लुका छुपी
Update 7
अगले दिन सुबह दोनो में से पहले अखिलेंद्र उठ गए थे और बाहर वाले बाथरूम में जाकर फारिग होकर बाहर चले गए अपने और अपनी बेटी के लिए कुछ नाश्ता वगैरा लाने।
इधर सपना भी उठ चुकी थी और जैसे ही उसे कल की घटनाओं का भान हुआ वो काफी मायूस और पछतावे की ग्लानि भाव में आ गई थी, कुछ देर बिस्तर में पड़े रहने के बाद उठी, उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी की वो अपने बाबूजी का सामना करें। परंतु काफी देर से उसे ज्ञात हुआ की उसके डैडी घर पे नहीं है कहीं बाहर गए हुए है, तब झट से उठ के वो बाहर के तरफ निकली और घर में उसके डैडी के नहीं रहने की वजह से बिना दुपट्टा के ही बाहर का छत के कैंपस में खड़ी हो गई और रिमझिम के घर के सामने देखने लगी , अपने कपड़े को लेकर वह आश्वस्त थी क्योंकि रिमझिम के अलावे और कोई नहीं था वहां
तभी रिमझिम अपने कमरे से बाहर झांक के देखा तो सपना की जवानी का एहसास हुआ और वह सोचने लगी कि यह लड़की कितनी कामुक है , हो न हो इसकी जवानी एक तगड़ा लन्ड मांग रही है, कुंवारी लड़कियों में भी अगर कामभावना जागृत हो जाती है तब उनके बदन में एक कशीस झलकने लगती है जो कि सपना के बदन में दिखाई देने लगा था।
रिमझिम शादी से पहले एक बहुत ही शरीफ सीधी सादी लड़की थी , उसका आचरण बिलकुल सभ्य लड़कियों के तरह था सपना की तरह। लेकिन शादी के बाद दो महीने तक उसके पति द्वारा मसल के छोड़ जाने के बाद उसके सोए हुए काम का जगा चुका था। तब से वह काफी बैचेन और खोई खोई रहने लगी थी, और अपने तनहाई का साथी उसका मोबाइल ही थी जिसपे वो न चाहते हुए भी ऐसे कई कंटेंट देख लेती थी जिससे की उसके काम भाव में और आग लग जाती थी।
मोबाइल पर ही काफी समय गुजारा करती थी और ऐसा असंभव है की incest की सामग्री उसे न मिले , अक्सर yutube पर उसके होम स्क्रीन पर ससुर बहु , मां बेटा , भाई बहन की सेक्स की कहानियां उसे मिलती थी , तब से रिमझिम मानो पूरी तरह बहक के बिगड़ चुकी थी और मन ही मन अपने कल्पना में ऐसे ख्याल कर के खुद को गाजर मूली , बैगैन से शांत किया करती थी।
उसके घर में ससुर के अलाव कोई मरद नहीं था , इस कारण से कभी कभी ज्यादा कामातुर होकर और मोबाइल की इनसेस्ट वीडियो और कहानियों के प्रभाव से वो अपनी जवानी का झलक अपने ससुर को उकसाने के लिए दिखा चुकी थी परंतु उसके ससुर एक ठंडे और मंदबुद्धि के व्यक्ति थे तो वहां भी रिमझिम की दाल नहीं गली और अपने किस्मत को कोस कर खुद को समझा चुकी थी। मतलब रिमझिम की मनोस्थिति ऐसी हो गई थी की उसे incest की फीलिंग उसे काफी उत्तेजित करती और खास कर बाप बेटी का रिश्ता उसके लिए काम भाव में आग लगा देती थी।
