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सूरज अपने कमरे में बदहवास सा बैठा हुआ था और आगे उसके क्या सामने क्या क्या समस्या आ सकती हैं और उनसे वो कैसे बचेगा इस पर विचार कर रहा था। बेशक राधा ने बोल दिया था कि वो वो उसकी मम्मी को कुछ नही कहेगी लेकिन फिर भी उसकी बुरी तरह से फटी हुई थी। शाम को जब मम्मी वापिस आयेगी और अगर राधा ने कुछ बोल दिया तो उसका क्या होगा उसे सही से अंदाजा था क्योंकि उसकी मां उसे पहले से ही पसंद नहीं कर रही थी उसकी आवारा हरकतों के चलते।

वहीं दूसरी तरफ सुलिप्सा मधु के घर पहुंच गई और दोनो सहेलियां काफी समय के बाद मिली थी तो बाते होने लगी। मधु चाय पीते हुए बोली:”

” अरे यार तेरी बहुत याद आ रही थी और फिर दो दिन बाद मेरी शादी की सालगिरह भी हैं तो सोचा तुझे बुलाया जाए और सारे प्रोग्राम की रूप रेखा तैयार की जाए।

सुलिप्सा हंसते हुए बोली:”

” अरे भाई मैं भला इसमें क्या कर सकती हू!! तुम लोग अपने हिसाब से देखो।

मधु:” अरे तुम कर सकती हों तभी तुम्हे बुलाया है। कॉलेज में हर एक प्रोग्राम तुम कितने अच्छे कर करा देती थी। सच में तुम इस काम में बहुत एक्सपर्ट हो। करना तो पड़ेगा ये तो फाइनल है।

सुलिप्सा:” अच्छा बाबा ठीक हैं चलो बताओ मुझे कितने आदमी आयेंगे और वो क्या क्या काम करते हैं ताकि उनके हिसाब से उन्हे सुविधा दी जा सके। प्रोग्राम दिन में होगा या रात में, खाने का क्या इंतजाम होगा आदि ये सब बताओ मुझे।

काफी देर तक गहन विचार करने के बाद अंततः प्रोग्राम की रूप रेखा तैयार हो गई लेकिन एक चीज को लेकर सुलिप्सा सहमत नही थी और वो थी दारू।

सुलिप्सा:” देख जहां तक मेरा सवाल है तो किसी भी तरह से दारू पार्टी में नही होनी चाहिए।

मधु:” यार तुम कैसी बात कर रही हो!! भला दारू के बिना भी कोई पार्टी होती हैं क्या ?

सुलिप्सा:” लेकिन दारू पीना भी सही नहीं होता। कितना नुकसान करती हैं और लिवर भी करती हैं वो अलग। उपर से दारू पीकर लोग लड़ाई करते हैं और हल्ला करते हैं उसका क्या।

मधु हंस पड़ी और बोली:”

” उफ्फ तुम भी ना बस, तुम्हे शायद पता नहीं ये सब हरकते नीच किस्म के लोग करते है और खासतौर से वो सब जिन्हे कभी कभी मिलती हैं और भी फ्री की बस इसलिए पागलों की तरह पीते हैं और अपना भी होश नही रहता। हाई क्लास लोग तो दारू पीने के बाद कहीं ज्यादा समझदार और संस्कारी हो जाते हैं क्योंकि उन्हें अपनी लिमिट पता होती हैं और उससे ज्यादा वो कभी नही पीते।

सुलिप्सा ने बुरा सा मुंह बनाया और बोली:”

” वाह जी वाह। ये क्या दलील हुई भला? तुम तो ऐसे बाते कर रहे हो मानो तुम भी दारू पीते हो ?

मधु:” हां तो पीती हु तो पीती हु। उसमे भला गलत क्या है !! मैं तो अपने पति के साथ और अक्सर अपनी सहेलियों के साथ भी लेती हू मैडम।

सुलिप्सा को मानो यकीन सा नही हुआ और बोली:” चल झूठी। कुछ भी बोल देती है तू।

मधु:” अरे मैं यकीन कर मैं सच में पीती हु। अच्छा रुक जरा मैं अभी आई एक मिनट।

इतना कहकर वो बाहर निकल गई वो करीब पांच मिनट बाद आई तो उसके हाथ में एक दारू का पैग का था और उसकी घूंट पीते हुए बोली:”

” अब तो यकीन कर ले कि मैं पीती हु।

सुलिप्सा को मानो अपनी आंखों पर यकीन सा नही हो रहा था और बोली:”

” है भगवान मैं क्या सच देख रही हूं, तुम इतनी कैसे बिगड़ सकती हो मधु ??

