36 भंगिन बनी सेठाइन
हाँ, हाँ। बोल ना! फिर क्या हुआ, मेरे लाडले ? मम्मी को सब कुछ सच-सच बता दे।”
“मम्मी, कमलाबाई तो पहँची हुई रॉड है। पहले दिन ही अखियों से इशारे करके मुझसे सैटिंग कर ली थी। कहती थी, जय बाबा, जब से मेरा मरद मरा है, मेरा बिस्तर गरम करने को कोई नहीं। और बुढ़िया ने दे खोला अपना ब्लाऊज, और बोली , आ जय बबा, माँ का दूध पिया है तो दिखा अपने लन्ड की गर्मी। फिर क्या, मैने भी पैन्ट खोली और तब से हमारी चूत – चटाई और लन्ड चुसाई का प्रोग्राम फ़िट हो गया।”
उँह! मुई बुढ़िया के ब्लाऊज में भला क्या माल दिखा तुझे ? मरियल कुतिया से लटके हुए मम्मे होंगे!”, टीना जी दम्भ भरे स्वर में बोलीं।
“अरे मम्मी, मम्मे और चूत तो जमादारन ने ना जाने कितने मर्दो से चुद-चुद कर लटकवा लिये थे। मैं इतना गया- गुजरा नहीं की उसकी टूट सी बॉडी पर लार टपकाऊँ। कमलाबाई का जादू तो उसके रन्डीपने में है। कोई भी मर्द उसकी ललकार और गाली गलौज सुनकर लन्ड पर काबू नहीं पा सकता !” अपनी माँ के मुख पर ईष्र्या के भाव को देखकर जय झट से बोला, “नहीं मम्मी, मेरा मतलब आपके सैक्सीपन का तो लैवल ही कुछ और है ना, वो तो आपकी जूती भी नहीं !”
टीना जी ने अपने कूल्हे मटका कर पुत्र की ठोड़ी को अपने चोंचले पर टिकवा डाला।
“अच्छा, अच्छा, मादरचोद, तू ये बता कि तूने और क्या-क्या किया ? चूत चाटने के अलावा, कुछ चुदाई वुदाई भी की या नहीं ?’, टीना जी ने जय से पूछा, जानती थीं कि पुत्र उनके स्वर में भड़ती उत्तेजना को भाँप रहा था। ।
“कहाँ मम्मी, उसकी चूत तो बिलकुल सूखी हुई है। साली चुदाई में जरा भी दिलचस्पी नहीं दिखाती थी, बस लन्ड चूसती थी और चूत चटाती थी। फिर एक दिन बाथरूम में मैने ऐसे थूक-थूक कर उसकी चूत चाटी, कि रॉड खुद ही मुझसे अपनी भोंसड़ी में उंगल डालने की फ़र्माइश करने लगी !” ।
“फिर !”, टीना जी के शुष्क कंठ से स्वर निकला। वे अब अपने नम पेड़ को अपने बेटे की ठोड़ी पर हौले-हौले मसलने लगी थीं।
जय ने भी माँ के कूल्हों की सरगर्मी को देखकर विस्मय किया कि कहीं वे उससे प्रतिक्रिया की उपेक्षा तो नहीं कर रही थीं। “क्या मम्मी, आपका भी फिर चूत चटायी का मूड बन रहा है क्या ?”, उसने पूछा।
“नहीं। अभी नहीं, मेरे पूत ! पहले तू अपनी कहानी तो बता !” अपने दाँतों को भींचती हुई वे बोलीं, “और खबरदार, कोई भी डीटेल छोड़ना नहीं, समझा !”
