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लुका छुपी

Update 13

 

और फिर सारे जानवरों के थिएटर देखने जाने लगे, परंतु वहां टिकट और प्रवेश द्वार पर खाचाखच भीड़ था। भीड़ इतना की वहां कुछ लोफर लफंगे किस्म के लोग पहले से ही मौजूद थे और औरतों और लड़कियों के पीछे नितम्बो को दबाना उनको तरह तरह से छेड़ छाड़ हो रही थी।

जब अखिलंद्र ने यह देखा तो समझ गया की यहां तो काफी मुश्किल है और कहने लगा की हम यहां नहीं जाते हैं क्योंकि भीड़ में जाना मुझे पसंद नहीं है।
इतने में वह बगल में घूम के देखता है तो सिर्फ रिमझिम की सास दिखती है, रिमझिम और सपना पहले ही उस भीड़ के बीचों बीच जाकर खड़े थे। मानो ऐसा लग रहा हो उनका किसी को सुध ही नहीं है, वो अपने में मगन इधर उधर देखे जा रहे थे , तभी दोनों कहीं ओझल हो गई और टिकट और प्रवेश द्वार पर अंधेरा और उजाले का समिश्रण दृश्य था , क्योंकि रात के समय जिधर बल्ब की लाइट जाति थी वहां उजाला था और जिधर रोशनी नहीं जा रही थी उधर घुप अंधेरा था।

अचानक अखिलेंद्र को लगा उसका लन्ड किसी ने हल्का सा सहलाते हुए उसका जायजा लिया, अखिलेंद्र अंधेरे वाले पोर्शन में खड़ा था इसलिए और काफी भीड़ भाड़ भी थी पीछे के तरफ इसका मतलब अगर कोई लड़की ने ऐसा हरकत किया है तो जाहिर सी बात है की भीड़ में खड़ी वह लड़की अखिलेंद्र के पीछे ही खड़ी है और उसके भी पीछे या अगल बगल से लोग और लड़के अपना लंड उसकी गांड़ में सटा कर मजे ले रहे होंगे। अखिलंद्र ने जैसे ही अंधेरे में पीछे नज़र घुमाने की कोशिश किया उस हाथ ने लंड सहलाना बंद कर हाथ हटाने लगा, तभी अखिलेंद्र सोचता है की शायद यह जो भी है लुका छुपी में ही मजा लेना चाहता है।
इसलिए अल्हिंद्रा ज्यों का त्यों आगे के तरफ देखते रहा और बगल में रिमझिम की सास थी जो काफी परेशान थी और वहां से निकलने की बात कर रही थी , हालांकि वो कोई खास आकर्षक नहीं थी लेकिन महिला थी और उसके पास भी हल्का उभार और नितम्ब तो था ही। और भीड़ के पास कोई लाज शर्म तो होती नहीं है, कहीं किसी ने औरत जान उन्हे भी किसी कोने से मसल ही दिया होगा।

इसी तरह अखिलन्द् के लंड से उस हाथ ने काफी देर तक खेला, तभी अखिलेंद्र ने झट से उस हाथ को पकड़ कर हाथ का जायेजा लेने की कोशिश करने लगा की वाकई में कोई लड़की है या कोई gandu पुरुष है जिन्हे गांड़ मरवाने और लंड सहलाने में मजा आता है।

लेकिन काफी मुलायम, कोमल और गुदेदार हाथ था , अखिलेंद्र को यकीन हो गया की यह लड़की ही है।
और ताज्जुब की बात यह थी की सपना और रिमझिम दोनो गायब हो गए थे और सहसा अखिलेंद्र को जोरदार झटका लगा जब उसके लिंग पर एक और हाथ बस हल्का सा छू कर सुपाड़े की अग्र भाग को मोटाई अपनी तर्जनी और अंगूठे की मदद से पकड़ हल्का सा दबा दिया।

इस हरकत ने तो अखिलेंद्र की दिमाग की बत्ती जला दी और तभी दोनों हाथ गायब हो गए।

और कुछ देर के बाद रिमझिम मुझे दिखाई देती है जो ठीक अपने सास के बगल में खड़ी थी और कुछ मिनटों के बाद सपना मुझे दिखाई देने लगी वो भी मेरे पीछे वाले पोर्शन में जहां लाइट काफी कम था और वो मुझसे काफी दूर थी और काफी ज्यादा परेशान थी जैसे किसी ने उसके साथ कुछ ज्यादा बदसलूकी कर दी हो। इस बात से अखिलेंद्र को पक्का यकीन हो गया ” की सपना जरूर किसी से मसवलवाने की कोसीस की होगी ,क्योंकि यहां किसी बात की इज्जत की खतरा भी नहीं है क्योंकि उसकी बेटी अपनी बेदाग छवि की काफी प्रेमी थी, एक तरह से यह अहंकार खास किस्म की छुपी रुस्तम रंडियों में पाया जाता है। और उसकी बेटी को यहां अपने इमेज की कोई परवाह नहीं थी इसलिए आज वह शायद वासना और जवानी की आग में खूब जलना चाहती हो, जैसे वो इधर से उधर भागी जा रही हो, जो उसके इशारों को पढ़ता उसी से हल्का रगड़ा रगड़ी करने को व्याकुल थी , लेकिन वो करे तो क्या करे उसका मन तो यह कर रहा था जैसे खुद नंगी हो जाए और भीड़ के बीच चली जाए और वहां मौजूद भेड़िए उसके टूटती बदन को और तोड़ मडोड़ दे।

