46 त्रिकोणीय शृंखला
जब मिस्टर शर्मा ने बेडरूम में पुनः पदार्पण किया और गतिविधियों का मुआयना किया, तो उनका लिंग तपाक से सावधान मुद्रा में आ गया। उन्होंने सर्वदा कल्पना की थी कि टीना जी को किसी अन्य महिला की योनि से मुखमैथुन करते देखें , और आज तो वही कल्पना यथार्थ बनकर उनके समक्ष दृष्टिगोचर हो रही थी। दरसल उनका लिंग इसलिये फड़क – धड़क उठा था क्योंकि उन्हीं की कामुक नवयौवना पुत्री की योनि में उनकी पत्नी अपना मुख चिपटाकर भूखी कुतिया जैसी चाट-चुपड़ कर रही थीं।
मिस्टर शर्मा बिस्तर के समीप पहुंचे और उन्होंने अपने पुत्र को उनकी पत्नी के साथ ठोक-ठोक कर सम्भोग करते हुए देखा। जैसे वह अपने लम्बे, कठोर लिंग को उनकी उचकी मांद में जोतता जा रहा था, किशोर जय के अण्डकोष ‘फत्थ – फच्चाक’ की जोरदार ध्वनि के साथ माँ के पेट पर टक्कर कर रहे थे।
“आओ डैडी, देखो बेशरम कुतिया कैसे चूत चाटती है !”, जय ने पिता का स्वागत किया। उसके ठेलों के बल के प्रभाववश हर ठेले के साथ उसकी माँ का मुख सोनिया की रिसती योनि में अन्दर दब जाता था, जिससे उसकी वासना से बेसुध जवान बहन के मुख से रह रह कर लैंगिक आनन्द की अभिव्यक्ति करती किलकारियाँ फूट पड़ती थीं।
“मादरचोद, रुक नहीं सकता था मेरे लिये ?”, मिस्टर शर्मा मुस्काते हुए बिस्तर पर चढ़ बैठे और अपने लिंग को पुत्री के कामुक मुख में उडेलते हुए बोले।
सोनिया अपने पूरे सामर्थ्य से मिस्टर शर्मा के लिंग को चूसने लगी। अपनी योनि पर माँ के होंठों और जिह्वा का अनुभव उसे मारे मस्ती के पागल किये देता था, और अब मुंह में पिता का लिंग उसकी मादक मस्ती के अनुभव को परिपूर्ण कर रहा था। जैसे मिस्टर शर्मा ने अपने लिंग को उसके मुख में चलाना प्रारम्भ किया, सोनिया ने फिर एक बार ऑरगैस्म का अनुभव किया। भूखी माँ उसकी योनि के अति – संवेदनशील चोंचले को चूसती जा रही थी। प्रतिक्रिया में वह केवल पिता के लिंग पर मुँह कसे हुए मदमस्त होकर कराहती जा रही थी।
“साली, डैडी का वीर्य पियेगी ? बोल ?”, मिस्टर शर्मा ने पूछा।
“बेटीचोद, तू सोनिया से चुसवा रहा है ?”, अब तक उनकी गतिविधियों से अनभिज्ञ टीना जी ने हैरानी प्रकट की।
“अबे हरामजादी, तू चुपचाप जय से चुदवा! तेरी बेटी मेरे लन्ड की सेवा कर रही है !” पिल्ले जनेगी! मेरी माँ मेरे पिल्ले जनेगी!”
जय भी अब वीर्य स्खलन के निकट आ चुका था। उसकी माँ की तंग, भींचती योनि की चिपचिपाहट उसके सारे बाँध तोड़े देती थी। उसपर अपनी बहन को पिता के लिंग को चूसते देख, और साथ में माँ द्वारा योनि चुसवाता देख, जय की उत्तेजना और अधिक बढ़ गयी थी। लड़के को अपने वीर्य-कोष में खिंचाव का आभास हुआ। अब किसी भी सैकेण्ड उसकी माँ को उसके वीर्य की हर बूंद प्राप्त होने वाली थी!
“ऊ ऊहहह! कुतिया! अब मेरा लन्ड भी झड़ने वाला है, मम्मी !”, जय गुर्राया, और अपने फड़कते लिंग को माँ की चुपड़ी योनि की गहनता में पागलों जैसा पीटने लगा।
टीना जी पुत्री की योनि के भीतर कराहीं और अपने नितम्बों को संकेतात्मक लहजे में हिलाती हुई उससे अपनी योनि के भीतर वीर्य स्खलन का आग्रह करने लगीं। इस निर्लज्जता भरे आह्वाहन ने जय के संयम के बाँध को तोड़ दिया। माँ की जकड़ती तपन के भीतर उसका लिंग फड़ाका। उसके अण्डकोष उबल पड़े और एक लबालब बौछार के साथ अपने भीतर संग्रहित वीर्य को टीना जी की मचलती योनि की गहनता में उडेल दिया।
“ले कुतिया, मेरा बीज !”, वो चीखा, “उँहह अँ आ … आह ऊहह ! ले अपनी कुतिया चूत में मेरा वीर्य ! ओहहह, मादरचोद! माँ की चूत ! चोद मेरा लन्ड !”
