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कुछ दिन यूं ही बीत गए रोहन लगातार इसी आशा में लगा रहा की उसे बेला के खूबसूरत अंगों को फिर से देखने का मौका मिल जाएगा और वह इसी ताक में बिना के इर्द-गिर्द घूमता रहता था लेकिन बेला पक्की खिलाड़ी थी वह रोहन को तड़पाना चाहती थी… इसलिए रोहन पर बिल्कुल भी ध्यान ना देते हुए वह अपने काम में लगी रहती थी लेकिन तिरछी नजरों से रोहन को देख ले रही थी कि वह कहां देख रहा है और उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव खिल उठते थे जब उसे पता चल जाता था कि रोहन चोरी छुपे उसके कपड़ों के भीतर झांकने की कोशिश कर रहा है…..
रूपा सिंह वाले हादसे को भुलाकर सुगंधा फिर से अपने जमीदारी के काम में लग गई थी वह रोज खेतों की तरफ जाकर फसल का मुआयना करती रहती थी…..। काम में व्यस्त रहने के बावजूद भी उसे अपने बेटे रोहन की चिंता सताए जाती थी क्योंकि वह जानती थी कि गांव के आवारा लड़कों के साथ वह बिगड़ता जा रहा था… ना तो उसका पढ़ाई में ही मन लगता था और ना ही जमीदारी के काम में रुचि लेता था बस इधर-उधर घूम कर अपना समय व्यतीत कर रहा था सुगंधा कहीं जाने के लिए अपने कमरे में तैयार हो रही थी और वह इस समय केवल एक टावल लपेटी हुई थी। उसके लंबे गदराए बदन को ढकने के लिए टावल छोटी ही पड़ती थी। वह अलमारी में अपने कपड़े ढूंढ रही थी….
और दूसरी तरफ रोहन अपनी मां के कमरे की तरफ जा रहा था क्योंकि अपने आवारा दोस्तों के साथ रहकर उसे फिजूलखर्ची की आदत जो पड़ गई थी और उसी आदत के तहत वह अपनी मां से पैसे मांगने के लिए उसके कमरे की तरफ जा रहा था और थोड़ी ही देर में वह अपनी मां के कमरे के दरवाजे के पास पहुंच गया.. और कमरे के अंदर उसकी मां बेखबर होकर अलमारी में अपने कपड़े ढूंढ रही थी और रोहन कमरे के बाहर खड़ा होकर एक पल की भी देरी किए बिना ही दरवाजे पर दस्तक देने के लिए जैसे ही अपना हाथ उठा कर दरवाजे से सटाया … दरवाजा खुद तो खुद खुल गया क्योंकि जल्दबाजी में सुगंधा ने दरवाजे की कड़ी लगाना भूल गई थी और यही भूल उसके रिश्तो को तार-तार करने के लिए काफी होने वाला था दरवाजे के खुलते ही रोहन की आंखों के सामने जो नजारा दिखाई दिया उसे देखते ही रोहन के अंदर संपूर्ण रूप से रिश्तो को लेकर बदलाव आना शुरू हो गया रोहन की आंखों के सामने उसकी मां अपने नंगे बदन पर मात्र एक छोटा सा टावल लपेटी हुई थी जो कि उसके गदराए बदन को ढक पाने में असमर्थ था… जिस समय दरवाजा खुला और रोहन की आंखें सामने उसकी मां पर पड़ी उस समय सुगंधा अलमारी में नीचे झुक कर अपनी पेंटी ड़्औवर में से ढूंढ रही थी। और जिस तरह से झुकी हुई थी छोटी टावल होने की वजह से सुगंधा की भराव दार गाँड़ साफ साफ नजर आ रही थी ..
