लुका छुपी
Update 22
सोनू और शेखर कुछ इसी तरह के रात को एक कमरे में सोते हुए बात कर रहे थे।
और सोनू ने जिस जिस तरह माला की चूदाई की थी उसका पूरा विवरण इतने कामुक अंदाज में बता रहा था जिससे शेखर का लंड भी एकदम उफान पर आ गया था।
शेखर के साथ एक कमजोरी थी उसकी ड्रीम गर्ल उसकी बड़ी मम्मी गिरिजा थी और incest ke प्रभाव में आने के बाद आजकल उसकी मम्मी माला भी उसके लंड को खड़ा करने लगी थी।
लेकिन जो कशिश गिरिजा के बदन में था उस घर में अन्य किसी में न था।
सबसे प्रौढ़ महिला होते हुए भी सर्वाधिक आकर्षक और कामुक महिला थी।
और शेखर के लिए तो वह माला से भी ज्यादा सगी थी क्योंकि शेखर और सोनू का लालन पालन उसी ने किया था ।
वर्षो की उसकी ब्रह्मचर्य व्रत की तपस्या का यह परिणाम था की उसके बदन एक एक अंग से एक नूरानी प्रकाश और एक अदंभ्य खुशुबू निकलता रहत था । इसके पहने हुए कपड़ो या उसके कमरे में जाने के बाद जो खुशबू सोनू और शेखर को महसूस होता था उससे इनके दिल में गिरिजा के प्रति एक भावुक काम का आविर्भाव होता था और दोनो को दिल और लंड गिरिजा को समर्पित हो गया था ।
परंतु सोनू के उस अनाचार भरे मैसेज और आजकल के कलयुगी प्रभाव की वजह से गिरिजा जैसी महिला के चरित्र में भी ग्रहण लगने की संभावना होने लगा था क्योंकि कभी कभी वह बहुत विचलित सी हो जाति थी परंतु खुद पर नियंत्रण कर के रखती थी।
रात के 11 बज चुके थे और गिरिजा को अचानक याद आया की अपनी बीपी की दवाई वह कमरे में भूल गई है। उसने जल्द से सोनू और शेखर को आवाज लगाया लेकिन वह सामने के जिस कमरे में थे वहां तक आवाज नहीं पहुंची और वह स्वयं उतर कर नीचे के तरफ जाने लगी और अपने कमरे के नजदीक वह जैसे पहुंची उसे कुछ हंसी ठिठोली सी आवाज आने लगी।
यह आवाज उसके बेटी और दामाद की थी। गिरिजा को उन्हे डिस्टर्ब करना नागवार गुजरा और फिर वहां से वापस लौट जाने की सोची तभी उसकी बेटी की एक मादक आवाज उसके कानो में गूंजी ” isshhhhhh, आह्ह्ह्ह्ह उम्मम्म्म, यह आवाज जैसे ही गिरिजा के कानो में गई उसके जज्बात जागने लगे और वह ताक झांक करने की कोशिश करने लगी।
वह उसी का कमरा था जिसमे वह अपनी राते तन्हाई में गुजारा करती थी और जिस बिस्तर पर उसकी बेटी और दामाद क्रीड़ा कर रहे थे वह बिस्तर भी मानो गिरिजा को तरह प्यासा हो उठा था यही कारण था की गिरिजा के बेटी और दामाद दोनो की प्यास अपनी मां की उस बिस्तर पर जाग चुकी थी और दोनो को आज एक अजीब से मस्ती सूझ रही थी।
गिरिजा जैसे एक खिड़की के सुराख से अंदर के तरफ देखती है उसकी आंखो में एक बिजली सी चमक आ गई। वह देखती है की उसका दामाद एकदम नंगा लेटा हुआ है और इसका लिंग जो एक औसत आकार का था वह बिलकुल खड़ा था और उसकी बेटी उसे अपने हाथ में लेकर सहला रही थी और उसके दामाद का एक हाथ उसकी बेटी के चुचियों पर था ।
कुछ देर बाद उसकी बेटी अंजू अपना मुंह लगाकर अपने पति राहुल का लंड अपने मुंह लेकर पूरी तन्मयता के साथ चूसने लगी थी।
