गिरिजा नहाने चली गई और सोनू और माला अपने अपने कमरे में जाकर अफसोस और ग्लानि में भर गए। माला के आंखो से आंसू गिरने लगे उसने सोचा की अचानक यह कैसा तूफान आया जो मेरी जिंदगी में पाप का एक नया अध्याय लिख दिया ।
परंतु इस बात से उसे तसल्ली थी की आमने सामने आकर दोनो ने संभोग नहीं किया था वरन एक परदा एक आड़ के सहारे दोनो प्रत्यक्ष एक दूसरे के समक्ष आए बिना एक दूसरे के जिस्म के साथ मजा लिए थे।
सुबह हुई सभी अपने कमरे में सो रहे थे परंतु माला अपने कृत्य के पछतावे में आते हुए निरंतर एक अफसोस में थी। और सुबह 4 बजे से ही उठ कर पूजा पाठ में व्यस्त थी , तभी सोनू अपने छत से देखता है की माला चाची पूजा करते हुए आंख बंद कर रोते हुए मन में कोई प्रार्थना कर रही है।
यह देख सोनू के सिटी pitti गुम हो गई। और वह स्वयं भी पछतावे के आग में जलने लगा और सोचा की जो लुका छुपी में होना था वह हो गया , प्रत्यक्ष तौर पर कभी चाची के साथ ऐसा नहीं कर सकता है।
दोनो अपने अपने तरीके से अफसोस और ग्लानि से जूझ रहे थे। लेकिन वह कहते है की न की सेक्स के भाव को जितना दबाने की कोशिश करें वह उतने ही गति से दुगुना ताकत से आक्रमण करता है और तब इंसान उस वेग को झेल नहीं पाता है।
खैर , दिन बीतते गए कुछ दिनो बाद अखिलेंद्र भी रिश्तेदारों के यहां से घूम के आ चुके थे और शादी की तैयारी जोर शोर से चलने लगी थी , क्योंकि शादी के और 12 दिन ही बच गए थे और परिवार के सभी सदस्य शादी की तैयारी में लग गए थे परंतु माला अभी तक एक शर्मिदगी और जिल्लत के भाव के साथ निरुत्साह की भांति तैयारी में लगी हुई थी।
लेकिन जब जब रात्रि का समय होता तो उसकी तड़प इसके बदन को तोड़ने लगती । हो न हो सोनू ने चोर के रूप में एक दमदार और कभी न भूलने वाली चूदाई की थी। अखिलंद्र के जवानी आजकल बिलकुल शांत थी वैसे भी इस बुढ़ापे में उसकी खुद की बेटी ने शहर में उसके जवानी को रिमझिम बन कर निचोड़ चुकी थी ।
दूसरे तरफ सपना सब कुछ भूल कर प्यार के एक नए एहसास में गोते लगा रही थी। जी हा जिस लड़के से उसकी शादी होने वाली थी वह दिन रात इस लड़के से फोन कॉल , चैट पर लगी रहती और अपने भविष्य संजोने के सपने देखने लगी थी। ब्यूटी एक चुलबुली सी लड़की शादी को लेकर काफी उत्साहित थी और घरवालों के साथ ही बड़े उत्साह से शादी की तैयारी में लगी हुई थी।
सोनू अपने लंड से अपने चाची को तृप्त कर पछतावे के भाव के साथ कुछ दिन तक शांत था और सारे बुरे हरकत जैसे incest forum पर कहानी पढ़ना , incest चैट इत्यादि बंद कर चुका था।
और इसी क्रम में उस unknown नंबर से गिरिजा को मेसेज भी करना बंद कर दिया था।
गिरिजा भी उस घटना को भुला दिया था परंतु रह रह कर अपने मोबाइल को अक्सर चेक किया करती थी और एक अनचाहे इच्छा के साथ कभी कभी मैसेज का इंतजार करती थी और इन दिनों वह अपना मोबाइल किसी को नहीं देती थी।
परंतु परिवार का एक सदस्य काफी विचलित और काम के प्रबल प्रभाव में आकर दिन रात चूत और लंड के दुनिया में खोया हुआ था जिसका नाम शेखर था।
