अपनों का प्यार या रिश्तों पर कलंक [ ड्रामा + सस्पेंस ] – Update 7

अपनों का प्यार या रिश्तों पर कलंक [ ड्रामा + सस्पेंस ] - Pariwarik Chudai Ki Kahani
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मम्मी–तू ये कैसी बाते कर रही है….में तेरे पापा से प्यार करती हूँ उन्होने जो कुछ भी किया है वो हमारे लिए ही किया है…जय मेरी भूल का नतीजा है और ये भूल दुबारा इस घर में दोहराने नही दूँगी में..

रूही–ठीक है आप मेरा साथ दो या ना दो लेकिन मुझे अब रोकना मत.

मम्मी–रूही में अब झड़ने वाली हूँ तू ये फालतू बाते बंद कर और थोड़ी ज़ोर से मेरी चूत में अपनी उंगलिया चला…

रूही लगातार मम्मी की चूत में अपनी दो उंगलिया चलाते हुए कहती है..

रूही–ज़रा सोचो जब जय का लंड आपकी चूत को ठंडा करेगा ज़रा सोचो जब वो हम दोनो को बेड पर पटक पटक कर चोदेगा…कैसा मज़ा आज़ाएगा हमारे जीवन में .

मम्मी–जय …..जय चोद मुझे..आअहह… डाल दे अपना मोटा लंड सीहह भर दे तेरी माँ की चूत तेरे गर्म लावे से…ऊहहााअहह में गाइिईईईईई. और उसके बाद वो झटके खाती खाती झड़ने लग जाती है.

उधर दरवाजे पर खड़ी नीरा की चूत भी अपना पहला काम रस छोड़ देती है उसकी चूत का रस उसके शौरट्स की साइड में से होता हुआ उसकी जाँघो पर बहने लगता है ….वो मन ही मन एक कसम खा चुकी थी…

तेरी कसम जय में शादी अब तुझ से ही करूँगी…तेरी कसम मेरे जिस्म को रोन्दने वाला मेरी जिंदगी में पहला और आख़िरी मर्द तू ही होगा….तेरी कसम ….जय मेरी हर साँस अब तुझे ही पाने के लिए चलेंगी…तेरी कसम……तेरी कसम……..

वहाँ रूही , मम्मी और नीरा तीनो ही जय को पाने की कामना कर रहे थे वही…नेहा इन सारी बातो से दूर अपने सपनो की दुनिया में मस्त हो रखी थी…शायद आने वाला समय उसके लिए ही सब से भारी होने वाला था….

में–एयिरपोर्ट पर पहुँच कर दुबई की एक फ्लाइट ले लेता हूँ जो बस थोड़ी देर में छूटने ही वाली है…में फ्लाइट में बैठा बैठा सारी बातो के बारे में सोचे जा रहा था…में इतनी गहराई से उन सोचो में डूब गया था कि मुझे कुछ सुनाई नही दे रहा था….

एक हाथ मेरे कंधे को लगातार हिलाए जा रहा था….सर ….सर…सर….सर आपको क्या हुआ है….आप जवाब क्यो नही दे रहे…

कंधे के हिलने से मेरी चेतना फिर से वापस आने लगी….में हड़बड़ा कर अपना सर उपेर कर के देखता हूँ… वहाँ एक सुंदर सी एर होस्टेस्स मेरी आँखो में झाँक रही थी..उसकी छाती पर जो नेम प्लेट लगी हुई थी उस से मुझे उसका नान पता चला…रीना नाम था उसका.

रीना–सर आप ठीक है…आपको क्या हुआ था सर में काफ़ी देर से आपको पुकारे जा रही थी..

में–कुछ नही बस ऐसे ही आँख लग गयी थी आप मुझे बताइए आप क्यो मुझे आवाज़ लगा रही थी.

रीना–सर आपने सीटबेल्ट्स नही बाँधी है प्लेन अब उड़ने वाला ही है…प्ल्ज़ आप अपनी बेल्ट बाँध लीजिए.

में अपनी बेल्ट बाँधने लग जाता हूँ फिर वो कहती है…

रीना–सर फ्लाइट के दौरान आप कुछ लेना चाहेंगे

में–मुझे एक ड्रिंक चाहिए लेकिन थोड़ा हार्ड…क्या आप मेरे लिए इतना कर सकती है..