वह बाहर खड़ी सपना को देखने लगी, उसके घर में बने खिड़कियों पर कांच का बना ग्लास था जिसमे बाहर के नजारा आराम से देखा जा सकता था परंतु बाहर वाले व्यक्ति अंदर का नजारा नहीं देख सकता था जब तक की घर में लाइट न जले। तो इसी तरह वो काफी देर तक सपना के जवानी का आकलन करने लगी और उसके मन में एक शैतानी भाव जगने लगा और सोचने लगी कि क्यों न कुछ खेल करूं इन दोनों बाप बेटी के साथ । और दोनो के अंदर एक दूसरे के प्रति काम भावना जगा कर लुका छुपी में एक दूसरे को तृप्त कर दूं।
कुछ इस तरह रिमझिम अपने दिमाग में ब्याभीचार सोचते हुए प्लानिंग सेट करने लगी
और बाहर निकल के सपना का हाल चाल लिया तभी सपना थोड़ा झेंपते हुए जवाब देती है और अपने कमरे के अंदर दुपट्टा लाने जाति है तब तक रिमझिम उसे रोक लेती है और कहती है , चलो मेरे कमरे ने सुबह की चाय पिलाती हूं तो वह कहती है दुपट्टा तो ले लेने दो कहीं पापा तब तक आ गए तो अच्छा नहीं लगेगा , हमलोग अपने बाबूजी के सामने बिना दुपट्टा के नहीं रहते ।
तब तक सपना हंसते इठलाती इसके पास आती है और उसके दोनो आंखो की गहराई में झांक के देखती है
और उसके कानों में आ के फुसफुसा कर बोली की अब यह दूध की टंकी भर चुका है अब इसे न दिखाओगे तो कब दिखाओगे और फिर मजाकिया अंदाज में बात को टालते हुए उसका हाथ पकड़ खींचते हुए अपने कमरे में लेते जाती है, सपना भी उसके इस मजाक से थोड़ा मुस्करा उठती है और उसके साथ उसके कमरे में वैसे ही चली जाती है ।
अंदर कमरे में ले जाकर रिमझिम उसके लिए चाय लेकर आती है और फिर खूब सारी बाते करती है। लड़कियों का तो अपलोगो को पता होगा की बातें कभी खत्म नहीं होती और एक दूसरे के बारे में सब चीज़ों से अवगत हो जाती है।
अब सपना को रिमझिम के साथ काफी रिलैक्स फील होने लगता है और उसे अपना दोस्त समझने लगती है।
फिर सपना कहती है की मैं चलती हूं ,मुझे कल के पेपर की तैयारी भी करनी है ।
तभी रिमझिम कहती है की “अरे सपना तुम्हें तो पता है मैं भी PG कर रही हू तो तुम एक काम क्यों न करती , तुम दोपहर में यहीं आ जाओ और यही बैठ के पढ़ेंगे और मैं तुम्हारी मदद भी कर दूंगी।
ये बात सपना को भी पसंद आती है और कहती है ठीक है।
रिमझिम के कमरे में एक खिड़की थी जो बाहर के तरफ खुलती थी और खिड़की के बाहर एक गली जैसी रोड थी। जिसमे अक्सर लोग आया जाया करते और गली के एक कोने में अडोस पड़ोस के लोग पेशाब भी करते थे । छोटे शहरों में ऐसा ही होता है , गली कूचों में ही लोग बाग मुतते हैं।
उसी खिड़की के सहारे एक टेबल और कुर्सी थी जिसपे कुछ किताबे वगैरा रखी हुई थी। बस नाम के लिए किताबे और कुछ पढ़ाई की सामग्री रखी हुई थी की बहु रिमझिम PG कर रही है । परंतु वास्तव में बहु रिमझिम दिन भर चूदाई की कहानियों में ही खोई रहती थी।
इतने में बाहर कुछ आवाज आई जो सपना के डैडी थे। इसपर सपना जल्दी से अपने कमरे के तरफ भागी क्योंकि उसने दुपट्टा नहीं लिया था और ऐसी बाते बदतमीजी कहलाती थी। इतने में दोनो आमने सामने आ गए