मधु ने तगड़ा घूंट भरा और बोली:”

” अरे तुम भी ना बस। ये तो आज कल का फैशन हैं। दारू पीना अब कोई बड़ी बात नहीं है।

सुलिप्सा:” मतलब कुछ भी बोल दोगी क्या तुम। फैशन के नाम पर क्या जहर भी खा लोगी तुम! तुम्हे क्या पता है दारू कितना नुकसान करती है।

मधु ने एक और जोरदार घूंट भरा और बोली:” किसने कहा तुम्हे कि नुकसान करती हैं!! अगर अच्छे ब्रांड्स की दारू लिमिट में पी जाए तो दवा से ज्यादा अच्छा काम करती है। अच्छा लो तुम एक घूंट पीकर तो देखो, खुद ही पता चल जाएगा!!

सुलिप्सा ने बुरा सा मुंह बनाया मानो कुनैन खा ली हो और बोली:”

” चल अपना काम कर समझी, मुझे ये सब गंदी आदतों में नही पड़ना समझी तुम ।

मधु को अब हल्का सा नशा होने लगा तो बोली:” कैसी बाते करती हो मेरी जान ? ये गंदी आदत ही तो जिंदगी का असली मजा दिखाती है, एक बार पिएगी तो पता चलेगा तुझे।

सुलिप्सा:” जाओ अपना काम करो तुम। लगता हैं कि तुझे चढ़ गई है।

मधु हल्की सी हंसते हुए बोली:”

” अभी कहां चढ़ी हैं भला? अच्छा सुन न मेरी बात, एक घूंट तो पीकर देख आज मेरी जान सुलिप्सा मेरे साथ।

इतना कहकर उसने सुलिप्सा को आंख मारते हुए उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया तो सुलिप्सा हंसती हुई बोली

” हाय राम तुझे तो पूरी चढ़ गई हैं। अच्छा सुन मैं अब चलती हु इसमें ही मेरी भलाई है। वरना पता नही तुम क्या क्या उल्टी सीधी हरकते करोगी।

मधु:” अरे ऐसा कुछ नही है। मैं अपने होश में हू और तुम्हे एक घूंट तो आज पीना चाहिए। लो ना टेस्ट करो।

सुलिप्सा:” नही न मधु। मैं नही पी सकती। जिद मत कर न प्लीज

मधु:” कोई बात नही, आज तेरी बात मान लेती हूं लेकिन ध्यान रखना परसो मेरी शादी की सालगिरह पर तुम्हे मेरे साथी पीनी ही पड़ेगी। एक पैग तो हर हाल में पीना पड़ेगा।

सुलिप्सा किसी तरह अपना पीछा छुड़ाना चाह रही थी तो जल्दी से बोली:”

” अच्छा ठीक है। लेकिन अब जिद मत करना। तुम्हे काफी चढ़ गई है तो आराम से बैठ जाओ।

मधु ने आखिरी घूंट भरा और ग्लास को एक तरफ रख दिया और बोली:”

” अरे नही चढ़ी हैं मुझे। देख मेरी कोई भी हरकत तुझे अजीब नही लगेगी। कुछ भी ऐसा लगे तो बताना मुझे कि दारू पीकर मैने ड्रामा किया और हल्ला किया, वैसे एक बात तो हैं तू एक दम मस्त लग रही है। क्या खाती हैं आज कल ?

सुलिप्सा के होंठो पर स्माइल आई और बोली:” कुछ भी बोल देती हो तुम, लगता है दारू असर कर रही है अपना।

मधु ने उसे आंख मारी और बोली:”” अरे नही मेरी जान, दारू छोड़ ना तू सच में उम्र के साथ जवान और कामुक होती जा रही है बिलकुल देसी शराब की तरह। जितनी पुरानी उतनी नशीली।

सुलिप्सा उसकी बात सुनकर खुश हुई और अगले ही पल उदास होते हुए बोली:”

” क्या फायदा अब इन चीजों का मधु।

मधु उसका सब दर्द समझ गई और बोली:” अच्छा किस्मत के लिखे को कोई नहीं बदल सकता लेकिन हम अपनी जिंदगी में थोड़े रंग तो भर ही सकते है। मेरी बात समझ रही हैं मैं क्या बोल रही हूं।