यह लाइव सेक्स दृश्य देख कर गिरिजा की तो मानो सांसे ऊपर नीचे होने लगी और वह सोचने लगी क्या ऐसा भी होता है की एक दूसरे के इस भाग को भी मुंह में लिया जाता है । दरअसल गिरिजा पुरानी संसाकारो की थी और यह सारे काम क्रीड़ा का अनुभव उसे आजतक ना सुनने को और न देखने को मिला था । उसके पति भी एक सामान्य से व्यक्ति थे जो गिरिजा को 20 वर्ष पूर्व ही अकेला छोड़ कर जा चुके थे ।
गिरिजा काफी हद तक उत्तेजित हो गई थी और अंदर का नज़ारा देखने लगी। तभी उसकी बेटी अंजू अपने पति के खड़े लंड पर चढ़ के बैठ गई और राहुल नीचे से काफी तेज तेज धक्के लगाना लगा , उसकी स्पीड इतनी तेज थी की उसके जांघ और अंजू के जांघ आपस में चोट खाने की वजह थपप्प थप्पप की एक मादक आवाज कमरे में गूंज रही थी।
गिरिजा कुछ पल के लिए सब कुछ भूल कर उस दृश्य में खो गई थी और एक एक झटके को अपने चूत पर महसूस करने लगी।
हालांकि गिरिजा ऐसी महिला नहीं थी परंतु आजकल इसके परिवार में अनाचार का वायरस की वजह से उसका दिलो दिमाग भी कामुक हो चुका था ।
सहसा अंजू का सारा बदन अकड़ने लगा और और वह अपना सर ऊपर करते हुए अपने दोनो चूची को अपने हाथ में दबाते हुए अअह्ह्ह्ह उन्ह्ह्ह्ह की आवाजे करते झड़ने लगी। और राहुल निरंतर अपने धक्को को जारी किए हुए था और फिर वह भी अपने पैरो को एक दम सीधा टाइट कर अपने वीर्य को इसके चूत में छोड़ आआह्ह्ह की आवाज निकाल स्खलित होने लगा।
और अंजू ने एक सिसकारी लेते हुए कहा “जानू, आज कई दिनों में बाद आपने ऐसा मजा दिया है”
दरअसल अंजू भी एक बेहद कामुक लड़की थी परंतु शक्ल , बदन और गुण से बिलकुल अपनी मां पर गई थी।
उसके पति राहुल को सेक्स को लेकर कुछ खास रुचि नहीं थी और वह महीने में एकाध बार ही कभी कभी सेक्स करते थे, इसी वजह से अंजू की भी इच्छा सुस्त हो चुकी थी और अपने मन को समझाते हुए वह भी sex के प्रति अरुचि रखने लगी थी।
लेकिन गिरिजा की बेटी अंजू 35 साल की एक बेहद कामुक स्त्री थी जिसके चेहरे पर एक गजब नूर झलकते रहा था और कुंवारी में अपने गांव में वह सबसे खूबसूरत और शरीफ लड़कियों में गिनी जाती थी।
उसके खूबसूरती में चार चांद उसके चर्बीदार विशाल गांड़ और उभरे हुए मदमस्त स्तन लगाते थे।
खैर , गिरिजा ने जैसे देखा की इन दोनो का काम लीला समाप्त हो गया वह दबे पांव ऊपर अपने कमरे में जाने लगी।
दूसरे तरफ शेखर और सोनू दोनो ही अपने कामुक बातो गरम हो चुके थे और दोनो की एक बुरी लत लगी हुई थी सिगरेट पीने की , दोनो ठीक उसी वक्त छत के कोने में जहां कभी कभी गिरिजा और माला और अन्य लड़किया छत पर बने इस भाग में आड होने की वजह से मूतने आया करते थे । वही यह दोनो एक शेड के आड़ में सिगरेट का कस लगाते हुए एक वीडियो देख रहे थे जिसमे एक लड़की और दो लडको का थ्रीसम चल रहा था।
फिर अचानक सोनू की नजर अपनी मां पर जाति है जो नीचे से बड़े दबे पांव आ रही थी। सोनू तुरंत शेखर को आगाह करते हुए सिगरेट फेंकने को कहता है और बोलता है मां आ रही है , चल जल्दी , लेकिन वहां से जाना मुमकिन नहीं थी जब तक गिरिजा अपने कमरे में नही चली जाती वरना वह इन दोनो को देख लेती।
गिरिजा तो अभी इस वक्त एक अलग ही धुन में थी और वह इधर उधर देखे बिना ठीक उसी जगह पर आ जाती जहां ये दोनो पहले ae मौजूद थे परंतु गिरिजा को वह दिख नहीं रहे थे ।