और जैसे अखिलेंद्र सपना के सामने आए और अपनी बेटी को इस हालात में देखे तो फिर एक बार करेंट लगा । दरअसल घर में कभी भी सपना अपने डैडी के आमने बिलकुल छुप छुपा के डरी सहमी रहती थी क्योंकि वहां का ऐसा ही क्लचर है।
इसलिए अखिलेंद्र को कभी पता न लगा की उनकी बेटी इतनी बड़ी हो गई है। लेकिन यहां दोनो बाप बेटी के अकेले रहने से कई ऐसी घटनाएं होते जा रही हैं जिससे की एक नर और मादा की मन स्थिति को मजबूती मिल रही थी ।
अचानक अखिलेंद्र के सामने आ जाने के पश्चात सपना बिलकुल कुछ करने , कुछ सोचने के स्थिति में न रह गई थी , और क्या और कैसा रिएक्शन दे यह भी समझ न पाई, क्यूंकि जब वहां उन दोनो के अलावा कोई तीसरा नहीं था और अखिलेंद्र बाहर से आए हैं तो बिना कुछ बोले अंदर चले जाना भी कुछ अजीब सा हरकत हो जाता । अंत में सपना अपने डैडी के नजरो से नजर मिलाती है और रात वाली घटना तुरंत उसके मन में डोलने लगते हैं, नजर मिलने के क्रम में इसका असर उसके भाव भंगिमा में आने लगते हैं और बिना कुछ बोले वो कुछ कुछ नजरो से बोलती हुई अंदर चली गई।
अखिलेंद्र को सपना का यह बर्ताव बिल्कुल समझ से परे था। उसके लिए यह बाउंसर था।
फिर बात को इग्नोर करते हुए वो सपना के लिए नाश्ता और मिठाइयां लेकर आता है । और सपना को अपने पास बुला कर मिठाई देते हुए उसकी शादी की बात पक्की हो जाने की खुशखबरी देता है।
यह सुन सपना भी काफी खुश होती है क्योंकि सपना के लिए जिस लड़के की बात चलाई जा रही थी उसे सपना भी पसंद करती थी और मन ही मन उसकी चाह थी की शादी इसी लड़के के साथ हो ।
दोनो बाप बेटी खुश हो जाते है और अखिलेंद्र दुलार से अपनी बिटिया के सर पर हाथ फेर देता है।
इधर घर से अखिलेंद्र की पत्नी माला फोन करती है और कहती है “अजी सुनते हैं, लड़के वाले अगले महीने ही शादी करने को जिद्द किए बैठे हैं क्योंकि उनको जल्द से जल्द अप्रैल के पहले ही शादी करनी है।
इस पर अखिलेंद्र भी सोच में पड़ जाता है और सोचता है की बेटी की शादी की तैयारी इतनी जल्दी कैसे होगी, खैर शादी के लिए पैसे तो उसने जमा कर के रखे थे बस शादी का इंतजाम वगैरा की चिंता थी।
अच्छा ठीक है , जैसा होगा देख लेंगे आज मैं समधी से बात करता हूं ” इतना कह कर अखिलेंद्र फोन रख देते हैं।
इधर सपना अपने दिमाग से सारे फालतू बातों को हटाकर पढ़ाई में ध्यान लगाती है और पढ़ने बैठ जाती है।
कुछ दिनों तक यूं ही चलता रहा, सपना और अखिलेंद्र एक आदर्श पिता पुत्री की तरह बिलकुल घर के माहौल के जैसा एक दूसरे से ब्यवाहा कर रहे थे और सब कुछ बिलकुल सामान्य था। परंतु उधर रिमझिम दोनों बाप बेटी में अपनी छीछोरी हरकतों और अपने कामप्रभाव के नाकाम आक्रमण करने लगी लेकिन इन दिनों अखिलेंद्र और सपना दोनो मानो सतयुगी बाप बेटी के शुद्ध रिश्ते में थे । वैसे तो ये पहले से ही पवित्र हैं बस ये अपने भीतर की एक खानदानी जिन की वजह से कामपिपासा की प्रबलता और शहर के माहौल में अकेलेपन और आजकल के न्यु दुनिया के प्रभाव में हल्का सा फिसल गए थे। काम शास्त्र कहता है की तन्हाई और अकेलेपन में अपनी मां , बहन और पुत्री के साथ भी नहीं रहना चाहिए अन्यथा काम का वेग कुछ भी करवा सकता है।
