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लुका छुपी

Update 4

तभी अचानक सोनू ने अपना लन्ड बाहर निकाल लिया

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और फिर उसी लड़की की एक नंगी फोटो देखने लगा जिसमे वह लड़की बिलकुल हुबहु शेखर की सगी बहन और खुद की सगी चचेरी बहन की तरह दिखने में थी।
और सोनू ने शेखर से कहा की यार शेखर मुझे यह लड़की मस्त माल लगती है। इतना कह कर शेखर के लन्ड को भी दबा दिया और शेखर का शरीर एकदम से रोमांचित हो गया था, शेखर दिखने में काफी आकर्षक और चर्बीदार गोरा चिकना बच्चा था और एक बेहतरीन मूसल लन्ड का अधिपति था। उसने उस तस्वीर को देखा तो उसे एक पल के लिए काफी ऑकवार्ड फील हुआ की यह लड़की तो मानो सपना दीदी ही हैं परन्तु दूसरे ही पल उसके दिमाग की नसे तन जाती है मुंह की मुद्रा गंभीर हो जाती है , अपनी सगी बड़ी बहन जो आजतक सामान्य सी लड़की की तरह थी , कामुक दृष्टि में मानो सपना उसकी सपनो की रानी हो , जैसे उसे छोड़ दुनिया में अन्य सारी लड़कियां फिकी हो। और सोनू जो उसका चचेरा भाई है शायद जरूर यह इशारों में सपना दीदी के बारे में बताना चाह रहा है और कैसे उसके लिए माल शब्द का उपयोग कर रहा है । क्योंकी उसके घर में सगी हो या चचेरी सभी खास भाई बहन जैसे ही थे।

और फिर सोनू के नजरो से नजर मिलाते हुए दोनो एक दूसरे को देखने लगे, दोनो अपने मन में यह जानते हुए की यह लड़की बिलकुल सपना दीदी की तरह है यहां तक कि उसके चूंचे सीना रंग और नाक नक्श बिलकुल सपना की थी। एक दूसरे के सामने प्रकट नहीं कर रहे थे । बस एक दूसरे की आंखो में झांक रहे थे। और एक दूसरे की आंखों में वासना का एक नंगा सच देख रहे थे। ये दोनों एक दूसरे के काफी हमराज और इनमे जिगरी यारी था

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तभी सहसा शेखर को बुरा लगा और गुस्से में वहा से उठा और कुछ बोलने वाला ही था, तभी किसी के आने की आवाज आई और दोनो झट से होश में आते हुए खड़े हो गए और सामान्य स्थिति में आ गए। एक बूढ़ी औरत “मनोरमा बूआ” अपने सर पर कुछ लादे अपनी एकाध बकरियों को ले जा रही थी और खंडहर के पास रूक कर अपने सर से बोझ नीचे उतार के रखी और इधर उधर बगले झांकने लगी , जैसे आश्वस्त कर रही हो कोई है तो नहीं, सोनू एवम शेखर एकदम शांत पड़े रहे है और जहां पर वह औरत खड़ी थी उसके ठीक पीछे की दीवाल से सटे ये दोनो खड़े थे। तभी मनोरमा जिसे सोनू और शेखर काफी अच्छे से जानते हैं क्योंकि मनोरमा बूआ गांव की ही थी और जवानी में विधवा होकर अपने मायके में ही रहती है, यूं तो ये काफी शरीफ है लेकिन जैसे जैसे उसकी उम्र बढ़ रही है उसकी दबी हुई ठरक और वासना उभर रही है , मनोरमा अक्सर सोनू और शेखर के घर आते जाते रहती थी। इसलिए सोनू और शेखर कुछ भयभीत भी थे ।

तभी मनोरमा ने अपनी साड़ी को ऊपर खींचा और कमर से ऊपर तक ले गई,

मनोरमा का कुछ यूं दृश्य था।

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इतनी मदमस्त गांड़ को देखकर तो सोनू और शेखर को मानो मदहोश होने लगें और वहा से जाने के बजाय दोनो और छुप गए और ऐसी जगह पर खुद को व्यवस्थित किया जिससे की सोनू और शेखर एक साथ एक खंबे के सहारे टिक गए और मनोरमा बूआ की गांड़ देखते हुए सोनू ने शेखर का विशाल फनफनाता नाग पकड़ के मसल डाला इस पर शेखर चाह कर भी कुछ न बोला और तभी सोनू ने शेखर के कान में धीरे से फुसफुसाते हुए कहा “मम्मी की भी बिल्कुल ऐसी गांड़ है” uffffffffffffff