अपनी आंखों के सामने इस तरह का नजारा देखकर आश्चर्य से रोहन की आंखें फटी की फटी रह गई उसे इस नजारे की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी वह तो बस कल्पना में इन नजारों के चित्र रचा करता था। लेकिन आज उसकी आंखों के सामने उसकी मां की नंगी गांड बिल्कुल साफ नजर आ गई थी जिसे देखकर पल भर में ही रोहन उत्तेजित हो गया उसकी नजर उसकी मां की गदराई गांड पर ही टिकी टिकी रह गई गोरी गोरी गांड और वाह भी तरबूज के समान गोल गोल… ऐसी मस्तानी और कामुकता से भरी हुई कि मुर्दे के तन में जान डाल दे। खरबूजे जैसी गोलाई लिए हुए सुगंधा की मतवाली गांड रोहन के तन बदन में कामुकता की सुईया चुभा रही थी।
और तो और नितंबों के दोनों भागों में हो रही हलन चलन से ऐसा लग रहा था कि जैसे गुब्बारों में पानी भर के लटका दिया गया हो.. रोहन कि नाजुक उम्र इस बेहद कामुकता के वार को झेल सकने में असमर्थ साबित हो रही थी और जिस वजह से उसके लंड का तनाव पल पल बढ़ता जा रहा था। कुछ ही सेकंड में कामुकता भरे नजारे की वजह से बहुत कुछ हो चुका था रोहन के सोचने समझने की शक्ति रिश्तो के प्रति छीण होती जा रही थी। बेला के खूबसूरत बदन के नग्न दर्शन करके पहले से ही रोहन के मन में औरतों के अंगों को लेकर आकर्षण साहो चला था और रही क सर को सुगंधा की खूबसूरत बदन ने पूरा कर दिया था अपनी मां की नंगी गांड देखकर वह पल भर में ही सुगंधा में अपनी मां की जगह एक खूबसूरत गदरई जवानी जवानी से भरपूर औरत के दर्शन होने लगे थे सुगंधा अभी भी इस बात से बेखबर कि दरवाजे पर रोहन खड़ा होकर उसके नग्न नितंबों के दर्शन करके मस्त हुआ जा रहा है वह अपनी ही धुन में अलमारी में से कपड़े ढूंढने में व्यस्त थी और इसी का फायदा उठाते हुए रोहन अपनी आंखों को सेक रहा था।
रोहन इस नजारे का और ज्यादा फायदा उठाते हुए अपने आप को खुशनसीब समझने लगा था क्योंकि उसकी मां थोड़ा सा और नीचे झुकी जिसकी वजह से रोहन को वह अंग देखने को मिल गया जिसके बारे में सोच कर उसका लंड ना जाने कितनी बार पानी फेंक चुका था रोहन की आंखों के सामने सुगंधा की बुर नजर आने लगी थी जो कि बस केवल एक हल्की सी पत्नी रेखा की शक्ल में नजर आ रही थी और बीचों-बीच उसकी बीच की दो गुलाबी पत्तियां निकली हुई थी ऐसा लग रहा था मानो गुलाब का फूल अभी अभी खील रहा हो… रोहन के लिए यह दूसरा मौका था जब उसे अपनी आंखों से एक औरत की नंगी बुर देखने को मिल रही थी इसके पहले बेला की बुर के दर्शन रोहन कर चुका था लेकिन बस हल्की सी झलक भर मिली थी.. लेकिन आज उसकी आंखों के सामने उसकी मां की नंगी बुर नजर आ रही थी और वह भी बेहद खूबसूरत कचोरी जैसी फूली हुई अपनी मां की बुर देखकर रोहन इतना तो अनुमान लगा ही लिया होगा कि बेला की बुर से कहीं ज्यादा अत्यधिक गुना खूबसूरत और हसीन उसकी मां की बुर थी जिस पर हल्के हल्के रेशमी छोटे-छोटे बाल उगे हुए थे जो कि उसकी खूबसूरती को और ज्यादा बढ़ा रहे थे सुगंधा अभी अभी नहा कर ही आई थी जिसकी वजह से उसकी दूर के इर्द-गिर्द मोतियों के सामान पानी की बूंदे नजर आ रही थी और यह नजारा देखकर अत्यधिक उत्तेजना को न सह पाने की वजह से मन में आए लालच की गाथा गाते हुए उसके लंड ने दो बूंद पानी के टपका दीया……
उत्तेजना के मारे रोहन की सांसे तीव्र गति से चलने लगी वह अपने आपको संभाल नहीं पाया और उसके हाथ से दरवाजा हल्के से हील गया जिसकी आहट सुगंधा को महसूस हुई तो वह पल भर में ही पीछे पलट कर देखी तो दरवाजे पर रोहन खड़ा था और उसे दरवाजे पर खड़ा देखकर वह एक दम से चौंक गई,, और वह तुरंत खड़ी हो गई वह समझ नहीं पाई कि अब क्या करें, अब इतनी जल्दी तो वहां कपड़े पहन नहीं सकती थी, इसलिए दोनों हाथों को अपनी छातियों पर लाकर टावल पकड़ कर बहुत ही सामान्य तरीके से बोली’
क्या बात है बेटा इतनी सुबह-सुबह तुम यहां पर …
