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जोर जोर से दरवाजा पीटने के बाद भी जब नही खुला तो सुलिप्सा का मूड खराब हो गया और उसे समझते देर नहीं लगी कि उसके बेटे ने रात फिर से दारू पी हैं तो उसका गुस्सा सातवें आसमान पर चला गया और जोर जोर से चिल्लाते हुए बोली:”

” सूरज तू ऐसे सुधरने वाला, आज तुझे ऐसा सबक सिखाऊंगी तो मुझे याद रखेगा।

इतना कहकर वो बाहर आ गई तो देखा कि घर की नौकरानी राधा भी आ गई थी और उसे गुस्से में देखकर बोली”

” क्या हुआ मैम साहब? आज फिर से सूरज ने परेशान किया क्या आपको ?

सुलिप्सा सोफे पर बैठ गई और जमाने भर की चिंता अपने चेहरे पर लाते हुए बोली:”

” हां राधा, समझ नही आता कि क्या करू इस लड़के का ? कोई काम करने के लिए तैयार नहीं होता, बस ये और इसके आवारा दोस्त , ठीक है इसका बाप अच्छी दौलत छोड़कर गया है लेकिन अगर काम नहीं करेगा तो एक दिन सब खत्म हो ही जाएगी। पता नही कब अक्ल आयेगी इसे ??

राधा ने झाड़ू उठाई और सफाई करते हुए बोली:”

” आप की चिंता ठीक हैं, लेकिन आप देखना सूरज बेटा एक दिन अपनी सब जिम्मेदारी ठीक से पूरी करेंगे।

सुलिप्सा:” भगवान करे तेरी बातो में सच्चाई हो, तेरे मुंह में घी शक्कर। अच्छा चल तू काम खत्म कर मैं नहा कर आती हू।

इतना कहकर सुलिप्सा बाथरूम में घुस गई और कोई मधुर गीत गुनगुनाते हुए नहाने लगी। सुलीप्सा करीब 39 साल की एक बेहद कसी हुई ठोस बदन की औरत थी। इतनी उम्र होने के बाद भी उसका शरीर मानो सांचे में ढला हुआ था। बिल्कुल सही जगह पर सही मांस। बिल्कुल नंगी सुलिप्सा अपने आपको शीशे में निहार रही थी और अपने आप पर गर्व महसूस कर रही थी। उसकी 36 इंच की चूचियां बेहद कसी हुई और तने हुए निप्पल, लंबी सी खूबसूरत गर्दन, मांसल कंधे और मध्यम आकार की हल्की सी भरी हुई कमर, खूबसूरत सपाट पेट जिसमे गहरी नाभि और उसके पास बना हुआ एक कट का छोटा सा निशान जो इस बात का जीता जागता सबूत था कि उसका बेटा उसकी चूत नही पेट फाड़कर बाहर आया था। गांड़ तो मानो जीती जागती कयामत थी। ऐसा लगता था मानो पेट और कमर का मांस गांड़ पर जबरदस्ती आ गया हो। कुल मिलाकर 36:32:38 ये उसके शरीर का अनुपात था।

नहाकर आने के बाद सुलिप्सा अपने घर के कामों मे लग गई और राधा ने सफाई करके खाना भी बना दिया था। करीब 10 बजे के आस पास सूरज उठा और अपनी मम्मी और राधा को बैठे देखकर नजरे झुकाए बाथरूम में चला गया। थोड़ी देर बाद वो नहाकर आया और दोनो मां बेटे ने एक साथ नाश्ता किया। खाना खाते समय बिल्कुल खामोशी ही रही क्योंकि सुलिप्सा नही चाहती थी कि उसका बेटा खाते समय नाराज हो।

खाना खत्म होने के बाद सूरज हॉल में बैठ गया और अपने मोबाइल में लग गया तो सुलिप्सा उसके पास बैठ गई और बोली:”

” सूरज बेटा अब तुम बड़े हो गए हो और घर की जिम्मेदारी लेना शुरू करो।

सूरज ने ऐसा मुंह बनाया मानो कड़वी गोली खाई हो और बोला:”

” मम्मी घर में अभी आप तो हैं ही और फिर अभी मेरी ही कितनी है, थोड़ी सा मस्ती करने दो, फिर एक दिन सब मुझे ही तो संभालना है।

सुलिप्सा को गुस्सा तो आया लेकिन समझदारी दिखाते हुए बोली:” लेकिन बेटा तुम्हे भी कोई तो काम करना चाहिए।

