तभी सोनू के दिमाग की बत्ती जलती है और वह दौड़ कर अपने कमरे में जाता है और अपने कपड़े खोल कर लूंगी और बनियान पहन एक गमछा से अपना मुंह ढक लेता है और माला के जाने के 10 मिनट के बाद खेतों के तरफ चला जाता है। और माला को खोजने लगता है।
माला को पहले से शक था की सोनू मेरे पीछे पीछे आयेगा ही इसलिए वह वही घर के पीछे ही वाले खेतो में एक पेड़ की आड़ में छुप गई थी और जैसे ही सोनू को देखा की वह वेश बदल कर सच में चोरोयकी भांति आया है मतलब थोड़ी देर पहले मेरा चोरोई से रक्षा करने वाली बात करने वाला मेरा रक्षक ही भक्षक बन कर आया है।
माला ने भी अपनी योजना के मुताबिक उसे जोर से आवाज लगाते हुए कहा , जबकि वो भी जानती है की इधर चोर कभी नहीं आते है और इस जगह पे तो कभी नहीं क्योंकि यह ठीक पीछे वाला ही खेत था , सोनू समझ जाता है की माला पीछे ही छुपी हुई थी और वह देखता है , तभी माला कहती है कौन हो तुम , उस रात की तन्हाई में और घुप अंधेरे में सोनू मदहोश हो उठा और इतने में सोनू का लंड लुंगी में खड़ा हो कर फुंफकार मरने लगा , और वह एकदम झटके में आकर माला को पीछे से जोर से पकड़ लिया और कोई आवाज न करते हुए माला की चूची को मसलने लगा
ताज्जुब की बात यह थी की माला विरोध करना छोड़ दी और अपने को सोनू के हवाले कर बिलकुल ढीला छोड़ दी और दोनो एक दूसरे को जानते समझते अपने बदन को एक दूसरे से रगड़े जा रहे थे लेकिन ऐसा एक्टिंग कर रहे थे की बात छुपी रहे।
तभी माला कहती है अरे कौन हो तुम , छोड़ो मुझे जाने दो।
तभी सोनू कान में फुसफुसाते हुए कहता है की मैं आपका बहुत पुराना दीवाना हूं।
जिस अहसास के साथ सोनू ने माला के कान में फुसफुसा कर बोला , माला मचल उठी और अपना चेहरा सामने कर बोली”अच्छा मुझे तो अभी अभी पता चला”
और यह कहते हुए उसके सीने के बालो में अपना मुंह छुपा कर एक हाथ से सोनू के लंड के इर्द गिर्द घुमाने लगी। तभी सोनू ने कान में फिर फुसफुसा कर कहा मैं तो काफी बड़ा चोर हू आपने अभी तक मेरे बारे में सुना क्यों नहीं ” ऐसा बोल कर माला का चेहरा अपने चेहरे के तरफ कर अपने मुंह पर ढके गमछे को होंठो के पास से हटा कर माला का होंठ अपने होंठ में लेकर चूसने लगा।
माला ने मुंह बंद किए हुए थी और खुल कर मदद नहीं कर रही थी, उसके होंठो से होठ सटाए हुए ही उसने सोनू से पूछा की आखिर मेरे में क्या है जो दीवाने हो चले। और यह बोल कर अपना होंठ खोल कर सोनू के जीभ को अपने मुख में घुसने की इजाजत दे दी और वह भी बड़ी तन्मयता के साथ सोनू के होंठो को चूसे जा रही थी। आखिर उसका अपना भतीजा था और वह भी काफी गोरा चिट्ठा मस्त खूबसूरत सा लड़का था । माला ऐसे बांके जवान को पा के धन्य हो गई थी और खूब मजे में आकर सोनू के होंठो का रसपान करने लगी।