( सुगंधा एकदम सामान्य होकर रोहन से बातें कर रही थी वह ऐसा जताना चाहती थी कि उसने ऐसी कोई गलती नहीं किया है जिसके लिए उसे डांटने की जरूरत पड़े क्योंकि ऐसा करने से हो सकता है कि रोहन को इस बात का एहसास हो कि उसे जो नहीं देखना चाहिए था उसने वह देख लिया है और रोहन भी बेला और अपने आवारा दोस्तों की संगत में कुछ ज्यादा ही चालाक हो गया था वह भी इस तरह का बर्ताव करने लगा कि जैसे कुछ हुआ ही नहीं है…)
मम्मी मुझे कुछ पैसों की जरूरत है इसलिए मैं आपसे पैसे लेने आया था….( इतना कहते हुए व कमरे में दाखिल हो गया वह यह जताना चाहता था कि सब कुछ सामान्य है और वैसे भी सुगंधा अभी तक रोहन को बच्चा ही समझती थी लेकिन यह नहीं जानती थी कि उसका बच्चा धीरे धीरे अब बड़ा हो गया था रोहन अपनी मां से पैसे मांगते हुए जाकर बिस्तर पर बैठ गया सुगंधा चाहे जितने भी आ सामान्य तौर पर स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिश कर ले लेकिन वह थी तो एक औरत ही भले ही कमरे में उसका बेटा उपस्थित था लेकिन वह था तो एक मर्द ही, सुगंधाको अंदर ही अंदर अपने बेटे की आंखों के सामने केवल टावल में खड़े रहने में शर्म महसूस हो रही थी। क्योंकि मैं अच्छी तरह से यह बात जानती थी कि आधे से ज्यादा अंग उसका टावल से बाहर नजर आ रहा था।
अभी भी वहां अपने दोनों हाथों को अपनी छातियों पर टीकाकर टॉवल पकड़े खड़ी थी.. वह जल्द से जल्द चाहती थी कि रोहन कमरे से चला जाए… इसलिए उसकी बात मानते हुए तुरंत अलमारी की तरफ घूमी है और ड़ृवर खोलकर अपना पर्स निकाली और उसमें से ₹200 निकालकर वापस पर्स रख दी.. लेकिन तुम हमको इस बार फिर से मौका मिल गया क्योंकि सुगंधा के इस तरह से घूम जाने की वजह से रोहन की नजर फिर से अपनी मां की बड़ी-बड़ी गदराई गांड पर पर पड़ गई। भले ही नितंबों का नंगापन कपड़ों के अंदर ढका हुआ था लेकिन फिर भी उसका आकार का सांचा साफ तौर पर नजर आ रहा था जिसे देख कर रोहन के मुंह में पानी आ रहा था…
लेकिन तभी उसकी मां रोहन की तरफ घूम गई और उसे ₹200 पकड़iते हुए.. बोली…
तुम कब सुधरोगे रोहन तुम नहीं जानते कि अपने आवारा दोस्तों के साथ तुम अपना समय और जीवन सब बर्बाद कर रहे हो…
मम्मी मैं किसी भी गलत संगत में नहीं हूं आप गलत समझ रही है यह पैसे तो मेरे एक दोस्त को बहुत ज्यादा जरूरी है इसलिए उसे देना है उसकी मां बीमार है…( रोहन झूठ बोलते हुए अपनी मां के हाथों से पैसे लेकर उसे अपने पेंट की जेब में रख लिया और वहां से उठकर बाहर की तरफ जाने लगा दरवाजे से बाहर निकलते ही सुगंधा लगभग दौड़ते हुए दरवाजे की तरफ आगे बढ़ी और तुरंत जाकर दरवाजा बंद करके कड़ी लगा दी, लेकिन जल्दबाजी में उसकी टूऑल खुल गई और सुगंधा एकदम से नंगी हो गई लेकिन तब तक उसने दरवाजे की कड़ी लगा दी थी और दरवाजे पर पीठ टीकाकर राहत की सांस लेते हुए अपने आप से ही बातें करते हुए बोली,
हे भगवान मैंने दरवाजे की कड़ी लगाना कैसे भूल गया अच्छा हुआ कि रोहन कुछ देखा नहीं( इतना कहकर वह छत की तरफ देखती हुई कुछ पल के लिए सोच में पड़ गई और अपने आप से ही बातें करते हुए बोली.)
क्या सच में रोहन ने कुछ भी नहीं देखा होगा (अपने आप को नीचे से ऊपर की तरफ देखते हुए) लेकिन मेरे बदन का तो बहुत कुछ नजर आ रहा है…. क्या सच में रोहन ने कुछ देखा होगा………… नहीं कुछ नहीं देखा होगा मेरा बेटा ऐसा बिल्कुल भी नहीं है..
( अपने आप को झूठी तसल्ली देते हुए सुगंधा आगे बढ़ी़े तो अपनी स्थिति का भान होते ही… वह मुस्कुरा दी क्योंकि वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी लेकिन इस बार वह बिल्कुल भी हड़बड़ा हट नहीं की क्योंकि कमरे में वह अकेली ही थी… इसलिए इत्मीनान से अलमारी के करीब आए और अपने कपड़े पहनने लगी और तैयार होकर कमरे से बाहर निकल गई….