सूरज:” आप भी ना बस पीछे ही पड़ जाती हो, हमारे पास कौन सा पैसे की कमी है जो मुझे काम करना पड़ेगा। इतनी दौलत पापा हमारे लिए ही तो छोड़कर गए हैं।

सुलिप्सा के चेहरे पर अब गुस्सा साफ झलक आया और बोली:”

” तेरे बाप ने मेहनत करके पैसा कमाया और तू इसे पानी की तरह बहाने की मत सोच। मैं तुझे ऐसा करने भी नही दूंगी। मैं चाहती हूं कि तू आगे पढ़ाई करे समझा।

सूरज अपनी मम्मी के गुस्से से बेहद डरता था इसलिए नरम पड़ते हुए बोला:”

” मम्मी अब मेरा पढ़ने का मन नही है, लेकिन मैं कल से आपको शिकायत का कोई मौका नहीं दूंगा बिल्कुल भी।

सुलिप्सा:” बस कर तू तो। आज तो पता नही कितने वादे कर चुका है लेकिन सुधरता नही है।

सूरज:” कल से आप देखना, मैं बिल्कुल बदल जाऊंगा।

सुलिप्सा:” चल फिर तो अच्छी बात है। अच्छा राधा सुनो ना होली आने वाली है तो घर की साफ सफाई करने पड़ेगी और इस काम में सूरज भी मदद करेगा।

सूरज:” लेकिन मुझे तो सफाई आती थी नही है।

राधा:” वो मैं सब सिखा दूंगी तुम्हे, अब बहाने मत बनाओ और सुधार जाओ। देखो तुम्हारी तुमसे बहुत प्यार करती हैं और उसे अब ज्यादा दुख मत दो। समझे तुम

सूरज:” ओह आंटी मेरी मम्मी दुनिया की सबसे अच्छी मम्मी हैं और मैं इन्हें सबसे ज्यादा प्यार करता हूं।

इतना कहकर उसने अपनी मम्मी का गाल चूम लिया तो सुलिप्सा ना चाहते हुए भी मुस्कुरा पड़ी और बोली:”

“देखा राधा कितना तेज हैं ये ? बाते बनाना तो कोई इससे सीखे ?

राधा:” सूरज बेटा तेज तो जरूर हैं लेकिन आपसे बहुत ज्यादा प्यार करते है। देखना इस बार ये बिलकुल सुधर जाएगा।

सुलिप्सा:” अच्छा चलो ठीक है। मुझे थोड़ा काम हैं तो मार्केट जाना होगा। तब तक तुम इसको काम के बारे में थोड़ा समझा दो।

इतना कहकर सुलिप्सा घर से बाहर निकल गई और राधा ने होली की सफाई के बारे में सूरज को समझाना शुरू कि वो कैसे क्या करेंगे। सूरज बिना ध्यान से सुने अपने मोबाइल में लगा रहा और बस अपनी गर्दन हिलाता रहा।

थोड़ी देर के बाद सूरज को खांसी आई तो राधा पानी लेने के लिए दौड़ी और जल्दी में उसका पल्लू सरक गया। राधा तेज से चलती हुई जिससे उसकी चूचियों में कम्पन हो रहा था और उसने पानी का ग्लास सूरज को दिया तो सूरज पानी पीने लगा और उसकी नजर पहली बार राधा की ब्लाउस से झांकती हुई गोलाईयों पर चली गई और राधा को जैसे ही उसकी नजरो का एहसास हुआ था तो उसने अपना पल्लू ठीक किया। पानी पीकर सूरज को आराम मिला और राधा अपने घर लौट वापिस गई।

करीब चार बजे सुलिप्सा वापिस आई तो देखा कि सूरज घर नही था तो सुलिप्सा ने आज उसके कमरे की तलाशी लेने की सोची ताकि अगर दारू मिले तो उसे हटा सके। सुलिप्सा उसके कमरे में घुस गई और उसे दो बॉटल मिल भी गई। वो फिर से तलाशी लेने लगी और उसे कुछ सीडी मिली तो उसने चलाकर देखी तो उसके बदन पसीने पसीने हो गया। ये सेक्सी वीडियो से भरी थी जिसमे जोरदार चुदाई की वीडियो थी। सुलिप्सा को अपने बदन में आज 11 साल के बाद गर्मी महसूस हुई और उसकी उंगली पेंटी में घुसकर उसकी उसकी गीली चिकनी हो गई चूत के होंठो से जा टकराई लेकिन मैन तभी गेट नॉक की आवाज आई
तो उसने किसी तरह खुद को काबू में किया और दोनो बॉटल को अपने कमरे मे छुपा दिया।

