Update- 40
पहले तो रश्मि ने अपना हाथ हटाने की कोशिश की.. लेकिन फिर उसने आख़िर अपने भाई का लंड पकड़ ही लिया।

कुछ देर तक सूरज के लंड को सहलाने के बाद रश्मि बोली- बस भाई.. अब मुझे छोड़ दो प्लीज़.. फिर कर लेना..
सूरज- फिर कब?
रश्मि- जब मौका मिले तब.. आप कौन सा अब मुझे छोड़ने वाले हो.. जब भी मौका मिलेगा.. कुछ ना कुछ तो करोगे ही ना आप..
सूरज ने मुस्कुरा कर रश्मि के होंठों को जोर से चूमा और रश्मि ने भी एक बार जोर से उसके लण्ड को अपनी मुठ्ठी में जोर से दबाया और फिर उससे अलग होने लगी।

सूरज ने पीछे को हट कर अपने शॉर्ट्स को नीचे खींचा और अपने लंड को बाहर निकाल कर उसके सामने खुद को नंगा कर दिया।

रश्मि अपनी मुँह पर हाथ रखते हुए बोली- ऊऊऊ.. ऊऊओफफ.. उफफफ्फ़.. भैया.. आप कितने बेशरम हो.. कुछ तो भाभी का ख्याल करो.. किसी ने देख लिया.. तो क्या सोचेगा कि आप अपनी बहन के साथ ही यह सब कर रहे हो?
सूरज अपने लंड को हिलाते हुए बोला- हाँ.. तो क्या है.. मैं अपनी बहन के साथ ही कर रहा हूँ ना.. किसी और की बहन के साथ तो नहीं ना..
रश्मि चुप होकर मुस्कुराने लगी।
सूरज- यार एक किस तो कर दो इस पर..
रश्मि- नहीं भैया.. अभी नहीं करूँगी।
सूरज- प्लीज़्ज़.. मेरी प्यारी सी बहना हो ना.. तो जल्दी से एक बार कर दो..
रश्मि- भैया आप बहुत ही ज़िद्दी और बेसब्र हो।
यह कहते हुई वो नीचे को झुकी और अपने हाथ में अपने भैया का लंड पकड़ कर उसकी मोटी फूली हुई टोपी पर एक किस किया और फिर जल्दी से बाहर की तरफ भागने लगी।

सूरज ने फ़ौरन ही उसे पकड़ा और बोला- अब एक किस मुझे भी तो दे कर जाओ ना..
रश्मि ने अपने होंठों को उसके आगे कर दिए.. लेकिन सूरज ने नीचे बैठ कर उसकी टाइट लेगिंग के संगम पर उसकी लेग्गी के ऊपर से ही उसकी चूत पर अपनी होंठों रखा और एक जोरदार चुम्बन करके बोला- ठीक है.. अब जाओ.. बल्कि ठहरो.. मैं पहले जाता हूँ.. तुम बाद में आना..