सुगंधा तो चली गई थी लेकिन जाते जाते रोहन की हालत खराब कर गई थी रोहन ने आज जो नजारा देखा था वह शायद बरसों तक उसके मन मस्तिष्क से मिटने वाला नहीं था और वैसे भी सुगंधा बेहद खूबसूरत थी उसे कपड़ों में ही देख कर ना जाने कितनों का खड़ा हो जाता था और आज तो रोहन में अपनी मां की नंगी गांड को और साथ ही उसकी बेहद खूबसूरत बुर के दर्शन कर लिए थे… हालांकि रोहन ने अभी तक संपूर्ण रूप से बुर के आकार को नहीं देख पाया था… बेला की बुर की हल्की दर्शन करके ही… वह मस्त हो चुका था और आज तो उसने अपनी मां की रसीलो बुर के दर्शन किए थे।
लेकिन अभी भी बुरदर्शन संपूर्ण रूप से नहीं हुआ था लेकिन जितना भी हुआ था रोहन की उम्र के मुताबिक बहुत ही ज्यादा था।…
रोहन अपने कमरे में बैठा हुआ था लेकिन उसका मन बिल्कुल भी नहीं लग रहा था वह बहुत ही व्याकुल नजर आ रहा था….
उसकी आंखों के सामने बार बार उसकी मां की रसीली बुर और बड़ी बड़ी गोरी गांड नजर आ जा रही थी ना चाहते हुए भी वह अपनी मां के बारे में गंदी कल्पना करने लगा बार बार उसका मन उसे ऐसा ना करने के लिए अंदर ही अंदर बोल रहा था लेकिन जो नजारा उसने अपनी आंखों से देखा था उस नजारे की वजह से वह रिश्तो की डोर को बराबर से थाभ नहीं पा रहा था। बार-बार उसके मन में अपनी मां के प्रति गंदे विचार आ रहे थे और वह इन विचारों से भाग नहीं पा रहा था बार-बार उसे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जानबूझकर जैसे उसकी मां अपनी गांड और बुर ऊसे दिखाकर ललचा रही हो और रोहन लार टपकाते हुए अपनी मां के नंगे बदन का दर्शन करते हुए अपना लंड हिला रहा हो यही सब ख्याल उसके दिमाग में आ रहा था थक हारकर वह तुरंत कमरे से बाहर चला गया और ठंडे पानी से अपने चेहरे को धो कर अपने आप को साबित करने की कोशिश करने लगा कुछ देर के बाद उसका मन थोड़ा शांत हुआ तो वह अपने दोस्तों से मिलने निकल गया…
उसके दोस्त भी एकदम आवारा लड़के थे गाली गलौज के बिना बात ही नहीं करते थे रोहन को देखते ही उनमें से एक बोला…
लो देखो आ गए मादरचोद हमयहां कितनी देर से इंतजार कर रहे हैं… और यह ना जाने कहां गांड मरा रहा था…
हां यार यह इंतजार बहुत करवाता है ( उनमें से ही दूसरा लड़का बोला)
तुम दोनों ज्यादा मत बोलो नहीं तो तुम्हारी मां चोद दूंगा….
( रोहन ऊन दोनों को थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोला।)
तो हम क्या बाकी रखेंगे क्या और वैसे भी हमें तो तेरी मां में बहुत मजा आएगा…. आहहहहहहहहहहह तेरी मां की गांड वाला देख कर खड़ा हो जाता है उनमें से एक्ने गरम आहें भरते हुए बोला……
तू ज्यादा बकवास मत कर बहुत बोलने लगा है तू…..
यार तू नाराज मत हो दोस्तों में तो सब कुछ चलता है मैं भी कहा इनकार कर रहा हूं…. अगर तेरी इच्छा है तो तू मेरी मां की चुदाई कर लेना मुझे जरा भी एतराज नहीं होगा लेकिन बदले में मैं भी तेरी मां की चुदाई करूंगा……..
( रोहन के आवारा दोस्त ने अपनी इच्छा जताते हुए बोला…)
देख अब तू ज्यादा बोल रहा हैं… मैं अपनी मां के बारे में कुछ भी नहीं सुन सकता….
अच्छा तू अपनी मां के बारे में कुछ भी नहीं सुन सकता और हमारी मां को तो कुछ भी बोल सकता है…
शुरुआत तो तूने की ना तभी तो मैं कहा……..
( उन दोनों के बीच बात बात में झगड़ा बढ़ जाता इससे पहले ही उन दोस्तों में से एक जो खड़ा हुआ और उन दोनों को शांत करते हुए बोला..)