सुलिप्सा ने गेट खोला तो बाहर राधा थी। राधा अंदर आई और घर के कामों में लग गई। करीब 9 बजे सूरज भी घर लौट आया और
सुलिप्सा ने चैन की सांस ली कि उसने आज दारू नही पी थी अभी तक। खाना खाकर सुलिप्सा बोली:” अच्छा सुनो मुझे कल मधु के घर जाना होगा, उसने कुछ जरूरी काम से बुलाया हैं। तुम राधा के साथ मिलकर सफाई कर लेना और आंटी को परेशान मत करना समझे गए न तुम।

सूरज:” आप चिंता मत करिए मम्मी, मैं सब काम अच्छे से कर लूंगा।

सुलिप्सा:” अच्छा राधा मेरे कुछ पुराने कपड़े है, ऐसे ही पड़े हुए हैं तो उन्हें तुम ले लेना और सफाई भी उन्हे ही पहन कर करना ताकि नए कपड़े खराब न हो।

राधा:” ठीक है दीदी मैं ले लूंगी। वैसे भी पुराने कपड़े ही सफाई के लिए ठीक होते है। अच्छा मैं अब चलती हु, रात ज्यादा होने लगी।

सुलिप्सा:” अरे पति और बच्चो के लिए खाना लेती जाना। अब कहां जाकर रात को बनाएगी।

राधा:” दीदी रोज रोज अच्छा नही लगता। मैं घर जाकर बना लुंगी।

सुलिप्सा उसे प्यार से डांटती हुई बोली:” ज्यादा मत सोचा कर और चुपचाप खाना लेकर चली जाओ। समझ गई ना तुम।

राधा:” अब क्या ही बोलूं दीदी आपको मैं!!

सुलिप्सा स्माइल करती हुई बोली:” कुछ बोलना भी मत। अब जाओ और कल आ जाना।

उसके बाद राधा चली गई और सूरज भी अपने कमरे मे चला गया और थोड़ी देर के बाद वापिस हॉल में आकर बैठ गया। उसकी दारू की बॉटल न मिलने के कारण उसका मूड खराब हो गया था लेकिन कुछ बोल भी नहीं सकता था।

सुलिप्सा:” क्या हुआ बेटा कुछ परेशान से लग रहे हो तुम ?

सूरज:” कुछ नही मम्मी। बस ऐसे ही मन नही लग रहा आज ।

सुलिप्सा खूब समझ रही थी कि क्यों उसका लड़का बेटा परेशान हैं इसलिए स्माइल करते हुए बोली:” क्या हुआ बेटा ? किसी ने कुछ बोला क्या तुझे ?

सूरज:” नही मम्मी, बस ऐसे ही दिल सा नही लग रहा है आज।

सुलिप्सा:” क्यों गर्ल फ्रेंड से लड़ाई हो गई क्या तेरी आज ?

सूरज अपनी मां की स्माइल देखकर सब समझ गया था कि आज उसकी मां ने उसकी दारू छुपा दी है और अब उसके मजे ले रही है तो सूरज बोला:”

” नही मम्मी, आप तो जानती है कि मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।

सुलिप्सा:” घूमता तो रहता है सारे दिन लड़कियों के साथ। मैने कई बार देखा तुझे।

सूरज:” क्या मम्मी आप भी ना, वो मेरी दोस्त राजू की बहन थी और उसके लिए सामान लेने के लिए मैं उनके साथ गया था। और मुझे परेशान मत करो।

सुलिप्सा हंस पड़ी और बोली:” अच्छा बाबा ठीक है। लेकिन कुछ तो तुझे जरूर हुआ है, कहीं कुछ खो तो नही गया तेरा।

सूरज पूरी तरह से खीज उठा और बोला:” जब आप सब जानती है तो फिर क्यों मजे ले रही हो मेरे ?

सुलिप्सा बिलकुल अनजान सी बनते हुए:” क्या हुआ ? मैं क्या जानती हूं भला ?

