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रश्मि- भाई मैं कौन सा लंड चूसती रहती हूँ.. जो मुझे आता है कि कैसे चूसते हैं.. पहली बार तो चूस रही हूँ। मुझसे तो ऐसे ही चूसा जाएगा.. चुसवाना है तो बोलो.. नहीं तो मैं चली।
सूरज- अच्छा अच्छा.. ठीक है.. जैसे भी चूस ले.. ठीक है, कोई बात नहीं.. आहिस्ता आहिस्ता तुझे मेरा लंड ठीक से चूसना भी आ जाएगा। तेरे पति तक पहुँचने से पहले तुझे बिल्कुल एक्सपर्ट बना दूँगा.. देखना तू..
रश्मि- मेरे पति के लिए कुछ बाकी छोड़ोगे.. तभी तो जाऊँगी ना उसके पास बरना फिर जाने का क्या फ़ायदा?
दोनों हँसने लगे..
सूरज- चल अब जल्दी से मेरा पानी निकाल दे ना..
अब आगे..
रश्मि- नहीं भाई.. यहाँ पर सब कुछ खराब हो जाएगा.. मैं नहीं निकालती।
सूरज- तो मेरा पानी मुँह में ले लेना ना..
रश्मि- छी: छी: कितनी गंदी बातें करते हो ना तुम.. मैं तुम्हारा पानी अपने मुँह में क्यों लूँ?
अपने भाई का लंड रगड़ते-रगड़ते.. जैसे वो छूटने वाला हुआ तो रश्मि ने उसका लंड उसके शॉर्ट्स के अन्दर ही डाल दिया और ऊपर से दबा दिया।
इसी के साथ ही सूरज का पूरे का पूरा पानी उसके शॉर्ट्स के अन्दर ही निकलने लगा।
‘ऊऊऊहह.. आआआ..अह.. सस्स्स्स.. स्सस्स..’ की आवाजों के साथ ही सूरज के लंड ने सारा पानी अपने शॉर्ट्स में ही निकाल दिया।
पूरा पानी निकलने के बाद सूरज बोला- रश्मि तुम बहुत शैतान हो.. देखो तुमने मेरा सारा शॉर्ट्स खराब कर दिया है..

रश्मि ने उसके शॉर्ट्स को नीचे को खींचा.. और अन्दर हो रही सारी मलाई को फैलते देखा तो हँस कर बोली- अब बहुत अच्छा लग रहा है.. है न?
सूरज बोला- कोई बात नहीं.. आज रात को तेरी चूत से सारा बदला लूँगा।
रश्मि- क्या मतलब?
सूरज- मतलब यह कि मैं आज ही रात को तेरी कुँवारी चूत चोदूंगा।
रश्मि- भाई.. आपको शर्म नहीं आएगी क्या.. अपनी ही सग़ी बहन को चोदते हुए?
सूरज- जब तुझे अपने भाई का लंड चूसते हुए शर्म नहीं आई.. तो मुझे भी तेरी चूत चोदते हुए कोई शरम नहीं आएगी।
रश्मि हँसते हुए बोली- लेकिन भाई भाभी भी तो हैं ना?
सूरज- उसकी फिकर ना कर.. उसे मैं रात को दूध में नींद की गोली मिलाकर दे दूँगा.. तो खुद ही सोई रहेगी।
रश्मि अपने खुले हुए मुँह पर अपना हाथ रखते हुए बोली- भाई कितने गंदे हो तुम?
सूरज- गंदे नहीं.. बेचैन कहो कि कितना बेचैन हूँ तुम्हें चोदने के लिए..
मुझे सूरज के प्लान का पता हो चुका था। मैं मुस्कुरा दी.. क्योंकि मैं भी आज रश्मि को अपने भाई के लंड से चुदवा कर उसका कुँवारापन तुड़वाना चाहती थी.. इसलिए मैंने सूरज के साथ सहयोग करने का फ़ैसला कर लिया।
रात के खाने के बाद मैं कमरे में पहले ही आ गई और लेट गई।
थोड़ी देर के बाद सूरज आया और मुझे दूध का गिलास और दवा दे कर बोला- यह दवा ले लो.. सुबह तक तबीयत ठीक हो जाएगी।
मैंने उसे दोनों चीजें साइड की टेबल पर रखने को कहा।
फिर वो चला गया.. उसकी जाते ही मैंने वो दूध और दवा बाथरूम में गिरा दी और लेट गई।
अब फिर से उठ कर मैंने बाहर झाँका तो दोनों बहन-भाई की मस्तियाँ जारी थीं। टीवी देखते हुए भी वो रश्मि को अपनी बाहों में खींचे हुए था और उसकी चूचियों से खेल रहा था..