और फिर उन्होंने होंठ एक दूसरे से हटाया और सोनू अपना लंड बाहर निकाल कर माला के हाथों में दे दिया माला ने उसे सहालते हुए नीचे झुक कर अपना जीभ निकाल कर उसे चाटने के लिए बैठी ही थी की उसे याद आया की यह तो अपने मां को ही छुप कर देखते हुए लंड हिला रहा था ,उसने ऊपर मुंह कर उससे पूछा की तुम तो काफी जवान चोर लगते हो मुझ बुढिया में इतना इंट्रेस्ट कैसे हो गई । मैं तो तुम्हारी मां जैसी हूं।
इस पर सोनू ने अपना लंड से माला के नाकों के ऊपर उसके दोनो नथुने के ऊपर रगड़ता हुआ कहने लगा की तुम बड़ी मस्त चीज हो और मां की उमर हुई तो क्या हुआ आजकल तो कुछ लोग अपनी मां को भी चोदने लगे हैं।
और फिर माला यह सुनकर एकदम से गरम होकर उसका लंड अपने मुंह में लेकर चूसने लगी । चारो तरफ अंधेरा था और सुनसान और वही लंड चूसने से आती हुई pluuup pluplp कर आवाज आ रही थी।
और माला भी एक रण्डी की भांति उसका लंड चूसे जा रही थी।
और तभी सोनू ने अपने मोबाइल में कुछ incest GIF और pics दिखाने लगा ।
ये सब देख कर माला की तो मानो काटो तो खून नहीं और वह सोचने लगी की आजकल के लड़के कितने बिगड़ चुके हैं क्या मेरा शेखर भी ऐसा ही होगा ??
और फिर उसे पता न क्या हुआ वो उठी और अपनी गांड़ पीछे कर घोड़ी की तरह खुद से बन गई और कुछ बोले बिना सोनू का इंतजार करने लगी , सोनू ने अपनी चाची का निमंत्रण पाकर काफी उत्तेजित हो गया और अपना लंड निकाल कर पहले तो अपनी चाची की चूत पर जीभ निकाल कर उसके गांड़ से लेकर चूत तक को चाटने लगा।
माला उफफ्फफ आअह्ह्ह्हह्ह उह्ह्ह्ह करते हुए अपना कमर ऊपर नीचे करने लगी और सोनू ने अपना लंड निकाल कर उसके चूत पर रख के हल्का अपने लंड से उसके गीले हो चुके चूत पर दो बार ठोका
और माला की चूत जैसे आग की भट्टी बन गरम हो गई थी और चूत से लगातार रस की धारा बहे जा रही थी जिससे पता चलता है की उसकी चूत काफी वर्षो से प्यासी पड़ी थी।
सोनू अपना सुपाड़ा का अगला भाग माला के चूत में जैसे डाला वह डर गया क्योंकि माला की चूत वाकई में एक गरम भट्टी की तरह ही जल रही थी। और फिर माला ने अपनी कमर उछाल उसका लंड अपने भीतर लेने लगी दोनो के बीच एक घमासान और धुंवाधार पारी की शुरुवात होने लगी और दोनों दिन दुनिया भुला कर अपनी अपनी हवस की आग को ठंडा करने लगे। एक मस्त चूदाई का दौर चल उठा, उस अंधेरे जगह पर चाची और भतीजे की चूदाई लीला की एक ऐसी मधुर संगीत बज उठी जिसमे पूरा वातावरण काम के प्रभाव में आ गया दोनो एक दूसरे पर बराबर पड़ रहे थे। माला को पहली बार कोई मजबूत बांका नवजवान मिला था जो उसके भीतर की गहराई तक लंड घुसा के उसके जड़ को खोद खोद के चोद रहा था।
माला एक मस्तानी घोड़ी की तरह हो चुकी थी और फिर उसने आवाज करना चालू कर दिया और फिर वह उठ खड़ी हुई और सोनू को बेदर्दी से पकड़ कर उसे नीचे धक्का देकर लेटने को कहा और वो खुद ऊपर चढ़ गई और उसके लंड की सवारी प्रारंभ कर दिया।