इतना बोलते ही इधर शेखर के लन्ड ने सब्र खोते हुए पिचकारी से pchhhhhhhh pchhhh वीर्य का धार छोड़ने लगा। और मुंह से ohhhhhhh aaaahhhhhh कि आवाजे निकलते हुए पानी छोड़ दिया।

इधर सपना का पेपर पूरा हो गया, दिन के करीब 12 बज रहे थे फरवरी और मार्च का महीना की दोपहर की क्या कसक होती है , आप लोग समझ रहे होंगे ।

जब सपना का पेपर चल रहा था , उतने देर तक अखिलेंद्र पांडे सुबह से शहर में बने एक पार्क में बैठ कर टाइम पास कर रहें था । इस बीच उसे अनायास ही एक अजीब सा ठरक फील हो रहा था । क्योंकि शहर में खूबसूरत लड़कियों औरतों को देख कर उसमे काम का अविर्भाव उत्पन्न होने लगा था। जब तक वह अपनी बेटी के साथ रहता बिलकुल अनुशासित और आदर्श संस्कृतिवान पिता की तरह व्यवहार करता था परंतु जैसे ही सपना पेपर देने अंदर चली गई तब इसके अंदर की ठरकी भाव उसके आंखों में तैरने लगे और पार्क में बैठ कर आते जाते शहर की लड़कियों और औरतों को ताड़ने लगा, इसी बीच पार्क के कोने में कुछ लड़के मोबाइल में देख कर काफी मजाक मस्ती कर रहे थे, अखिलेंद्र गांव में एक शिक्षक थे इसलिए उन्हें जिज्ञासा हुई की आखिर लड़के कैसी ठिठोली कर रहे हैं, उन्होंने टहल लगाते हुए उनके पास जा के गुजरा तो देखा कि लड़के मोबाइल पर लड़कियों की नग्न तस्वीर तथा ब्लू फिल्म देख रहे थे

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अखिलेंद्र ने भी अपने एक साथी के साथ कई दफा ऐसी फिल्में मोबाइल पर देखी थी, यही मूल कारण था की वह मल्टीमीडिया मोबाइल खरीदने का इच्छुक था , तभी उसे ख्याल आया क्यों न किसी मोबाइल दुकान पे जाकर पता करू, तभी सामने एक मोबाइल स्टोर का पता चला और अखिलेंद्र वहां गए तो काउंटर पर एक जवान खूबसूरत लड़की सेल्स गर्ल थी उन्होंने वहां जाकर नया मल्टीमीडिया मोबाइल खरीदने की इच्छा जाहिर की , सेल्स गर्ल ने अखिलेंद्र को देखा की गांव का एक अक्खड़ और दमदार मर्द सामने खड़ा था , अखिलेंद्र अपनी उमर से 10 साल छोटे लगते थे और बदन एकदम फिट था,

अखिलेंद्र का गठीला शरीर

शहर की लड़कियों को ये पता होता है गांव के मरद काफी तगड़े होते हैं और चूदाई में दम निकाल देते हैं, शहर के लडको के मुकाबले गांव के बूढ़े मर्द ज्यादा अच्छे होते हैं यह सेल्स गर्ल समझती थी , इसलिए न चाहते हुए भी वह चुड़क्कड़ टाइप की सेल्स गर्ल अखिलेंद पंडित को वासना की नजर से एक बार अखिलेंद् की आंखो में झांक के देखा इस तरह देखने से अखिलंद्र की तो जैसे आंखे चौड़ी हो गई, उसने सोचा भी नहीं था की बूढ़े हो रहे मुझ जैसे आदमी को कोई जवान खूबसूरत लड़की क्यों देखेगी जबकि मैं उसके बाप के उमर का हूं, वह मन ही मन सोचने लगा की क्या आजकल की लड़किया इतनी एडवांस हो गई हैं क्योंकि गांव की लड़कियां तो नज़रे मिलाना तो दूर ढंग से बात भी नहीं कर पाती है। इस सेल्स गर्ल की उमर ही कितनी है मेरी बेटी सपना के उमर की ही तो है।