रीना–ज़रूर सर…में थोड़ी ही देर में आपका ड्रिंक ले आउन्गि आप जब तक आराम कीजिए…

उसके बाद वो वहाँ से चली गयी और में अपने आस पास के लोगो को देखने लगा…थोड़ी ही देर बाद हमारा प्लेन आकाश की उँचाइयो में था…

तभी मुझे वो खूबसूरत एर होस्टेस्स मेरी तरफ़ आती नज़र आ गयी.

रीना –सर ये आपके लिए ड्रिंक…क्या आप इसके साथ खाने में कुछ लेना चाहेंगे….

में–नही मुझे और कुछ नही चाहिए लेकिन जब तक हम लोग दुबई नही पहुँच जाते आप मुझे ड्रिंक देती रहना.

रीना–जेसी आपकी मर्ज़ी सर…लेकिन इतनी ज़्यादा ड्रिंक आपके दिल को नुकसान पहुँचाएगी…

में–दिल तो वैसे भी टूट चुका है बस ये शराब ही है जो मेरे दिल को बिखरने से बचा रही है…

उसके बाद में वो ड्रिंक एक ही साँस में ख्तम कर देता हूँ…

रीना–सर हो सकता है शराब दर्द को कम कर देती हो लेकिन इसको ज़्यादा पीने से वो दर्द कम होने की बजाए और बढ़ जाता है…अगर जीवन मिला है तो अपनी परेशानियो का सामना करो ना कि परेशानियो से छिप्कर जीवन का कीमती समय खराब करो.

उसकी इस बात ने मुझे सुहानी की बात याद दिला दी…

में–सॉरी रीना में आज कुछ ज़्यादा परेशान हूँ इस लिए प्ल्ज़ मेरे लिए बस एक और ड्रिंक ला दो इसके बाद आप और ड्रिंक मत लाना..

ये सुनकर वो मुस्कुरा उठती है…

सर–आपने मेरी बात का मान रखा उसके लिए तहे दिल से शुक्रिया…में आपका ड्रिंक लेकर आती हूँ….

और उसके बाद वो वहाँ से चली जाती है …और जब वापस आती है तो वो ड्रिंक के साथ कुछ खाने को भी ले आती है..

रीना–सर आपको मेरी एक बात और माननी पड़ेगी आपको ड्रिंक के साथ ये पनीर पकोडे भी खाने होंगे..क्योकि आप को देख कर ऐसा लग रहा है जैसे आपने सुबह से कुछ नही खाया…

मैने उसकी बात मानते हुए खाने के लिए हाँ कह दी फिर वो चली गयी….

एक एर होस्टेस्स मुझे जिंदगी की एक और सीख दे गयी….अपनी परेशानियो से घबराने की बजाए उनका सामना करना ही असली जिंदगी जीना होता है…..

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राजस्थान का एक और रंग….जैसलमेंर…यहाँ का रंग बड़ा निराला है यहाँ के मर्द अपने सिर पर साफ़ा बाँधते है…और औरते अपनी छाति तक का घूँघट रखती है…

दूर ….दूर तक फैला रेत का समंदर दिन में आग को तरह जलता है और सूरज ढलते ही यही रेत किसी माँ के आँचल की तरह शीतलता प्रदान करती है…ये मशहूर है अपनी परंपराओं के लिए सजे धजे ऊँट ( कॅमल) के लिए…

जैसलमेर का ही एक गाँव लक्ष्मण गढ़ यहाँ आज भी किशोर गुप्ता के पुरखे रहा करते थे…किशोर ने बचपन में ही अपना गाँव छोड़ दिया था और चला आया था मुंबई.

मुंबई से अपने बिज़्नेस की शुरूवात करी फिर किसी काम के सिलसिले में उदयपूर आया यहाँ उसकी मुलाकात संध्या से हुई…दोनो ने शादी करली और उदयपूर में ही घर बसा लिया….

किशोर के माता पिता इस दुनिया में नही है…अगर कोई उसका सगा है तो वो है उसका छोटा भाई रजत गुप्ता…रजत के 2 बच्चे है और दोनो ही लड़किया है एक 18 की और एक 20 साल की किशोर की पत्नी गाँव की नही है इसी वजह से उसकी दोनो लड़किया आच्छे से पढ़ लिख पा रही थी…

रजनी–रजत की पत्नी (चाची)।

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दीक्षा – रजत की बड़ी बेटी।

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कोमल – रजत की छोटी बेटी।

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रजत का वैसे तो कोई ख़ास कारोबार नही है लेकिन खेतीबाड़ी अच्छी जमी हुई है…वो ब्याज पर भी अपने पैसो को चलाया करता था…इसलिए उनकी जिंदगी में किसी प्रकार की कोई कमी नही थी…

उनका एक बड़ा सा घर गाव के बीचो बीच बना हुआ था सभी रजत की दिल से इज़्ज़त किया करते थे …क्योकि ज़रूरत के टाइम रजत ही पूरे गाव के काम आता था…

रजनी–कोमल से…कहाँ डोलती रहती है सारा दिन ये घर आने का वक़्त है क्या तेरा.