कभी उसको चूम रहा था।

रश्मि अपनी अदाएं दिखाते हुए उसे तंग कर रही थी ‘भाई.. क्या है ना आपको.. मेरे ही पीछे पड़े रहते हो.. थोड़ा सबर नहीं हो सकता क्या?’
सूरज- नहीं हो रहा ना सबर मुझसे.. मेरा तो दिल कर रहा है कि अभी डाल दूँ तेरी चूत में अपना लंड..
रश्मि- भाई.. मैं आपको कुछ भी ऐसा-वैसा नहीं करने दूँगी.. पता भी है आपका यह कितना मोटा है.. मेरी तो वैसे ही फाड़ देगा..
रश्मि ने सूरज के लंड को छूते हुए कहा।
सूरज- हाय मेरी जान.. मुझे तेरी चूत फाड़नी ही तो है.. आज की रात..
रश्मि- नहीं भाई.. प्लीज़ फिर कभी कर लेना.. आज नहीं.. आज तो भाभी भी हैं ना.. तो ऐसे में ठीक नहीं है ना..
सूरज- अरे कुछ नहीं होता यार.. तेरी खातिर तो उसे नींद की गोलियां दीं हैं.. तू उसकी फिकर ना कर..
चल जा उसे देख कर बता.. सो गई होगी वो.. और फिर थोड़ा मेकअप करके तैयार हो जा.. मैं आता हूँ.. फिर तुझे चोदता हूँ..
रश्मि मुस्कुराते और शरमाते हुई उठी और कमरे की तरफ बढ़ी.. तो मैं जल्दी से बिस्तर पर लेट गई और सोती बन गई।
रश्मि कमरे में आई और मेरे बिस्तर के पास खड़ी होकर मुझे आवाजें देने लगी- भाभी भाभी..
लेकिन ज़ाहिर है कि मैंने कोई जवाब नहीं दिया.. फिर रश्मि ने मेरी चूचियों के ऊपर हाथ रख कर आहिस्ता आहिस्ता सहलाते हुए मुझे उठाना चाहा..

लेकिन मैंने कोई जवाब नहीं दिया।
रश्मि का हाथ मेरे जिस्म पर से फिसलता हुआ मेरी चूत तक आ गया और मेरे पजामे के ऊपर से ही मेरी चूत को सहलाते हुए बोली।


रश्मि- मेरी प्यारी भाभी.. आज तो आपके पति मेरे भी पति बनने जा रहे हैं.. आज भाई का लंड मेरी चूत में भी जाने वाला है.. जैसे आपकी चूत में जाता है.. पता नहीं कैसे होगा यह सब.. और कैसा हो पाएगा..रश्मि मुस्कुराते हुए बोली आज से में आपके सौतन बन जाऊंगी…
फिर रश्मि ने झुक कर मेरे गाल को चूमा। फिर जाकर ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठ गई और मेकअप करने लगी।

मैं थोड़ी सी आँखें खोल कर उसे देख रही थी और वो कुछ गुनगुनाते हुए मेकअप कर रही थी। थोड़ी ही देर में दरवाज़ा खुला और सूरज भी अन्दर कमरे में आ गया।
उसने सीधा रश्मि के पीछे जाकर उसके नंगे कन्धों पर झुक कर चूमा और उसकी गर्दन पर अपनी ज़ुबान फेरने लगा।
रश्मि ने उसे पीछे को धक्का दे दिया- प्लीज़ भाई.. थोड़ा तो सबर करो ना.. और जाओ वहाँ बिस्तर पर जाकर बैठ जाओ..
सूरज मुस्कुराया- जी राजकुमारी जी..
ये कह कर बिस्तर पर मेरे पास आकर बैठ गया।
वो बिस्तर की पुश्त टेक लगा कर अधलेटा सा होकर मेरी तरफ देखने लगा।
फिर उसने अपने लौड़े को मसलते हुए रश्मि को आवाज़ दी- आ भी जा.. जल्दी से अब..
जिस तरह बिस्तर पर लेट कर सूरज अपनी बहन को आइने के सामने तैयार होते हुए देख और उसका इन्तजार कर रहा था.. बिल्कुल ऐसा ही लग रहा था जैसे कि वो उसकी बीवी हो और यह उसका चोदने को बेकरार पति हो..
तभी रश्मि स्टूल से उठी और बिस्तर की तरफ आई और बिस्तर के क़रीब रुक कर बोली- भाई हमें दूसरे कमरे में चले जाना चाहिए.. यहाँ भाभी सो रही हैं।

सूरज- अरे नहीं यार.. यहाँ एसी चल रहा है.. उधर गर्मी होगी और तुम इसकी फिकर ना करो.. यह तो नींद की दवा लेकर सोई हुई है।
यह कहते हुए सूरज ने रश्मि का हाथ पकड़ा और उसे बिस्तर पर अपने ऊपर घसीट लिया।
रश्मि सूरज के ऊपर आ गिरी और सूरज ने उसे अपने बाँहों में कसते हुए चूमना शुरू कर दिया।
कुछ देर तक दोनों एक-दूसरे को किस करते रहे।