सूरज:” यहीं कि आप मेरे कमरे में आई थी आज दिन में। बस अब खुश

इतना कहकर सूरज उठा और अपने कमरे की तरफ जाने लगा तो उसकी मां पीछे से बोली:”

” बेटा देखो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा तुम क्या कह रहे हो। लेकिन मैं तेरी मां हू, तेरा कुछ गलत थोड़े ही करूंगी।

सूरज बिना कोई जवाब दिए अपने कमरे मे घुस गया और उम्मीद में कुछ ढूंढने लगा लेकिन कुछ होता तो मिलता ना। दूसरी तरफ सुलिप्सा अपने कमरे में आ गई और सोने की कोशिश करने लगी। थोड़ी देर के बाद ही उसे नींद आ और दूसरी तरफ सूरज को नींद नहीं आ रही थी तो मन बहलाने के लिए मूवी देखने लगा और सेक्सी मूवी देखते हुए सूरज को दारू की बड़ी जरूरत महसूस हुई और उसे ध्यान आया कि उसकी मम्मी ने जरूरी बॉटल अपने कमरे में ही छुपाई होगी। इसलिए सूरज धीरे से दबे पांव उठा और और धीरे से अपनी मम्मी के कमरे तक आ गया और उम्मीद में दरवाजे को हल्का सा धक्का दिया तो वो खुल गया और सूरज की खुशी का ठिकाना न रहा। कमरे मे हल्के गुलाबी रंग का नाइट बल्ब जला हुआ था और और उसने एक नजर अपनी मम्मी की तरफ डाली ताकि निश्चित कर सके कि वो सोई हुई हैं तो उसने देखा कि उसकी मम्मी की साड़ी उसके घुटनो तक चढ़ी हुई थी जिससे उसके खूबसूरत पैर नजर आ रहे थे और सूरज को यकीन हो गया कि उसकी मम्मी नींद में हैं लेकिन उसका दिल नही मान रहा था क्योंकि वो जानता था कि अगर मम्मी ने उसे अपने कमरे में दारू ढूंढते हुए पकड़ लिया तो वो मुंह दिखाने के लायक नहीं रहेगा। इसलिए वो धीरे धीरे आगे बढ़ा और बिलकुल अपनी मां के सामने पहुंच गया तो उसने देखा कि उसकी मम्मी आंखे बंद किए सच में गहरी नींद नहीं सोई हुई थी। सूरज पलटने लगा कि उसकी नजर अपनी मम्मी की छाती पर चली गई और अस्त व्यस्त हो रहे ब्लाउस में से उसकी चुचियों का उभार नजर आया तो सूरज को लगा कि ये क्या पाप कर रहा हूं मैं यार, ऐसा सोच कर सूरज दूसरी तरफ घूम गया और अलमारी से बॉटल ढूंढने लगा लेकिन उसे नही मिल रही थी। करीब 10 मिनट में सूरज ने पूरा कमरा छान मारा लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ तो अन्त में उसने दुखी मन से वापिस जाने का फैसला किया और जाते हुए उसकी नजर एक बार फिर से अपनी मम्मी पर पड़ी तो देखा कि उसकी साड़ी एक बार जांघो पर सरकी हुई थी और सूरज को न चाहते हुए भी अपनी सांसे अटकती हुई महसूस हुई। सूरज को समझ नही आया कि क्या करे और मुंह दूसरी तरफ किया और जाने लगा लेकिन उसका दिल नही मान रहा था। अंत में जैसे ही वो कमरे के गेट पर पहुंचने वाला था हो उसने एक बार फिर से ना चाहते हुए भी अपनी मम्मी की तरफ देखा और उसकी जांघो को देखता रहा और फिर कमरे से बाहर निकल गया और अपने कमरे मे जाकर सो गया।

अगले दिन सुबह नाश्ता करने के बाद सुलिप्सा ने सूरज और राधा को काम के बारे में सब समझाया और मधु के घर निकल गई। सूरज रात से दारू न मिलने से परेशान था तो राधा से बोला:”

” आंटी मुझे कुछ जरूरी काम हैं तो मैं थोड़ी देर के बाद आता हूं।

और उसके बाद सूरज अपनी दारू लेने के लिए निकल गया। करीब आधे घंटे के बाद वो पीकर आया और देखा कि राधा घर की सफाई में लगी हुई थी और उससे बोली :”