चूदाई में दोनो को अद्भुत आनंद मिलने लगा और अब कुछ देर के लिए सोनू ने भी आवाजे निकालना स्टार्ट कर दिया और महज कुछ देर के लिए अपने चेहरे से गमछा हटा कर बिलकुल साफ साफ एक दूसरे के सामने सगे चाची भतीजे चुदवाने लगे थे।
दोनो को एक दूसरे का पता तो पहले से ही था लेकिन दोनो एक दूसरे से छुपने का नाटक कर रहे थे ।
और कुछ देर ऐसे ही माला अपने भतीजे के लंड पर चढ़ी उसकी स्वारी करती रही और और तभी दोनों बैठ जाते है जमीन पर एक दूसरे के कमर के इर्द गिर्द अपने अपने पैर फंसा लेते है और आगे पीछे होकर धक्के देना चालू करते है। जमीन पर बैठ के यह अद्भुत आसन एक असीम आनंद दे रहा था दोनो को।
माला मन ही मन सोचने लगी क्या मरद का बच्चा है यह , uffff मेरा भोला सा दिखने वाला सोनू मेरा ही भतीजा आज मुझे चोद रहा है।
अब यह मुझे चोद चुका है तो क्यों न इसकी मां से इसको चुदवाने में मदद करूं।
और एक सगी मां और बेटे की चूदाई की परिकल्पना से सिहर उठी और मस्त होकर अपनी चूत में उसका लन्ड लेती गई
और तभी दोनों अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंचने ही वाले थे तभी सोनू कहता है की आप तो कह रही थी आपके बेटे के उमर का हूं मैं फिर मेरे साथ क्यों चुदवा रही हैं आप”
कमावेश में उसने चुदवा रही हैं जैसे गंदे और अश्लील शब्दो का चयन किया था जिससे की अपनी चाची को जलील कर सके और जोर जोर से लंड पेलने लगा ।
माला आह्ह्हह आह्ह्ह् करते हुए कहती है , क्योंकि मुझे पता है तुम जैसे ठरकी लड़के अपनी मां को भी चोदने में पीछे नहीं रहेंगे।
ऐसा कह कर अपनी कमर को जोर से उछलते हुए सोनू के होंठो को चबाने लगी और कुछ देर ने उसका शरीर अकड़ने लगा और फिर झड़ने लगी।
वर्षो के बाद उसे ओर्गास्म की प्राप्ति हुई थी कुछ देर तक उसके पूरा बदन में जो कम्पन और आनंद की अनुभूति उसे आज हुई थी , उसे आज तक कभी नहीं हुआ था और एक असीम सुख और संतुष्टि का अनुभव वह करने लगी ।
सोनू का भी पानी निकलने ही वाला थी की माला ने कहा अपना पानी बाहर गिरा दो सोनू।
चाची के आदेश सुन अपना लंड बाहर निकाल माला के गांड़ पर अपने वीर्य रस को चूड़ी झड़ गया।
इधर पड़ोस की शादी का सारा कार्यक्रम खत्म हो रहा था और अखोलंद के सारी फैमिली वापस घर आने लगी , सोनू ने माला को चोद कर वही उसी हालात में छोड़ कर भाग गया और वापस अपने कमरे में आकर लेट गया ।
आज गिरिजा काफी कामुक और बैचैन लग रही थी , अमूमन शादी वाले घर में जाने के बाद सभी एक दूसरे के श्रृंगार प्रभाव में आकर थोड़े रोमांटिक हो ही जाते है लेकिन गिरिजा आज सब पे भारी लग रही थी। व्हाइट साड़ी में ही काम की देवी लग रही थी ।
उसने घर आते ही सबसे पहले छत पर बने बाथरूम में गई और सॉच आदि क्रिया करने के बाद पता न उसे क्या हुआ शावर चालू कर अपने बदन को भिगोने लगी