क्या यार तुम दोनों बेवजह उलझ रहे हो यार दोस्तों में तो गाली गलौज चलती ही रहती है इसमें बुरा मानने वाली कोई बात नहीं है…
यार मैं कहां बुरा मान रहा हूं मैं तो कह रहा हूं अगर तुझे मेरी मां को चोदने है तो चोद ले बदले में मैं इसकी मां को भी चोदूंगा,” और तुम सब अच्छी तरह से जानती हो कि किसकी मां ज्यादा मजा देगी………( उसका इशारा रोहन की खूबसूरत मां की तरफ था इस बात से रोहन को और गुस्सा आ गया)
तू अब देख लिए फिर शुरू पड़ गया फिर तू कहना नहीं कि मैं क्या कह रहा हूं….( रोहन गुस्से में बोला)
यार तुम दोनों बेवजह उलझ रहे हो मैं जानता हूं कि तुम दोनों एक दूसरे की मां को चोदना चाहते हो तो चोद लेना… लेकिन बाद की बात को लेकर अभी क्यों सारा मजा किरकिरा कर रहा है अब दोनों कुछ भी नहीं कहोगे…. देख तू भी नहीं कहैगा और ना ही रोहन तू ही कुछ कहेगा….
साला जब देखो तब आपस में झगड़ना शुरू कर देते हो किसकी मां की गांड़ बड़ी है, किसकी मां की चूची बड़ी है ईसकी मां को चोदना है उसकी मां को चोदना है…. बस यही बात सारा दिन तुम लोग करते रहते हो.. अरे मैं जानता हूं तुम दोनों की मां की गांड बड़ी है … हम सब की मां की गांड बड़ी है तो क्या सब की गांड मारी ही जाए…. देखो सालों जब मौका आएगा तो उस सब लोग एक दूसरे की मां की गांड मार लेना लेकिन अभी शांत रहो साला ऐसा लगता है कि जैसे तुम सब एक दूसरे की मां को चोदने को बोलते हो और वह लोग तुमसे चुदवा लेंगी। इतना आसान समझे हो तुम लोग तुम लोग सोच कर करना भी चाहो तो नहीं कर सकते समझे….( इतना कहते हुए वह उन सब को बाजार की तरफ ले जा रहा था… वैसे तो वहां उन दोनों को समझा ही रहा था लेकिन समझाने के साथ साथ वह मजा भी ले रहा था उसे भी मालूम था कि रोहन की मां की गांड बेहद खूबसूरत और बड़ी-बड़ी थी वह भी मन ही मन में रोहन की मां को चोदने की इच्छा रखता था और ना जाने कितनी बार कल्पनाओं में उसकी मां की सवारी कर चुका था लेकिन यह मुमकिन नहीं था यह बात वह भी जिसे हकीकत में भी चोदा जाए बस आपस में इस तरह की गंदी बातें करके मजा ले लेते थे। वह नहीं चाहता था कि रोहन नाराज हो क्योंकि रोहन इतनी उन सबके ऐसो आराम को पूरा करने का जरिया था इसलिए रोहन का मन बना रहे इसलिए उसके सामने ही उसने उसके दोस्त को जो कि उसकी मां के बारे में अनाप-शनाप बक रहा था उसे गंदी गंदी गालियां देने लगा.. थोड़ी ही देर में वह लोग बाजार में पहुंच गए और एक दुकान पर बैठकर नाश्ता करने लगे कोई समोसे मना रहा है कि कोई कचोरी मंगा रहा है कोई हलवा बना रहा है और यह सब का भुगतान रोहन को ही करना था इसलिए वह लोग बीच-बीच में रोहन की तारीफ भी कर दिया करते थे लेकिन इन सब के दौरान दुकान में बैठे बैठे वह लोग बाजार में आने जाने वाली औरतों को प्यासी नजरों से घूरते रहते थे…. यही उन लोगों का रोज का क्रम था….
रोहन का गुस्सा उसके दोस्त पर दिखावटी था क्योंकि रोहन को अपनी मां की बारे में गंदी बातें सुनकर कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का एहसास होता था और जब से उसने औरतों को गलत नजरिए से देखना शुरू किया था तब से तो उनके दोस्तों की गाली भी उसे अच्छी लगती थी जब उसका दोस्त की मां की गांड मारने के लिए बोला था तो वह कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का एहसास कर रहा था उसे तो मन में कल्पना भी कर रहा था कि कैसे वह खुद अपनी मां को नंगी करके चोद रहा था…. रोहन मन ही मन अपनी मां की गंदी बातें सुनकर प्रसन्न होता था…. बस उसे अपनी मां के बारे में गंदी अश्लील बातें सुनना ही अच्छा लगता था लेकिन यह कतई पसंद नहीं था कि उसकी मां को की हकीकत में चोदे….
दोस्तों की टुकड़ी दुकान में बैठकर सड़क पर आने जाने वाली लड़कियों और औरतों को घूर ही रहा था कि तभी.. एक औरत दुकान में आई और समोसे खरीदने लगी तभी रोहन के दोस्तों में से एक उसे पहचानता था वह उसके पड़ोस मे हीं रहती थी और पड़ोसी होने के नाते वह उसे भाभी कहता था। उसे देखते ही वह अपनी जगह से खड़ा हुआ और उसके करीब पहुंच गया…
क्या भाभी आजकल दिखाई नहीं दे रही हो….