सुलिप्सा अंदर तक कांप उठी और बोली:”

” नही नही ऐसी बाते मत कर। मैं ऐसा सपने में भी नहीं सोच सकती।

उसके बाद करीब दो चार बजे तक सुलिप्सा वही रुकी रही और मधु की कोई भी हरकत उसे ऐसी नही लगी जिससे उसे बुरा लगा बल्कि मधु बेहद मजेदार बाते कर रही थी जिससे उसे बेहद मजा आ रहा था और वो मधु की हिम्मत पर हैरानी हो रही थी कि उसकी हिम्मत कैसे दारू पीने के बाद बढ़ गई थी।

करीब छह बजे के समय आखिरकार सुलिप्सा घर आ गई और उसे देखते ही सूरज का पसीना छूट पड़ा। लेकिन अच्छी बात ये थी कि अभी राधा घर पर नहीं थी तो उसने सुकून की सांस ली और सुलिप्सा बोली:”

” अरे राधा का फोन आया था मुझे। वो आज रात खाना बनाने के लिए नहीं आएंगी।

सूरज को उसकी सांसे रुकती हुई सी महसूस हुई और बोला:”

” क्यों , क्या हुआ ? सब ठीक तो हैं न मम्मी ?

सुलिप्सा:” हां सब ठीक है। बस इसे कुछ जरूरी काम है ऐसा बोल रही थी वो। चल मैं आज रात के लिए खाना बना देती हु।

इतना कहकर वो रसोई में घुस गई और सूरज हॉल में बैठ कर टीवी देखने लगा। तभी उसकी मम्मी वहां आई और बोली:”

” अरे मैं कुछ मिठाई लेकर आई थी राधा के बच्चो के लिए।। एक काम करो तुम राधा को ये मिठाई दे आओ तो नही तो सुबह तक खराब हो सकती है।

सूरज जाना तो नही चाहता था लेकिन मना कर नही पाया और कल दिया अपनी बाइक लेकर राधा के घर की तरफ। अंदर आने के बाद उसने देखा कि घर में तो कोई नहीं था। सूरज वापिस जाने ही वाला था कि एक कमरे की लाईट जली और सूरज को हैरानी हुई और वो धीरे से उधर गया और अंदर झांकने लगा तो दरवाजे की झिर्री से उसने देखा कि राधा बिस्तर पर नंगी पड़ी हुई थी और एक आदमी उसकी चूत में लंड घुसाने की कोशिश कर रहा था और राधा बोली:”

मोहन मैंने तुमसे कितनी बार कहा हैं अंधेरे में किया करो ये सब, कोई देख लेगा किसी दिन।

मोहन उसकी चूत में लंड का सुपाड़ा रगड़ते हुए बोला:”

” तेरी चूत में लंड घुसते हुए तेरे चेहरे पर जो मजा होता हैं वो देखे बिना चुदाई का क्या मजा। मुझे तो लगा था कि आज तुम भी अपने परिवार के साथ शादी में चली जाओगी। लेकिन तुमने अपनी मकान मालकिन के यहां सफाई का बहाना बनाकर जाने से मना कर दिया।

और इतना कहकर उसने जोर से धक्का मारा और लंड घुसा दिया और फिर दोनो की चुदाई शुरू हो गई और राधा बोली:”

” बस हो गया ना अंदर, अब तो लाइट बंद कर दो, फंस गई तो दिक्कत होगी।

मोहन बिना उसकी बात सुने धक्के लगाने लगा और राधा भी जोर जोर से सिसकियां लेने लगी। सूरज पहली बार चुदाई होते देख रहा था और उसका लंड खड़ा हो गया था। उसे समझ नही आ रहा था कि क्या करें। मिठाई वापिस लेकर वो घर की तरफ चल दिया और रास्ते मे भिखारियों को सारी मिठाई खिला दी।

अगले दिन जब वो काम पर गई तो सुलिप्सा ने उससे पूछा

” अरे मिठाई कैसी लगी तुझे ?

राधा:” मिठाई कौन सी मिठाई ?

सुलिप्सा:” अरे मैं शहर से लाई थी और सूरज के हाथ भेजी थी। लगता हैं सूरज ने दी नही तुम्हे। सूरज ओ सूरज जरा इधर तो आ!

सूरज आया और वो अब राधा को देखकर कल की तरह डर नही रहा था और बोला:”

” क्या हुआ मम्मी ?