। जय भली भाँती अपनी माँ की उत्सुकता का कारण जानता था। और उनकी उत्सुकता की पूर्ती करने का पूरा इरादा रखता था। वो माँ को अपनी प्रथम सैक्स-क्रीड़ा का वृत्तांत सुना कर उनकी कामेन्द्रियों को उकसाना चाहता था, ताकि जब वे वासने के आवेग में अपना आत्मनियंत्रण खो डालें, तो वो अपने लिंग को माँ की योनि में प्रवेश करा कर जी भर कर उनके संग सम्भोग का आनन्द भोगे।।
“ओके मम्मी! हाँ तो उस दिन कमला बाई की चूत को मैने ऐसा प्रेम से चाटा, को वो अपनी चूत में कुछ तो घुसवाये बगैर रह नहीं पा रही थी। उसकी चूत बाहर से बिलकुल सूखी है, और झाँटे सफ़ेद हैं।
बहरहाल, उस दिन कमलाबाई कमोड पर बैठी थी और मैं घुटनों के बल उसकी जाँघों के बीच मुँह घुसेड़े हुए बैठा था।” | टीना जी अपनी आँखें मूंदे पुत्र के वर्णन की कल्पना करते हुए अपने दोनों हाथों से अपने खरबूजों से लबाबदार स्तनों को दबा रही थीं और बार-बार निप्पलों को मसलती जा रही थीं।
“जियो बेटा! भंगिन को कमोड पर बैठा कर चूत चाटता था! साले रन्डुवे, तेरे बाप को ये पता चले तो सोचेगा किसी स्वीपर से चुदकर मैने तुझे पैदा किया है!”, कराहती हुई टीना जी अपने मन में आते कलुषित विचारों को स्वच्छन्दता से अभिव्यक्त कर रही थीं। ।
“अरे मम्मी, कमलाबाई के रन्डीपन को देख कर तो मेरा बाप भी उसकी चूत चाटने को राजी हो जाये !” जय ने माता की कीचड़ भाषा का उपयुक्त प्रतिउत्तर दिया था। “हाँ तो कमलाबाई ने मेरी ओर रन्डी जैसे दाँत पीसकर आँखों का इशारा नीचे को किया और बोली, “सूअर, बहूत हुआ चाटना, अब हाथ की सफ़ाई नहीं दिखायेगा ?” मैं बोला, “क्यों सेठानी जी, क्या कमी रह गयी चाटने में ?’ मम्मी हम ऐसे ही मजा लेते हैं, कमला बाई मुझे गालियाँ देती है, और मैं उसे मालकिन कहता हूँ।
* कमलाबाई ने अपनी जाँघों के बीच मेरे मुंह के बिलकुल पास कमोड में थूका और बोली, “अबे भूतनी के, चुपचाप उंगली अन्दर डाल और मेरी चूत को उंगल कर !’ ऐसा रन्डीपना दिखाती है वो मम्मी! सोचो, अपनी भंगिन हमारे ही घर में, मुझे गाली दे-दे कर अपनी चूत में उंगल – चोदी का ऑर्डर दे रही थी।”
“फिर मैंने मुँह को झुका कर कमलाबाई की जाँघों पर हाथ फेरे। फिर उसने हल्के से कराह कर अपनी गाँड को मेरी ओर उचका दिया।”
“कमलाबाई की जाँघों पर पसीने छूट रहे थे, बिलकुल तुम्हारी तरह मम्मी!”, जय ने अपनी माँ की जाँघों पर हाथों को फेरा।
टीना जी के कंठ से वासना-लिप्त कराहट निकली।
“मैने हाथ बढ़ा कर छुआ तो भोंसड़ी सूखी हुई थी, तो कमलाबाई मुझसे बोली कि बाबा थोड़ी सी वैसलीन हाथ पर ले लो, और फिर चूत में घुसाना। मैने डिबिया से उंगली भर कर वैसलीन निकाली और कमलाबाई की भोंसड़ी पर लथेड़ने लगा, जब चूत मक्खन सी चिकनी हो गयी तो मेरी पूरी की पूरी उंगली उसके अन्दर आराम से फिसल गयी। फिर तो उसका चेहरे देखने लायक था मम्मी। किसी चुडैल की तरह आँखें फाड़े हुए अपने पीले-पीले दाँतों के बीच से लाल जीभ निकाल कर वो मुस्कुरा रही थी। फिर मुझसे कहने लगी, ‘डर मत गाँडू, कस के रगड़ इसे, ये तेरी माँ की भोंसड़ी नहीं है, कमलाबाई की चूत है। बड़े-बड़े सेठों और पन्डितों से चुद चुकी है। फिर मम्मी, मैने वैसा ही किया! दे घुसाई अपनी उंगली और लगा रगड़ने हरामजादी की भोंसड़ में !” ।
| ‘फिर तो बस, कमलाबाई कमोड पर आराम से पसर कर मजे लेने लगी। चूत चटाई से ज्यादा मजा तो उसे उंगल – चोदी में आ रहा था। टीना जी अपने चोंचले पर पुत्र की ठोड़ी के दबाव, और उसके द्वारा उत्पन्न होते अश्लील रोमांच का आनन्द उठा रही थीं। जय माँ की उत्कट उत्तेजित अवस्था को देख कर मन्द-मन्द मुस्कुराता हुआ अपना वृत्तान्त आगे कहने लगा। । “हाँ, तो अब साला मेरा लन्ड भी खड़ा होकर लालम लाल हो गया था। कमलाबाई तो लन्ड चूसने का नाम ही नहीं ले रही थी, मैने ही कुछ जुगाड़ करने की ठानी।”

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