हम तो रोज ही दिखाई देते हैं बस तुम्हारा ही ठिकाना नहीं रहता ना जाने कहां खोए रहते हो…. ( वह इतराते हुए बोली और कुर्सी पर बैठे हुए सारे दोस्तों की वजह उस औरत पर ही टिकी रह गई भाभी जिस तरह की होनी चाहिए उसी की तरह की थी बस रंग थोड़ा सा दबा हुआ था बाकी सब कुछ ठीक-ठाक था… उसके दोस्त सब जानते थे कि उस औरत का और उसके दोस्त का चक्कर चल रहा था….)
भाभी आज बहुत मन कर रहा है कुछ आशीर्वाद इधर भी मिल जाता तो बड़ी मेहरबानी होती….
हम तो हमेशा आशीर्वाद देने के लिए तैयार रहते हैं देवर जी लेकिन तुम्हें ही लगता है किसी और का आशीर्वाद मिलने लगा है इसलिए तो हमारा आशीर्वाद लेने नहीं आते….
भाभी मुझे तो अभी आशीर्वाद चाहिए……
नहीं बिल्कुल नहीं अभी हम तुम्हें कैसे आशीर्वाद दे सकते हैं थोड़ा दिन ढल जाने दो रात को घिर आने दो… तब तुम्हें आशीर्वाद लेने में और मुझे देने में बहुत मजा आएगा….
दिन ढलने का इंतजार में बिल्कुल नहीं कर सकता भाभी कहो तो 5 समोसे और बंधवा दूं….
( उसकी बात सुनकर कुछ देर तक इतराते हुए सोचने लगी और फिर बोली. )
आशीर्वाद लेने के लिए सिर्फ 5 समोसे केवल समोसे से काम नहीं चलेगा मैं तो कहती हूं आधा किलो जलेबी भी बनवा दो तो मैं तुम्हें अभी आशीर्वाद देने के लिए तैयार हो जाऊंगी….
बहुत चालाक हो भाभी तुम्हारा आशीर्वाद तो बहुत महंगा पड़ने वाला है….
देवर जी आशीर्वाद भी तो बहुत ही अनमोल भेंट है जो किसी किसी को ही मिलती है….
चलो कोई बात नहीं आशीर्वाद लेने के लिए तो मैं कुछ भी कीमत अदा कर सकता हूं….
( इतना कहने के साथ ही वह दवाई गोपाल समोसे और आधा किलो जलेबी बांधने के लिए बोल दिया और वह भाभी प्रसन्न नजर आने लगी हलवाई करीब होने की वजह से वह सुन ना ले इसलिए उसे करीब बुलाकर उसके कान में कुछ बोली और मुस्कुराने लगी वह भी उसकी बात समझ कर मन ही मन प्रसन्न होने लगा लेकिन रोहन को कुछ समझ में नहीं आ रहा था इसलिए वह…. अपने दोस्त से धीरे से बोला….)
यार मुझे तो इन दोनों की बात समझ में नहीं आ रही है यह क्या आशीर्वाद आशीर्वाद लगा रखे हैं दोनों….
तुम साले चुतिया के चुतिया ही रहोगे, आशीर्वाद का मतलब समझ में नहीं आ रहा है और चने हो उसकी मां की गांड मारने। अरे मेरे बुद्धू रोहन आशीर्वाद का मतलब है कि वह उसे चोदना चाहता हे… और मैं उसे आशीर्वाद देने के लिए मतलब की चुदवाने के लिए तैयार भी हो गई है देख नहीं रहा है कैसे 5 समोसे और आधा किलो जलेबी बंधवा रहा है साला हम सब के ऊपर खर्चा करना रहता है तो नानी मर जाती है… और भाभी का आशीर्वाद लेने के लिए कैसे पैसे लुटा रहा है….
( रोहन आशीर्वाद का मतलब समझ कर सनृन रह गया था…. और इस बात से उसके लंड में हरकत आना शुरू हो गया था कि उस औरत ने उसे आशीर्वाद देने के लिए तैयार भी हो गई थी …. वाह सामान लेकर जाने लगी और वह दोस्त उन लोगों की करीब आकर धीरे से बोला….
मैं जा रहा हूं भाभी का आशीर्वाद लेने अगर किसी को देखना हो तो आ जाओ कि मैं कैसे भाभी का आशीर्वाद लेता हूं आम के बगीचे में….
साले तेरी तो निकल पड़ी… हमारा भी तो जुगाड़ लगवा…
( उनमें से एक लालच मन से बोला..)