सुलिप्सा:” अरे मिठाई का क्या हुआ जो मैने तुझे कल राधा को देने के लिए दी थी?

सूरज:” वो मैं इनके घर गया था लेकिन घर में कोई नही था, शायद सब लोग कहीं बाहर गए थे और एक कमरे की लाइट भी खुली छोड़ गए थे गलती से। मिठाई तो मैंने सब रात ही भिखारियों को खिला दी थी।

सूरज की एक कमरे की लाइट खुली वाली बात सुनकर राधा की हालत खराब हो गई और बोली:”

” हां मालकिन हम तो कल शादी में गए थे। फिर कहां से घर पर मिलती। सूरज ने अच्छा किया जो भिखारियों को मिठाई खिला दी नही तो खराब हो जाती।

सूरज अपने कमरे में चला गया और सुलिप्सा बोली:”

” अच्छा सुन न मुझे बैंक में थोड़ा है तो मुझे जाना होगा, तुम आज सारी सफाई खत्म कर देना सूरज के साथ मिलकर।

राधा ने हां में सिर हिलाया और कमरे में सफाई करने लगी। उसकी हालत खराब हो गई थी क्योंकि उसे पूरा यकीन हो गया था कि जरूर सूरज ने उसे मोहन के साथ देख लिया था।

सुलिप्सा के जाने के साथ ही राधा सूरज के पास आई और बोली:”

” सूरज बेटा तुम रात आए और मैं घर पर नहीं मिली। अच्छा नही लगा मुझे।

सूरज:” ओह इसका मतलब तो कमरे मे मोहन के साथ आपकी भूतनी थी क्या ?

इतना सुनते ही राधा लगा कि मानो उसकी जान निकल गई हो उसके बदन से। काटो तो खून नहीं और जिस्म पसीने से भर गया और बोली:”

” कौन मोहन भला ? ये कैसी बात कर रहे हों तुम ?

सूरज” ज्यादा बनने की कोशिश मत करो तुम समझी। वही मोहन जो चोदते हुए तेरे चेहरे को देखता हैं और जिसके चक्कर में तू शादी में भी नही गई थी। याद आया या कुछ और बताऊ?

राधा के मुंह से एक आवाज नही निकली और बिना कुछ बोले चुप खड़ी रही। सूरज बोला:”

” अब क्यों चुपचाप खड़ी हो , जाओ अपन काम करो, कल तो बड़ी बड़ी बाते कर रही थी तुम और कल ही तेरा असली चेहरा भी देख लिया।

राधा:” देखो मुझे माफ कर दो। मुझसे गलती हुई है। ये बात किसी को मत बताना तुम।

सूरज ने बिना किसी डर और शांत के उसकी गान्ड को मसल दिया और बोली:”

” डरो मत, नही को नही बताऊंगा।

राधा कुछ नही बोली और दूसरे कमरे में आ गई। वो समझ गई थी कि अब सूरज उसे छोड़ने वाला नही है। थोड़ी देर के बाद दोनो सफाई में लग गए और सूरज कभी उसकी चूची मसल रहा था तो कभी उसकी गांड़ तो राधा बोली:”

” सूरज ये सब मत करो मेरे साथ। मुझसे गलती हुई है लेकिन उसकी इतनी बड़ी सजा मत दो मुझे।

सूरज ने उसकी गांड़ पर एक थप्पड़ मारा और बोली:”

” नखरे मत कर समझी। इतनी आसानी से नही छोडूंगा तुम्हे। अभी तो शुरुआत हैं मेरी रानी।

तभी अचानक सूरज का फोन बज उठा और उसके दोस्त विजय का फोन था।

सूरज:” हां विजय बोलो?

विजय:” अरे हम सब मूवी देखने जा रहे हैं। तू भी आज, संजय पार्टी दे रहा हैं आज।

सूरज:” अच्छा कल ठीक हैं फिर मैं आ रहा हूं।

इतना कहकर उसने फोन काट दिया और राधा से बोला:”

” तुम सफाई करो जरा, मैं कुछ घंटो के बाद आता हु। आने के बाद आज तुझे ऐसा मजा दूंगा कि मोहन को भूल जायेगी।

इतना कहकर उसने जोर से राधा की गोलाईयों को रगड़ दिया तो राधा तड़प सी उठी औ सूरज बाहर निकल गया तो राधा ने चैन की सांस ली। राधा को समझ नही आ रहा था कि वो इस मुसीबत से कैसे बाहर निकले।

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