कोमल–माँ अब में बकरिया तो चराती हूँ नही जो में आपको ये बोलू…अपनी सहेली के यहाँ गयी थी उसकी दादी से मिलने.

आप तो ज़रा सी देर क्या हुई पूरा गाँव सिर पर उठा लेती हो.

रजनी–अरे छोरी अपनी जीभ को काबू में रखा कर …कल को जब दूसरे घर जाएगी तब वहाँ से शिकायत बर्दाश्त ना होगी मुझ से..

कोमल–माँ म्हारे से पहले तो जीजी का ब्याह करना पड़ेगा….कभी जीजी से भी पूछ लिया करो कि कठे डोलती फिरे है….

और वो हँसती हुई अपने कमरे में भाग जाती है.

रजनी–अब या दीक्षा कठे रह गी…कोमल में राधा काकी के घर जा रही हूँ…दीक्षा और तू दोनो मिलकर खाना बना लेना …तेरे बापू आते ही होंगे खेतो से…..

कोमल और दीक्षा इस घर की जान थी उनके हँसते मुस्कुराते चेहरे से घर हमेशा ख़ुसनूमा बना रहता था…

किशोर के घर छोड़ने के बाद कभी वो पलट कर वापस अपने गाव नही गया…बस किशोर ने अपनी शादी के समय रजत को ज़रूर बुलाया था,बस उस समय ही रजत मिल पाया था किशोर से…उसके बाद दोनो ही अपनी अपनी दुनिया में सुख से जीवन बिता रहे थे…किशोर के हिस्से की ज़मीन रजत ने संभाल कर रखी थी…ये वो ज़मीन थी जिसका बटवारा किशोर के पिता ने जीते जी कर दिया था…रजत ने कभी किशोर की अमानत पर बुरी नज़र नही डाली….हमेशा उसे संभाल कर ही रखा.

दीक्षा घर के अंदर आ गयी थी…

कोमल–जीजी इतनी देर कहाँ घूम रही थी आप…

दीक्षा–कहीं नही कोमल सहेलियों के साथ कुए पर बैठी थी…

कोमल–माँ कह कर गयी है खाना बनाने के लिए …चलो आजाओ आटा मैने लगा दिया है आप सब्जी बना लो.

दीक्षा–हाँ रुक आई एक मिनट में….

तभी एक आवाज़ गूँजती है घर के अंदर ये आवाज़ रजत की थी…

रजत–दीक्षा , कोमल कहाँ हो तुम दोनो…

कोमल–हाँ पापा क्या हुआ… और अपने साथ लाया हुआ पानी का ग्लास रजत को पकड़ा देती है…

रजत–दीक्षा और तेरी माँ कहा है…

कोमल–दीक्षा दीदी अंदर रसोई में सब्जी काट रही है और माँ राधा काकी के यहाँ गयी है…

रजत–अच्छा ठीक है जा और तेरी माँ को वहाँ से बुला कर ले आ …

कोमल–ठीक है पापा में अभी गयी और अभी आई….

थोड़ी देर बाद रजनी भी वहाँ आजाती है…

रजनी–क्या हुआ दीक्षा के बापू…ये कोमल बता रही थी कि आपको ज़रूरी बात करनी है…

रजत–वैसे इस शैतान को मैने ऐसा कुछ कहा तो नही था लेकिन जिस लिए तुझे बुलाया वो बात है तो ज़रूरी…

रजनी–ऐसी क्या बात है दीक्षा के बापू…

रजत–कल दिन भर से मेरा मन बड़ा अजीब सा हो रहा है मुझे कल से किशोर भाई साहब से मिलने का मन हो रहा है…

रजनी –तो फिर मिल आओ ना आप वहाँ जा कर ये भी कोई सोचने की बात है क्या…

रजत–इसबार में सोच रहा हूँ हम सभी लोग वहाँ चले किशोर इन दोनो को देख कर बड़ा खुश हो जाएगा.

रजनी–ठीक है दीक्षा के बापू हम सभी चलेंगे वैसे भी खेत अभी खाली किए ही है और इन दोनो के स्कूल और कॉलेज का भी बंदोबस्त वापस आकर कर लेंगे.

