Update- 38
आपने अभी तक पढ़ा..
रश्मि हँसने लगी और बोली- भाई जल्दी से नाश्ता करो और चाय पी कर निकलो.. आपको बहुत देर हो गई है!
सूरज- लेकिन आज तो मैं चाय नहीं दूध पीऊँगा..
रश्मि- तो जाओ अन्दर जाकर पी आओ.. भाभी अन्दर ही हैं..
सूरज- लेकिन मैं तो आज तेरी इन चूचियों का दूध पीऊँगा..
सूरज ने रश्मि की चूची से खेलते हुए कहा और फिर झुक कर अपनी बहन की चूची के निप्पल को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगा।
रश्मि ने उसके बालों में हाथ फेरा और फिर बोली- आह्ह.. बस करो.. भाई क्या आपने एक ही दिन में सारे के सारे मजे लूट लेना हैं..
अब आगे..
सूरज मुस्कराया और उठ कर बाहर की तरफ चला गया और रश्मि भी पीछे-पीछे डोर लॉक करने और उसे ‘सी ऑफ’ करने के लिए चली गई।
गेट पर भी सूरज ने रश्मि को अपनी बाँहों में जकड़ा और उसे किस करने लगा, बोला- डार्लिंग थोड़ा सा मुँह में लेकर इसे नर्म तो कर दो.. देखो यह सारा दिन मुझे ऑफिस में तंग करेगा।
रश्मि हँसी और अपना हाथ सूरज की पैन्ट की ऊपर से सूरज के लंड पर रख कर उसे दबाते हुए बोली- भाई तड़फने दो इसे.. इसी तड़फन में तो मज़ा है.. वापिस आओगे.. तो इसका कुछ ना कुछ करूँगी.
सूरज- प्रॉमिस है ना?
रश्मि- नहीं जी.. प्रॉमिस-श्रौमिस कोई नहीं.. अगर मौका मिला तो.. समझे..
यह कहते हुए रश्मि ने उसे बाहर की तरफ धकेला और फिर सूरज घर से निकल गया।
रश्मि अपना ड्रेस ठीक करते हुए वापिस आई और बर्तन समेट कर रसोई में चली गई।
मैं भी दोबारा बिस्तर पर लेट गई।
थोड़ी ही देर मैं रश्मि चाय के दो कप बना कर बेडरूम में आ गई और लाइट जलाते हुए बोली- क्या बात है भाभी.. आज आपने उठना नहीं है क्या?
मैं अंगड़ाई लेती हुई बोली- रात तूने मुझे नींद में डरा ही दिया था.. तो नींद ही खराब हो गई थी.. तुझे रात को क्या हो गया था?
रश्मि दूसरी तरफ बिस्तर की पुश्त से टेक लगा कर बैठते हुए बोली- भाभी लगता है कि रात को सोते में भी भाई ने फिर मुझे तुम्हारी जगह ही समझ लिया था.. वो ही हरकतें कर रहे थे.. इसलिए तो मैं उठ कर दूसरी तरफ आ गई थी।
रश्मि ने मासूमियत से पूरी की पूरी बात छुपाते हुए कहा।

मैं मुस्करा कर बोली- अरे यार.. तो फिर क्या हुआ.. उसे मजे करने देती और खुद भी मजे करती.. इनकी तो यही आदत है.. सारी रात सोते में भी मुझे तंग करते रहते है। अब तो मैं इस सबकी आदी हो गई हूँ..
रश्मि भी हँसने लगी और फिर हम दोनों चाय पीने लगे। चाय पीते हुए मैं अपने एक हाथ से रश्मि के कन्धों को चूमते हुए बोली

मैंने उससे पूछा- रश्मि.. जब तुम्हारे भाई तुम्हें छू रहे थे.. तो तुमको कैसा लगा था?
रश्मि का चेहरा शर्म से लाल हो गया और बोली- भाभी लग तो अच्छा रहा था.. लेकिन भाई हैं ना मेरे.. इसलिए अजीब लग रहा था।
मैं रश्मि के और क़रीब हो गई और अपना हाथ उसकी गर्दन पर उसके बालों में रखते हुए आहिस्ता-आहिस्ता अपने होंठ उसके होंठों के पास ले जाने लगी

और धीरे से बोली- रश्मि.. तुम हो ही इतनी खूबसूरत.. कि कोई भी तुम से दूर कैसे रह सकता है..
ये कहते हुए मैंने उसके होंठों को चूमना शुरू कर दिया।

रश्मि कसमसाई- भाभी.. आप फिर से शुरू होने लगी हो ना..
लेकिन उसके विरोध को पूरा होने से पहले ही.. मैंने अपने होंठों में उसके लबों को बंद कर लिया और उसके निचले होंठ को.. अपने होंठों में लेकर चूमने और चूसने लगी।

