लुका छुपी
Update 3
सपना आते ही पापा को देख के न जाने क्यों नज़रे चुराती हुई कमरे में चली गई और रात का खाना की तयारी करने लगी।
खाने के समय दोनो एक साथ खा रहे थे तब तकउसके पापा ने कहा बेटी कल सुबह ही पेपर के लिए सेंटर जाना है उधर से 12 बजे दोपहर तक हम फ्री हो जायेंगे तो मैंने सोचा है की एक मोबाइल ले लूं।
इसपर सपना ने खुशी में उत्साहित होकर बोली क्योंकि वो खुद चाहते थी की उसके मम्मी पापा हर तरह की खुशी मिले और उसके पापा भी किसी से कम नहीं रहे औरों की भांति एनरोइड मोबाइल चलाएं।
इधर घर पर अखिलेंद्र की धर्मपत्नी माला जिन्हे 7 वर्ष पूर्व एक शादी में शामिल होने के क्रम में उसी की मायके वालो ने जादू टोना के सहारे उसे काफी ज्यादा नुकसान पहुंचा चुके थे।
दरअसल सपना की मां माला एक मदमस्त हस्तिनी कामुक औरतों में गिनती होती थी लेकिन इस बात से उसकी अपनी भाभी को माला से जलन होने लगी थी और अन्तत: एक ओझा के सहारे माला पर जादू टोना का असर कर दी थी , जिसके दुष्प्रभाव से माला को हमेशा गंदी गंदी बाते याद आने लगती है और कभी कभी आपे से बाहर होकर हिस्ट्रीया की रोगी की तड़पने लगती है और उस समय सिर्फ और सिर्फ संभोग की व्याकुलता होती है। यूं तो माला एक घोर पतिव्रता और पूजा पाठ वाली बिलकुल संस्कारी औरत थी, लेकिन यह कोई ऊपरी काला साया का प्रभाव था जिसकी वजह से माला की व्याकुलता बढ़ती है और बीमारी का रूप ले लेती है।
अखिलेंद्र ने झाड़ फूंक वालो से लेकर सारे जगह इसकी इलाज करवा चुका है परंतु सबने यही कहा की ऐसे औरत को काम वासना से बिलकुल दूर रखना है और उनके अगल बगल ऐसा कोई माहौल न हो जीससे की माला पर मौजूद कामान्ध आत्मा प्रबल हो जाए। हालांकि आजकल वह बिलकुल ठीक है और अखिलेंद्र को विश्वास हो गया है की अब माला पूरी तरह ठीक हो गई है।
माला को कभी कभी काफी कामुक सपने भी आते हैं जिसमे कोई उसे काफी मसल रहा हो लेकिन आज तक उस सपने में किसी चेहरा को नहीं देखा । जब भी उसे ऐसे सपने आते हैं तब और यह बात माला ने अखिलेंद्र को भी नहीं बता पाई है। परिवार में और कोई इस बात को नहीं जानता।।
माला
इसे चिंता थी तो सिर्फ दो बातों को एक उसकी बेटी की शादी जल्द हो जाए दूसरा ये कि उसका छोटे बेटे की जिंदगी कही सेट हो जाए।
परंतु शेखर की चाल चलन दिन प्रतिदिन खराब होता जा रहा था जिसका मुख्य कारण है उसके बड़े पापा जो इस दुनिया में नहीं रहे उनका लड़का था और उसकी विधवा मां गिरिजा के साथ वो अखिलेंद्र के ही घर में रहता था । हालांकि घर काफि बड़ा था और बंटवारे की हिसाब घर का दक्षिणी छोर अखिलेंद्र के हिस्से में था और उतरी छोर में सोनू और उसकी मां जो एक सरकारी शिक्षिका है वो रहते थे।और उसका दोस्त सोनू । शेखर को एक दिन सोनू ने अकेले रात को नाइट out के लिए बुलाया।।
घर पर अखिलेंद्र और सपना के नहीं रहने की वजह से शेखर को रोक टोक करने वाला कोई नहीं था , क्योंकि इन्ही दो लोगो की वो सुनता भी था।
उसका चचेरा भाई सोनू ने उससे कहा कि चलो गांव में जो हमारी पुरानी जमीन पर खंडहर है वहां घूमने चलते हैं , शेखर और उसका भाई सोनू दोनो हमउम्र थे और दोनो में सोनू काफी धूर्त किस्म का लड़का था। उसे सेक्स तथा संभोग जैसी बातों में रुचि होने लगा था और इन दिनों अक्सर लड़की, औरत , महिला के तरफ आकर्षित होता था। खंडहर जाने के पीछे मंशा भी यही थी क्योंकि उसने किसी तरह अपने किसी अन्य दोस्त की मदद से मोबाइल में पोर्न वीडियो अपलोड करवाया था और आज पहली बार सुकून से पोर्न देखने का मौका मिलता क्योंकि घर में केवल उसकी विधवा मां जो काफी गुस्सैल और सख्त किस्म की थे तो घर में ऐसा वैसा करने की वो सोच भी नहीं सकता था। अकेले खंडहर में जाने से उसे डर भी लग रहा था इसलिए उसने सोनू को साथ ले लिया और सोनू से उसकी काफी बनती भी है तो सोनू अगर आपत्ति भी जाहिर करेगा तो उसे वीडियो दिखा के बहका देंगे , ऐसी प्लानिंग थी वहां से सटे एक पतली सी नहर निकलती है और कभी कभी गांव की महिलाएं अपनी अपनी पशु , बकरी आदि चराने भी जाया करती थी।
दोनो दोपहर को गांव की अंतिम छोर पर एक पुरानी खंडहर जो शेखर और सोनू के खानदान के ही हिस्से में आता था वहां चले गए । शेखर सामान्य मस्ती में था तब तक सोनू ने कहा कि शेखर तूने कभी मुट्ठ मारा है ?