उसका आवेग काफी तीव्र होती है और यह व्यक्ति का सबसे बड़ा शत्रु है जो कभी नहीं अघाती है और इसकी संतुष्टि भी कभी नहीं होती है, ये कभी भी अपने जाल में फंसाकर आपको घुटने टेकने पर मजबूर कर देता है।
करीब एक सप्ताह बीतने के बाद दोपहर का समय होता है और सपना को नींद लग गई और वो सो रही थी। और अखिलेंद्र को काफी दिनो के बाद एक गांजे वाली सिगरेट फूकने की इच्छा हुई। और वो बाहर चला गया। और एक पार्क में जाकर बैठ गया।
इधर सपना जग गई और जैसे ही बाहर निकल के अपने बाबूजी को खोजने के उद्देश्य से गई , बाहर रिमझिम बैठ कर अपना मोबाइल चला रही थी और मोबाइल में से अजीब सी आवाजें निकल रही थी , जैसे रिमझिम कोई चूदाई की वीडियो देख रही हो । सपना के कानों में जैसे ही कामुक आवाजे गई , सपना के कान खड़े हो गए और तभी वीडियो में से आवाज आया “” आअह्ह्ह उफफ् आअह्ह्ह्ह आउच्च्च!! Ohhhh जी चोद डालो अपनी बहु को आज।”
सपना की तो मानो काटो तो खून नहीं । उसे कल के पेपर की पढ़ाई के लिए जाना था परंतु वो भरी दोपहर में आज पिघलने लगी और फिर से उसके मन में काम का आवेग जगने लगा। और फिर ध्यान से वीडियो की आवाजे सुनने लगी। इधर रिमझिम अपने खिड़की के बाहर सब दृश्यों को बड़े आराम से देख सकती थी क्योंकि मैंने पहले ही बताया था आपको की उसकी खड़की में कुछ ऐसा ग्लास लगा था जिससे की अंदर का व्यक्ति बाहर के दृश्यों को देख सकता परंतु बाहर का व्यक्ति अंदर नहीं देख सकता , जब तक की भीतर लाइट न जल रहा हो मतलब ज्यादा प्रकाश हो।
आज रिमझिम अपने चाल में सफल होती दिख रही थी , रिमझिम तुरंत मोबाइल लेकर बाहर निकली और वीडियो को बिना बंद किए वह सपना के पास आ गई। और आंख मारते हुए कहती है “क्यों सपना रानी आज कैसे अकेले खोई हुई हो , और किसे ढूंढ रही हो” इस पर सपना ने कहा की बस ऐसे ही खड़ी थी ,और तुम ये कैसी वीडियो देख रहे हो जिसमे से ऐसी आवाजे आ रही है। तब रिमझिम कहती है “चलो मेरे कमरे में तुम्हे एक चीज दिखाती हूं” सपना को भी उत्सुकता हुई की क्या ऐसी चीज दिखाने को कह रही है और उसके साथ भीतर कमरे में चली गई ।
जैसा की मैने पहले ही बताया था रिमझिम ऊपर के कमरे में रहती थी और उसके कमरे से एक खिड़की बाहर एक गली वाली सड़क के तरफ खुलता था जो काफी सुनसान होता था और अक्सर कुछ मोहल्ले के लड़के , मरद वहां आकर एक जगह कोने में मुतते थे।
तभी रिमझिम उस खिड़की के पास जाकर सपना को एक कुर्सी दे दी और खुद भी बैठ गई और कहने लगी की सपना तुमने कभी मोबाइल पर गंदी फोटो और फिल्मे देखी हैं ?