उनकी बात सुन कर मैं जल्दी से रसोई में आ गई और फिर सूरज बाहर आ कर बैठ गया और उसने वहीं से मुझे आवाज़ दी- डार्लिंग.. क्या बात है इतनी देर लगा दी है.. कहाँ रह गई हो?
मैं मुस्कुराई और फिर खाने की ट्रे लेकर बाहर आ गई और बाहर आते हुए रश्मि को भी आवाज़ दी- आ जाओ जल्दी से खाने के लिए..
खाने के दौरान भी मेरा दिल खाने में नहीं लग रहा था.. बल्कि मैं दोनों बहन-भाई को ही देखने की कोशिश कर रही थी कि मेरे सामने बैठ कर भी वो कैसी हरकतें कर रहे हैं।
अचानक सूरज बोला- डार्लिंग.. क्या बात है.. तुम खाना ठीक से नहीं खा रही हो.. तुम्हारी तबीयत तो ठीक है ना?
मैं- तबीयत.. हाँ हाँ.. ठीक ही है.. कुछ नहीं हुआ मुझे.. मैं ठीक हूँ।
सूरज- लेकिन तुम ठीक लग तो नहीं रही हो।
अचानक से मेरे दिमाग में एक ख्याल कौंधा- हाँ.. बस दोपहर से थोड़ी तबीयत ठीक नहीं है.. मेरा जिस्म थोड़ा गरम हो रहा है.. और मुझे तो बुखार सा महसूस हो रहा है।
सूरज- तो कोई दवा लिया है ना..
मैं- हाँ.. मैं खाना खाकर कोई दवा लेती हूँ।
ऐसी ही बातें करते हुए हमने खाना खत्म किया और रश्मि ने ही बर्तन समेटने शुरू कर दिए।
कुछ बर्तन लेकर रश्मि रसोई में गई तो बाक़ी के बर्तन उठा कर सूरज भी उसके पीछे ही चला गया.. हालांकि कभी उसने पहले ऐसे बर्तन नहीं उठाए थे।
अन्दर रसोई में बर्तन छोड़ कर उसने बाहर आने में काफ़ी देर लगाई। मुझे पता था कि अन्दर क्या हो रहा होगा.. लेकिन मैं सोफे पर लेटी रही और उठ कर देखने नहीं गई।
थोड़ी देर के बाद सूरज बुखार की दवा लाया और मुझे पानी के साथ दी। मैंने वो दवा खा ली और बोली- तुम लोग एसी वाले कमरे में सो जाओ आज.. मैं रश्मि के कमरे में सो जाऊँगी.. एसी में तो ज्यादा सर्दी लगेगी ना..
सूरज के चेहरे पर फैलती हुई ख़ुशी की लहर को मैंने फ़ौरन ही महसूस कर लिया और दिल ही दिल में मुस्कुरा दी।
मैं उठ कर रश्मि वाले कमरे में गई और वहीं बिस्तर पर लेट गई।
कुछ ही देर में रश्मि मेरा हाल पूछने आई और बोली- भाभी मैं भी आपके पास ही सो जाती हूँ.. थोड़ा रेस्ट ही तो करना है ना..
मैं- नहीं नहीं.. तुम उधर एसी में सो जाओ जाकर.. ऐसे हम बातें ही करते रहेंगे.. मैं थोड़ी देर के लिए आँख लगाना चाहती हूँ.. तुम जाओ.. मैं ठीक हूँ।
रश्मि मुस्कुराई और बोली- लगता है कि भाभी सुबह आपकी जिस्म की गर्मी नहीं निकल पाई ना.. इसलिए आपको बुखार हो गया है।
मैं मुस्कुराई और बोली- तुझे बड़ी बातें आने लग गईं हैं ना..
वो हँसने लगी और बोली- भाभी आप कहो तो मैं आपकी कुछ ‘मदद’ करूँ?
मैं मुस्कुराई और बोली- नहीं रहने दे तू.. और करने ही है.. तू जाके अपने भैया की ‘मदद’ कर देना..
रश्मि थोड़ा घबराई और फिर बोली- नहीं भाभी.. अब मैं जाग रही हूँ ना.. तो उनको कोई ऐसा मौका नहीं दूँगी..
पता नहीं क्यों.. वो सब कुछ मुझसे छुपाना चाहती थी और मैं भी अभी इस गेम को इसी तरह से खेलते रहना चाह रही थी।
खैर.. रश्मि चली गई.. तो मैं भी उसके बिस्तर पर लेट कर सोने का इन्तजार करने लगी।
क़रीब 5 मिनट की बाद मैं उठी और बाथरूम के रास्ते जाकर अन्दर झाँकने लगी.. तो अन्दर कमरे की रोशनी में मेरे ही बिस्तर पर दोनों बहन-भाई एक-दूसरे से लिपटे हुए पड़े थे।
रश्मि- प्लीज़ भैया.. भाभी आ जाएंगी..
सूरज- अरे यार.. नहीं आती वो अब दवा लेकर सो गई है।