“आह ऐंह पी जा अपनी चूत में मेरे टट्टों का वीर्य! देख बेटीचोद, जिस चूत को चोदकर तूने मुझे पैदा किया था, उसी चूत को चोदकर आज मैं हराम के पिल्ले पैदा करूंगा!” पिता को सम्बोधित करता हुआ बड़े गर्व से बोला था जय।
“मादरचोद, चोद माँ की चूत! मेरे शेर, दे साली को अपना वीर्य !” मिस्टर शर्मा ने पुत्र का उत्साह वर्धन किया।
टीना जी ने भी अपने पुत्र के गरम, गाढ़े वीर्य को अपनी योनि में प्रवाहित होता महसूस कर लिया था। जय के लिंग का तना उनके चोंचले पर खूबसूरती से रगड़े जा रहा था, परन्तु वे अपने ऑरगैस्म के तनिक भी करीब नहीं थीं।
जय के लिंग ने तो उनके भीतर ज्वलन्त कामाग्नि को हलका सा भड़काया भर था। मैं पहले भी कह चुका हूँ किन कारणों से यह स्वाभाविक था। टीना जी ने अपनी निस्वार्थ ममता का प्रेम अपने पुत्र के लिंग से वीर्य स्खलित कर अभिव्यक्त किया था। करुणा की सागर उनकी योनि में पुत्र-वीर्य को ग्रहण कर उन्होंने अपने असीम और निश्छल प्रेम का एक और उदाहरण दिया था।
उनके चूसते मुख ने तले, सोनिया अपने तीसरे ऑरगैस्म के प्रभाव में ऐंठ रही थी। उनकी नन्हीं बिटिया की कामक्षुधा तो बुझाये नहीं बुझती थी, पर टीना जी की देह तो तृप्ति के लिये अधीर हो रही थी। वे अपनी पुत्री से क्षुधा पूर्ति की अपेक्षा कर रही थीं। | जब जय ने अपना लिंग उनकी योनि से बाहर खींच निकाला, तो टीना जी ने पीठ के बल लोटकर सोनिया को अपने संग खींचते हुए, उसके सर को अपनी दुखती योनि पर नीचे दबा दिया। मिस्टर शर्मा के लिंग ने ‘सुड़प्प’ के गूंजते स्वर के साथ पुत्री के मुख का त्याग किया। उन्होंने सोनिया को अपने हाथों और घुटनों के बल बैठकर माँ की जाँघों के बीच सर घुसाते हुए देखा।
“चूस मुझे, सोनिया !”, टीना जी कराहीं, “आ बिटिया, तेरी कुतिया माँ तुझे रन्डी बनने की ट्रेनिंग देगी !”
सोनिया ने इससे पहले कभी योनि को चाटा नहीं था, पर मैथुन की इस नवीन शैली को सीखने का इससे अच्छा अवसर भला और कौनसा हो सकता था ? आखिरकार माँ ने अभी-अभी तो उसकी योनि के संग मुख मैथुन किया था। उसकी नन्हीं योनि अब भी माँ द्वारा प्रदान किये अति-तीक्षण ऑरगैस्मों के प्रभाववश में गुदगुदा रही थी। उसे तनिक भी ग्लानि अथवा शर्म का आभास नहीं हुआ। जानती थी तो बस इतना की पूरी रात उसे चूसना और चुदना है! एक पाश्विक कराह के साथ किशोरी सोनिया ने अपना मुँह टीना जी की पटी योनि पर दबा डाला और आतुरता से अपनी कामुक माता की टपकती योनि पर ऊपर-नीचे चाटने-चुपड़ने लगी। | मिस्टर शर्मा पुत्री के उचके हुए नितम्बों के पीछे आ पहुंचे और घुटनों के बल बैठ गये। फिर उन्होंने अपनी जिह्वा को पीछे की दिशा से उसकी आकर्षक योनि के भीतर घुसेड़ना प्रारम्भ कर दिया। उन्होंने सोनिया की रसीली योनि-कोपलों को चाटा और चूसा। सोनिया भी इसी क्रिया को माता पर दोहरा रही थी। फिर खड़े होकर मिस्टर शर्मा ने, उस स्थान पर, जहाँ कुछ देर पहले उनकी जिह्वा थी, अपने विशालकाय लिंग के सिरे को टिका दिया।
