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लुका छुपी

Update 9

फिर सपना अपने कमरे में चली जाती है, तभी गांजे के नसे में मस्त होकर मस्ती में मस्तराम बने अखिलेंद्र सड़क के सारी महिलाओं, लड़कियों को घूरते और लंड खड़े किए हुए घर पहुंचते हैं। घर पहुंचते ही छत पे बने कमरे में जाते क्रम में उसे बाथरूम के बगल में रस्सी टंगी हुई थी जहां रिमझिम और सपना अपने गीली अंत: वस्त्र सूखने के लगी डालती है। उसपे नज़र जाती है।
उसपे नज़र जाते ही उसके लंड में फिर से उफान आना चालू हो जाता है और गरम होने लगता है।

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फिर अचानक उसे भान आता है की छी छी मैं क्या सोच रहा हूं , कही इसमें से मेरी बेटी की ब्रा पैंटी हो शायद । क्योंकि अखिलेंद्र को यह ज्ञात नहीं था की कौन सी ब्रा पैंटी उसकी बेटी की है और कौन सी रिमझिम की।

अंदर आकर देखा तो सपना रिमझिम के साथ चूत चटवा कर बेसुध सोई पड़ी थी।

कुछ इस तरह
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सपना का कुर्ता पीछे से थोड़ा उठ गया था और सलवार के ऊपर से उसके मस्त फूले हुए दोनो गांड़ और उसके दरारों में बने घाटी स्पष्ट दिख रहे थे। इतना देखते ही अखिलेंद्र मानो सब कुछ भूल के भूखे भेड़िए की तरह अपनी लाडली बिटिया की गांड़ देख कर लंड मसलते हुए मन में धीरे से कहा की “उफ्फ क्या गांड़ है साली”

फिर उसने आव देखा न ताव और और बाहर टंगे ब्रा और पैंटी को उतार लाता है और अपने बाहर बने बाथरूम में ले जाकर उसे खूब सूंघता है , कभी चाटता है और उसे अपने लंड में फंसा कर अपना लंड हिलाने लगता है।

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गांजे के नशे में चूर उसे यह भी ज्ञात नहीं की जिस ब्रा और पैंटी के साथ वो कामुक और घिनौना खेल खेल रहा था वो कहीं उसकी बेटी की भी हो सकती थी, लेकिन वो इस स्थिति में नहीं था की इतना सोच पाए और अपनी दिन दुनिया से बेखबर अपनी मस्ती में अपना लंड हिलाए जा रहा था , लेकिन आज पता न क्यों उसका पानी निकलने का नाम ही नहीं ले रहा था, करीब 20 मिनट तक एक पागल की भांति उन ब्रा पैंटी के साथ खेलता रहा। उसे किसी बात का डर भय नहीं था की कोई उसे इस दशा में देख लेगा , आज मानो वह कुछ कर गुजर जाना चाहता था फिर उसे कुछ होश आया तो उसे लगा की कोई उसे देख रहा है।

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इतने में वो बुरी तरह सकपका गया और तुरंत अपने को संभाल के दबे पांव बाहर निकला और ब्रा और पैंटी को उसी जगह रख दिया जहां से उठाया था।

फिर थोड़ा लंबी सांस लेते हुए जैसे पीछे के तरफ घूमता है वहां दरवाजे पर रिमझिम खड़ी उसे एक कुटिल मुस्कान दिए देखे जा रही थी।

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अखिलेंद्र को मानो काटो तो खून नहीं , वो करे तो क्या करे उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। इतने में रिमझिम उसे देखते हुए अपने मोबाइल निकाल किसी से बात करने लगी , अखिलेंद्र को अजीब लगा क्योंकि अचानक से न किसी का कॉल आया और ना ही कोई रिंग टोन बजा ।

रिमझिम फोन पे ” हा बोलो, खाना सामने रखा और तुम अभी तक भूखे हो।

कल रात को 1 बजे अंधेरे में कमरे में आने से कुछ बोलना नहीं है तो भूख मिटा दूंगी।

अखिलेंद्र को कुछ समझ में नहीं आ रहा और फिर वहां से मुंह लटकाते हुए जाने लगा , तभी रिमझिम की आवाज आती है।

ओ भड़वे , कहां जा रहा मादरचोद , कल रात को 1 बजे रात में अंधेरे में कमरे में चुप चाप आ के खाना खा लेना” कान पे फोन लगाए हुए और अखिलेंद्र के नजरों में देखते हुए जैसे किसी और को बोल रही थी लेकिन वो सीधे सीधे साफ तौर पर अखिलेंद्र को न बोल कर इशारों में बात कर रही थी।

इतना कहते हुए वो फोन नीचे रख बिलकुल रंडियों जैसी हरकत करते हुए एक उत्तेजित लुक देती है

इस तरह
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अखिलेंद्र पूरा माजरा समझ जाता है की फोन पर बात करने के बहाने वो परोक्ष तौर पे मुझे ही बोल रही थी। अखिलेंद्र का सारा वजूद हिल जाता है।
एक तो वो गांव में शिक्षक होते हैं और सभी प्रतिष्ठा की नजर से उसे देखते हैं और जीवन में पहली बार उससे किसी ने बदतमीजी से बात की है।

क्रोध की अग्नि में अखिलेंद्र की शरीर की सारी नसे तन जाती है लेकिन यह सोच वह खुश हो जाति है की कल रात को उस रण्डी ने बुलाया है उसकी चूत की भोसड़ा बना की उसकी मैया चोद दूंगा। अब उसकी खैर नहीं। मैं जितना भोला और तहजीब रखता हू उससे ज्यादा मैं एक हरामी भी हूं।

और जा के अपने बरामदे में सो जाता है।

इधर सपना का कल आखिरी पेपर था, जिसकी वो तैयारी कर रही थी, कल के परीक्षा के बाद और दो दिन रुक के घर चले जाना था।
लेकिन इस बात की खुशी है की वापस इसी शहर में दुल्हन बन के आना है, क्योंकि लड़के का घर उसी शहर में था जहां सपना अभी पेपर देने आई थी।

वह इसी ख्यालों में खोए रहती है तब तक उसके मोबाइल के व्हाट्स ऐप पर एक मैसेज आता है ।
वह चेक करती है तो रिमझिम का मेसेज आता है।
और उसका मैसेज पढ़ के सपना फिर विचलित हो उठती है और यह फैसला नहीं कर पाती है की अब वो क्या करें, अपने दिल की सुने या अपनी जमीर , अपनी आत्मा की सुने।

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