सूरज ने रश्मि को सीधा किया और उसकी टी-शर्ट को ऊपर करने लगा। टी-शर्ट को ऊपर तक उसकी गले तक ले जाकर उसे निकालने लगा।
तो रश्मि बोली- नहीं भैया.. यहीं तक रहने दो.. फिर जल्दी में पहनने में दिक्कत होगी।
सूरज ने ‘ओके’ कहा और फिर झुक कर अपनी बहन की ब्रेजियर के ऊपर से उसकी चूची पर किस करके बोला- बहुत खूबसूरत चूचियाँ हैं तुम्हारे. इतने दिन से देख रहा था और दिल ललचा रहा था।
रश्मि- सिर्फ़ दिल ही नहीं ललचा रहा था.. बल्कि मुझे रातों में तंग भी कर रहे थे ना आप.. और आपने पहले से ही इनको छू-छू कर भी चैक कर लिया हुआ है।
सूरज चौंक कर रश्मि के चेहरे की तरफ देखता हुआ बोला- तो क्या तुमको पता था कि मैं ऐसे कर रहा हूँ?
रश्मि- तो भैया यह कैसे हो सकता है कि कोई किसी लड़की की चूचियों को और नीचे ‘उधर’ भी छुए और उसे पता ही ना चल सके?
सूरज मुस्कुराया और उसकी दोनों चूचियों को जोर से अपनी मुठ्ठी में दबाते हुए बोला- बहुत चालाक हो तुम..
सूरज ने अब झुक कर रश्मि की खूबसूरत चूचियों के बीच उसकी गोरी क्लीवेज को चूम लिया और फिर आहिस्ता आहिस्ता उसमें अपनी ज़ुबान को फेरने लगा।
रश्मि की चूचियों की चमड़ी इतनी सफ़ेद और नरम थी कि जैसे ही वो जोर से वहाँ पर किस करता.. तो उसकी चूचियों पर लाल निशान पड़ जाता।
रश्मि- भैया थोड़ा धीरे करो ना.. क्यों इतने उतावले बन रहे हो..
सूरज- तुम्हारी चूचियाँ भी तो इतनी सेक्सी हैं ना.. कि खुद पर कंट्रोल ही नहीं हो रहा।
रश्मि मुस्कुरा दी और अपने भाई की सिर के बालों में अपना हाथ फेरने लगी।
सूरज ने रश्मि की ब्रा के कप्स को ऊपर को उठाया और उसकी दोनों चूचियों को नंगा कर लिया।
उसकी अपनी सग़ी बहन की खुबसूरत छोटी-छोटी साइज़ की गोरी-गोरी चूचियाँ और गुलाबी निप्पल उसकी नजरों के सामने खुले हुए थे।
सूरज ने झुक कर आहिस्ता से अपनी बहन की नंगी चूचियों को चूमा और फिर अपने होंठ उसके गुलाबी छोटे से निप्पल पर रख कर एक किस कर लिया।
रश्मि का जिस्म तड़फ उठा।

सूरज ने अब आहिस्ता-आहिस्ता उसके निप्पलों को अपने होंठों में भर लिया और चूसने लगा।
कभी अपनी बहन के एक निप्पल को अपने मुँह में डालता और कभी दूसरे निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगता।

सूरज का एक हाथ फिसलता हुआ नीचे को अपनी बहन की कुँवारी चूत की तरफ आने लगा और फिर अपनी बहन की टाइट लैगी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा।

कुछ देर तक रश्मि की चूत को सहलाने और उसकी चूचियों को चूसने के बाद सूरज उठ गया और नीचे उसकी टाँगों की तरफ आ गया।
सूरज ने उसकी लेग्गी को पकड़ा और नीचे खींच कर उतारने लगा। रश्मि ने एक बार उसे रोका.. लेकिन फिर खुद से ही अपनी गाण्ड को ऊपर उठा दिया और सूरज ने अपनी बहन की लेग्गी को उसकी टाँगों से निकाल कर बिस्तर पर रख दिया।
अब रश्मि का निचला जिस्म लगभग पूरी तरह से उसके भाई की सामने नंगा था। रश्मि ने फ़ौरन से अपनी चूत को छुपा लिया।
सूरज ने मुस्कुरा कर उसे देखा और फिर उसका हाथ पकड़ कर उसकी चूत से हटा दिया।
रश्मि की बिल्कुल गोरी रूई जैसे नरम बालरहित चूत.. अपने भाई की आँखों की सामने थी।

सूरज- वाउ.. क्या प्यारी चूत है.. लगता है तुमने आज ही हेयर रिमूविंग की है।
रश्मि ने शर्मा कर कहा- हाँ सुबह आपके जाने के बाद किए थे।
सूरज- यानि कि तुमने मेरे लिए अपनी चूत के बाल साफ़ किए हैं ना?

रश्मि शर्मा कर बोली- अब ज्यादा भी गलतफहमी में ना रहें आप.. मैंने तो वैसे ही बस रुटीन में साफ़ कर लिए थे। अब मुझे क्या पता था कि आप आकर इसे देखोगे?
सूरज हंसा और अपनी होंठ रश्मि की चूत पर रख दिए और उसकी कुँवारी मुलायम चूत को चूम लिया।

फिर सूरज ने अपनी कुँवारी बहन की कुँवारी चूत की लबों को खोला और अपनी ज़ुबान से उसे अन्दर से चाटने लगा।

धीरे-धीरे जैसे-जैसे उसकी ज़ुबान अपनी बहन की चूत को चाट रही थी.. तो उसके साथ-साथ ही रश्मि की हालत खराब होती जा रही थी।