सोनिया माँ की योनि में जोर-जोर से कराही, और उसके पिता अपने सुपाड़े को उसकी महीन रोमों से सजी योनि पर ऊपर-नीचे मसल-मसल कर अपने दैत्याकार लिंग को रिसते हुए द्रवों की चिपचिपाहट में लथेड़ने लगे। लिंग के चिकने-चपाट हो जाने के पश्चात उन्होंने अपने सुपाड़े को सोनिया की संकारी प्रजनन गुहा में घुसा डाला। जैसे ही उसने डैडी के लिंग को अपनी योनि में प्रविष्ट होता महसूस किया, सोनिया उचकने और बलखाने लगी। वह अपनी गीली, लिसलिसी, टाइट योनि को मिस्टर शर्मा के लिंग की संतोषजनक कठोरता के विपरीत ठेलती रही।
68 थका कुटुम्ब जैसे ही उनके पति अपने दानवाकार लिंग द्वारा नवयौवना सोनिया की जकड़ती योनि के भीतर सैक्स-क्रीड़ा करने लगे, टीना जी को अपनी योनि में पुत्री की जिह्वा के बेतहाशा थीरकने का आभास हुआ। । “ओह, आह आँह ! चाट मेरी चूत , लौन्डिया !”, सोनिया के केशों को दबोच कर टीना जी ने आदेशात्मक स्वर में कहा। “रन्डी, तेरा बाप तेरी जवान चूत को चोद रहा है, तू मम्मी की चूत को चाट! अहहहह! हे राम! चाट मुझे, सोनिया! चाट चोंचले को भी, लाडली! अम्म अहह • आँह! शाबाश अब तो तू पेशेवर :: अ आहह रन्डी बन गयी समझ !” ।
अतुल्य दैहिक सौन्दर्य की स्वामिनी टीना जी ने अपनी गोरी सुडौल टाँगों को चौड़ा फैला दिया। जिस प्रकार वे अपने नितम्बों को बिस्तर से उचका-उचाका कर पुत्री के चेहरे को अपनी गुंघराले रोमों से मण्डित योनि पर लथेड़ते जा रही थीं, उनके विशाल स्तन बड़े-बड़े रसगुल्लों जैसे फुदकते जा रहे थे। टीना जी ने दीवार पर लगे आईने में झांका तो मिस्टर शर्मा के लिंग को सोनिया की कोमल जवान योनि के भीतर लुप्त होते देख अप्रत्याशित आनन्द भरी एक कराह उनके कंठ से फूट पड़ी।
ओह दीपक डार्लिंग! चोद रन्डी को! दम लगा के चोद !”, टीना जी चीखीं, “चोद हरामजादी का मुँह मेरी चूत में, मेरे आशिक़ ! हे राम, मेरी प्यास तो बढ़ती जा रही है !” उन्होंने मुड़कर जय को देखा, जो हस्तमैथुन किये जा रहा था, संयम से वो अपने नौजवान लिंग को किसी तपते और चिपचिपे छिद्र में घोंपने के अवसार की प्रतीक्षा कर रहा था।
इधर आ, हरामी”, टीना जी ने फंकार कर काहा। “ला इधर अपना मोटा, टनाटन लन्ड, मम्मी इसे चूसना चाहती है !”
“अभी लाया मम्मी!”, जय हँसते हुए माता के स्तनों पर चढ़कर बैठ गया। “ले चूस मेरा लन्ड, मम्मी !” | उसका दानवाकार लिंग टीना जी के मुख के सामने तनकर फड़क रहा था।
कामुक माता ने तुरन्त मुख को पूरी तरह से खोला, और आनन्द के मारे बिलबलाते हुए, ममतापूर्वक अपने होंठों को पुत्र के धड़कते लिंग पर लिपटा दिया।
“उहहह, अहहह! ले मम्मी चूस ले मेरा मोटा लौड़ा”, जय ने कराह कर नीचे हाथ बढ़ाया और माँ के विशाल, पुखता श्वेत वर्ण के स्तनों को दबाने लगा। मेरी रन्डी मम्मी! अगर ऐसे ही मस्ती से चूसती रही तो तेरे मुँह में ही मेरा वीर्य बह जायेगा !”
