23 अब अपनों से क्या छुपाना
बेडरूम का दरवाजा बंद था। डॉली ने दरवाजा खोलने की कोशिश की – दरवाजा लॉक नहीं था। असमंजस में थी कि खोले या नहीं। बहुत हुआ तो कह देगी कि उसे कराहने की आवाजें सुनकर लगा था कि राज किसी खतरे में है। डॉली ने हैन्डल दबा कर बड़े धीमे से दरवाजे को एक इन्च भर खोला। अन्दर झाँक कर देखा तो बिस्तर पर दो नगे जिस्म एक दूसरे से लिपटे हुए सैक्स के जुनून में कराह रहे थे। एक नगा जिस्म उसके भाई राज का था। दुसरे जनाने जिस्म की पहचान डॉली नहीं कर पा रही थी। जो भी थीं, वो मोहतरमा पीठ पर लेटी हुई अपनी टंगें फैलायी थीं और राज की पीठ दरवाजे की तरफ़ थी। मोहतरमा पर चढ़ा हुआ राज अपना लन्ड उसकी टाइट चूत में ठेल रहा था। दरवाजे पर खड़ी डॉली को अपने भाई की टंगों के बीच का नज़ारा साफ़ दिख रहा था!
औरत की रिसती हुई चूत उसके प्यारे भाई के लन्ड को जबरदस्त शिकंजे में जकड़े थी। चूत के होंठ लन्ड के साथ चिपक कर अंदर-बाहर खिंच रहे थे। “अल्लाह मियाँ! ये नजारा तो मेरी चूत में भी गर्मी पैदा कर रहा है !” डॉली ने अपने सूखे होंठों पर जीभ फेरते हुए सोचा। अचानक बिस्तर पर लेटी लौंडीया चीखी: । “चोद हरामी! अपनी बहन की चूत समझ के लन्ड से मरहम लगा रहा है क्या ?! कस के चोद !”
* जानेमन, यूं कहूं क्या ?”, राज ने अपने कूल्हों के झटकों में और जोश भर कर हुंकार भरी। ।
“उह्ह्ह! अब लगा बहन के लौड़े में कुछ दम है! ऊऊ मजा आ गया! ऊहूह, चोद्दे! अम्म्म्म , ऐसे ही! कटुवे! बिलकुल ऐसे ही! अब रोकना मत”
तभी डॉली ने अनजान औरत की आवाज़ पहचान ली। “सोनिया ?” डॉली ने अचरज से सोचा, “अट्ठारह साल की बच्ची से !” डॉली को यक़ीन नहीं हो रहा था! उसका भाई इतनी कम उम्र की लौन्डी को चोद रहा था। हालाँकि हरामजादी गाली-गलौज तो ऐसे कर रही थी जैसे मन्झी हुई रन्डी हो! डॉली ने और करीब जा कर देखा तो लगा कि सोनिया के तेवर बच्ची जैसे तो बिलकुल नहीं थे! पेशेवर रन्डी जैसे जाँघों को फैलाये अपनी एड़ियां अपने आशिक़ की गाँड पर बाँधे हुए थी।
जैसे राज अपने लन्ड को जवाँ हसीना की खिंची हुई चूत में हथौड़े की तरह चला रहा था, सोनिया के कमसिन कूल्हे बिस्तर से ऊपर उचक-उचक कर राज के ताकतवर झटकों को झेल रहे थे। डॉली ने अपने भाई के लन्ड को सोनिया की टपकती चूत के अंदर-बाहर लगातार ठेलते देख कर अपने होंठों पर जीभ फेरी और नज़ारे का भरपूर लुफ्त उठाया। डॉली के जिस्म की भूख भी अब जाग चुकी थी। वो भी दोनों की मस्ती में शरीक होने के लिये बेटाब हो रही थी। उसे यक़ीन था कि उसके भाई राज को इस पर कोई ऐतराज नहीं होगा, लेकिन सोनिया पर इसका क्या असर होगा ? । “एक ही रास्ता है” डॉली ने तय किया, और रूम के अंदर दाखिल होकर अपने पीचे दरवाजा लॉक कर दिया। बिस्तर पर अपने वहशी जिस्मों की भूख में मशगूल नौजवान जोड़े को इसकी भनक भी नहीं हुई।
वाह! वाह! बहुत खूब!” डॉली ने बड़ी आवाज कर के ऐलान किया और बिस्तर की जानिब बढ़ी। आवाज सुनकर राज और सोनिया अपनी बेशरम हरकत में जैसे थे वैसे ही जम से गये। । “अबे डॉली तू? साली डरा ही दिया मुझे !” उसे पा कर राज के चेहरे पर कुछ राहत हुई।
“क्यों बड़े भाई ? लगता हैं मुझे देख कर आपको कुछ परेशानी हो रही है ?” डॉली ने बेतकल्लुफ़ लहजे में बिस्तर पर तशरीफ़ ली। दोनो जुड़वाँ थे लेकिन वो हमेशा राज को अदब से बड़े भाई कहती थी। पहले तो इसलिये कि राज उससे एक मिनट पहले पैदा हुआ था। फिर इसलिये कि डॉली ने जबसे उसके लन्ड को देखा था और उसके साईज को नापा-तौला था, तब से बड़ी मोहब्बत से उसे बड़े भाई कहती थी।
सोनिया को तो जैसे साँप सूंघ गया था। उसका मुँह अब भी खुला का खुला रह गया था, पर उसमें से जरा भी आवाज नहीं निकल रही थी। डॉली के खुराफ़ाती दिमाग़ में उस खुले हुए मुंह के अंदर अपने भाई के लन्ड को देखने की ख्वाहिश पनप रही थी। । “तुझे क्या हुआ सोनिया ? क्या तेरी नानी मर गयी ?” सोनिया ने डरी हुई लड़की पर तरस खा कर मुस्कुरा कर उसे इत्मिनान दिलाया।
“अ अ अरे डॉली दीदी! तुम कब आयीं ?” राज के चौड़े सीने के पीछे अपना नंगा जिस्म छुपाते हुए बोली।
“मुझे खबर हुई कि तुम्हारे घर में कुछ ऐयाशी और रंगरेलियों का प्रोगराम है। बस चली आयी मैं भी शरीक होने !”

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