19 पानी में शैतानी
राज सोनिया को पकड़ कर पूल के अन्दर ले गया और उसके जिस्म को पूल के किनारे सट कर लगा दिया। फिर सोनिया लुभाती चूत को पाने के लिए अपनी मजबूत बाहों से उसे ऊपर उठा कर अपनी उंगलियों से बिकीनी की जाँघिया की इलास्टिक को वहशियों जैसे, लगभग उसे चीरते हुए, खींच कर उसके बदन से उतार दिया। जैसे ही चूत बेपर्दा हुई, उसने अपनी चौड़ी हथेली से चूत के भाग को धीमे से दबाया और उसकी एक उंगली सोनिया की टपकती गर्मा-गरम चूत के अन्दर फिसल कर पहुंच गयी।
राज की इस हरकत ने सोनिया को विभोर कर दिया। वो सकुचा कर फुसफुसाती हुई राज से बोली।
“राज चोद दो मुझे। इसी वक़्त ! यहीं पर! तुम नहीं जानते मैं सुबह से कितना तड़प रहीं हूं।” सोनिया ने अपनी बहें राज के मजबूत कन्धों पर डालीं और टांगों को फैला कर घुटने ऊँचे उठा कर अपना यौवन राज को पेश किया।
“मैं क्या कम तड़पा हूं। आज तुझे इतना चोदूंगा कि तू फ़्लर्ट करना भूल जाएगी !” अपनी स्विमिंग ट्रन्क को उतारता हुआ राज गुर्राया।
राज ने एक मजबूत हाथ सोनिया की पटाखा गाँड जमाया और दूसरे से अपने तने हुए, धड़कते लन्ड को सम्भाला। इतना उतावला हो रहा था कि आव देखा ना ताव, सोनिया की चूत पर लन्ड को टेक कर लगा अन्दर ठेलने। पर नवयौवना की चूत इतनी संकरी थी कि लन्ड का निशाना चूत के मुंह पर ठीक से नहीं लगा था। पर सोनिया ने थोड़ा बहुत ऐंठ-ऊंठ कर लन्ड को अपनी चूत का रास्ता दिखा दिया। अपने सुपाड़े पर चूत के मुंह का एहसास होते ही राज और दम लगाकर लन्ड को अन्दर घुसाने लगा। एक – एक इन्च कर के उसने अपना बम्बू सोनिया की टाइट और रिसती चूत में ठूसा।
“ऊंघ्ह्ह! खुदा की कसम! बड़ी टाइट है!” सोनिया की तंग मांद में आहिस्ता से अपने लम्बे लन्ड को जमाता हुआ जानवरों सा हुंकारता राज ।
“रन्डी की चूत इतनी टाइट है तो गाँड इससे भी टाइट होगी !” राज मन में अपने खौफ़नाक इरादों के लिए में स्कीम बना रहा था। इस खयाल ने उसके लन्ड को और मोटा कर दिया। अब उसका लम्बा तंबू बरी मुश्किल से हाँफ़ती सोनिया की कसी हुई चूत में अन्दर सरक पा रहा था।
पर जल्द ही सोनिया की छड़ती जवानी के हारमॉनों ने अपना कुदरती कमाल दिखाय। चूत में से सर- सर कर के स्त्राव होने लगा और अन्दर की लसलसाती फिसलन में राज का लन्ड पहले की तरह घुसने लगा। कुछ ही सैकन्डों में सोनिया की चूत ने पूरे 7.5 इन्च का लन्ड टट्टों तक निगल लिया। जैसे ही लन्ड सोनिया की मांद में जाम हुआ, राज ने लपक कर सोनिया की गाँड को हाथों में जकड़ा और ठेलमठेल चालू कर दी। सोनिया ने अपनि जिन्दगी में इससे बड़ा लन्ड अपने अन्दर नहीं लिया था। लम्बे लन्ड के जोरदार धक्कों को झेलती हुई कसाईखाने में बन्धे मेमने की तरह मिमिया रही थी।