वह इस वक्त कामाग्नि में जल रही थी , जिसका एक चमकीला भाव उसके चेहरे और नैन नक्श पे पड़ने लगा था। इस वक्त वो अखिलेंद्र से नजर मिलाने की स्थिति में भी नहीं थी वरना उसकी आंखे उसका भेद उसके बाबूजी से बयान कर देती।

अखिलेंद्र चुप चाप छुप के उसके हरकतों को देखने लगा और टिकट खरीदने के बहाने कहीं छुप कर अपनी बेटी की हरकतों को देखने लगा , वो भी महिला टिकट लाइन में ही खड़ी थी और वह लाइन काफी लंबी होने की वजह से वो मेरे पीछे वाले भाग जहां अंधेरा और काफी कम प्रकाश था वहा आकर खत्म हो रहा था।

महिला लाइन के इर्द गिर्द मर्द औरते भी खड़ी थी , तभी मैंने देखा एक साधारण सा दिखने वाला युवक, काला मोटा भैंसे की तरह बदन और चेहरा था उस युवक का, परंतु तगड़ा जान पड़ता था, और अखिलेंद्र की ठरकी आंखो ने उस युवक और सपना की जोड़ी मिलाया तो खूबसूरती में तो सपना का उस युवक की कोई तुलना ही नहीं थी, क्योंकि वह भैंसे की तरह काला गैंडा परंतु चेहरे पर एक मजबूती और हट्टा कट्टा 32 साल का युवक था।

लेकिन जब बदन से बदन की माप तौल किया तो उस काले सांड के साथ यह गोरी , गदरई और अपने हर अंग में भरपूर चोट और सहनशीलता लिए दिव्य कामुक गाय की जोड़ी जम रही थी। जैसे उसकी चूदाई पर ही सपना जैसी गदराई घोड़ी काबू में आ सकती है। परंतु जिससे सपना की शादी हो रही थी वह दिखने में तो खूबबसूरत और स्मार्ट था लेकिन उसमे वह कामशक्ति नहीं जो सपना की चूत को तृप्त कर सके।

तभी थोड़े देर बाद सपना उस युवक से हल्का नजदीकी बना ली, सपना इस बात से आश्वस्त थी की मैं उसे नहीं देख देख नहीं सकता क्योंकि वहां एक तो अंधेरा और दूसरा उसे लग रहा की मैं टिकट घर के मुख्य दरवाजे पर खड़ा हूं।

तभी वह युवक सपना के समीप आ गया जैसे देखने वाले को ऐसा लग रहा था जो महिला खड़ी है यानी की मेरी बेटी उसका वो हसबैंड हो और दोनो उस तरह सामान्य सा बर्ताव भी कर रहे थे इसलिए उनके तरफ किसी का ध्यान भी नहीं जा रहा था।

तभी सपना के बिल्कुल समीप आकर उसे दूध को मसल देता है जैसे किसी को पता न चला

और सपना उसका लन्ड नीचे से पकड़ कर आगे पीछे कर रही थी और अपना चहेरा सीधा कर के आमने सामने देखे जा रही थी , जिससे किसी को शक न हो और फिर वो युवक सपना के पीछे आकर उसे कमर से जकड़ लेता है और जोर जोर से उसके चूंचे दबा कर उसके गांड़ के पीछे से रगड़ रहा था और तभी एक अचानक प्रकाश उस तरफ आया और दोनों अलग अलग हो गए

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और फिर मैं खुद सपना के पास चला गया और बोला ” अरे बेटी , इधर आओ कहा थी तब से तुम्हे ढूंढ रहा था, इस पर सपना ने आंखे चुराते हुए कहा की मैं टिकट लेने का प्रयास कर रही थी महिला लाइन में , इस पर मन में अखिलेंद्र ने कहा ” टिकट या लंड ” ??

तभी रिमझिम के सास का शबर टूट जाता है और वो कहती है की मुझे नहीं देखना मुआ ये थिएटर वियेटर।। फौरन सब चलो यहां से । शायद किसी ने आंटी के गांड़ में उंगली डाल के सूंघ लिया था ।

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