टीना जी ने पुत्र के फड़कते लिंग को अपने गले की गहराईयों में निगल लिया। पुचकारते हुए, उन्होंने अपने पुत्र के लिंग को धीरे-धीरे चूस- चूस कर अपने गले में खींचना शुरू किया, और तब कहीं जा कर थमीं, जब वो उनके गले में पूरा का पूरा उतर नहीं गया। अपनी सौंदर्यवती पत्नी को अपने पौरुषवान पुत्र के लिंग पर मुखमैथुन करता देख , मिस्टर शर्मा अत्यन्त उत्तेजित हो गये, उन्होंने तुरन्त अपने लिंग का गतिवर्धन किया और सोनिया की प्रेम से सिकोड़ती योनि में उसे अपनी पूरी क्षमता के साथ ठेलने लगे।
पापी परीवार का उदिक्त सामूहिक सम्भोग कुछ ही मिनट और चला। सोनिया का मुख व जिह्वा माँ के रसीले योनि माँस में गहरी घुसी हुई थी, और योनि में ठेलते , पिता के विशाल लिंग द्वारा उत्पन्न विलक्षण आनन्द उस नवयौवना से सहा नहीं जाता था। किसी कुदाल की तरह मिस्टर शर्मा अपने लिंग को पुत्री की मलाईदार योनि में चला रहे थे। यौन तृप्ति की वेला को विलम्बित करने की चेष्टावश उनका आग-बबूला और पसीने से सना हुआ था, परन्तु उनकी चेष्टा विफल हुई।
टीना जी ज्वर- पीड़िता जैसी जय के ठोस लिंग को चूसे जा रही थीं और उनके चोंचले पर सोनिया का चुपड़ता मुख उनके सारे बाँध तोड़े दे रहा था। आखिरकार जब उन्होंने चरमानन्द की प्राप्ति की, तो उनका सम्पूर्ण बदन थरथरा उठा। वे बेचारी चीख भी नहीं पायीं , मुँह में पुत्र का मोटा लिंग जो ठूस रखा था उन्होंने। परन्तु सोनिया को ज्ञात हो गया कि उसकी माँ को चरमानन्द प्राप्त हो रहा है। टीना जी की भीगी योनि अचानक सिकुड़ी, फिर अपनी किशोर पुत्री की लपलपाती जिह्वा पर कुलबुलाती – बलखाती हुई फड़की। सोनिया निरन्तर प्यासे जानवर की तरह चाटती-चुपड़ती हुई उस निर्लज महिला की तप्त, रोमयुक्त योनि पर जिह्वा चलाती रही। उसने मुख-मैथुन-क्रीड़ा में चरमानंद की आखिरी घड़ी तक माँ का साथ निभाया।
पिता और पुत्र के बीच वीर्य स्खलन स्पर्धा में, मिस्टर शर्मा अग्रिम आये। वीर्य का देर तक संयमित किया हुआ फ़व्वारा सोनिया की आक्रमित युवा योनि में फूटा, और उसके प्रजनन मार्ग को चिपचिपे गाढे, श्वेत वर्ण के वीर्य- प्रवाह से लबालब भरता गया। उनकी सिकुड़ती- ढील देती योनि पर सोनिया के मुख का शिकंजा कायम तो था ही, अब टीना जी अतिरिक्त मस्ती से कराहने लगीं थीं क्योंकि उनके पुत्र का लिंग भी अब वीर्य का स्खलन कर रहा था।
| टीना जी निर्लज्जता से अपने पूरे सामर्थ्य से जय के लिंग को चूस रही थीं। उसके झटकते लिंग को वे अपनी मुट्ठी में कस के पकड़े हुए, कराहते हुए किशोर जय के अण्डकोष से स्फुटित वीर्य की बूंद-बूंद को दुह – दुह कर पुत्र-वीर्य का पान कर रही थीं। उन्हें इसकी तनिक भी परवाह नहीं थी कि मुख में वीर्य बहाता लिंग उनके कोख – जने पुत्र का है, उनका पूरा ध्यान तो बस जय के पुरुषाकार लिंग को चूसने पर केन्द्रित था।
टीना जी ने अपना मुँह उसके पेड़ पर गाड़ दिया, और जय के सम्भोगास्त्र को अपने गले में जितना अन्दर जा सकता था, ठूस लिया। उन्होंने ध्यान ही नहीं दिया कि कब सोनिया उठकर पलटी और मिस्टर शर्मा के लिंग को चूसना प्रारम्भ करा। टीना जी तो केवल अपने पुत्र के वीर्य का रसास्वादन करती जा रही थीं।
दोनों महापुरुषों के लिंग जब अपने भीतर सिमटे वीर को उडेल चुके, तो पापी परीवार के सदस्य संतुष्ट और प्रसन्न मुद्रा में थक कर बिस्तर पर लेट गये। सर्वसम्मति से यह तय हुआ कि सभी रात को अपने-अपने बिस्तरों पर सो कर विश्राम करेंगे।