” अरे सूरज बेटा अच्छा हुआ तुम आ गए, जरा ये टेबल हटाने में मेरी मदद करो तो।

सूरज ने उसकी मदद करी और राधा टेबल के पास बैठ कर उसे साफ करने लगी जिससे उसकी चूचियां ब्लाउस से नजर आने लगी और की नजर उन पर ही जम गई। राधा मुंह नीचे किए अपना काम कर रही थी और टेबल के पाए की सफाई करने के लिए पूरी तरह से नीचे झुक गई तो उसकी करीब आधे से ज्यादा चुचियों का आकार छलक पड़ा और सूरज के माथे पर पसीना उभर आया और उसे अपने लंड में तनाव महसूस हुआ और तभी राधा उठ गई तो उसे एहसास हुआ कि सूरज उसकी चुचियों को देख रहा है तो उसे अपने बदन में एक सिरहन सी महसूस हुई और उसने अपने ब्लाउस को ठीक किया और बोली:”

” चलो हॉल तो साफ हो गया अब आपका कमरा साफ़ करते हैं।

इतना कहकर वो चल पड़ी और सूरज उसके पीछे चलने लगा। राधा को यकीन नहीं हो रहा था कि सूरज उसकी चुचियों का उभार सचमुच देख रहा था और ये सोचकर उसका बदन अभी तक कांप रहा था जिससे चलते हुए उसकी गांड़ मटक रही है और सूरज की नज़र वही टिकी हुई थी। राधा कमरे मे पहुंची और अलमारी को साफ करने लगी जबकि सूरज उसे काम करते हुए देख रहा था। सफाई करते हुए राधा सोच रही थी कि उसके मन का वहम था कि सूरज उसकी चुचियों को देख रहा था। वो ऐसा नहीं कर सकता, तभी उसे लगा कि नही वो सच में ही देख रहा था और तुझे ये बात मान लेनी चाहिए। दुविधा में पड़ी हुई राधा के मन में एक विचार आया कि मुझे एक बार फिर से देखना होगा कि कहीं मेरी आंखो ने धोखा तो नही खाया और ऐसा सोचकर वो सूरज से बोली”

” सूरज बाबा जरा ये अलमारी को थोड़ा उधर खिसका दो।

सूरज ने अलमारी को ताकत लगाते हुए खिसका दिया और राधा जान बूझकर पूरी तरह से झुक गई और सफाई करने लगी जिससे उसकी आधे से ज्यादा बाहर छलक पड़ी और सूरज की आंखे चमक उठी और सूरज एक बार से राधा की गोलाईयों का दीदार करने लगा। राधा ने धीरे से चोरी चोरी सूरज को देखा तो उसे सच में यकीन हो गया कि वो उसकी चुचियों को ही देख रहा है तो राधा ने अपना मुंह उपर किया जिससे उसकी चूचियां अंदर चली गई और सूरज को निराशा हुई। लेकिन अगले ही पल राधा सफाई के लिए फिर से झुकी तो उसकी चूचियां फिर से छलक पड़ी तो सूरज की खुशी का ठिकाना न रहा। राधा शर्म से पानी पानी हो गई और वो फिर से उपर हुई तो उसकी चूचियां फिर से अंदर चली गई और सूरज निराश। लेकिन राधा मरती क्या न करती, उसने एक बार अच्छे से अपने ब्लाउस को ठीक किया और सफाई करने के लिए झुक ही गई और कुछ सेकंड्स के बाद फिर से उसकी चुचियों ने उसे धोखा दे दिया और सूरज की चांदी हो गई । राधा फिर से उपर की तरफ उठने लगी तो सूरज बोला:”

” आंटी मेरे हाथ अब दर्द कर रहे हैं तो आप जल्दी से सफाई कीजिए। बार बार आप बीच मे मत रुकिए ना।

राधा को पसीना उभर आया उसकी बात सुनकर। कितना चालाक हो गया है ये लड़का। राधा बिना कुछ बोले झुकी रही और उसकी चूचियां सूरज मजे से देखता रहा जिससे उसके लंड में भी तनाव आ रहा था।