नॉटी सेल्स गर्ल
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फिर सेल्स गर्ल ने कुछ मोबाइल निकाल के दिखाना चालू किया , इसी तरह काफी देर मोबाइल देखते रहने के क्रम में अखिलेंद्र सुनिश्चित नहीं कर पाया की कौन सा मोबाइल लूं, तब उसने सोचा कि उसकी बिटिया आएगी तब साथ में ही ले लेंगे ।

इतने में अखिलेंद्र ने सेल्स गर्ल से कहा की मेरी बेटी की पास में ही इम्तिहान चल रहा है , उसके आने तक इंतजार कर लेता हूं, इतने में सेल्स गर्ल ने कहा की आप अंदर वाले केबिन में बैठ जाए तब तक।

करीब आधे घंटे इंतजार करने के बाद अखिलेंद्र को मोबाइल स्टोर में ही बने टॉयलेट दिखा और अखिलेंद्र को जोर की पिशाब भी लगी थी। वो जैसे ही टॉयलेट के तरफ उठ के जाने को हुआ ठीक उसी वक्त वह सेल्स गर्ल भी लेडीज टॉयलेट के तरफ जाने लगी जो जेंट्स टॉयलेट के बगल में ही था । जिधर टॉयलेट बना हुआ था वहां पोर्शन आड़ में था जहां से कोई किसी को नहीं देख सकता था।

अखिलेंद्र के टॉयलेट खत्म कर बाहर निकला और अपना पैंट संभालते हुए बेल्ट पर हाथ रखा हुआ था तब तक सेल्सगर्ल भी लेडीज टॉयलेट से बाहर निकलती है और जैसा की अखिलेंद्र एक उम्रदराज व्यक्ति थे तो नियमत: सेल्स गर्ल को उनके तरफ देखना भी नहीं चाहिए लेकिन इसके उल्टे उसने एक तिरछी छिछोरी नजरो से देखते हुए आगे निकल गई।

कुछ इस तरह
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इस तरह सपना का इम्तिहान खत्म हुआ और वह परीक्षा हॉल से बाहर आ थी थी , अखिलेंद्र बाहर खड़ा उसका इंतजार कर रहा था, काफी सारी लड़कियां एक साथ निकली लेकिन उसी बीच अचानक कोई निकला जिसपे अखिलेंद्र की निगाह स्वत: चली गई , थोड़ा ध्यान से देखा तो वो उसकी अपनी बेटी सपना ही थी ।

आज पहली बार अखिलेंद्र ने अपनी बिटिया को एक जवान लड़की की तरह देखा , एक तो पहले से उसके लन्ड में सुबह से ठसक थी ऊपर से फरवरी का फागुन महीना ऊपर से दोपहर की बसंती हवा में मानो कोई भांग का नशा मिला दिया हो ऐसा एहसास अल्हीलेंद्र को हो रहा था, सपना थोड़ी नजदीक आई और मानो सारी लड़कियों में वह अकेला चांद की तरह खिल रही थी,

अखिलेंद्र की बेटी सपना
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पांडे जी को एक क्षण के लिए गर्व हुआ की कितनी खूबसूरत है उसकी बिटिया , अखिलेंद्र भीड़ में एक ऐसी जगह पर खड़ा था जहां से वो अपनी बेटी को देख सकता था , परंतु सपना उसे नही देख सकती और इधर उधर अपने पापा को खोजने के लिए देखने लगी।
सहसा अखिलेंद्र के मन में कुछ देर के लिए पाप जाग्रत हुआ और उसने अपने जीवन में पहली बार अपनी नज़र बिटिया के मांसल बदन पर फिराया वो भी एक मर्द की नजर से अखिलेंद्र को तो जैसे काटो तो खून नहीं ” uffff उसकी अपनी बिटिया जिसे वो अभी तक बच्चा ही समझते रहें थे वो इतनी बला की खूबसूरत और कामुक है , सपना की जवानी का जलवा ऐसा हो गया था की डंके की चोट पर किसी ऋषी बाल ब्रह्मचारी की तपस्या भंग कर दे। तब अखिलेंद्र जैसे कामी की क्या औकात।

अखिलेंद्र के बदन निहारते रहने के क्रम में उसने पाया की सपना का शरीर उसके मां की ढांचे में है परंतु सपना अपनी मां से भी कई गुना कामुकता लिए हुए थी। अखिलेंद्र उसके पापा तो इतने उत्तेजित होते गए की उसे देख के उसे बिना कपड़ों के कल्पना भी करने लगे की वो बिना कपड़ों के कैसी लगेगी ??

