25 नायाब अन्दाज
“मोहतरमा, अपनी रसीली चूत जरा इधर खिसकायिए, बन्दे को भी एक जाम चखने का मौक़ा मिल जाये !”
सोनिया बड़े गौर से भाई-बहन के बीच होती बेहूदा आशिक़ाना डयलॉगबाजी को सुन रही थी, जो उसे कुछ ही दिन पहले सपने में भी मुमकिन नहीं लग सकती थी। वो अपनी चूत को राज के लन्ड पर उचका कर उसे चोदने के लिए उकसा रही थी। अपनी बहन के बिस्तर पर आ जाने के बाद से राज का लन्ड अब और भी बड़ा हो गया था, इस कारण सोनिया को चुटकी भर जलन हो रही थी।
“देखते क्या हो राज , सोनिया ने फ़रमाइश की, “पहले जैसे एक और बार मुझे चोदो!” लौन्डा अपने कूल्हे फिर से हिलाने लगा। अप्ना लम्बा लन्ड जवान लौन्डीया की तन्ग जकड़ती चूत में अन्दर-बाहर टेलने लगा।
डॉली एक बार और खड़ी हुई और अपनी भिगी पैन्टी को उतार फेंका। 4 शाबाश राज ! चोद साली को!”, उसे यूं उकसाती हुई बिस्तर पर फिर छड़ गयी, “लगा कर चोद हरामजादी की चूत ::: बड़ी गालियाँ दे रही थी ना? खोद दे आज रंदी की चूत। हाथ के हाथ मेरी भी चूत चाट ले ना !” ।
डॉली अपने भाई के ठीक सामने बिस्तर पर अपनी टांगों को सोनिया के कन्धों के दोनों ओर रख कर खड़ी हो गई। अपनी फैली हुई टांगों के बीच अपनी चुंगराली, काली झाँटों के दर्मयान उग़लियों से रगड़ते हुए राज के वास्ते अपनी चूत के होंठों को खोल डाला। अपनी आँखों के बीच इस खुदाई कैफ़ियत को देख राज के गले से एक गहरी आह निकली।
उसकी बहन की चूत बड़ी ही चिकनी थी, और तीन साल से, जब उसने पहली बार उस नशीली चूत पर अपने लबों का चुम्बन दिया था, उस शराबी चूत का दीवाना था। कमसिन कली जैसी खिलती चूत की पंखुड़ीयों के बीच उसके अन्दर राज अपनी हवस भरी आँखों से ताक रहा था।
“करीब आ डॉली! मेरे मुँह के पास !”, राज अपने सर को आगे को झुकाता हुआ मुँह बाये होंठों को अपनी बहन की चूत की जानिब करता हुआ बोला। उसके झुकने से उसका लन्ड भी सोनिया की चूत में और गहरा घुसा। और गहरे धक्को से मजा पाकर सोनिया हलके से चीखी। डॉली ने पेड़ को अपने भाई के मुँह की तरफ़ धकेला। और राज अपना प्यासा मुँह उसकी तपती, रिसती चूत में लगा कर उसको पागल की तरह चूसने और चाटने लगा। सोनिया ने अपने ऊपर देखा तो राज की जीभ को डॉली की कुलबुलाती चूत के अन्दर घुसते हुए देखा।
जवान लौन्डी को बड़ी हैरत हो रही थी! सैक्स के इस नायाब तरिक़ के बारे में पढ़ा सुना तो था, पर कभी आँखों से देखा न था। ये नजारा सोनिया को सैक्स पर और आमादा कर रहा था, खास कर के इसलिये कि लड़का-लड़की सगे बहन-भाई थे। सोनिया ने अपने भाई का तसव्वुर करके सोचा कि वो दोनों भी अगर इस तरिक़ को अख्तियार करें तो कैसा रहे। फिर अपने भाई से चूत चटवाने के खयाल से जोश खाकर अपनी काम्पती चुतिया को राज के चाबुक से चलते लन्ड पर फुदकाने लगी। । “ओहह, यार !”, सोनिया सोच रही थी, “बड़ा मजा आयेगा अगर जय मेरी पैन्टी उतार कर अपनी जीभ को मेरी चूत में इसी तरह डाल कर चाटे। अम्म्म्म! और डैडी ? अगर डैडी उसकी गरम चूत चाटने को राजी हो जाएं तो और भी मजा आये ? अगर जय और डैडी दोनों एक साथ उसकी चूत पर लगे हों तो फिर बात ही क्या हो !” उसके बेलगाम दिमाग़ में ऐसे पाप-भरे खयाल उठ रहे थे और वो अपनी टाइट चूत को राज के लन्ड पर वहशियाना अंदाज में फुदका रही थी। |
राज पागल कुत्ते की तरह अपनी जीभ से डॉली की चूत के अंदर और उसके चारों तरफ़ सड़प- सुडुप, चपड़-चुपड़ कर के चाट रहा था। वो अच्छी तरह जानता था कि उसकी बहन को किधर और किस लहजे से चटवाने में मजा आता है। रह-रह कर राज चूत के ऊपर से सटा कर अपनी जीभ को नीचे ले जाता हुआ उसकी गाँड के छेद तक चाटता, और फिर जीभ आगे लाकर चूत के अन्डर घुसा डालता। उसकी इस जंगली हरकत से डॉली अपनी भड़की हुई जवानी के आगोश में आ कर बुलन्दी से चीख पड़ती और अपने भाई के सर को दबोच कर अपनी उतावली चूत पर और दबाती। । “राज ! ओओह मेरे अल्लाह! बहनचोद, जीभ को अपनी लन्ड की तरह मेरी चूत में घुसा !”
राज खुशी से हुक्म बजा लाया। अपनी जीभ से झाँटों को अलग करता हुआ अपनी लम्बी जीभ को डॉली की ऐंठती चूत में जितना अंदर जा सकती थी, उतना अंदर घुसाया, और वैसी ही बेहूदा आवाजें करता हुआ चाटने लगा।
“आर्रघघहुह! ऊउन्घ अहह! माँ के लन्ड, अभी से झड़ायेगा क्या मुझे !”