इस लन्ड के सामने राजेश का छोटा सा लन्ड कुछ भी नहीं था। अछा हुआ उसका कौमार्य-भंग राजेश के छोटे लन्ड से हुआ था। कहीं राज के लन्ड से ये नेक काम होता तो हफ़्तों तक दर्द नहीं जाता! अब वो राज के चोदते लन्ड को कूल्हे झटकाती और उचकाती हुई झेल रही थी। राज उसे वहशीयाना ढंग से चोद रहा था और पूल के किनारे से सटी लोहे की रॉड पर सोनिया ने हाथों का सहारा ले रखा था।
राज का लन्ड अब फ़ौलाद सा सख्त हो चुका था। उसके हर स्ट्रोक के साथ लन्ड सोनिया की चूत के चोचले को मसलता जाता था। राज अपना लन्ड धपाक- धपाक चूत में भिड़ा रहा था और सोनिया की गाँड हवा में उछाल कर पानी की सतह पर छपाक-छप्पक कर के पटक रही थी। दोनों लड़का-लड़की मुँह फारे नीचे की तरफ़ अपने जवान जिस्मों के बीच होती इस जंगली हरकत को देख रहे थे। रह-रह कर सोनिया अपने चेहरे पर गिरती घुघराली जुल्फ़ों को एक हाथ से पीछे झटक देती थी। राज भी कभी-कभी सोनिया की गाँड का सहारा ले कर लन्ड की चूत में पकड़ को ठीक करता था।
फिर सोनिया कभी पेट को कमान की तरह तानती हुई पीछे जुक कर राज के लन्ड के इन्च – इन्च को चूत में निगलने की कोशिश करती। उसकी इस हरकत के कारं सोनिया के नारन्गी जैसे मम्मे आकाश को चुमते हुए ऊपर को उभर आते। फिर राज आगे झुक कर उसकी स्ट्रॉबेरी से गुलाबी निप्पलों को अपने मुँह मे ले दबोचता। सोनिया उसके सर को हाथों में झुलाती हुई अपने मम्मे चुसवाती और उसके खुले हुए होंठों से मस्ती भरी कराहटें निकालती।
आहह! ओह्ह्ह ! हा! औच! म्म्म्म्म !”
एक ओर सोनिया राज की कमर को अपनी दोनों जाँघों के बीच जोर से दबोच कर उसके चोदते लन्ड पर अपनी चूत को कसे जा रही थी। दूसरी ओर पूल के किनारे पर लगी रॉड पर उसने अपने हाथ पीछे को टेक रखे थे। और इन दो सहारों के बीच सोनिया का जिस्म मस्ती में झूल रहा था।
जवाँ लन्ड से चुदते हुए सोनिया के मन में खयाल आ रहा था कि इससे भी बड़े लन्ड से चुदने में कैसा लगेगा। राज का साइज़ काफ़ी बड़ा था और उससे सोनिया को कमाल का मज़ा आ रहा था। पर उसके भाई और डैडी लन्ड तो राज से और भी कुछ बढ़ कर था। वे दोनों तो अपने हाथी जैसे लन्ड से उसको शायद चीर ही डालें। पर सोनिया को हर बड़ा लन्ड एक चैलेन्ज जैसा लगता था, जिसे वो जरूर फ़तह करना चाहती थी।
तभी राज उसके मुं को अपने मुं पर लगा कर बड़ी निर्दयता से चुम्बन लेने लगा, उसकी जीभ सोनिया के मुँह में ऐसे लपकी जैसे उसका लन्ड सोनिया की चूत में सनसनाया था। फिर राज ने उसकी कमर को हाथों में जकड़ कर उसके धड़ को पीछे झुका कर पानी की सतह के जरा ऊपर बिलकुल समतल सुला दिया। इस पोज में राज के जघन की हड़ी सोनिया की चूत के चोचला पर रगड़ा रही थी। सोनिया को अपने चोचले पर मसलती हड्डी से और मज़ा आने लगा। वो झड़ने के करीब आने लगी। अपनी कमर को उसके मजबूत बदन पर फुदकाती हुई ऐसी आवाजें निकाल रही थी।