और गिरिजा को बहुत तेज मूत आई थी और उसने जल्दी उस जगह पर गई और अपना पिछवाड़ा सोनू और शेखर की तरफ करते अपनी साड़ी ऊपर उठाई और मूतने बैठ गई , अचानक से हुए इस घटना से सोनू और शेखर दोनो अवाक रह गए और कुछ पल के लिए दोनो यह भूल गए की वह दोनो साथ में है उनका पूरा ध्यान अपनी मदमस्त मां के बड़े बड़े मस्त खरबूजे की तरह चर्बीदार विशाल गांड़ और और गांड़ के दोनो फांकों के बीच की गहरी लकीर जो एक घाटी की तरह दिखाई दे रही थी वहां चले जाति है। और दोनो का लंड अकड़ जाता है क्योंकि वह पहले से कामुक हुए पड़े थे और ऊपर से उनकी सपनो की रानी उनकी मां और एक की बड़ी मां उनके सामने बड़ी निर्लज्ता के आठ गंदी उठाए मूत रही थी , कुछ 1 मिनट तक वह मूत के उठी और उठते हुए अपनी साड़ी से अपने चूत को भी पोंछ रही थी।

सोनू और शेखर दोनो इस घटना से बुरी तरह हिल गए और उनके बीच एक गहरा सन्नाटा छा गया हालांकि वह दोनो इस तरह की बातों को करते थे परंतु अभी जिस महिला को उन्होंने देखा था वह इन दोनो के लिए ही काफी आदरणीय थी और वह सामने प्रत्यक्ष तौर पर उसके बारे में कदापि बात नहीं कर सकते और उन दोनो के मन में लज्जा का भाव ने घेर लिया और बिना एक दूसरे से बोले कमरे में आकर लेट कर सोने लगे।
दोनो के लंड में आग लगी हुई थी अपनी मां की गांड़ देखने के बाद, सच्चाई तो यही थी की वह लाख मोबाइल और इंटरनेट पर वीडियो और तस्वीर देखें हो परंतु गिरिजा की गांड़ पूरी दुनिया में नायाब था।और दोनों एक दूसरे की सोने की प्रतीक्षा करने लगे की सुकून से उस गांड़ को याद कर अपना लंड हिलाएं।
सोनू काफी बेकरार था परंतु यह जाहिर न होने दिया और उसने झट से अपना मोबाइल निकाल नए वाले नंबर से गिरिजा को मेसेज कर दिया , वह खुद को काफी दिनो से रोक के रखा था परंतु उसकी मां की वह गोरी गांड़ देख कर उसका ईमान डोल गया क्योंकि वाकई में गिरिजा के गांड़ को देख के ऐसा ही लग रहा था की वह गांड़ काफी मजबूर होकर लंड को बुला रही हो, जिस तरह से गिरिजा ने उस वक्त गांड़ हवा में लहरा के जिस अदा और मादकता के साथ आगे पीछे करते हुए मूत रही थी सच में कोई भी देख के यह अंदाजा लगा सकता था की उसका गांड़ मन ही मन लंड की पुकार कर रहा था।
गिरिजा ने जैसे ही मैसेज का साउंड सुना । झट से मोबाइल देखी और जिसका उसे इंतजार था वह घड़ी आ गई , उसने देखा की उसी लड़के का मैसेज है जिसने उस दिन wrong number समझ के अश्लील मैसेज किया था।
गिरिजा का पूरा का पूरा अस्तित्व उसी दिन से बदलने लगा था जिस दिन उस लड़के का व्हाट्सएप पर अश्लील pics और videos देखी थी।
उसने देखा की “Hi” लिखा हुआ है।
गिरिजा को मेसेज और चैट करने की जायदा अनुभव नहीं था , वह डायरेक्ट कॉल ही करती थी किसी को भी , परंतु अभी माला बगल में ही सोई थी इसलिए उसे डर था की अभी इस वक्त कॉल करूंगी और माला ने सुन लिया तो बहुत गड़बड़ हो जायेगा इसलिए उसने मैसेज के रिप्लाई में बस एक वर्ड लिखा।
गिरिजा मैसेज में : “बोलो”
सोनू : एक GIF भेजता है जिसमे गले मिलने जैसा कोई कार्टून था ।
गिरिजा को वह कार्टून देख के हंसी आ रही थी । कुछ देर तक गिरिजा और सोनू दोनो बस चुप चाप बैठे हुए थे कोई किसी को रिप्लाई नहीं दे रहा था ।