सालों तुम्हारा भी जुगाड़ लग जाएगा लेकिन मेरा तो काम बनने
दो.. तुम लोग आ रहे हो कि नहीं आम के बगीचे में और अगर आना है तो चोरी चोरी देखना नहीं तो सारा काम बिगड़ जाएगा क्योंकि आगे भी हमें ऊसी भाभी से काम निकलवाना है।
यार ऐसा नजारा देखने के लिए कौन इंकार करेगा हम लोग आ रहे हैं तेरे पीछे पीछे रोहन तू भी चलेगा ना (रोहन की तरफ देखते हुए बोला… यह सब सुनकर ही रोहन के तन बदन में गुदगुदी हो रही थी… उसे भी उत्सुकता थी चुदाई देखने की इसलिए वह इंकार नहीं कर सका और हा मैं सिर हिला दिया और वहां उन सबको पीछे पीछे आने के लिए बोल कर ऊस भाभी के पीछे चल दिया।
रोहन का दोस्त उस औरतों के पीछे पीछे चल दिया था और उसके पीछे पीछे रोहन और उसके कुछ साथी जाने लगे सभी के मन में उत्सुकता कुछ ज्यादा बनी हुई थी लेकिन रोहन कुछ ज्यादा ही उत्सुक नजर आ रहा था क्योंकि रोहन के बागी 2 से जहां तक चुदाई के साथ साथ इस तरह की चुदाई कई बार देख चुके थे लेकिन.. उनमें से रोहन ही एक संपूर्ण रूप से अछूता था, जिसने अभी तक चुदाई की परिभाषा को बिल्कुल भी समझ नहीं पाया था और ना ही किसी ने अभी तक समझाने की कोशिश किया था इसलिए वह धड़कते दिल के साथ उन लोगों के पीछे पीछे जाने लगा….
थोड़ी ही देर में वह लोग एक सुनसान जगह पर पहुंच गए जहां पर लोगों की आवाजाही नहीं के हीं बराबर थी… चारों तरफ पेड़ ही पेड़ और जंगली झाड़ियां उगे हुए थे… जिसकी वजह से वह जगह जंगल जैसा ही दिखाई देता था क्योंकि वहां पेड़ों और जंगली झाड़ियों से इतना ज्यादा गिरा हुआ था कि झाड़ियों के बीच क्या हो रहा है किसी को कुछ भी पता नहीं चलता वहीं पर एक टूटी हुई झोपड़ी थी जिसके चारों तरफ बड़ी-बड़ी घास उगी हुई थी अक्सर रोहन का दोस्त गांव की औरतों को यही लाया करता था और यह भाभी भी उसके साथ कई बार यहां आ चुकी थी इसलिए उसे बताने की जरूरत नहीं पड़ी थी और वह खुद ब खुद ही इस जगह पर आगे आगे पहुंच गई थी….
बोलो देवर जी कैसे लोगे मेरा आशीर्वाद… ( वह औरत कुछ टूटी हुई झोपड़ी के बाहर खड़ी होकर अंगड़ाई लेते हुए बोली)
भाभी तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो तुम्हारा आशीर्वाद कैसे लेना है यह मुझे अच्छी तरह से मालूम है ….( इतना कहने के साथ ही वह उस औरत को अपनी बाहों में भर कर चूमने लगा उसके गाल को उसको होठ को चुमते चुमते ब्लाउज के ऊपर से ही ऊसकी गोल गोल चुचियों को दबाना शुरू कर दिया।… के सारे दोस्तों के साथ साथ रोहन भी छुपकर इस दृश्य को देखकर एकदम हैरान हो रहा था और उसका दोस्त जानबूझकर झोपड़ी के बाहर ही उस भाभी के साथ रंगरेलियां मनाते हुए उसके ब्लाउज के बटन को खोलना शुरू कर दिया और कुछ ही देर में उसकी नंगी चुचीया उसकी हथेली मैं कसमसा रही थी। यह देख कर रोहन के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी भड़क ने लगी रोहन का दोस्त यह सबकुछ जानबूझकर झोपड़ी के बाहर कर रहा था ताकि उसके दोस्तों को यह सब देखने का मौका मिल जाए… अगले ही पल उसने उस भाभी की सूची को पकड़कर अपने मुंह में भर लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरू कर दिया। रोहन की तो हालत खराब होने लगी और उसके बाकी दोस्त आपस में खुसर पुसर करके उस दृश्य का आनंद लेने लगे तभी उसका दोस्त.. एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर उसकी साड़ी को पकड़कर ऊपर की तरफ उठाने लगा