शेखर ने हंसते हुए कहा की “नहीं,” परंतु शेखर थोड़ा गंभीर होकर कुछ सोचने लगा, इससे पहले उसने मुठ तो नहीं मारा लेकिन सुबह सुबह उसके लन्ड में हो रही अकड़ की वजह से काफी परेशान था इसलिए वो अपना लन्ड काफी मसलता रहता था , एक दिन अचानक रात में मसलते मसलते उसका विर्यपात हो गया था तब से मानो शेखर को इसका नशा हो गया। लेकिन उसके घर वालो ने उसे काफी अच्छी शिक्षा दी है और उसे इस बात का एहसास था की मुझ पर काफी जिम्मेदारी है इसलिए वो खुद को संभालने की नाकाम कोशिश भी करता था। लेकिन बारूद के ढेर पर बैठ कर अगर माचिस कोई जलाए तो आग लगना तो स्वाभाविक था । शेखर के पास एक दमदार हथियार था जो बिल्कुल उसके पापा की तरह ही था, दरअसल अखिलेंद्र के पूरे परिवार पर कामदेव का अच्छा आशीर्वाद था , पूरे परिवार में एक छुपी हुई कामवासना थी लेकिन सांसारिक जीवन में इन्होंने खुद को काफी दबा कर रखा था और इस मामले में काफी अनुशासित थे । परंतु काम का आवेग इतना प्रबल होता है की उससे बच पाना किसी शूरवीर के बस की बात नहीं होती।
खैर कहानी पर आते हैं, तो सोनू ने आगे पूछा की तूने कभी गंदी वीडियो देखी है ??
इस पर शेखर ने कहा “नहीं , मैने कभी नहीं देखी। शेखर ने सिर्फ टीवी में आ रहे कुछ उत्तेजक दृश्यों को ही देखा था , उसे इंटरनेट और पोर्न की दुनिया के बारे में कुछ पता नहीं था । वही सोनू एक माहिर खिलाड़ी बन चुका था और इसका मुख्य कारण उसका मोबाइल था , इकलौता होने की वजह से उसे बचपन में ही मोबाइल मिल गया था जिसकी वजह से वो काफी आगे निकल चुका था और जाने अनजाने में वह अपने घर की औरतों जैसे उसकी चचेरी बहनें और चाची पर उसका ज्यादा ध्यान था। वह अक्सर आंगन में अपनी घर की महिलाओ के ताक में रहता था परंतु जिस माहौल से वो आता था वहां ऐसा करना गुनाहे अजीम समझा जाता था। कोई ऐसा सोच भी नही सकता था की incest जैसी कृत्य भी होती है दुनिया में।
तब सहसा सोनू ने अपना मोबाइल निकाला और कहा चल इंस्टा पर रील देखते हैं। उसने शेखर को कई तरह के लड़कियों के डांस दिखाने लगा , उसमे कई भाभियों और लड़कियों की डांस भी देखने को मिला , इतने में अचानक एक लड़की का डांस की वीडियो आई जिसमे वह लड़की हु ब हू शेखर की बहन सपना की तरह दिख रही थी। सोनू ने जान बुझ कर उसे यह वीडियो को दुबारा दिखाया क्योंकि सोनू पहले ही उस वीडियो को देख कर और उसमें अपनी चचेरी बहन सपना को सोच कर काफी बार अपना पानी निकाल चुका था और incest फोरम पर उस वीडियो को अपलोड भी किया था अपनी बहन बता कर।
सोनू ने तिरछी नजरों से शेखर की तरफ देखने लगा , शेखर थोड़ा असहज दिख रहा था और बोलने लगा की यह लड़की काफी अच्छी डांस करती है। इसपर सोनू ने डर की वजह से आगे कुछ नहीं बोला और अपना गैलरी खोल कर उसमें की सामग्री दिखाने लगा तभी अचानक एक तस्वीर जो सोनू ने अपने कमरे में कैद किए था वो दिखा , परंतु उस तस्वीर को देख के शेखर को झटका लगा क्योंकि वह तस्वीर किसी महिला की पीछे से लि गई थी और शेखर की घर की उसके कमरे की तस्वीर जैसी लगी ।
दरसल यह फोटो शेखर की मां की थी।

तभी सोनू ने झट से उस तस्वीर को हटा दिया । सोनू ने कमावेग में आकर उस तस्वीर को जान बूझ के दिखाया था। शेखर भी आश्वस्त नहीं था की वह तस्वीर उसकी मां की या उसके घर की थी क्योंकि सोनू पर उसे पूरा विस्वास था की ऐसा वो नहीं कर सकता था।
कुछ भी हो लेकिन उस तस्वीर को देखने के बाद शेखर का लन्ड एक्टिवेट होना शुरू हो गया था क्योंकि जाने अंजाने में वो भी औरतों के शरीर में आकर्षण रखने लगा था, और खासकर बड़ी उमर की औरतें उसे ज्यादा लुभाती मतलब जो उमर में बड़ी हो थोड़ी चर्बीदार , मांसल, गुदाज सीना और पेट हो , चौड़ी पीठ हो , उठा हुआ गुदगुदा चूतड हो और अनुभवी चेहरा हो ऐसी औरते उसे भाने लगी थी क्योंकि अपने आस पास वह उन्हीं जैसी महिलाओं को पता था।