आखिरकार सफाई खत्म हुई और शर्म से लाल हुई राधा उठ गई और बिना कुछ बोले दूसरे कमरे मे चली गई तो सूरज उसकी हालत पर मुस्कुरा उठा। थोड़ी देर के बाद राधा आई और दोनो फिर से सफाई में लग गए। बार बार ना चाहते हुए भी उसकी चूचियां उभर रही थी और सूरज देख रहा था जिसका नतीजा ये हुआ कि उसने अब अपनी चुचियों की परवाह ही छोड़ दी और काम में लग गई जिससे सूरज को यकीन हो गया कि अब राधा उसे जान बूझकर अपनी चुचियों को दिखा रही है और उसकी हिम्मत बढ़ गई। बेड के नीचे की सफाई करने के लिए राधा ने सूरज को बेड को ऊपर करने के लिए कहा और सूरज ने बेड को थोड़ा सा ऊपर उठा दिया और राधा अंदर घुसने लगी लेकिन उसकी साड़ी लकड़ी में फंसकर बाहर ही उलझ गई तो सूरज को उसकी नंगी जांघें नजर आई और बस उसकी गांड़ पर पहनी हुई एक पेंटी। सूरज का बदन पूरी तरह से गर्मी से भर गया और वो उसकी गांड़ को देखने लगा और राधा इस सबसे बेखबर तेजी से अपने काम में लगी हुई थी जिससे उसकी गांड़ मटक मटक पड़ रही थी और सूरज का हाथ अपने लंड पर चला गया और सूरज उसे सहलाने लगा और हिम्मत करके उसने एक हाथ राधा की गांड़ पर रख दिया तो राधा चिहुंक सी पड़ी और उसे अपनी गांड़ के नंगे होने का एहसास हुआ और बाहर की तरफ पीछे हटने लगी और बोली:”

” सूरज हटो जल्दी, पीछे हटो तुम।

सूरज समझ रहा था कि वो सब दिखावा कर रही है इसलिए उसकी गांड़ को अपनी मुट्ठी में भरते हुए बोला:”

” मैं पीछे हटा तो आप बेड के नीचे दब जायेगी इसलिए जल्दी से आप सफाई करके और बाहर आ जाए क्योंकि इतना भारी में बार बार नही उठा सकता।

राधा बड़ी मुश्किल मे फंस गई और तेजी से हाथ चलाने लगी वही सूरज अब हिम्मत करके उसकी गांड़ को जोर से सहलाने लगा तो राधा का बदन मचल उठा और उसकी चूत में कंपकंपी सी हुई और राधा कसमसाते हुए बोली:”

” उफ्फ तुम क्या कर रहे हो, मुझे छोड़ तो दो नही तो बेड गिर जायेगा सूरज।

सूरज की उंगलियां धीरे धीरे उसकी गांड़ के छेद की तरफ बढ़ने लगीं और बोला:”

” बेड नही गिरेगा आंटी, आपको छोड़ दूंगा तो आपको चोट लग सकती हैं।

राधा बुरी तरह से फंस गई थी और तेजी से अपना काम खत्म करने लगी और सूरज अब हिम्मत करके अपने लंड को बाहर निकाल लिया और बिल्कुल राधा के पीछे खड़ा हो गया जिससे उसका नंगा लंड राधा की गांड़ से टकराया तो राधा के मुंह से आह निकल पड़ी और बोली

” सूरज पीछे हट, मुझे बाहर निकलना है।

लेकिन सूरज ने उसकी बात को अनसुना करते हुए लंड को उसकी पैंटी के उपर रगड़ दिया तो राधा एक झटके से बेड के नीचे से निकली और उसे एक जोरदार थप्पड़ जड़ दिया और कमरे से बाहर निकल गई। सूरज की गांड़ फट गई और उसने बेड को नीचे किया और राधा से माफी मांगने लगा तो राधा गुस्से से बोली:”

” आने दे आज तेरी मम्मी को, तेरी सारी करतूत बताऊंगी उन्हे।

सूरज की गांड़ से धुवां निकल गया और वो राधा के पैरो मे लेट गया और बोला”

” आंटी नही, ऐसा मत करना, वो मुझे घर से निकाल देगी। भगवान की कसम आज के बाद मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगा।

राधा:” वो सब तो तुझे पहले सोचने चाहिए था न, मेरी इज्जत पर हाथ डालते हुए तुझे शर्म नही आई थोड़ी सी भी नालायक लड़के !! आज तो तुझे नहीं छोड़ने वाली मैं।

सूरज की हालत खराब हो गई और उसके पैरो पर अपना सिर रगड़ते हुए बोला:”

” आंटी अपना बेटा समझकर माफ कर दीजिए। आज के बाद ऐसी गलती हुई तो फांसी पर टांग दीजिए मुझे। मम्मी घर से बाहर निकाल देगी तो मैं कहां रहूंगा और कैसे जियूंगा!!

राधा का दिल पसीज गया और उसने सूरज को माफ करते हुए कहा:”

” ध्यान रखना लेकिन ये तेरी पहली और आखिरी गलती होगी। आज के बाद कुछ गलत किया तो अंजाम खुद भुगत लेना।

सूरज ने हां में सिर हिलाया और अपने कमरे मे आ गया और चैन की सांस ली।।

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