“आँ : आँह : आँआँह ” आँआँआँआँआँआँह !” राज का बस एक और जबरदस्त स्ट्रोक सोनिया को झड़ाने के लिये काफ़ी था :::
“ऊऊऊह! ऊहन्घ्ह्ह! उन्घाह्ह! मुझे चोद राज ! • अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह
!” सोनिया इस तरह तीखे स्वर में दर्जनों बार चीखती कराहती हुई और अपनी तन्ग चूत को अपने आशिक़ के गोदते लन्ड पर रौंदती हुई झड़ने लगी।
राज उसे बिना रुके चोदता जा रहा था। उसका लन्ड सोनिआ की गीली, उलझी हुई झांटों के बीच उसकी टाइट, नवयौवना चूत में और गहरे बरस रहा था। झड़ने के बाद सोनिया राज की जांगों पर अपनी टंगों की जकड़ को ढीला कर के अपने पाँवों के पन्जे के बल उचक कर खड़ी हो गयी और अपने आशिक़ के हांफ़ते मुँह का चुम्बन लेने लगी।
सोनिया की चूत में अब भी राज का लन्ड बराबर तन के जमा हुआ था। अपनी चूत में लन्ड के जबरदस्त तनाव के एहसास ने सोनिया की चूत को फिर से फड़काना शुरू कर दिया। अभी सोनिया का दिल कहाँ भरा था! “सुभान अल्लाह! मजा आ गया चुदाई का !”, राज बोला।
ओह राज ! कमाल का चुदते हो तुम ! एक और बार चोदो ना, प्लीज ?” सोनिया उसके कानों में अदा से फुसफुसाई और फिर उसकी गर्दन और गाल पर अपने सुलगते होंठों से कई बार चूमी।
राज हंस कर बोला “ठीक है! पर घर के अंदर तसल्लि से। यहाँ पानी साला बहुत ठंडा
है।”
“ये ठीक रहेगा! चलो अगली चुदाई मेरी मम्मी के बिस्तर पर! मेरी तो कब से ख्वाइश थी कि कोई मुझे अपनी मम्मी के बिस्तर पर चोदे !” आँख मारते हुए सोनिया ने अपने दिल का राज उसे कहा।
“मेरी भी ऐसी ही कुछ् ख्वाइश है!”, राज ने मुस्कुरा कर ऐस सोचा, “काश एक बार मेरे लन्ड को तेरी मम्मी की चूत नसीब हो जाए! पर फ़िलहाल तुझी से काम चलाता हूं। साली अगर बेटी जैसी चोद्दी होगी तो मेरा काम बिलकुल आसान है।”
सोनिया के पीछे-पीछे उसके मटकती हुई नगी गाँड को देखता हुआ राज घर घर के अंदर आया। “चोद्दी! क्या माल बॉडी है !” आज तो बेटी की अट्ठारह साल की टपकती चूत को तब तक चोदूंगा जब तक होश हैं, फिर माँ की बारी होगी। क्या पता क़िस्मत में दोनों को इकट्टे चोदान लिखा हो! एक मेरे लन्ड पर, दुसरी मेरी जीभ पर। राज की दिली ख्वाइश थी की वो अपनी जिभ से चूत चाटे। खास कर कि मिसेज शर्मा की रिसती हुई गर्मा-गरम चूत , और उसमें राज मियाँ की प्यासी जीभ। सोने पे सुहागा तो तब हो जब बेटी अपने मुँह में उसका लन्ड हो। उसके शैतानी दिमाग़ में ऐसी कैई सम्भावनाएं जाग रही थीं!