रजत–ठीक है रजनी हम कल सुबह ही निकल चलेंगे तुम चलने की तैयारी करो…….

में दुबई पहुँच चुका था…ऑफीसर अब्दुलह के साथ में मॉर्ग के लिए निकल गया …

वहाँ पहुँच कर बड़ी मुश्किल से में पापा और भाई की बॉडी को देख पाया मेरे आँसू रुकना भूल गये थे ….बिल्कुल अकेला पड़ गया था में…काश इस वक़्त कोई मेरे साथ होता जिसके कंधे पर सिर रख के में रो सकता…

कुछ ज़रूरी फ़ौरमलिटी के बाद अब्दुलह ने कहा..

अब्दुलह–मिस्टर जय आप अब ये बॉडी वापस ले जा सकते है मुझे बड़ा अफ़सोस है आपके साथ जो हुआ उसका..अभी थोड़ी देर में ही एक फ्लाइट जाने वाली है आपको टिकिट और बॉडीस को भेजने का प्रबंध मैने उसी में कर दिया है….

मुझे जैसे ही कुछ पता चलेगा हत्यारो के बारे में आपको इनफॉर्म कर दूँगा.

में–ठीक है ऑफीसर अब मुझे चलना चाहिए वैसे भी अब कुछ बचा नही है यहाँ पर.

उसके बाद एक आंब्युलेन्स में बैठ कर मैं एयिरपोर्ट की तरफ निकल जाता हूँ…आंब्युलेन्स में मेरे सामने दो ताबूतो में दोनो की बॉडी पड़ी हुई थी….में उस तरफ़ देखने की हिम्मत नही जुटा पा रहा था….एयिरपोर्ट आने पर वहाँ के स्टाफ ने ताबूतो को आंब्युलेन्स से निकाला और अपने साथ ले गये.

में जा कर अपनी सीट पर बैठ गया और अपनी सीट बेल्ट लगाने के बाद में अपनी आँखे बंद करके सोचने लग जाता हूँ….प्लेन अब आसमान में उड़ने लग गया था और में अपनी सोच के अंधेरे में अंधेरों से गिरता जा रहा था…

तभी एक आवाज़ मुझे उस भंवर में से निकाल देती है …वहाँ रीना मेरे सामने खड़ी थी… और उसके हाथ में मेरे लिए एक ड्रिंक था…

में–आप इस फ्लाइट में भी…

रीना–सर ये वही प्लेन है जिसमें आप कुछ घंटो पहले आए थे…

अब ये प्लेन वापस भारत जा रहा है तो में भी तो इसी में मिलूंगी ना…ये लीजिए आपका ड्रिंक…क्या में जान सकती हूँ आप इतने परेशान क्यो है…

में–आपके प्लेन में मेरे पापा और भाई भी सफ़र कर रहे है….

रीना–ओह्ह थ्ट्स नाइस अगर आप बोले तो में आप लोगो की सीट्स एक साथ करवा दूं…

में–रीना तुम समझी नही वो उन दो ताबूतो में हैं वो अब मेरे पास नही बैठ सकते…

रीना–ओह्ह्ह माइ गॉड एक्सट्रीम्ली वेरी सॉरी सर…शायद मैने आपकी चोट को और कुरेद दिया..मुझे माफ़ कर देना.

में–आपको सॉरी बोलने की कोई ज़रूरत नही है…क्या आप मेरा एक काम कर सकती है…

रीना –बोलिए सर कौनसा काम करना है…

में–जहाँ वो बॉक्स रखे हुए है में वहाँ जाना चाहता हूँ थोड़ी देर में मेरे भाई और पापा के साथ रहना चाहता हूँ…

रीना–सर में कॅप्टन से पर्मिशन लेने की कोशिश करती हूँ शायद वो मान जाए..

में–ठीक है वैसे कोशिश अक्सर कामयाब हो जाती है आप जाइए.

उसके बाद रीना कॉकपिट में घुस गयी और थोड़ी देर बाद फिर से मेरे पास आई.

रीना–सर कॅप्टन मान गये है बस उन्होने ये कहा है बाकी पॅसेंजर्स को परेशानी नही होनी चाहिए….

में–रीना में किसी को भी परेशान नही करूँगा बस मुझे वहाँ छोड़कर तुम वापस अपना काम संभाल लेना.

रीना– ठीक है सर आप चलिए मेरे साथ

उधर उदयपूर में एक बोलेरो किशोर गुप्ता के बंगले के सामने रुकती है….और वॉचमन दरवाजा खोल देता है..गाड़ी अंदर लेजाने के बाद रजत और उसकी फॅमिली बंगले की तरफ बढ़ जाते है….