इस पर सपना ने कहा ” नहीं, मैं ऐसी कुछ भी नहीं देखती” और बात भी सही है , सपना ने आज तक ऐसी वैसी फिल्मे कभी नहीं देखी और न ही इन चीजों के बारे कोई खास जानकारी थी । बस वो इतना जानती थी की कोई एक प्रकार का ब्लू फिल्म होता है जिसे शादी शुदा कपल देखते हैं और उन ब्लू फिल्मों में बिदेसी कलाकार कामसूत्र की तरह सेक्स क्रिया करते हैं। यह एक बहुत ही सामान्य सी बात जो सपना जानती थी और वो भी अपने सहेलियों के माध्यम से इतना कुछ भी जान पाई थी।
लेकिन वो इन दिनों इंटरनेट और मोबाइल पे हुई एक व्यभिचार की एक नवीन क्रांति के बारे में बिल्कुल अवगत नहीं थी। जिसमे अच्छे अच्छे लोग फिसल कर डूब गए हैं। अब पोर्न तथा ब्लू फिल्मे अब विदेशी कलाकार तक सीमित नहीं रह गए। अब तो प्राय: देश का हर व्यक्ति चाहे वो बालक हो, युवा हो, बूढ़ा हो, लड़की हो , औरत हो, आंटी हो , कोई प्रौढ़ महिला हो, गांव का हो या शहर का हो , धनी वर्ग हो या गरीब वर्ग हो, इनके द्वारा हर तरह के कंटेंट आजकल रोज अपलोड हो रहे हैं।
और इन वीडियो में सबसे ज्यादा कसक यह होती है की कुछ लोग स्वेच्छा से करते हैं , कुछ लोग छुप छुपा के हिडेन कैमरा से खुद की ही बीबी हो या घर की कोई अन्य महिला हो उनकी अश्लील वीडियो बनाकर अपलोड करते हैं क्योंकि यह वासना का एक चरम बिंदु होता है जहां व्यक्ति अपने सामने अपनी बीबी, अपनी बहन और अपनी मां के बारे किसी के मुख से अशलील शब्द सुने या उनकी फोटो दिखा कर इस वर्चुअल (मोबाइल) की दुनिया में किसी अन्य व्यक्ति के लिंग से संभोग और जलील करने की हवस का घिनौना परिकल्पना करने लगता है।
हां यह एक कड़वा सत्य है की हमारे सभ्य समाज में हमने जाने अनजाने में सेक्स और काम को इतना दबाकर रखा दूसरे तरफ हर जगह काम और सेक्स को ही बेचते रहें । अगर आपको कार खरीदना हो , शैंपू खरीदना हो , साबुन खरीदना या किसी भी तरह का कोई सामान खरीदने जाते हो तो आपको उस समान की गुणवता नहीं बल्कि उस समान का विज्ञापन करने वाली अदाकारा को दिखाने में ज्यादा फोकस होता है।
इसी तरह जाने अनजाने में हम एक तरफ तो खुद को सभ्य,संस्कारी बनने और अपने बच्चों को ठीक वैसा ही बनाने का प्रयत्न करते है वहीं दूसरी तरफ हमारे सारे कृत्यों के पृष्टभूमि में काम , सेक्स, लिप्सा, भोग और व्यभिचार रहता है।
जिसक परिणाम है पोर्न और taboo में incest अपना पैर काफी अच्छे से पसार रहा है। इंसान की एक फितरत होती है की उसे जिस काम को रोकने को कहा जाता है, वह उसी काम को करने में रस लेता है।
यह इंसान की बचपन की फितरत होती है की जिस काम को को करने से रोका जाता है , जिस वृति को दबाया जाता है उसका आवेग अवचेतन मन में बढ़ता चला जाता है और एक दिन विस्फोट हो जाता है।
खैर हमने ज्ञान बहुत चोद लिया अब कहानी पर आते हैं।
रिमझिम बिलकुल पास आ गई अपनी कुर्सी को उसके समीप ला कर उससे सट गई , इस वक्त रिमझिम का सारा बदन काफी गरम हो चुका था क्योंकि उसके कई बार के प्रयास के बाद आज सपना उसके झांसे में आई है और रिमझिम अतृप्त नवबिबाहिता थी जो इन दोनो बाप बेटी के रिश्ते में काम भोग के एक शैतानी बिज बोने का कमाना रखी हुई थी। जब से अखिलेंद्र और सपना उसके घर में आए थे तब से इन दोनो बाप बेटी के सेक्स करते हुए सोच सोच काफी बार हस्त मैथुन कर के खुद को शांत करती थी क्योंकि रिमझिम वासना के उसी बिंदु पर पहुंच गई थी जहां खुद सेक्स न कर किसी और के जीवन में काम की आग लगा कर संतुष्टि को पति थी। यही मुख्य कारण था की रिमझिम अखिलेंद्र और सपना को रिझा कर अपने जाल में फसाना चाहती थी।
रिमझिम ने एक वीडियो चला दिया और चुप रही जिसमे एक अधेड़ बूढ़ा अपने नव ब्याहता बहु के साथ व्याभिचार कर रहा था और उसकी बहू भी उसका बराबर साथ दे रही थी।
बूढ़ा ससुर की कद काठी रंग कुछ ऐसा था की मानो सपना के बाबूजी अखिलेंद्र ही हो। रिमझिम ने जान बुझ कर वही वीडियो दिखा रही थी और तभी अपने एक हाथ से सपना का हाथ पकड़ लिया।