सपना का वास्तविक ढांचा
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जब इस कल्पना के आवेश अपने ख्यालात और जेहन में सपना को बिना कपड़ों को देखने लगे तब मानो अखिलेंद्र की खून की सारी नसे उसके लन्ड में उतर गई और उसका लन्ड बिकराल स्वरूप में आने लगा और उसने कपड़ो के ऊपर से दबाने लगा।

इतने में अचानक एक लड़का ऐसा करते उसे देख लिया और अखिलेंद्र को झटका लगा ,अचानक जैसे किसी ने नींद से जगा दिया हो। अखिलेंद्र को काफी शर्मिंदगी महसूस हुई , और अपने को धिक्कार और गाली के सिवा निरंतर कोस रहा था ” छी कैसा आदमी हूं मैं” क्या मैं इतना कामना का अंधा हो गया की अपनी बिटिया को भी इस नजर से देखने लगा ” छी छी हे प्रभु मुझे माफ करो” ऐसा सोचते हुए वो पछतावे की अग्नि में जल रहा था, इधर सपना कॉलेज गेट के पास काफी देर से अपने बाबूजी का इंतजार कर रही थी। फिर जैसे तैसे हिम्मत बंधाते हुए अखिलन्द्र जी अपनी बेटी के पास गए। सपना उन्हें देख मुस्कुराती हुई आई

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और आते साथ उसने पूछा की आपने कुछ खाना खाया, अखिलेंद्र को मन ही मन ही सपना पर अनायास काफी प्यार आया और उसने कहा की “नहीं, हम दोनो एक साथ किसी होटल में चल के खा लेंगे” पहले चलो मोबाइल लेना है अपने लिए उसमे तुम्हे ही खरीदना पड़ेगा और मुझे मल्टीमीडिया मोबाइल यूज करना सिखाना पड़ेगा।

इतना सुनते ही सपना खुशी से बोली “ठीक है पापा, तो चलिए फिर ।

दोनो मोबाइल के दुकान पर पहुंचते हैं , जहां कुछ देर पहले अखिलेंद्र एक सेल्स गर्ल से नैन मटक्का कर रहे थे। अभी वह सेल्स गर्ल नहीं थी, शायद लंच पे गई होगी। सपना ने सैमसंग का एक अच्छा हैंडसेट जिसकी कीमत 12000 की थी उसे पसंद किया। अखिलेंद्र ने मोबाइल खरीदने के लिए 15000 जमा किए थे , लेकिन ऑफर की वजह से मात्र 12000 में मोबाइल मिल गई। इतने में कुछ क्षण के लिए अखिलेंद्र के हाथ से किसी का हाथ स्पर्श हुआ , अखिलेंद्र अचानक से देखा तो पाया की वही सेल्स गर्ल उसके हाथों को छू के फ्लर्ट कर रही थी।

अब बिलिंग मशीन पर वही लड़की बैठी थी और उसकी हरकतों की वजह से अखिलेंद्र पुन: लन्ड से सोचने लगे और एक टक उस सेल्स गर्ल का फेस , कभी सीना निहारने लगे। सपना ने भी यह बात नोटिस किया की पापा ऐसा क्यों देख रहे हैं उस लड़की को फिर अचानक उस लड़की ने भी ऊपर नज़रे उठा कर अखिलेंद्र को देखा और एक कातिल अदा दिखाते हुए अपनी दांत से होंठ को चबाने लगी और काम करने लगी। एक तरह से उनका मूक संवाद चल रहा था, शहर की उस सेल्स गर्ल को अखिलेंद्र में गांव का एक मरद का देसी अहसास आ रहा था दूसरी तरफ अखिलेंद्र को उस सेल्स गर्ल में शहर की कच्ची कली जो उसकी बिटिया की उमर की है उसका एक सुखद और कामुक अहसास मिल रहा था।

इन दोनो के हरकतों को सपना ने भी नोटिस किया , परंतु इस बात का उसने ज्यादा लोड नहीं लिया, सामान्य सी बातों की तरह इग्नोर कर दी।

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