तब तक सोनू का मैसेज आता है जिसमे लिखा था ।
“आपकी बहुत याद आ रही है अपनी तस्वीर भेजो न”
गिरिजा यह पढ़ मुस्कराने लगी और सोचने लगी अपने बेटे को उमर के लड़के से में कैसी अतरंगी एहसास लेना शुरू कर चुकी हूं। परंतु इस वक्त अपनी बेटी अंजू और राहुल की चूदाई देखने के बाद उसे ज्यादा कुछ सोचने समझने की फुरसत नहीं थी। और काफी कुछ सोचने के बाद वह काफी मुश्किल से एक रिप्लाई करती है। ” मैं कोई तस्वीर नहीं रखती लेकिन तुम कहते हो तो कल एक तस्वीर भेज दूंगी अपनी”
बस सिर्फ यही मैसेज देख सोनू के लंड की नसे तन गई, क्योंकि उसके लिए एक बेहद कामुक एहसास था यह की खुद को मम्मी से अनजान बनकर चैट कर रहा है, वो भी वह मां जो हमेशा मुझे शिक्षा, प्रवचन देते रहती है और हमेशा एक शख्त आचरण लिए मुझे डांटती रहती है।
उसे यह अहसास काफी गुदगुदा रहा था की एक औरत की नजर से देखूं तो क्या मस्त माल है मेरी गिरिजा मां।
और मन में अपनी मां की तस्वीर सोच तस्साली से मुठ मार हिलाने लगा। इधर शेखर सो चुका था या सोने का नाटक कर रहा था पता नहीं, एक बार तो सोनू जोर जोर से हरकत करने लगा इस पर शेखर की आंख खुली और उसे समझते देर नहीं लगी की उसका बड़ा भाई सोनू हिला रहा है। और वह ध्यान से उसकी हरकत सुनने लगा आंख बंद किए हुए।
सोनू ने सबसे पहले गिरिजा की होंठ और नाक की याद करते हुए अपना लंड रगड़ रहा था फिर उसकी नशीली पीठ और तभी उसके सामने में उसकी चाची माला की आंगन में देखी नंगी गांड़ की भी याद आ जाती है और सोनू उत्तेजना में एक बार धीरे से बस चाची बोल कर अन्हे भरने लगा ” यह सुन शेखर तो बिलकुल हक्का बक्का रह गया और इसके कदमों से जमीन खिसक गई और सोनू पर इतने जोर का क्रोध आया की उसकान हुआ अभी साले को दो चार लात देकर इसकी मुंह तोड़ दे। तभी उसके शैतान ने उससे कहा की यार इसमें सोनू की क्या गलती आज तूने भी तो गिरिजा मां की गांड़ देख कर लंड खड़ा कर लिए थे।
सोनू अपने सोच में अपनी मां गिरिजा और चाची माला को याद करते हुए

शेखर और ध्यान देते हुए सुनने लगता है और अंत में जोर लगा कर हिलाते हुए अअह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह्ह् उह्ह्ह्ह्ह मां तेरी गांड़ अअह्ह्ह्हह उम्मम्म करते हुए पानी छोड़ने लगता है।
यह सब सुन शेखर आउट ऑफ कंट्रोल होते होते रह जाता है और पूरे जोर से बर्दाश्त करते हुए कुछ देर तक वैसे ही रहता है और फिर धीरे से उठता है और छत के आंगन में जाता है और वहां वह क्यों आए क्या करेगा यह कुछ समझ नहीं आ रहा था बस वो उठा और छत के कोने में एक खाट रखा था वहां गिरिजा और माला के कुछ कपड़े रखे थे जिसे धोने के लिए रखा गया था , शेखर उन कपड़ों को जाकर सूंघने लगा , इसी बीच उसे एक ब्रा दिखाई दी जिसे देख वो समझ गया की यह सपना दीदी की है “उफ्फ्फ तब क्या था अपनी पसंदीदा लड़की सपना दीदी की याद उसे जैसे आई उसने अपना शॉर्ट्स नीचे किया और उस ब्रा को सूंघते चाटते अपने लंड पर रगड़ते अपनी दीदी का नाम ले लेकर जोर से हिलाते हुए झड़ गया।
शेखर अपनी दीदी को सोचते हुए मुठ मरता है