रजत घर की बेल बजाता है और अंदर से नीरा दरवाजा खोल कर बाहर आजाती है

नीरा–जी बोलिए किस से मिलना है आपको.

रजत–बेटी हम किशोर भाई साहब से मिलने आए है….

नीरा–माफ़ करना अंकल आपको पहचाना नही मैने और पापा तो दुबई गये है….

रजत–क्या तुम उनकी बेटी हो…

नीरा–जी अंकल

रजत—बेटा में तुम्हारे पापा का छोटा भाई हूँ तुम्हारा रजत चाचा….

नीरा–चाचा….लेकिन पापा ने तो कभी कुछ बताया नही…एक मिनट आप अंदर आइए फिर बैठ कर बात करते है…

कोमल अपने पिता को इस तरह फँसता देख मुस्कुराने लग गयी थी…

नीरा–अंकल आप यहाँ बैठिए में मम्मी को बुलाकर लाती हूँ…

नीरा भागकर मम्मी के रूम की तरफ़ चली जाती है…

नीरा–मम्मी कोई अंकल आए है अपनी वाइफ और दो लड़कियो को लेकर और वो अपने आप को मेरा चाचा बता रहे है…

मम्मी–चाचा…

और फिर मम्मी लगभग भागते हुए हॉल में बैठे हुए रजत की तरफ़ बढ़ जाती है….

मम्मी गौर से रजत के चेहरे को देखने लगती है…

मम्मी–आप रजत भैया है ना.

रजत–जी भाभी में आपका एक्लोता देवर और ये आपकी देवरानी रजनी और ये दोनो शैतान आप ही की है…

मम्मी रजत भैया से मिलकर बहुत खुश हो जाती है वो रजनी से गले मिलती है और कोमल और दीक्षा को आशीर्वाद भी देती है….

और फिर वो सब को आवाज़ लगा लगा कर बोलाने लगती है नेहा….रूही…नीरा जल्दी यहाँ आओ देखो कौन आया है…

नेहा –कौन आया है मम्मी…

मम्मी–कौन क्या आया है ये तुम्हारे चाचा जी… हैं चल पैर छु इनके…

रजत भैया ये राज की पत्नी नेहा है रजनी नेहा भाभी को अपने गले से लगा लेती है…तभी रूही और नीरा भी वहाँ आ जाती है वो दोनो भी सब से बड़े प्यार से मिलती है उसके बाद नेहा और रूही किचन में घुस जाती है…इतने में रजनी भी उठकर उनलोगो की मदद करने के लिए किचन की तरफ जाने लगती है तो मम्मी उनका हाथ पकड़कर उन्हे वही रोक लेती है…

रजनी–भाभी घर का ही तो काम है और हम कौन्से. यहाँ मेहमान बनकर आए है..

मम्मी–नही रजनी तुम यहीं बैठो वो दोनो काम कर लेंगी..

रजनी–कोमल..दीक्षा जाओ अंदर रसोई में भाभी और दीदी की मदद करो …

मम्मी–रहने दे ना रजनी क्यो बच्चो को परेशान कर रही है

रजनी–नही भाभी जी आप इनको जाने से मत रोको वरना मुझे बुरा लगेगा…

मम्मी–ठीक है नीरा तुम अपनी बहनो को लेकर भाभी के पास ले जाओ अगर ये आराम करना चाहे तो अपने साथ रूम में ले जाना.

नीरा–मेरे पास पहले तंग करने के लिए बस एक बड़ी बहन ही थी अब तो मेरे पास 2 बड़ी बहन है तंग करने के लिए और एक छोटी बहन भी आ गयी…. और फिर वो दोनो का हाथ पकड़कर किचन के अंदर ले जाती है..

मम्मी–बताइए रजत भैया गाँव के हाल कैसे है में तो कभी आ नही पाई गाव आप लोगो को यहाँ देख कर सच में दिल खुश होगया..

रजत–भाभी गाव में सब बढ़िया है मुझे दो दिन से भाई साहब की बहुत याद आरहि थी इसीलिए मैने आज यहाँ आ गया और इन लोगो को भी यहाँ ले आया …

मम्मी–अब आप यहाँ आगये होंठो अब कुछ दिन जाने का नाम मत लेना मुझे थोड़ी तो सेवा करवाने दो अपनी देवरानी से…आपने तो कभी भाभी का ध्यान रखा नही …

रजत–नही नही भाभी आप सब तो हम लोगों के दिल में हमेशा रहते हो…..

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