जैसा की कहानी के शुरू में बताया गया था वह ऊपर वाले कमरे में सोनू के विपरित जो कमरा था उसमे वह सोया करता था । इस कमरे में बिल्कुल अकेले रहने की वजह से वह उस कमरे को अपना चूदाई और हस्त मैथुन का संसार बना चुका था। उसके कमरे में एक की प्रभा कुछ ऐसी कामुक थी की सामान्य व्यक्ति भी आकर उसका मन विचलित हो जाता।
जी हां , जहां जवान चूत और जवान लंड कामगनी में जल रहे होते है तो एक अदृश्य शैतानी शक्ति उनके इर्द गिर्द मंडराती रहती है और उनके संसर्ग में आने वाली अन्य लोगो को भी कमोतेजित करती है।
खैर , अब शादी के दो चार ही बचे थे । और घर में में मेहमानों के आने का सिलसिला आज से चालू हो गया था ।
जैसा की मैने बताया था की गिरिजा की एक बेटी अंजू थी जिसकी शादी आज से 7 वर्ष पूर्व ही चुकी थी।
वह आज अपने हसबैंड और एक दो बच्चो के साथ आ चुकी थी।
इसके साथ ही माला की बहन और उसके बहनोई भी आज शाम तक आने वाले थे ।
अब सबके रहने का एडजस्टमेंट की प्लानिंग होने लगी और फैसला हुआ की की गिरिजा के कमरे में जहां वो नीचे वाले कमरे में सोती थी वहां उसके बेटी और दामाद रहेंगे । और माला के बहन और बहनोई नीचे माला के कमरे में ही रहेंगे ।
सपना और ब्यूटी एक साथ अपने पुराने कमरे में रहेंगे जहां घर के शादी के अन्य जरूरी सामान , गहने इत्यादि रखे होते हैं।
अखिलंद्र बाहर बरामदे में सोएंगे ।
गिरिजा और माला ऊपर वाले कमरे में जहां सोनू सोता था वहा रात को रहेंगे और सोनू शेखर के कमरे में एडजस्ट हो जायेगा।
रात हुई और सब अपने अपने नियत कमरे में सोने के लिए चले गए।
सोनू और शेखर आज काफी दिनो के बाद एक साथ समय बिताने का टाइम मिला था , इधर कुछ दिनों से सोनू और शेखर अपने अपने कामों में व्यस्त थे ।
जैसा की बताया गया है आप लोगों से की दोनो भाई जरूर थे परंतु दोनो में एक अभिन्न मित्रता भी थी।
आज सोते वक्त शेखर काफी असजह महसूस कर रहा था क्योंकि वह इन दिनों लंड की अकड़न से बहुत परेशान था और सोनू से लगा incest वायरस उसे भी जकड़ चुका था ।
फिर सहसा उसने पूछा यार शेखर तुम तो मुझसे 4 साल बड़े हो तुम 24 के और मैं सिर्फ 20 का हूं। तुमने आज तक कभी किसी की चूत नहीं देखा।
सोनू मन में सोचते हुए अफसोस और उत्तेजना का एक मिला जुला संगम के भाव में कहता है, यार, सोनू तुझे कैसे बताऊं की मैने अंधेरे की वजह से चूत देखा तो नहीं लेकिन तुम्हारी मम्मी माला की चूत जम कर चोदा हूं। और यह सोच की शेखर की मां क्या मस्त माल है यार उसका मन अब फिर से डोलने लगता है और शेखर से कहता है “हा यार मैंने देखा तो नहीं लेकिन चूत की चूदाई जरूर की है”
इसपर सोनू उत्साह से पूछा “तुमने किसकी चूत चोदी है”
सोनू : “यार एक लंबी कहानी है, छोड़ हटा”
शेखर जिद्द करने लगा की तुम्हे बताना ही होगा
सोनू : यार इतना जान की सब कुछ लुका छुपी में हुआ है और लुका छुपी एक बहुत मजेदार चीज है।
शेखर : यार सोनू ये लुका छुपी क्या होती है
सोनू : यह एक नायाब तरीका है पागल , इसमें वह सुख है जो अन्य किसी चीज में नहीं, इसमें चोदने और चुदाने वाली को यह पता नहीं होता की सामने वाला कौन है।परंतु लुका छुपी की एक शर्त होती है की यह हमेशा अंधेरे में ही सकता है ।