24 शर्मा खानदान
डॉली अपने बिस्तर पर लेट कर मैगजीन पढ़ रही थी। उसकी अम्मी रजनी जी बाजार में शॉपिंग के लिये गयीं थी और भाई राज पड़ोस के घर में पूल की सफ़ाई के लिये गया था। डॉली अकेले भर पर बोर हो रही थी तो कभी टीवी देखती तो कभी स्टीरियो- सेट पर गाने सुनती। फिर उनसे भी उकता कर आखिर एक मैगजीन ले कर पढ़ने लगी थी। पर उसके जेहन में तो कुछ और ही कौन्ध रहा था। | डॉली को ताज्जुब हो रहा था राज आखिर इतन्नि देर कर क्या रहा है। पिछली बार जब उसने शर्मा परिवार के घर में इतना वक़्त बिताया था तो कह रहा था कि मकान मालकिन साहिबा उस पर डोरे डाल रही थीं। मुआ खुद ही टीना जी के सामने दुम हिला रहा होगा, डॉली से सोचा। वो अपने जुड़वाँ भाई को अच्छी तरह से पहचानती थी। दोनों हम – खयाल थे और एक जैसी ही पसंदें रखते थे, खासकर की सैक्स के विषय में। राज और डॉली के बीच तीन साल से सैक्स सम्बंध थे। तीन साल पहले एक रात डॉली जिंदगी में पहली बार चुदी थी – राज से। उस घड़ी से दोनों भाई- बहन एक दूसरे की सैक्स की भूख को बिन बताये भाँप लेते थे। इतना ही नहीं, राज और उसकी अम्मी के बीच भी बाकायदा सैक्स सम्बन्ध थे
डॉली के वालिद ने जब उनकी अम्मी को तलाक़ देकर छोड़ दिया था, तो उसके छह महीनों बाद ये क़िस्सा शुरू हुआ था। डॉली के अबू ने जब अपने से आधी उम्र की एक तवायफ़ के लिये उन्हें छोड़ दिया था, तो उनके परिवार पर जैसे कहर ही टूट पड़ा था। उनके पास अब अब कोई चार नहीं था। माँ ने बच्चों के और बच्चों ने माँ के सहारे जिन्दगी काटनी थी। और वक़्त के साथ उनके माली हालात सुधरने लगे थे। घर पर सबकी खुशियाँ भी वापस आने लगी थीं। रजनी जी एक खानदानी खातून थीं और बला की खूबसूरत भी। जन्नत की हूर जैसे गोरे लम्बे चेहरे पर दो हरी, बिल्ली जैसी हरी आँखें, सुनहरे लम्बे बाल। रजनी जी को बस एक कमी बड़ी खलती थी – सैक्स की, जिसका लुफ्त, उनके शौहर तलाक़ के दिन तक, बा – क़यदा उन्हें दिलाते रहे थे। तलाक़ के सदमे के बाद, अब दूसरी शादी की हिम्मत उनमें नहीं रही थी।
परेशान हो कर आखिर उहोंने अपने बेटे का ही सहारा लेकर अपनी इस उलझन को भी सुलझा लिया था।
सब कुछ अचानक नहीं हुआ था। रजनी जी कैई दिनों तक परेशान सी अपनी उलझन के हल के बारे में सोचती रहीं थीं। उनके दिल में बैठा शैतान उन्हें उकसा कर राज की तरफ़ इशारा करता था। ऊपर वाले के खौफ़ के मारे अपने ही बेटे के बारे में गुनाह भरे खयालों को दबाने की लाख कोशिशें करतीं। पर एक रोज देर रात जब राज दोस्तों के साथ पार्टी मनाकर नशे में धुत घर पर आया, तो वे खुद पर क़ाबू खो बैठीं। रजनी जी अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी अपने बेटे के बिस्तर के लिहाफ़ में तेट गयी थीं। शराब का नशा और गैर-कुदरती ब्रह्मचर्य – दोनों गुनाह की जड़ हैं। इनका नतीजा तो हम सब जानते हैं। रजनी जी अपने बेटे राज पर पिंजरे से छुटी शेरनी सी झपट पड़ी थीं। राज चौंका तो बहुत था पर उसने अम्मी की इस हरक़त का मुक़ाबला नहीं किया था। इतनी हसीन औरत अगार नंगी होकर आपके बिस्तर में कूद पड़े तो आप भी वही करते जो राज ने किया। उस रात राज ने बड़ी जिन्दादिली से अपनी अम्मी को चोदा।। | उस रात आखिरकार रजनी जी की लम्बी बेक़रारी का खात्मा हुआ था। राज के कमरे से आती कराहने की आवाजें इस बात का सबूत थीं। दोनों अपने जिस्मों के जुनून में इतना शोर कर रहे थे कि डॉली भी जाग उठी। मारे चिंता के जब लड़की दौड़ कर अपने भाई के कमरे पहुंची तो अन्दर के नजारे ने उसके होश उड़ा दिये थे। राज बिस्तर पर लेटा हुआ था और अम्मीजान उसके तने लन्ड पर अपनी चूत को गाड़े हुए घुड़सवार की तर फुदक रही थीं। महीनों से कैद किये हुए जिस्मानी जुनून को अपनी कोख के ला के साथ सरन्जाम दे रही थीं।
उस रोज़ तक डॉली सिर्फ अपने भाई के मर्दाना जिस्म पर मन-ही-मन फ़िदा थी। कैई दफ़ा उसके मोटे लम्बे लन्ड के खयाल में अपनी चूत को उंगलीयों से रगड़-रगड़ कर जार- जार कर चुकी थी। उस स्याह रात वो अपने भाई के उसी लाजवाब लन्ड को अपनी अम्मी की उछलती चूत में फचाक – फचाक चलता देख रही थी। डॉली की शुरुआती बौखलाहट जन्द ही जिस्मानी प्यास में तब्दील हो गयी। साथ ही उसे अपनी अम्मी से जरा सी जलन भी हो रही थी!
शबने के रूम से भागने से पहले राज ने अपनी बहन को दहलीज पर खड़ा देख लिया था। पर अपनी अम्मी के हुस्न के मजे लूटने में इतना मशगूल था कि कुछ बोल नहीं पाया था। डॉली अपने रूम जाकर बिस्तर पर लेट गयी थी और वहीं से अपनी मम्मी की दबी हुई चीखों को सुनती रही थी। उसके जेहन में वो जो तस्वीर देख रही थी उसमे उसका भाई अपने मजबूत लन्ड को अम्मी की झांटेदार चूत ठेल रहा था। अम्मिजान अपने महीनों के दबाये अर्मानों को अब सैलाब बनकर अपने बेटे के लन्ड पर चूत को फुदका – फुदका कर उडेल रही थी.म। डॉली की खयाली दुनिया में वो राज के बेडरूम में फ़र्श पर बैठी अम्मी और भाई की जानंघों के बीच मुंथ खोले घूर रही थी। अपना मुँह अम्मी की चूत के झोलों पर लगाकर लसलसाती चूत को चात रही थी। साथ ही उसके भाईइ का लन्ड चूत में ठेलता जा रहा था। यह सब उसके खयालों में हो रहा था पर उसके भाई के बेडरूम से आती आवाजें तो बिलकुल असलियत में थीं! अपने खयलों में डॉली ने अम्मी की चूत और भाई के लन्ड, दोनों के बराबर जोश से चाटा। अम्मी की चूत के टपकते रसों को भाई के दनदनाते लन्ड पर से लपक लपक कर जीभ से चाटती, होंठों पर फेराती और फिर साफ़ निगल जाती।

