्तेजित कर गया,,,,, लेकिन महुआ सहज बनी रहे और वह राजू को अलग करते हुए बोली,,,।

तू बहुत शैतान हो गया है दिन भर इधर-उधर घूमता रहता है ऐसा नहीं कि बाबू जी के काम में हाथ बटाए,,,

कल से जरूर जाऊंगा दीदी,,,,

हां जरूर जाना तू अब बड़ा हो गया है लेकिन मेरे लिए तो मेरा छोटा भाई ही है,,,,

(महुआ की बात सुनकर गुलाबी अपने मन में बोली देखना छोटे भाई का अब बड़ा हो गया है कहीं तेरी बुर में ना  घुसा दे,,,।

थोड़ी ही देर में पूरा परिवार एक साथ खाना खाने के लिए बैठ गया था और खाना खा लेने के बाद मधु ने महुआ को राजू और गुलाबी के साथ सोने के लिए बोली,,, वैसे तो सब कुछ ठीक था नहीं गुलाबी और राजू का एक दूसरे के बिना चलने वाला बिल्कुल भी नहीं था राजू जब तक गुलाबी की चुदाई नहीं करता था तब तक उसे नींद नहीं आती थी और यही हाल गुलाबी का भी था बिना राजू करूंगा अपनी बुर में लिए उसे चैन बिल्कुल भी नहीं आता था इसलिए दोनों परेशान नजर आ रहे थे महुआ की मौजूदगी में ,,,दोनों को अपनी प्यास बुझाने का मौका नहीं मिलता लेकिन फिर भी करके आ सकते थे बेमन से राजू ने खटिया को खड़ी कर दिया और एक कोने में रख दिया क्योंकि वह जानता था एक घटिया पर तीनों नहीं सो सकते इसलिए नीचे चटाई बिछड़ना जरूरी था,,,, गुलाबी बीच में सो गई और राजू और महुआ दोनों किनारे किनारे पर सो गए गुलाबी जानबूझकर बीच में सोई थी क्योंकि वह किसी ना किसी बहाने राजू से चुदाई का आनंद लेना चाहती थी,,,,

दूसरी तरफ हरिया बात करते हो अपने बीवी के कपड़े एक-एक करके उतार रहा था,,, जब वह ब्लाउज का बटन खोल रहा था तभी मधु बोली,,,।

लड़की ब्याने से पहले एक बार लड़के के बारे में पूछताछ कर लिए होते तो शायद यह दिन नहीं देखना पड़ता,,,,

क्यों ऐसा क्या हो गया,,,?(ब्लाउज का आखरी बटन खोलते हुए बोला)

ससुराल में रोज उसे ताना सुनने को मिल रहा है,,,

ताना लेकिन क्यों,,,,?(हरिया अपनी बीवी की चूची को मुंह में लेते हुए बोला)

क्यों क्या पांव भारी नहीं हुए  हैं इसलिए,,, आप भी तो बिना सोचे समझे कहीं भी उसका शादी कर दिए,,,

राजू की मां तुम तो अच्छी तरह से जानती हो उस समय के हालात कैसे थे,,, महुआ की हरकतें कितनी गंदी हो चुकी थी तुम्हें मालूम है ना मैंने ही गन्ने के खेत में दो लड़कों के साथ उसे पकड़ा था,,,, अगर आनंद थाना में मैं उसका साथी नहीं करवाता तो शायद बदनामी हो जाती और फिर उसकी शादी कभी नहीं हो पाती,,,

जानती हूं,,,, लेकिन उसका दुख देखा नहीं जाता,,,

अरे राजू की मां तूम खा म खा परेशान हो रही हो,,, किसी किसी को ढेर में बच्चे होते हैं,,,

मैं भी तो उसे यही कह रही थी लेकिन ससुराल के ताने से वह परेशान हो चुकी है,,,

चिंता मत करो सब कुछ ठीक हो जाएगा,,,(और इतना कहने के साथ ही वह मधु को पीठ के बल खटीया पर लिटाते हुए उसकी दोनों टांगों को खोल दिया और उसकी बुर में समा गया,,, दूसरी तरफ चटाई पर तीनों लेटे हुए थे गुलाबी और महुआ आपस में बात कर रहे थे और राजू था कि अपनी बहन की नजर बचाकर गुलाबी जो कि उसकी तरफ मुंह करके बात कर रही थी सलवार के ऊपर से उसकी गांड को जोर जोर से दबा रहा था,,,,राजू की हरकतों से गुलाबी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी,,,,

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