फिर रश्मि सीधी होकर सूरज के ऊपर ही दोनों तरफ पैर डाल कर बैठ गई

और अपना हाथ सूरज के नंगी छाती पर उसके सीने के बालों में फेरते हुए

बोली- भाई क्या सच में आप मेरे साथ यह सब कुछ करना चाहते हैं?
सूरज- हाँ मेरी जान.. मैं तो तुझे चोदने के लिए मरा जा रहा हूँ..
रश्मि- क्या सच में आप मुझे इतना ज्यादा प्यार करते हो?
सूरज उसकी चूचियों से खेलते हुए बोला- हाँ मेरी जान.. इसका सुबूत यह तुम्हारी गाण्ड के नीचे दबा हुआ मेरा लंड भी तो है ना.. जो कि तेरी चूत में घुसने की लिए बेचैन हो रहा है..
सूरज ने रश्मि के टॉप को पकड़ा और आहिस्ता आहिस्ता ऊपर उठाने लगा और फिर अगले ही पल में उसके जिस्म से उतार कर परे फेंक दिया।
रश्मि ने फ़ौरन ही अपने हाथ अपनी चूचियों पर रख लिए तो सूरज बोला- अब मुझसे क्यूँ छुपा रही हो?
रश्मि- भाई वो भाभी की वजह से शरम आ रही है मुझे..
सूरज हँसने लगा और फिर उसे अपने ऊपर थोड़ा झुका कर उसकी खुबसूरत चूचियों के गुलाबी निप्पलों को चूसने लगा।

फिर उसने एक मम्मे को अपनी मुठ्ठी में भर लिया और अपना दूसरा हाथ मेरी चूची पर रख कर बोला- रश्मि तुम्हारी चूची.. तुम्हारी भाभी से छोटी हैं लेकिन तुम्हारी ज्यादा टाइट हैं..

रश्मि- अरे अरे.. भाई यह क्या कर रहे हो ना.. छोड़ो उनको.. वो उठ जाएंगी।
सूरज- नहीं उठेंगी यार.. आओ तुमको इसकी चूचियों खोल कर दिखाता हूँ।
यह कहते हुए सूरज ने मेरे टॉप को नीचे खींचा और मेरी चूचियों को भी नंगी कर दिया।

रश्मि तो पहले भी मेरा सब कुछ देख चुकी हुई थी.. इसलिए उसे हैरत तो नहीं थी.. लेकिन फिर भी वो अपने भाई के आगे ऐसी शो कर रही थी.. जैसे कि पहली बार मुझे नंगी देख रही हो।
सूरज ने रश्मि का एक हाथ मेरी चूची पर रखा तो रश्मि बोली- प्लीज़्ज़्ज़.. भाई ना करो ना.. छोड़ो भाभी को.. आख़िर आप करना क्या चाहते हो?
सूरज- सच पूछा तूने.. तो सुन.. मैं तुम दोनों को एक साथ नंगी देखना चाहता हूँ और तुम दोनों को एक साथ चोदना चाहता हूँ।
रश्मि- नहीं नहीं.. भाई ऐसा नहीं हो सकता..
सूरज ने रश्मि को दोबारा अपनी बाँहों में खींचा और उसे चूमते हुए बोला- हाँ मुझे भी पता है कि ऐसा होना ना मुमकिन है।
यह कहते हुए सूरज ने रश्मि को बिस्तर पर मेरे साथ लिटाया और फिर खुद उसके ऊपर आ गया और ऊपर झुक कर उसके गालों और होंठों को चूमने लगा।
आहिस्ता आहिस्ता उसके जिस्म को चूमते हुए वो नीचे को आने लगा। नीचे आकर उसने रश्मि के पजामे को भी उतार दिया।

अब पहली बार उसकी बहन पूरी की पूरी उसकी आँखों के सामने नंगी थी।
एक पल के लिए सूरज अपनी बहन के नंगे जिस्म को देखता रहा.. फिर उसका हाथ आगे बढ़ा और अपनी बहन की कुँवारी अनछुई और बिना बालों वाली चूत को सहलाने लगा।

‘इस्स्स.. ईस्स्स्स.. आआहह.. उम्म्म्म्..’
एक मर्द का अपने भाई का हाथ अपनी चूत पर लगते ही रश्मि की चूत गरम होने लगी और उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं।
अपनी सग़ी बहन की चूत पर अपनी उंगली फेरते हुए आहिस्ता आहिस्ता अपनी उंगली को उसकी चूत की दरार में घुसेड़ रहा था और उसकी उंगली पर उसकी अपनी ही बहन की चूत का पानी लग रहा था।


सूरज ने अपनी उंगली ऊपर की ओर रश्मि को दिखाते हुए कहा- देख.. तेरी चूत कितना पानी छोड़ रही है.. तेरी चूत मेरे लण्ड से चुदने लिए कितनी प्यासी और चुदासी हो रही है।
रश्मि ने शर्मा कर आँखें बंद कर लीं।