यह देख कर रोहन के दिल की धड़कन तेज होने लगी और उसके देखते ही देखते उसके दोस्त ने… उस औरत की साड़ी उठाकर एकदम कमर तक कर दिया गांव की अधिकांश औरतें साड़ी के नीचे चड्डी नहीं पहनती थी इस वजह से साड़ी कमर तक उठते ही उस औरत की बड़ी-बड़ी गांड़ सामने नजर आने लगी। क्या देख कर रोहन का लंड खड़ा हो गया रोहन की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी साथ ही उसके दोस्तों का भी यही हाल था देखते ही देखते उस औरत ने अपने हाथों से ही रोहन के दोस्त की पेंट की बटन खोलकर उसे घुटनों तक नीचे गिरा दी और खुद ही घुटनों के बल लेट गई रोहिल के दोस्त का लंड तुरंत खड़ा हो गया था और वह उसे हाथ में लेकर हिलाते हुए सीधा मुंह में भर कर चुसना शुरू कर दी। रोहन तो यह देखकर एकदम हक्का-बक्का रह गया उसे तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि जो वह देख रहा है.. वह सच है उसे सब कुछ सपना लग रहा था उसने कभी सोचा भी नहीं था कि एक औरत लैंड को मुंह में चुस्ती होगी, रोहन का दोस्त अच्छी तरह से जान रहा था कि.. उसके बाकी के दोस्त छू पकर यह सब नजारा देख रहे हैं और कहां से देख रहे हैं यदि उसे पता था तभी तो बार-बार उस तरफ देख कर मुस्कुरा दे रहा था। कुछ देर तक यूं ही वह भाभी रोहन के दोस्त के लंड को लॉलीपॉप की तरह चुस्ती रही रोहन का दोस्त एकदम मस्त हो चुका था… उससे रहा नहीं जा रहा था… वह तुरंत उस औरत की बांह पकड़ कर ऊपर की तरफ उठाया और उसे घुमा कर झुकने के लिए बोला…. वह तुरंत घोड़ी बन गई , रोहन की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसके पेंट में गदर मचा हुआ था…
देखते ही देखते उसके दोस्त ने अपने लंड़ को . उस औरत की बुर में पीछे से डाल दिया और उसकी बड़ी बड़ी गांड पकड़कर अपनी कमर को आगे पीछे करके हीलाना शुरू कर दिया।
रोहन की सांसे अब उसके काबू में बिल्कुल भी नहीं थी सब कुछ बदलना शुरू हो गया था रोहन की नजरें उस दृश्य पर जम गई थी। तभी रोहन को अपने आसपास तेज सांसो की आवाज सुनाई देने लगी और उसने अपने अगल बगल नजर दौड़ाई तो हैरान रह गया क्योंकि उसके सभी दोस्तों ने अपनी अपनी पेंट से अपने लंड को बाहर निकाल कर हीलाना शुरू कर दिया था। रोहन को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें यह सब उसकी समझ और बर्दाश्त के बाहर था सामने का संभोगनीय कामोत्तेजक दृश्य उसके तन बदन को झकझोर कर रख दे रहा था और आसपास उसके दोस्तों का इस तरह से अपने हाथों से हस्तमैथुन करते हुए अपनी वासना को शांत करने का दृश्य उसकी उत्तेजना को और ज्यादा भड़का रहा था
वह कभी अपने दोस्तों को देखता तो कभी सामने भाभी की चुदाई देख कर मस्त हो रहा था उसकी भी इच्छा हो रही थी कि वह भी उन लड़कों की तरह अपना लंड बाहर निकाल कर ही लाए….. लेकिन उसे शर्म महसूस हो रही थी और वैसे भी उसने आज तक इस तरह के कार्य को अंजाम नहीं दिया था और ना ही कभी सोचा ही था सामने का नजारा और ज्यादा काम उत्तेजना से भरता चला जा रहा था। रोहन के दोस्त की दमदार चुदाई के कारण भाभी जोर जोर से चिल्ला रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था और यहां वह खुल कर मजे ले रही थी… क्योंकि वह चाहे यहां पर जितना भी जोर जोर से सिसकारी भर कर चिल्लाने कोई उसे सुनने वाला नहीं था क्योंकि यहां कोई आता ही नहीं था लेकिन वह इस बात से बिल्कुल अनजान थी कि उसकी खुल कर हो रही चुदाई को कुछ लड़के मजे ले कर देख रहे हैं है वह इस बात से बेखबर जोर जोर से चिल्लाते हुए रोहन के दोस्त के लंड का मजा ले रही थी कुछ देर तक यूं ही दमदार चुदाई चलती रही… कुछ देर बाद ही उस औरत की सिसकारी की आवाज तेज हो गई और रोहन के इर्द-गिर्द हीला रहे हैं लड़कों के लाड़ ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया…. और कुछ ही पल में रोहन के दोस्त ने भी चिल्लाते अपना पानी उस औरत की बुर में गिराना शुरू कर दिया एक दमदार चुदाई खत्म हो चुकी थी वह दोनों अपने अपने कपड़े दुरुस्त करते इससे पहले रोहन और रोहन के दोस्त लोग वहां से वापस लौट गए लेकिन जाते-जाते रोहन के मन पर कामोत्तेजना का पर्दा चढ़ाते गए…

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