मेरे हाथ उसके बालों को सहला रहे थे और दूसरा हाथ उसकी कमर पर आ गया था।
अब मैं उसकी कमर को सहलाते हुए उसके होंठों को चूमने लगी।

आहिस्ता आहिस्ता मैंने अपने होंठ रश्मि के नंगे कन्धों पर लाकर उसके मुलायम और गोरे-गोरे कंधों को चूमना शुरू कर दिया.. रश्मि की आँखें भी बंद होने लगी थीं।
मैंने आहिस्ता से रश्मि को नीचे तकिए पर लिटा दिया और झुक कर उसकी गोरे-गोरे उठे हुए सीने पर किस करने लगी।
फिर मैंने रश्मि के टॉप की डोरियाँ नीचे को करके उसकी चूचियों को बाहर निकाला और उसके चूचों को नंगा कर दिया।
मैंने मुस्करा कर रश्मि की तरफ देखा.. तो उसने एक लम्हे की लिए अपनी आंखें खोल कर मुझे निहारा.. और फिर से बंद कर लीं।
मैंने अपने होंठ रश्मि के एक निप्पल पर रखे और उसे चूम लिया.. साथ ही रश्मि के जिस्म में एक झुरझुरी सी दौड़ गई।

अब आहिस्ता आहिस्ता मैंने रश्मि के निप्पल को अपनी ज़ुबान से सहलाना शुरू कर दिया और फिर अपने होंठों में लेकर चूसने लगी।
रश्मि के गुलाबी निप्पल को चूसने का मेरा पहला मौका था कि मैं किसी दूसरी लड़की की चूचियों को छू और चूस रही थी.. लेकिन मुझे भी एक अजीब सा मजा आ रहा था..



मैंने सीधे होकर अपना टॉप उतारा और अपना ऊपरी बदन नंगा कर लिया।
उसने जब मेरी ऊपरी गोरे बदन को नंगा देखा.. तो उसकी चेहरे पर भी एक मुस्कराहट फैल गई। इस बार उसने अपनी आँखें बंद नहीं कीं और मेरी चूचियों की तरफ देखती रही।
मैंने उसकी तरफ देखते हुए.. अपनी दोनों चूचियों पर हाथ फेरा और फिर एक चूची को अपने हाथ में पकड़ कर उसके निप्पल को आगे करते हुए रश्मि के होंठों पर रख दिया।
रश्मि मुस्कराई और उसने बहुत ही नजाकत से मेरे निप्पल को चूम लिया।

रश्मि के कुँवारे होंठों के बीच अपने निप्पल को चुसवाते हुए मुझे एक अजीब सा मज़ा आ रहा था। मैंने अपना हाथ दोबार रश्मि के शॉर्ट्स में डाला और उसकी चूत से खेलने लगी।

उसकी मेरे निप्पल को चूसने की ताक़त में इज़ाफ़ा होता जा रहा था। कभी आहिस्ता से वो मेरी निप्पल को काट भी लेती थी।
कुछ देर तक रश्मि से अपना निप्पल चुसवाने के बाद.. मैं उठी और रश्मि की टाँगों की तरफ आ गई।
मैंने उसके शॉर्ट्स को पकड़ कर खींचा और उतार दिया।




फिर मैंने उसकी दोनों हाथों पर किस किया.. जो कि उसकी चूत पर रखे हुए थे।
आहिस्ता से मैंने उसकी हाथों को उसकी चूत पर से हटाया.. तो उसने कोई विरोध नहीं की और अपनी चूत को मेरे सामने पेश कर दिया।
अब मेरी नज़र रश्मि की जाँघों के बीच में थी.. जहाँ रश्मि की कुँवारी चूत थी।
जिसके ऊपर के हिस्से और इर्द-गिर्द एक भी बाल नहीं था।

दोनों बाल रहित फलकों के बीच से गुलाबी रंग की अन्दर की चमड़ी का कुछ हिस्सा नज़र आ रहा था। जिससे यह अंदाज़ा हो सकता था कि दोनों फलकों के अन्दर का भाग किस क़दर गुलाबी और नर्म होगा।

उसकी चूत के दोनों फलकों के निचले हिस्से में जहाँ पर चूत की लकीर खत्म होती है.. वहाँ पर पानी का एक क़तरा चमक रहा था..

रश्मि की कुँवारी चूत के क़तरे की चमक से मेरी आँखें भी चमक उठीं और मैं वो करने पर मजबूर हो गई.. जो कि मैंने आज तक कभी नहीं किया था.. सिर्फ़ मूवी में देखा भर था।

